अमेरिका के इस फ़ैसले के बाद भारत काबुल दूतावास को लेकर क्या करेगा?- प्रेस रिव्यू

: तालिबान

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के काबुल के क़रीब तक पहुँच जाने के बाद कई देशों ने अपने राजनयिकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए है.

इस बीच भारत भी इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या काबुल दूतावास में कामकाज़ को कम किया जाना चाहिए. अंग्रेज़ी अखबार द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक शनिवार को राजधानी दिल्ली में इस मुद्दे पर बैठकें हुईं.

तालिबान काबुल से महज़ 50 किलोमीटर की दूरी पर है और अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा है कि वो अफ़ग़ानिस्तान नेशनल डिफेंस एंड सिक्यॉरिटी फ़ोर्सेस (एएनडीएसएफ़) को "फिर से संगठित करने" पर विचार कर रहे हैं ताकि राजधानी और दूसरे शहरों को बचाया जा सके.

सूत्रों ने अखबार को बताया कि कंधार और मज़ार-ए-शरीफ़ में वाणिज्यक दूतावास को बंद करने के बाद हुए सुरक्षा आकलन में काबुल में दूतावास को पूरी तरह संचालित रखने का विचार था.

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'पैनिक सिग्नल न दें'

गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बाग्ची ने कहा था कि काबुल में काम कर रहे अकेले दूतावास से कर्मचारियों को वापस बुलाने की 'कोई योजना नहीं' है. भारतीय राजदूत रूदेंद्र टंडन अभी काबुल में मौजूद हैं और वो किसी तरह का "पैनिक सिग्नल" नहीं देता चाहते, जिसका सुरक्षा पर असर हो.

हालांकि बीते दो दिनों में तालिबान ने कई प्रांतों में बढ़त बना ली है. अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने अपने दूतावास के स्टाफ़ को वापस बुलाने का फ़ैसला किया है. वहां से स्टाफ़ को बिना किसी दिक्क़त के निकालने के लिए सुरक्षाबल भी भेजे जा रहे हैं, अमेरिका 3000 सैनिकों को भेज रहा है, वहीं ब्रिटेन 600 सुरक्षाकर्मियों को अफ़ग़ानिस्तान भेज रहा है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ डेनमार्क, नॉर्वे और नीदरलैद्स जैसे यूरोपीय देशों ने भी अपने दूतावासों को बंद करने का फ़ैसला किया है और फिनलैंड और स्वीडन स्टाफ़ की मौजूदगी कम कर रहे हैं. जर्मनी और फ्रांस ने तालिबान के प्रवक्ता के "दूतावास और राजनयिकों को निशाना नहीं बनाने" के आश्वासन के बावजूद अपने कर्मचारियों का बाहर निकालना शुरू कर दिया है.

वीडियो कैप्शन, COVER STORY: गांव से शहरों की ओर बढ़ता तालिबान

सुरक्षित इलाक़ा

अमेरिका और ब्रिटेन के अलावा नेटो (नार्थ एटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन) के सदस्य देश भी अपने स्टाफ़ को काबुल एयरपोर्ट के कंपाउंड में भेज रहे हैं और वहाँ पर राजनयिक चौकियां बना रहे हैं ताकि शहर पर कब्ज़ा होने की स्थिति में वो वहाँ से काम कर सकें. एक अधिकारी ने बताया कि इसका मतलब है कि काबुल के "ग्रीन ज़ोन" में सुरक्षाबलों को मौजूदगी काफ़ी कम होगी.

भारतीय दूतावास में उन अफ़गान लोगों और परिवार, जिनके भारत से संबंध है, उनके वीज़ा आवेदन काफ़ी बढ़ गए है. दूतावास के कर्मचारियों को इन्हें देखना है और इसका असर भी फ़ैसले की प्रक्रिया पर पड़ेगा. अफ़ग़ानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत अमर सिन्हा ने द हिन्दू से कहा कि भारतीय जवानों की सुरक्षा 'प्राथमिकता' है, लेकिन फ़ैसले की टाइमिंग पर भी विचार करना होगा.

सिन्हा नें द हिंदू से कहा, "ये असमंजस की स्थिति है, जिसका मनोबल पर असर होगा. हाल की अमेरिकी रिपोर्ट, जिसमें काबुल पर कब्ज़े के समय का ज़िक्र है, उससे दहशत बढ़ी है. इसके अलावा भारत के शुभचिंतकों के वीज़ा आवेदनों को भी देखना है. अगर समय ने इजाज़त दी तो इन कामों में बहुत तेज़ी आएगी, इससे पहले की हम अपनी गतिविधियों को कम करें."

रेप

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दिल्ली : 6 साल की बच्ची के साथ रेप मामले में नया मोड़

दिल्ली के द्वारका के बिंदापुर में एक 6 साल की बच्ची के कथित रेप का मामला सामने आया है, आरोप है कि बच्ची ने चाचा ने उसका रेप किया है. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया अखबार में छपी ख़बर के मुताबिक़ अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि पुलिस ने पॉस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है.

उन्होंने बताया कि लड़की के माता-पिता उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में रहते हैं लेकिन वो पिछले कुछ समय के अपने चाचा-चाची के साथ रह रही थी.

13 अगस्त को पुलिस को एक बच्ची के घायल होने की सूचना फ़ोन पर मिली. अधिकारियों ने बताया कि जब पुलिस की टीम वहां पहुंची तो एक एनजीओ के कुछ कार्यकर्ता वहां पहले से मौजूद थे. जांच में पता चला कि पढ़ाई नहीं करने पर लड़की की चाची ने उसे "गरम चिमटे" से मारा

एक पुलिस अधिकरी ने बताया, "चोट मामूली थी और उसके चाचा-चाची ने आश्वासन दिया कि फिर से ऐसा नहीं होगा. मामला बातचीत से सुलझ गया इसलिए कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई. लेकिन उसी दिन बाद में ये ख़बर मिली की लड़की को डीडीयू अस्पताल ले जाया गया है."

पुलिस अधिकारी ने बताया कि लड़की ने अपने बयान में यौन उत्पीड़न की बात कही है.

उन्होंने कहा, "लेकिन मेडिकल जांच में उसके प्राइवेट पार्ट में किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं. लेकिन उसके आरोपों के मुताबिक, जांच की जा रही है."

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

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अविवाहित भारतीय लड़कियां सिर्फ मज़े के लिए शारीरिक संबंध नहीं बनातीं - मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बलात्कार के अभियुक्त व्यक्ति की ज़मानत याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा, "भारत एक रूढ़िवादी समाज है, यह अभी तक सभ्यता के उस स्तर तक नहीं पहुंचा है, जहां अविवाहित लड़कियां, अपने धर्म की परवाह किए बिना, केवल मज़े के लिए लड़कों के साथ कामुक गतिविधियों में लिप्त हैं."

अंग्रेज़ी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के जस्टिस सुबोध अभ्यंकर एक ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें अभियुक्त पर शादी का झांसा देकर रेप के प्रयास आरोप लगा है.

अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह इसे ज़मानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं मानती है. अदालत ने कहा, "भारत एक रूढ़िवादी समाज है, यह अभी तक सभ्यता के ऐसे स्तर (उन्नत या निम्न) तक नहीं पहुंचा है, जहाँ अविवाहित लड़कियां, अपने धर्म की परवाह किए बिना, लड़कों के साथ शारीरिक गतिविधियों में सिर्फ़ मज़े के लिए शामिल होती हैं, जब तक कि इसके पीछे भविष्य में शादी का वादा या आश्वासन न हो और अपनी बात को साबित करने के लिए हर बार पीड़िता के लिए आत्महत्या करने की कोशिश करना जरूरी नहीं है, जैसा कि इस मामले में हुआ है."

महिला ने दो जून को फिनाइल पीकर आत्महत्या का प्रयास किया था.

अदालत ने याचिका को ख़ारिज करते हुए टिप्पणी की कि लड़की ने आत्महत्या करने की कोशिश की है जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह रिश्ते को लेकर गंभीर थी और यह नहीं कहा जा सकता कि उसने केवल आनंद के लिए रिश्ते में प्रवेश किया.

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