खेल रत्न से राजीव गांधी के नाम हटाने पर क्या बोले कांग्रेस नेता

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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला और पुरुष टीमों के हॉकी में दमदार प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न से बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने खेल रत्न पुरस्कार के नाम को बदलने की घोषणा करते हुए ट्वीट किया, "देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए. लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है."
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सोशल मीडिया पर इस फ़ैसले को लेकर बड़ी संख्या लोग अपनी राय रख रहे हैं. कई लोग ओलंपिक खिलाड़ी बबीता फोगाट के उस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं जिसमें उन्होंने बीते वर्ष 'राजीव गांधी खेल रत्न' पुरस्कार का नाम बदलकर किसी खिलाड़ी के नाम पर किए जाने का सुझाव दिया था.
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केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर प्रधानमंत्री के फ़ैसले का स्वागत कर रहे हैं तो बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा इसे ऐतिहासिक बता रहे हैं. तो कांग्रेस से लेकर शिव सेना तक के कई नेता इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना कर रहे हैं.
कांग्रेस और अन्य राजनीतिक पार्टियों की तरफ़ से मेजर ध्यानचंद के नाम पर पुरस्कार देने के फ़ैसले का तो समर्थन किया गया लेकिन 'राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार' का नाम बदलने को पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान बताया गया. साथ ही कई नेताओं ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदलने की मांग भी की है.
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कांग्रेस के नेताओं ने क्या प्रतिक्रियाएं दीं?
कांग्रेस ने मेजर ध्यानचंद के नाम पर पुरस्कार का नाम रखने का स्वागत करते हुए कहा कि, "मेजर ध्यानचंद जी का नाम अगर भाजपा और पीएम मोदी अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न घसीटते तो अच्छा था. राजीव गांधी जी इस देश के नायक थे, नायक रहेंगे. राजीव गांधी जी पुरस्कारों से नहीं, अपनी शहादत, अपने विचारों और आधुनिक भारत के निर्माता के तौर पर जाने जाते हैं."
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कांग्रेस ने कहा, "उम्मीद है देश के खिलाड़ियों के नाम पर और ज़्यादा स्टेडियमों और अन्य योजनाओं के नाम रखे जाएंगे."
कांग्रेस ने इसके साथ ही नरेंद्र मोदी स्टेडियम और अरुण जेटली स्टेडियम के नाम बदलने की मांग भी की.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "भाजपा नेताओं के नाम से निर्मित स्टेडियम के नाम बदल दीजिए. अब पीटी ऊषा, मिल्खा सिंह, सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, अभिनव बिंद्रा, लिएंडर पेस, पुलेला गोपीचंद और सानिया मिर्जा के नाम पर स्टेडियम के नाम रखिए."
उन्होंने आरोप लगाया, "ओलंपिक वर्ष में जब खेल का बजट घटा दिया गया है तो नरेंद्र मोदी जी ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं. कभी किसानों की समस्या तो कभी जासूसी के मामले से और कभी महंगाई से ध्यान भटका रहे हैं."
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने ट्वीट किया, "प्रिय प्रधानमंत्री @narendramodi जी, जनता की भारी माँग है कि अहमदाबाद के नए स्टेडियम से अपना नाम हटाकर किसी खिलाड़ी के नाम कर दीजिए. खिलाड़ियों के सम्मान में भी राजनीतिक दाँवपेच क्यों?"
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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा कि उन्हें नाम बदले जाने को लेकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ. वे बस उम्मीद कर रहे थे कि इसका नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा जाएगा जैसे सरदार पटेल स्टेडियम का नाम बदल कर किया गया.
कांग्रेस सांसद के सुरेश ने राष्ट्रीय पुरस्कारों का भगवाकरण करने का आरोप लगाते हुए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की और पुरस्कार का नाम बदलने के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से के सुरेश ने कहा, "यह दुर्भाग्य की बात है. राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे जिनके नेतृत्व में भारत 21वीं सदी में पहुंचा था. उन्होंने युवाओं और खेल को प्रोत्साहित किया. यह सरकार भगवाकरण करना चाहती है और इसिलिए उन्होंने दूसरा नाम दिया है."
राजस्थान से कांग्रेस के सांसद कृष्णा पूनिया ने मोदी सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि, "यह व्यर्थ की कवायद, इसके बजाय महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर नए पुरस्कार की घोषणा की जा सकती थी. कांग्रेस विधायक ने इसके साथ ही मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की."
कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक, डिजिटल संचार और सोशल मीडिया गौरव पंधी ने कहा कि मोटेरा स्टेडियम और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल कर केंद्र की मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है.
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शिवसेना सांसद ने क्या कहा?
शिव सेना सांसद अरविंद सावंत ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का अपमान है. उन्होंने कहा कि सरकार को मौजूदा पुरस्कारों के नाम नहीं बदलने चाहिए लेकिन सरकार चाहे तो वो किसी व्यक्ति के नाम पर एक नए पुरस्कार की घोषणा कर सकती है.
ओलंपिक पदक जीत चुके बॉक्सर विजेंदर सिंह ने लिखा, "भाई ये नाम ही बदल सकते हैं, थोड़े से दिन में भारत का भी नाम बदल कर अमेरिका कर देंगे."
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गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
पूर्व भाजपाई और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने भी नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदलने की मांग की.
उन्होंने ट्वीट किया, "जैसे नरेंद्र मोदी सरकार ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया, मैं उनसे नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदलकर सरदार पटेल स्टेडियम करने का अनुरोध करना चाहता हूँ."
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खेल रत्न पुरस्कार और मेजर ध्यानचंद
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार 1991-92 में दिया जाना शुरू किया गया था. सबसे पहले खेल रत्न शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद बने थे. लिएंडर पेस, सचिन तेंदुलकर, धनराज पिल्ले, पुल्लेला गोपीचंद, अभिनव बिंद्रा, अंजू बॉबी जॉर्ज, मेरी कॉम और रानी रामपाल समेत 43 खिलाड़ियों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है. इस पुरस्कार में खिलाड़ियों को 25 लाख रुपए भी दिया जाता है.
1926 से 1949 तक हॉकी में भारत का परचम लहराने वाले दिग्गज मेजर ध्यानचंद ने अपने करियर में 400 से अधिक गोल किए. वे स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय ओलंपिक टीम के तीन बार (1928, 1932 और 1936) हिस्सा रहे.
खेल में देश का सर्वोच्च लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी ध्यानचंद के नाम पर ही दिया जाता है. इसकी शुरुआत 2002 में की गई थी.
साथ ही 2002 में ही नई दिल्ली स्थित नैशनल स्टेडियम का नाम भी बदल कर मेजर ध्यानचंद स्टेडियम रखा गया था.
भारतीय ओलंपिक संघ ने मेजर ध्यानचंद को शताब्दी का खिलाड़ी घोषित किया था और उनकी जन्मतिथि 29 अगस्त को भारत में 'राष्ट्रीय खेल दिवस' के रूप में मनाया जाता है. इसी दिन खिलाड़ियों को देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार दिए जाते हैं.
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नाम बदलने पर बवाल क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब नाम बदले जाने को लेकर हंगामा हुआ है.
इसी वर्ष फ़रवरी के महीने में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम मोटेरा का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम कर दिया था.
इस स्टेडियम में दो एंड के नाम- अडानी और रिलायंस के नाम पर रखा गया है. स्टेडियम का नाम बदलने के साथ साथ पवेलियन के इन दोनों एंड के नाम को लेकर भी काफी चर्चा हुई. इसे लेकर तब बहुत विवाद हुआ था.
तब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया था, "सच कितनी खूबी से सामने आता है, नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अडानी एंड- रिलायंस एंड, जय शाह की अध्यक्षता में!"
जब दिल्ली के फ़िरोजशाह स्टेडियम का नाम बदल कर अरुण जेटली के नाम पर रखा गया था तब बिशन सिंह बेदी और कीर्ति आज़ाद जैसे पूर्व क्रिकेटरों ने भी इसका विरोध किया था. हालांकि इन दोनों की अरुण जेटली से बनती भी नहीं थी.
फ़िरोज शाह कोटला स्टेडियम में उनकी प्रतिमा स्थापित करने को लेकर बिशन सिंह बेदी ने डीडीसीए की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा तक दे दिया था. अपना इस्तीफ़ा लिखते हुए उन्होंने एक ख़ुला ख़त लिखा था, जिसकी बहुत चर्चा भी हुई थी.
कॉपी-अभिजीत श्रीवास्तव
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