चीन जिससे चिढ़ता है वही बात पीएम मोदी ने शी जिनपिंग के सामने कही- प्रेस रिव्यू

नरेंद्र मोदी

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पिछले हफ़्ते ब्रिक्स समिट में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने वो बात कह दी जिससे चीन काफ़ी चिढ़ता है.

पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के सामने कहा कि कोविड महामारी की उत्पति की पारदर्शी जाँच होनी चाहिए. चीन इस मांग को लेकर काफ़ी सख़्त और संवेदनशील रहा है.

दुनिया का एक धड़ा चीन पर कोविड महामारी को लेकर शक करता है. अमेरिका और ब्रिटेन में कई लोग कहते हैं कि कोरोना वायरस जानबूझकर चीनी लैब में पैदा किया गया था.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो कोरोना वायरस को चीनी वायरस कहते थे.

चीनी राष्ट्रपति के सामने भारतीय प्रधानमंत्री की इस मांग को अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिन्दू' ने प्रमुखता से जगह दी है. इसी हफ़्ते एक बार फिर से पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग शंघाई कोओपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन समिट में वर्चुअली मिलने जा रहे हैं.

एससीओ समिट ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में होने जा रहा है. इसमें शामिल होने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी गुरुवार को दुशांबे पहुँच रहे हैं.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत कोरोना वायरस की उत्पति की जाँच की मांग फिर से उठाता है तो दोनों देशों में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर 17 महीनों से जारी विवाद और बढ़ सकता है.

ब्रिक्स

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इस बार नौ सितंबर को आयोजित ब्रिक्स समिट की मेज़बानी भारत ने की थी. पीएम मोदी ने ब्राज़ील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ़्रीका वाले इस गुट के समिट में कहा था, ''आज की तारीख़ में वैश्विक व्यवस्था में भरोसे की ज़रूरत है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत वायरस की उत्पति की जाँच पारदर्शी तरीक़े से होनी चाहिए. इस जाँच में सभी देशों को पूरी तरह से सहयोग देना चाहिए.''

राष्ट्रपति शी की मौजूदगी में पीएम मोदी ने कहा, ''अगर पारदर्शी जाँच होती है तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की साख पर उठ रहे सवाल कम होंगे और हम भविष्य की महामारी की प्रति ज़्यादा सचेत रहेंगे.''

हिन्दू का कहना है कि पीएम मोदी की यह टिप्पणी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई, लेकिन उसके पास एक कॉपी है.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स समिट में मौजूद अधिकारियों और राजनयिकों ने बताया कि पीएम मोदी ने इस विषय को ज़ोर देकर उठाया. भारत ने इससे पहले चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वाइरलॉजी में गई WHO की टीम के साथ चीन के सहयोग करने की बात कही थी, लेकिन तब भारत डेटा मुहैया कराने की बात करता था.

WHO की जाँच अब भी अधूरी है और कोरोना से अब तक 47 लाख लोगों की जान जा चुकी है.

चीन और रूस

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पीएम मोदी के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भाषण दिया और उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों को कोरोना की उत्पति की जाँच के राजनीतिकरण का विरोध करना चाहिए. शी जिनपिंग ने कहा, ''हमें कोविड-19 के ख़िलाफ़ वैश्विक एकता को लेकर काम करना चाहिए. हमें महामारी को रोकने में साथ आना चाहिए. कोरोना की उत्पति की जाँच में विज्ञान आधारित जाँच को प्रोत्साहित करना चाहिए. लेकिन हमें इस मामले में राजनीति और किसी को बदनाम करने की प्रवृत्ति से बाज आने की ज़रूरत है.''

शी जिनपिंग ने कहा था, ''कोरोना को रोकने के लिए हमें आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए. शोध और वैक्सीन के उत्पादन पर ज़ोर देना चाहिए''

अमेरिका चीन पर इल्ज़ाम लगाता है कि वो कोरोना वायरस को रोकने में नाकाम रहा है. दूसरी तरफ़ चीन आरोप लगाता है कि अमेरिका इस पर राजनीति कर रहा है. चीन का कहना है अमेरिका WHO के ज़रिए मनगढ़ंत लैब थिअरी को स्थापित करना चाहता है.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रोटोकॉल के हिसाब से समिट के शुरुआती भाषण ही सार्वजनिक रूप से जारी किए जाते हैं जबकि वायरस को लेकर जो भी बात हुई वो 'क्लोज़ डोर सेशन' यानी बंद दरवाज़े के भीतर हुई बात थी.

मोदी

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पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन की अमेरिका में द्विपक्षीय बातचीत

हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 सितंबर को द्विपक्षीय वार्ता कर सकते हैं.

दोनों राष्ट्राध्यक्षों की बीच यह बैठक क्वॉड देशों के समिट से पहले होगी. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी और राष्ट्रपति बाइडन के बीच अफ़ग़ानिस्तान, इंडो-पैसिफ़िक, कोविड-19 महामारी और जलवायु संकट के मुद्दे अहम होंगे.

पीएम मोदी 23 सितंबर को जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन के साथ भी पीएम मोदी अलग-अलग बैठक करेंगे.

जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ भारत की टू प्लस टू वार्ता भी है. 11 सितंबर को नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के साथ यह वार्ता हुई थी. 24 सितंबर को पीएम मोदी अमेरिका की उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस से भी मिलेंगे.

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गाँधी की हत्या पर राहुल के तीखे सवाल

कोलकाता से प्रकाशित होने वाले अख़बार द टेलीग्राफ़ के अनुसार, राहुल गाँधी ने बुधवार को पूछा कि हिन्दू धर्म के सबसे महान अनुयायी महात्मा गाँधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने क्यों की थी?

राहुल ने कहा कि अगर आरएसएस हिन्दू धर्म का रक्षक है तो उसने धर्म का इस्तेमाल सत्ता हथियाने में किया है.

महिला कांग्रेस के स्थापना दिवस पर राहुल गाँधी ने कहा, ''बीजेपी ख़ुद को हिन्दू पार्टी कहती है. अगर कोई हिन्दूइज़म को समझता था और उसका पालन करता था, तो वे महात्मा गाँधी थे. यहाँ तक कि आरएसएस भी इसे स्वीकार करता है. ऐसे में गोडसे ने गाँधी के सीने में गोली क्यों दागी थी? पूरी दुनिया गाँधी को आदर्श के तौर पर देखती थी. गाँधी ने अहिंसा की राजनीति अपनाई थी और अहिंसा हिन्दू धर्म की बुनियाद है. लेकिन गोडसे ने गाँधी को गोली क्यों मारी थी?''

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''बीजेपी अक्सर कहती है कि गोडसे ने जब गाँधी की हत्या की थी तो आरएसएस छोड़ दिया था. लेकिन राहुल गाँधी का तर्क है कि गोडसे आरएसएस की विचारधारा के ही प्रोडक्ट थे.''

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