चीन ने परमाणु सौदा तुड़वाने के लिए लेफ़्ट पार्टियों का इस्तेमाल करना चाहा था: विजय गोखले - प्रेस रिव्यू

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पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने दावा किया है कि 2007 और 2008 के बीच भारत-अमेरिका परमाणु सौदे के दौरान चीन ने भारत में लेफ़्ट पार्टियों के साथ 'क़रीबी संबंधों' का इस्तेमाल करके 'घरेलू विपक्ष तैयार' कर रखा था.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार, इस बात का दावा विजय गोखले ने अपनी नई किताब 'द लॉन्ग गेम: हाउ द चाइनीज़ नेगोशिएट विद इंडिया' में किया है.
संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) रहते हुए गोखले 2007-2009 के दौरान विदेश मंत्रालय में चीन के मामले देख रहे थे. इस दौरान भारत की समझौते पर बात चल रही थी और उसे न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में बीजिंग के राज़ी होने के बाद छूट मिल गई थी.
39 साल के अपने राजनयिक करियर में गोखले ने 20 साल चीन पर काम किया. वो चीनी मंदारिन भाषा में भी दक्ष हैं. इस दौरान वो सात साल विदेश मंत्रालय में चीन डेस्क पर और सात साल पूर्वी एशिया डेस्क पर रहे. वो चीन में भारत के राजदूत भी रहे और चीन पर नज़र रखने वालों में उन्हें देश का सबसे बड़ा ज्ञाता माना जाता है.
जनवरी 2018 में एस. जयशंकर की जगह उन्होंने विदेश सचिव की ज़िम्मेदारी संभाली और पिछले साल रिटायर हुए.
गोखले ने अपनी किताब में बीते 75 सालों के दौरान भारत और चीन के बीच जिन छह बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई है उसको कवर किया है.
उन्होंने दावा किया है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को तोड़ने के लिए चीन ने लेफ़्ट पार्टियों का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी.
उन्होंने लिखा है, "चीन ने भारत में लेफ़्ट पार्टियों के साथ क़रीबी संबंधों का इस्तेमाल किया. सीपीआई और सीपीएम के शीर्ष नेताओं की बैठक के लिए चीन की यात्रा करने की भी योजना थी. दोनों पार्टियां देश की सीमा और द्विपक्षीय हितों के सवाल पर हमेशा राष्ट्रवादी रही हैं, लेकिन चीनी जानते थे कि लेफ़्ट पार्टियों की भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर मूलभूत चिंताएं हैं."
"डॉक्टर मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में लेफ़्ट पार्टियों के दबदबे को चीन जानता था और शायद इसीलिए उसने उनके डर का इस्तेमाल अमेरिका के प्रति भारत के झुकाव के ख़िलाफ़ करना चाहा. यह शायद घरेलू राजनीति में चीन के दख़ल का पहला मामला था, लेकिन वे पर्दे के पीछे रहने को लेकर बहुत सचेत थे."
दिल्ली: नौ वर्षीय बच्ची के बलात्कार और जबरन अंतिम संस्कार का मामला

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दिल्ली के एक श्मशान घाट में रविवार रात एक नौ वर्षीय बच्ची के साथ कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार और फिर उसका जबरन अंतिम संस्कार कर देने का मामला सामने आया है.
अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के नांगल गांव में यह घटना सामने आई है जिसमें पुलिस ने श्मशान घाट की देखभाल करने वाले पुजारी समेत चार लोगों को गिरफ़्तार किया है.
पुलिस ने इसमें लापरवाही के कारण मौत और सबूत मिटाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में हत्या, यौन हिंसा और पोक्सो एक्ट के तहत अन्य धाराएं जोड़ी गईं. शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका क्योंकि उसका पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था.
अख़बार लिखता है कि बच्ची कूड़ा इकट्ठा करने वाले शख़्स की बेटी थी और उसका परिवार श्मशान घाट के सामने एक किराए के कमरे में रहता था.
पुलिस के अनुसार, शाम 5.30 बजे बच्ची अपनी मां को बताकर श्मशान घाट में पानी भरने गई थी. 6 बजे श्मशान घाट के पुजारी और तीन लोग उसकी मां के पास आए और बताया कि उनकी बेटी की वाटर कूलर से करंट लगने से मौत हो गई है.
डीसीपी (दक्षिण पश्चिम) इंगित प्रताप सिंह ने लड़की की मां के हवाले से बताया कि चारों अभियुक्तों ने बच्ची की मां को पुलिस को सूचित करने से रोक दिया था. अभियुक्तों ने बच्ची की मां से कहा था कि इससे पुलिस केस बनेगा और पोस्टमॉर्टम के दौरान उसके अंग निकाल लिए जाएंगे.
दिल्ली के विधायकों की तनख़्वाह बढ़ी

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के विधायकों की तनख़्वाह में बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है जिसके बाद उनकी मासिक तनख़्वाह 90,000 रुपये हो जाएगी.
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार के मुताबिक़, दिल्ली सरकार ने जितनी तनख़्वाह बढ़ाने की मांग की थी यह उससे काफ़ी कम है. इस मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर बैठक करेंगे.
अख़बार के मुताबिक़, विधायकों की तनख़्वाह 2011 में बढ़ाई गई थी और देश में सबसे कम तनख़्वाह दिल्ली के विधायकों की ही है.
उत्तर प्रदेश में जहां एक विधायक को प्रति माह 95,000 रुपये की तनख़्वाह मिलती है. वहीं, गुजरात में विधायकों को 1,05,000, बिहार में 1,30,000, राजस्थान में 1,42,500, हरियाणा में 1,55,000 और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 1,98,000 और 1,90,000 रुपये प्रति माह की तनख़्वाह मिलती है.
देश में तेलंगाना के विधायकों को सबसे अधिक 2,50,000 प्रति माह की तनख़्वाह मिलती है.
समानांतर संसद चला सकता है विपक्ष

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पेगासस जासूसी, तीनों नए कृषि क़ानूनों और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष लंबी लड़ाई पर मंथन कर रहा है.
अमर उजाला के मुताबिक़, सरकार की मुश्किल बढ़ाने के लिए विपक्ष सदन के बाहर समानांतर संसद चलाने की रणनीति बना रहा है. अंतिम फ़ैसला मंगलवार सुबह होने वाली विपक्षी नेताओं की बैठक में होगा.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष व वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी नेताओं की यह बैठक बुलाई है. बैठक में मॉनसून सत्र की बाकी बची बैठकों के लिए रणनीति तैयार की जाएगी.
टीएमसी सूत्रों का कहना है कि उनकी पार्टी ने समानांतर संसद चलाने का प्रस्ताव दिया है, इस पर विमर्श भी हुआ है. अब मंगलवार को विस्तार से चर्चा के बाद अंतिम फ़ैसला लिया जाएगा.
यूपी में अनाथ बच्चों को मिलेंगे हर माह ढाई हज़ार रुपये

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना के अलावा अन्य कारणों से भी अनाथ होने वाले बच्चों को आर्थिक मदद देने का फ़ैसला किया है.
दैनिक जागरण लिखता है कि सोमवार को कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) के अंतर्गत आर्थिक सहयोग प्रदान करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी.
अब 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे जिन्होंने कोविड-19 के अलावा अन्य कारणों से अपने माता-पिता दोनों या माता या पिता में से किसी एक या फिर अपने लीगल अभिभावक को खो दिया है, उन्हें 2,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक मदद दी जाएगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की शुरुआत के मौके पर कोरोना के अलावा अन्य कारणों से अनाथ बच्चों को भी आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी. घोषणा के 11 दिन बाद ही कैबिनेट ने सोमवार को इसका प्रस्ताव पास कर दिया.
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