येदियुरप्पा को बीजेपी ने कर्नाटक के सीएम पद से क्यों हटाया?

येदियुरप्पा

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, बेंगलुरु से

आख़िरकार कर्नाटक के ताक़तवर क्षत्रप बीएस येदियुरप्पा को राज्य की भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा है.

माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के आरोप और सरकार में बेटे की दखलंदाज़ी के आरोपों के कारण उन्हें ऐसा करना पड़ा है.

येदियुरप्पा की विदाई के पीछे केंद्र सरकार को दिए गए उनके उस 'इकरारनामे' को भी एक वजह बताया जा रहा है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे ये वादा लिया था कि सत्ता में दो साल पूरे होने के बाद वे पद छोड़ देंगे.

कर्नाटक के सियासी हलकों में ये कहा जा रहा है कि येदियुरप्पा ने उसी 'इकरारनामे' पर अमल पर करते हुए सोमवार को पद छोड़ने का एलान किया और वादा किया कि साल 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को सत्ता में लाने के लिए वे काम करते रहेंगे.

कर्नाटक विधान सभा के बैंक्वेट हॉल में राज्य की भाजपा सरकार की दूसरी सालगिरह के मौक़े पर मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफ़े का एलान किया. उन्होंने भावुक स्वर में कहा, "मैं इस इवेंट के बाद जल्द ही अपना इस्तीफ़ा सौंपने के लिए राज भवन जाऊँगा."

येदियुरप्पा के पद से हटने के कुछ और भी कारण हो सकते हैं लेकिन बड़ी वजह यही लग रही है कि पार्टी विधायक और नव नियुक्त मंत्रियों ने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से सरकार के कामकाज में मुख्यमंत्री के बेटे बीवाई विजेंद्र की दखलंदाज़ी को लेकर शिकायत की थी.

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'तीस परसेंट वाली सरकार'

कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर से पाला बदलकर भाजपा की सरकार बनवाने वाले 17 विधायकों में एक एएच विश्वनाथ भी थे. येदियुरप्पा के बेटे को लेकर कर्नाटक में नाराज़गी का ये आलम था कि एएच विश्वनाथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीवाई विजेंद्र का नाम तक ले लिया.

येदियुरप्पा सरकार के ही नवनियुक्त पर्यटन मंत्री सीपी योगेश्वर ने बीवाई विजेंद्र की कड़े शब्दों में आलोचना की. उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहूँगा कि मेरा बेटा मेरे विभाग के कामकाज में दखल दे."

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बीबीसी हिंदी से कहा, "इस में ज़रा सा भी संदेह नहीं है कि उन्हें पद से हटाया गया है क्योंकि उनकी सरकार एक भ्रष्ट सरकार थी. हर कोई जानता है कि वो 30 परसेंट वाली सरकार थी."

किसी परियोजना की लागत के 'एक ख़ास हिस्से' का हवाला देने के लिए 'परसेंट' शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. साल 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार को '10 परसेंट वाली सरकार' कहा था.

बीजेपी के एक नेता नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से कहते हैं, "जब हम ये सुनते हैं कि हमारी सरकार को 'तीस परसेंट वाली सरकार' कहा जाता है तो इससे हमारी पार्टी और सरकार की ख़राब छवि बनती है. हमारी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व निश्चित रूप से इस बात को लेकर नाराज़ होगा."

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प्रशासनिक नियंत्रण

कर्नाटक की राजनीति में वो चाहे सत्तारूढ़ पार्टी हो या विपक्ष, हर किसी ने ये बात नोटिस की थी कि हमेशा जोश से लबरेज रहने वाले येदियुरप्पा आधिकारिक विचार विमर्श के दौरान किस तरह से शांत हो गए थे.

साल 2008-2011 के बीच लोगों ने जिस मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को देखा था, अब वो वैसे नहीं दिखाई देते थे.

सरकार के कामकाज पर उनकी पहले जैसी पकड़ नहीं रही थी. कर्नाटक में जब कोरोना महामारी तेज़ी से फैल रही थी, तो येदियुरप्पा अपने स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु के कामकाज से ख़ुश नहीं थे. उन्होंने मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर डॉक्टर के सुधाकर से कर्नाटक में कोरोना महामारी की स्थिति पर राज्य सरकार का पक्ष रखने के लिए कहा था.

इसके बाद ऐसी स्थिति पैदा हो गई कि बी श्रीरामुलु कोरोना संक्रमितों का एक आँकड़ा पेश करते, तो थोड़ी देर बाद डॉक्टर के सुधाकर दूसरा आँकड़ा सामने रखते. इसके बाद येदियुरप्पा ने प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन मिनिस्टर एस सुरेश कुमार को कोरोना महामारी की स्थिति पर रोज़ाना होने वाली मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करने के लिए कहा.

इसके बाद बी श्रीरामुलु से स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार वापस ले लिया गया और डी सुधाकर को स्वास्थ्य और मेडिकल एजुकेशन दोनों ही महकमों का प्रभार दे दिया गया. कहा जाता है कि डी सुधाकर की काफ़ी कोशिशों के बाद येदियुरप्पा ने ये फ़ैसला किया था.

ठीक इसी तरह येदियुरप्पा सरकार के मंत्री जेसी मधुस्वामी का मंत्रालय भी कई बार बदला गया.

राज्य सरकार के एक मंत्री ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी हिंदी को बताया, "जिस तरह से ये चीज़ें की गईं, वो येदियुरप्पा के तौर तरीक़ों से मेल नहीं खाती हैं. अपने पहले कार्यकाल में वे मंत्रियों पर चिल्ला देते थे कि वे ढंग से बर्ताव करें."

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अब कोई चुनौती नहीं

साल 2011 में जब लालकृष्ण आडवाणी के पास बीजेपी की कमान हुआ करती थी, तो येदियुरप्पा को पद छोड़ने के लिए कहा गया था. उस वक्त येदियुरप्पा रेस कोर्स रेड स्थित उनके आवास से बाहर निकले और सीधे राज भवन पहुँच गए.

उनके साथ बड़ी संख्या में पार्टी विधायक भी मौजूद थे और इसका मक़सद केंद्रीय नेतृत्व को अपनी ताक़त का अहसास कराना था. उस वक़्त कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने येदियुरप्पा सरकार को राज्य में अवैध खनन के लिए दोषी भी ठहराया था.

बाद में जब येदियुरप्पा को ये अहसास हुआ कि भ्रष्टाचार के दो मामलों में उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इस मामले में येदियुरप्पा के बेटे का नाम भी उछला था. येदियुरप्पा कर्नाटक के पहले ऐसे पूर्व मुख्यमंत्री बने, जिन्हें 23 दिन जेल में गुज़ारना पड़ा.

सोमवार को येदियुरप्पा ने भावुक स्वर में केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा, "मेरी उम्र 75 साल से ज़्यादा हो जाने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे पद पर बने रहने दिया."

राज्य की भाजपा सरकार की दूसरी सालगिरह के मौक़े पर इस भावुक भाषण में येदियुरप्पा ने कम से कम तीन बार नरेंद्र मोदी और अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि वो पार्टी के लिए काम करते रहेंगे और पार्टी की सरकार को वापस लाएँगे.

उन्होंने ये भी कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि मोदी और शाह अगले लोकसभा चुनावों में पार्टी को सत्ता में लाएँ.

कर्नाटक भाजपा में येदियुरप्पा को जो ख़ास दर्जा दिया गया था, उसकी एक वजह ये भी थी कि वे राज्य में लिंगायत समुदाय के सबसे निर्विवाद नेता थे. कर्नाटक की आबादी में 17 फ़ीसदी लिंगायतों की है.

उन्होंने कहा, "मैं स्वामी जी के समर्थन के लिए उनका आभारी हूं. मैं सभी ये अपील करता हूँ कि मेरे इस्तीफ़े पर वे विरोध-प्रदर्शन न करें."

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वाजपेयी कैबिनेट में लेना चाहते थे

कर्नाटक में बीजेपी की राज्य सरकार की दूसरी सालगिरह के मौक़े पर भाषण देते वक़्त येदियुरप्पा का गला पहली बार उस वक़्त रूंध गया जब उन्होंने श्रोताओं से कहा, "अटल बिहारी वाजपेयी ने मुझे कैबिनेट ज्वॉइन करने के लिए कहा था. मैंने उन्हें मना कर दिया और कहा कि मैं कर्नाटक में काम करूँगा और पार्टी का संगठन खड़ा करूँगा. उन दिनों जब उनके जैसे बड़े नेता राज्य के दौरे पर आते थे, तो हमारी जनसभाओं में 200-300 से ज़्यादा लोग नहीं जुटते थे."

उन्होंने कहा, "मैंने साइकिल पर चुनाव प्रचार किया था क्योंकि हमारे पास कार नहीं थी. आज हमारी पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन से सशक्त हो गई है. केएस ईश्वरप्पा आज यहाँ मौजूद हैं. पार्टी का विस्तार इसलिए हो पाया, क्योंकि हम सभी ने कड़ी मेहनत की थी और हम सत्ता में आ सके."

"कई वजहों से हम अपने बूते बहुमत नहीं जुटा सके. हमें 108-110 सीटें मिलीं. मुझे भरोसा है कि भविष्य में हम 125-130 सीटें जीत सकेंगे और मैं पार्टी को सत्ता में लाने के लिए जो कुछ भी मुमकिन होगा, करूँगा."

येदियुरप्पा ने उस घड़ी को भी याद किया, जब दो साल पहले मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें "किस तरह से अग्नि परीक्षा देनी" पड़ी थी. उनके शपथ लेते ही राज्य में भीषण बारिश और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी. येदियुरप्पा ने बताया, "केंद्रीय नेतृत्व ने मुझे मंत्रिपरिषद का गठन करने से कुछ समय के लिए रोक दिया. और मैं पागलों की तरह राज्य के दौरे कर रहा था."

पार्टी के एक नेता नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, "हर किसी को ये बात मालूम है कि येदियुरप्पा को पद से हटाने के क्या ख़तरे हो सकते हैं. लेकिन ये एक ऐसा जोखिम है जो हम सोच समझकर उठा रहे हैं."

अभी ये साफ़ नहीं है कि पार्टी नेतृत्व किसे उनका उत्तराधिकारी चुनता है.

ऐसा लगता है कि जुलाई येदियुरप्पा के लिए ठीक नहीं होता. पिछली बार उन्हें 31 जुलाई, 2011 को इस्तीफा देना पड़ा था. 10 साल बाद इसी जुलाई की 26 तारीख़ को उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है.

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