यूपी में जींस पहनने को लेकर 17 साल की लड़की की हत्या का पूरा मामला क्या है?

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- Author, राजेश कुमार आर्य
- पदनाम, देवरिया से बीबीसी हिंदी के लिए
नेहा पासवान की उम्र 17 साल थी. वह नौवीं कक्षा में जाने वाली थीं. पढ़-लिखकर पुलिस-दरोगा बनना चाहती थीं. लेकिन उनका यह सपना उन्हीं के साथ ख़त्म हो गया.
20 जुलाई को उनका शव उनके घर से करीब 20 किलोमीटर दूर एक पुल पर लटका हुआ मिला.
उनकी मां शकुंतला देवी का आरोप है कि दादा-दादी और चाचा-चाची ने नेहा को पीट-पीटकर मार डाला और वो भी सिर्फ़ इसलिए की नेहा जींस पहनना बंद नहीं कर रही थी.
मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले के महुआडीह थानाक्षेत्र सवरेजी खर्ग गांव का है. इस गांव में रहने वाले अमरनाथ पासवान दो बेटों और दो बेटियों के पिता हैं. नेहा उनकी तीसरे नंबर की संतान थीं. अमरनाथ पासवान लुधियाना में दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं और हादसे के दिन भी वह लुधियाना में ही थे. हादसे की जानकारी मिलने के बाद वह अपने घर पहुंचे हैं.
हादसे के दिन क्या हुआ पूछे जाने पर नेहा की मां शकुंतला देवी ने बताया, "नेहा ने सोमवार का व्रत किया था. उसने सुबह पूजा-पाठ किया था. शाम को उसने नहाने के बाद जींस-टॉप पहना और पूजा की. पूजा के समय तो किसी ने कुछ नहीं कहा. लेकिन उसके बाद उसके दादा-दादी और चाचा-चाची ने उसके जींस पहने को लेकर आपत्ति जताई. इस पर नेहा ने कहा कि सरकार ने जींस बनाया है पहनने के लिए. इसलिए मुझे पहनना है, पढ़ना लिखना है और समाज में रहना है."
वो बताती हैं, "नेहा का जवाब सुनकर उसके दादा-दादी ने कहा कि वे ना तो उसे जींस पहनने देंगे और ना पढ़ने लिखने देंगे और इसके बाद दादा-दादी और चाचाओं-चाची ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी. इससे उसकी मौत हो गई."
वो बताती हैं कि उनके सास-ससुर और देवर ने नेहा को पीटने के बाद कहा कि वह बेहोश हो गई है और उसे अस्पताल ले जा रहे हैं.

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गंडक नदी के पुल पर लटका मिला शव
शकुंतला देवी के मुताबिक, "उन लोगों ने जिस तरह से नेहा को अस्पताल ले जाने के लिए ऑटो में लादा उससे लगा कि उनके बेटी की मौत हो चुकी है."
वो बताती हैं कि उन्होंने तीन बार ऑटो में चढ़ने और अपनी बेटी के साथ जाने की कोशिश की लेकिन उन्हें नहीं चढ़ने दिया गया और वे लोग ऑटो लेकर चले गए.
सास-ससुर और देवर-देवरानी ने घर लौटकर शकुंतला देवी को बताया कि नेहा अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत ठीक है. लेकिन डॉक्टरों ने बात कराने से मना किया है.
शकुंतला देवी बताती हैं कि इसके बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों को इस घटना की जानकारी दी. उनके रिश्तेदार आए और नेहा की तलाश में देवरिया के ज़िला अस्पताल गए. लेकिन वहां उसका कुछ पता नहीं चला.
मंगलवार सुबह उन्हें पता चला कि गंडक नदी पर बने पटनवा पुल पर एक लड़की की लाश लटकी हुई है. जब शकुंतला देवी के रिश्तेदारों ने जाकर देखा तो वह शव नेहा का ही था.
नेहा के परिजनों का आरोप है कि नेहा के शव को नदी में फेंकने की कोशिश की गई थी. लेकिन उसका एक पैर लोहे के गाटर में फंस गया था.
बाद में सूचना मिलने पर पुलिस ने नेहा के शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. हालांकि परिवार को अब भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति नहीं मिली है.
शकुंतला देवी की तहरीर पर पुलिस ने नेहा के दादा परमहंस पासवान,दादी भगना देवी, चाचा व्यास पासवान और चाची गुड्डी देवी, चाचा अरविंद पासवान और चाची पूजा देवी, चचेरे भाई और पट्टीदार राहुल पासवान पुत्र हरेराम पासवान, पन्नेलाल पासवान पुत्र रामजनक पासवान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया है.
एफ़आईआर में नामजद लोगों में अरविंद पासवान के दोस्त राजू यादव और ऑटो चालक हसनैन का नाम भी शामिल है. पुलिस ने आरोपियों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा-147, 302 और 201 के तहत एफ़आईआर दर्ज की है.
पुलिस क्षेत्राधिकारी (डीएसपी) श्रीयश त्रिपाठी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "इस मामले में पुलिस ने दादा-दादी और एक चाचा को हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ की जा रही है."

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10 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप
डीएसपी से जब यह पूछा गया कि क्या यह हत्या जींस पहनने को लेकर हुई है. इस सवाल पर उनका कहना था, "मंगलवार सुबह जब हमने लड़की की मां से बात की थी तो उन्होंने हमें ऐसी कोई बात नहीं बताई थी. उस समय उन्होंने बताया था कि धुले हुए कपड़ों को सुखाने को लेकर विवाद हुआ था. लेकिन उसी दिन शाम को जब उन्होंने अपनी लिखित तहरीर दी तो उसमें उन्होंने जींस पहनने को लेकर विवाद होने की जानकारी दी. उनकी तहरीर पर महुआडीह पुलिस ने 10 लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है."
पुलिस के इस अधिकारी ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की बात बताई.
नेहा के पिता अमरनाथ पत्थर घिसाई का काम करते हैं. पिछले करीब छह महीने से वो पंजाब के लुधियान में रहकर काम कर रहे हैं. इससे पहले वो दिल्ली में काम करते थे.
अमरनाथ की सबसे बड़ी बेटी निशा ग्रेजुएट है. वो घर पर ही रहकर सिलाई-कढ़ाई का काम करती है. और अपने परिवार की मदद करती है. निशा से छोटा भाई विशाल पासवान हाईस्कूल पास हैं. वो गुजरात के बड़ौदा में रहकर रंगाई-पुताई का काम करते हैं. वहीं सबसे छोटा विवेक पासवान घर पर ही रहकर सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है.

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नेहा और विवेक घर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित श्रीमति शांति देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते थे. नेहा ने इस साल आठवीं की परीक्षा पास की थी. उसका नाम अब नौवीं कक्षा में लिखा जाना था.
शकुंतला देवी ने बताया, "नेहा कहती थी कि वो पढ़-लिखकर दरोगा बनेगी और अपने परिवार की परेशानियों को दूर करेगी. लेकिन उसका सपना पूरा नहीं हो पाया."
नेहा के पिता अमरनाथ पासवान चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़े हैं. उनका परिवार जर्जर हो चुके एक घर में रहता है. यह परिवार गुजारा मेहनत-मजदूरी करके ही जीवन-यापन करता है. परिवार के पास खेती के नाम पर एक बीघे ज़मीन है, जो अभी उनके माता-पिता के नाम पर है.

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शकुंतला देवी के पति अमरनाथ पासवान ने बताया कि मजदूरी करके उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाया-लिखाया.
वो कहते हैं कि उन्होंने अपने बच्चों के पढ़ने-लिखने और पहनने-ओढ़ने को लेकर कभी टोका-टाकी नहीं की. वो चाहते हैं कि पढ़-लिखकर उनके बच्चे आगे बढ़ें.
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या कभी उनके पिता ने बच्चों के पहनने-ओढ़ने या पढ़ाई लिखाई को लेकर कोई शिकायत की थी. इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने कभी बच्चों को लेकर कभी किसी बात की शिकायत नहीं की."
हालांकि शकुंतला देवी बताती हैं कि उनके ससुराल वाले काफ़ी पहले से ही उन्हें और उनके बच्चों को परेशान कर रहे हैं. उनका कहना है कि ससुराल वाले नहीं चाहते हैं कि वो और उनके बच्चे वहां रहें. शकुंतला की बहन के बेटे अजय पासवान ने भी इसकी तस्दीक की.

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गांव में सन्नाटा
अजय पासवान बताते हैं कि जब वो पोस्टमार्टम के बाद नेहा के शव को लेकर घर आए तो उसके शव को गाड़ी से उतारने के लिए केवल एक आदमी ही आगे आया था कोई और नहीं.
अजय ने बताया कि नेहा के शव को जब अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाने लगा तो गांव वालों ने इसका भी विरोध किया. उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी. इस पर पुलिस पहुंची और अपनी सुरक्षा में शव को उठवाया और अंतिम संस्कार करवाया.
गांव में इस पूरे मामले पर कोई भी शख़्स कुछ बताने को तैयार नहीं दिखा. गांव के प्रधान राजू राव ना तो अपने गांव में थे और ना ही उनसे फ़ोन पर पर संपर्क करने की कोशिश कामयाब हो पायी.

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आरोपियों के लिए सजा के सवाल पर नेहा की मां शकुंतला देवी ने कहा कि उनकी बेटी तो चली गई. लेकिन अब वो नहीं चाहती हैं कि आरोपियों को फांसी की सजा हो. वो चाहती हैं कि इस मामले के आरोपी अपने अंतिम समय तक जेल में ही रहें और अदालत आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए.
जब मैं नेहा के घर जा रहा था तो रास्ते में उसका स्कूल भी मिला, जिसकी दीवार पर लिखा था, 'पढ़ी लिखी लड़की, रोशनी है घर की.' नेहा भी अपने परिवार के लिए रोशनी बन सकती थी.
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