राहुल गाँधी समेत '5000 अकाउंट लॉक' होने पर प्रियंका गाँधी बोलीं, 'असल मुद्दा न भूलें'

राहुल गांधी

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    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने गुरुवार शाम ट्विटर बनाम कांग्रेस विवाद पर कहा है कि जब बीजेपी सरकार ट्विटर के साथ मिलकर न्याय की गुहार लगाती आवाज़ों को दबा रही है तब ये नहीं भूलना चाहिए कि असल मुद्दा क्या है.

उन्होंने लिखा, “असल मुद्दा ये है कि 9 साल की दलित बच्ची के साथ बर्बर बलात्कार और जबरन दाह संस्कार के मामले में दिल्ली पुलिस ने 15 घंटों तक एफ़आईआर दर्ज नहीं होने दी.”

राहुल गाँधी ने कुछ दिनों पहले इसी मामले में पीड़िता की माँ की तस्वीर पोस्ट की थी. इसके बाद ट्विटर ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के कहने पर राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए उनका अकाउंट लॉक कर दिया है.

इसके बाद गुरुवार को कांग्रेस ने बताया है कि ट्विटर ने उसके आधिकारिक अकाउंट समेत कई बड़े नेताओं के अकाउंट ब्लॉक कर दिये हैं. कांग्रेस ने दावा किया है कि ट्विटर ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करते हुए सरकार के कहने पर अब तक कुल 5,000 अकाउंट ब्लॉक कर दिए हैं.

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हालांकि, ट्विटर की ओर से कहा गया है कि वो निष्पक्षता के साथ अपने नियमों का पालन कर रहे हैं. लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी और ट्विटर के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है.

इसी बीच कांग्रेस कार्यकर्ता ने ट्विटर और सरकार के विरोध का एक रोचक तरीका निकाला है जिसके तहत कार्यकर्ता अपने निजी ट्विटर खातों पर अपने नाम और तस्वीर की जगह राहुल गाँधी का नाम और तस्वीर लगाकर ट्वीट कर रहे हैं.

लिखा जा रहा है कि “तुम कितने ट्विटर अकाउंट रोकोगे, हर कार्यकर्ता राहुल गाँधी की आवाज़ बनकर तुमसे तीखे सवाल पूछेगा.”

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वहीं, राहुल गाँधी ने इंस्टाग्राम पर लिखा है, "डरो मत. सत्यमेव जयते."

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संसद से सड़क तक कांग्रेस पार्टी

कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है, “जब कोई व्यक्ति डर के आगोश में होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले अपराधों का अंत नहीं होता.”

इस बयान के साथ पार्टी ने एक तस्वीर भी चस्पा की है जिसमें लिखा है, “मोदी सरकार और नीचे गिरी….रेप पीड़िता को न्याय देने की माँग करने पर कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल समेत नेताओं के 5000 अकाउंट्स को लॉक कर दिया गया है.”

सरकार के ख़िलाफ़ सड़क पर मोर्चा खोलते हुए कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि वह दलितों के ख़िलाफ़ हो रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए ट्विटर पर निर्भर नहीं रहेगी.

पार्टी की ओर से फेसबुक पर लिखा गया है, “जब हमारे नेताओं को जेलों में बंद कर दिया गया, हम तब नहीं डरे तो अब ट्विटर अकाउंट बंद करने से क्या ख़ाक डरेंगे. हम कांग्रेस हैं, जनता का संदेश है, हम लड़ेंगे, लड़ते रहेंगे. अगर बलात्कार पीड़िता बच्ची को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना अपराध है, तो ये अपराध हम सौ बार करेंगे. जय हिंद...सत्यमेव जयते.”

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राहुल गाँधी ने कई शीर्ष नेताओं के साथ संसद का घेराव करते हुए कहा, “ये देश आज़ादी से पहले हमारे दलित भाई – बहनों को अंधेरे में रखता था. अंधेरे से बाहर नहीं निकलने देता था. उन्हें उनके हक़ नहीं देता था. संविधान आने के बाद दलितों को उनका हक़ मिला. कांग्रेस पार्टी और बाबा साहेब ने मिलकर हिंदुस्तान के हर नागरिक और विशेषकर दलितों को उनके अधिकार और हक़ दिए. आज संविधान पर नरेंद्र मोदी, आरएसएस, और उनके चार – पाँच उद्योगपति मित्र मिलकर आक्रमण कर रहे हैं.”

राहुल गाँधी ने कहा कि सदन में विपक्ष को दलितों, पिछड़ों और महिलाओं की बात रखने का अवसर नहीं दिया जाता.

उन्होंने कहा, “हमने सरकार से पेगासस पर बहस करने के लिए कहा लेकिन सरकार ने पेगासस पर बहस करने से मना कर दिया. हमने संसद के बाहर किसानों का मुद्दा उठाया और हम आज यहां आपसे (मीडिया) बात करने आए हैं क्योंकि हमें संसद के अंदर नहीं बोलने दिया गया. ये देश के लोकतंत्र की हत्या है.”

राज्य सभा में हुए हंगामे पर राहुल गाँधी ने कहा, “कल राज्य सभा में इस देश के इतिहास में पहली बार सांसदों को मारा गया, धकेला गया, पीटा गया. बाहर से लोगों को बुलवाकर नीली वर्दी पहनाकर सांसदों के साथ धक्का – मुक्की और मारपीट की गयी है.”

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क्या कमरे में बंद हो जाएं पीड़ित?

कांग्रेस इस बहस को ट्विटर बनाम कांग्रेस पार्टी से आगे लेकर जाने पर जोर दे रही है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने बीबीसी हिंदी से कहा, “ये लड़ाई न ट्विटर से है और न किसी क़ानून के उल्लंघन की है. ये लड़ाई मोदी सरकार द्वारा एक दलित बेटी के अधिकारों की आवाज़ उठाने वाली आवाज़ को दबाने की है. ये लड़ाई मोदी सरकार द्वारा अपने विरोधियों की आवाज़ को दबाने की है. प्रजातांत्रिक तरीके से अपनी बात कहने की आज़ादी को दबाने की है. सरकार डरा-धमकाकर ट्विटर का इस्तेमाल एक पिट्ठू की तरह कर रही है.”

सुरजेवाला सवाल पूछते हैं, “इन सारे अकाउंट्स को बंद करने का क्या औचित्य है? जब दो अगस्त, 2021 को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग जो कि एक क़ानूनी संस्था है, उन्होंने ये सारी तस्वीरें ट्वीट कीं. तीन अगस्त को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्या और बीजेपी की पूर्व सांसद ने ये तस्वीरें ट्वीट की. चार अगस्त को राहुल गाँधी जी पीड़िता के परिवार से मिले और उन्होंने उनके लिए न्याय की आवाज़ उठाने की गुहार लगाई."

वे पूछते हैं, "क्या पीड़िता के लिए न्याय माँगना अपराध है, अगर हाँ तो हम ज़रूर करेंगे. क्या अनुसूचित जाति के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना अपराध है, अगर है तो हम ज़रूर करेंगे. इससे अधिक कुछ नहीं. ये मोदी सरकार का हिटलरशाही रवैया है.”

रणदीप सुरजेवाला

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लेकिन एक सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या न्याय दिलाने के लिए नियमों का उल्लंघन जायज़ है.

इस पर सुरजेवाला कहते हैं, “जहां तक नियमों का सवाल है तो वो कौन सा क़ानून है जो कहता है कि पीड़िता के माँ – बाप न्याय की गुहार लगाने के लिए सामने नहीं आ सकते. सामने आएंगे तो फोटो दिखेगी. या तो वे कमरे में बंद हो जाएं और बुर्का पहन लें. "

"ट्विटर ने खुद अपने नियमों में लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति किसी के अधिकारों की रक्षा के लिए उसकी आवाज़ उठाएगा तो ये हमारे नियमों का उल्लंघन नहीं है. तो राहुल गाँधी जी क्या कर रहे थे. केवल पीड़िता के लिए न्याय की गुहार लगा रहे थे."

उन्होंने कहा, "मैं कहता हूं कि राहुल जी न भी हों. अगर पीड़िता के घरवाले न्याय माँगने जाएं और बीबीसी हिंदी उनकी तस्वीर छाप दे तो फिर आप भी अपराधी हो जाएंगे. ऐसे में तो पीड़िता के माँ – बाप, परिवार वाले कहीं न्याय माँगने जा ही नहीं सकते. क्योंकि अगर कहीं उनकी तस्वीर दिख गयी तो वो अपराध हो जाएगा. बीजेपी ने कामयाबी से एक नौ साल की दलित बच्ची के साथ बलात्कार के बाद हत्या होने के मामले को फ़ोटो छापने या न छापने तक सीमित कर दिया है."

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"अब कोई बेटी के लिए न्याय की गुहार नहीं लगा रहा. और ट्विटर तो केवल एक ज़रिया है, मोदी जी न्याय मांगने के विकल्प पर ताला लगाना चाहते हैं. क्योंकि न्याय माँगने जाने पर फ़ोटो खिंच जाएगी तो अपराध हो जाएगा. ऐसे में पीड़ित बुर्का पहनकर कमरे में बंद हो जाएं और अपराधी खुले में घूमते रहें.”

सुरजेवाला ने उस ओर इशारा किया है जिस पर एक लंबे समय से बहस जारी है.

कुछ समय पहले एक ऐसे ही मामले में आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने कहा था, “रेप पीड़िता को अपनी पहचान क्यों छिपानी चाहिए. क्या बलात्कारियों को नहीं छिपना चाहिए? क्या पीड़िता के लिए ये शर्म की बात है कि वह इस कदम क्रूरता की शिकार हुई.”

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उन्होंने भी कहा था कि “मेरी ग़लती – एक 14 साल की बच्ची की रक्षा करने में असफल रही दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाना. और भी मामलों में मुद्दा उठाउंगी. मैं एफ़आईआर से डरती नहीं हूं.”

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पक्षपात का आरोप

कांग्रेस पार्टी ने ट्विटर पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है और इसके समर्थन में वो सबूत पेश करने का दावा भी कर रही है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से बीजेपी नेताओं के उन ट्वीट्स को शेयर किया जा रहा है जिनमें पोक्सो नियमों का उल्लंघन हुआ है. लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. और ट्वीट भी आज तक डिलीट नहीं किए गए हैं.

कांग्रेस नेता श्रीनिवासन ने अपने एक ट्वीट में लिखा है, “क्या ट्विटर ने रेप पीड़िता का वीडियो डालने पर नफ़रत और दुष्प्रचार के ब्रांड एंबेसडर अमित मालवीय का अकांउट लॉक किया था?”

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बीजेपी नेता अमित मालवीय के एक अन्य ट्वीट को शेयर करते हुए श्रीनिवासन ने लिखा है, “डियर ऑरेंज ट्विटर, यह रेप पीड़िता की माँ हैं. इस ट्वीट को दस महीने हो गए हैं. और अकाउंट अभी भी सक्रिय है. मोदी जी से परमिशन नहीं मिली क्या?”

इस वीडियो में पीड़िता की माँ और पीड़िता का शरीर नज़र आ रहा है. पोक्सो नियमों की वजह से इस वीडियो और उस ट्वीट को यहां नहीं दिखाया जा सकता.

बीबीसी से बात करते हुए कांग्रेस नेता प्रणव झा सवाल उठाते हैं कि क्या इस देश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए दो अलग-अलग मानक हैं?

संबित पात्रा

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वहीं, बीजेपी नेता संबित पात्रा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “जिस प्रकार का व्यवहार आज कांग्रेस पार्टी और कुछ अन्य विपक्षी पार्टियां सड़क पर उतरकर कर रही हैं. जिस प्रकार की अराजकता संसद के अंदर विपक्षी पार्टियों और खासकर राहुल गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने दिखाई है उससे पूरा देश और लोकतंत्र शर्मसार हुआ है.”

क्या कहता है ट्विटर

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, ट्विटर प्रवक्ता ने बताया है, “हमने सक्रियता के साथ सैकड़ों ट्वीट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है जिन्होंने एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की है जो हमारे नियमों का उल्लंघन करती है.”

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ट्विटर के मुताबिक़, "अगर कोई ट्वीट ट्विटर के नियमों का उल्लंघन करता हो और उसे ख़ाता धारक द्वारा डिलीट न किया जाए तो कंपनी इसे एक नोटिस के पीछे छिपा देती है और अकाउंट लॉक रहता है जब तक कि ट्वीट डिलीट न हो जाए या खाता धारक द्वारा की गयी अपील स्वीकार न कर ली जाए."

हालांकि, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप पर ट्विटर की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है.

प्रियंका गांधी

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‘न भूलें क्या है असल मुद्दा’

प्रियंका गाँधी समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार और ट्विटर का विरोध करते हुए अपने निजी ट्विटर अकाउंट के नाम बदलकर राहुल गाँधी रखना शुरू कर दिया है.

कोविड की दूसरी लहर के दौरान लोगों को ऑक्सीजन पहुंचाते दिखे यूथ कांग्रेस नेता श्रीनिवासन ने भी अपने अकाउंट पर नाम बदलकर राहुल गाँधी कर दिया है.

श्रीनिवास के अकाउंट से ट्वीट किया गया है, “तुम कितने ट्विटर अकाउंट रोकोगे? हर कार्यकर्ता राहुल गाँधी की आवाज़ बनकर तुमसे तीखे सवाल पूछेगा... आइये मिलकर इस जन-आंदोलन का हिस्सा बनते है.”

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कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने भी अपने अकाउंट पर राहुल गाँधी की फोटो लगाते हुए सवाल किया है, “क्या ट्विटर कांग्रेस नेताओं के अकाउंट्स निलंबित करने की अपनी नीति का पालन कर रहा है या मोदी सरकार की नीति का? इसने अब तक एससी आयोग के अकाउंट को लॉक क्यों नहीं किया है जिससे इसी तरह की तस्वीरें जारी की गयी थीं.”

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया कि ये नहीं भूलना चाहिए कि असल मुद्दा क्या है...

उन्होंने लिखा, “अब जब भाजपा सरकार ने ट्विटर के साथ मिलकर न्याय की गुहार लगाने वाली आवाजों को बंद कर दिया है, ऐसे में हमें असल मुद्दा नहीं भूलना चाहिए. असल मुद्दा भारत की राष्ट्रीय राजधानी के बीचोबीच एक 9 वर्षीय दलित लड़की का क्रूर बलात्कार और जबरन दाह संस्कार का है. असल मुद्दा यह है कि दिल्ली पुलिस ने 15 घंटे तक एफ़आईआर दर्ज होने की इजाज़त नहीं दी. और नरेंद्र मोदी आपने एक मासूम बच्ची के ख़िलाफ़ हुए इस जघन्य अपराध पर एक शब्द भी क्यों नहीं कहा है.”

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