पेगासस जासूसी मामला: नई लिस्ट' में कई चौंकाने वाले नाम- प्रेस रिव्यू

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पेगासस-जासूसी मामले में जो कथित नई लिस्ट जारी की गई है उसमें उस महिला के इस्तेमाल किये गए तीन फ़ोन नंबर भी हैं जिसने अप्रैल 2019 में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था.

सुप्रीम कोर्ट की एक आंतरिक समिति ने गोगोई को क्लीन-चिट दे दी थी और उनके रिटायर होने के तुरंत बाद सरकार ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया था.

द वायर के अनुसार, इस महिला के नंबरों के साथ-साथ उनके पति और उनके दो भाइयों द्वारा इस्तेमाल किए गए आठ अन्य नंबरों को निगरानी के लिए चुना गया. द वायर के अनुसार, ये वह समय था जब पूर्व सीजेआई के ख़िलाफ़ उन्होंने आरोप लगाए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, महिला के देवर (पति का भाई) में से एक ने सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उसे या उसके परिवार को पता नहीं था कि उनके फ़ोन नंबर निगरानी के संभावित टारगेट थे.

उन्होंने कहा कि 'हमने कुछ भी ग़लत नहीं किया'. इसके अतिरिक्त उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की.

दिल्ली पुलिस में तैनात महिला के पति और देवर को दिसंबर 2018 में निलंबित कर दिया गया था. हालांकि पुलिस ने कहा था कि उनके निलंबन और महिला के आरोपों के बीच कोई संबंध नहीं है. लेकिन बाद में जून 2019 में दोनों को बहाल कर दिया गया था.

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द हिंदू की ख़बर के मुताबिक़, पेगासस जासूसी के संबंध में जारी कथित लिस्ट के मुताबिक़, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा,चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद पटेल के मोबाइल नंबर की भी जासूसी का अंदेशा ज़ाहिर किया गया है.

सोमवार देर शाम कांग्रेस पार्टी ने इस संबंध में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाते हुए गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफ़े की मांग की और जासूसी के इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की मांग उठाई.

डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म द वायर उन 16 मीडिया संस्थानों में से एक सहयोगी है जिसने 'नंबरों की जासूसी' से जुड़ी ये रिपोर्ट जारी की है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, राहुल गांधी के कम से कम पांच क़रीबी दोस्तों और कांग्रेस के अन्य नेताओं के मोबाइल नंबर भी उन संभावित लोगों की सूची में शामिल किए गए हैं जिनकी या तो जासूसी हुई या फिर वे टारगेट थे.

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 के मध्य में भी राहुल गांधी के दो क़रीबी अलंकार सवाई और सचिन राव के नंबरों की जासूसी हुई.

इन 16 मीडिया संस्थानों में से एक द गार्जियन के अनुसार, डेटाबेस में एक फ़ोन नंबर की मौजूदगी इस बात की पुष्टि नहीं करती कि संबंधित डिवाइस पर जासूसी की ही गई या फिर की जानी ही थी.

डेटा चोरी

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इसके अलावा लीक हुई इस कथित सूची में चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम भी बताया जा रहा है. द वायर के अनुसार, साल 2018 में भी प्रशांत किशोर के फ़ोन पर पेगासस हमला करने का प्रयास किया गया था, लेकिन वो असफल रहा था.

इसके अलावा जिन अन्य दूसरे लोगों के फ़ोन कथित तौर पर निगरानी के लिए चुने गए थे उनमें जगदीप छोखर, वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर गगनदीप कांग और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन के भारत प्रमुख हरि मेनन का नाम भी शामिल है.

50,000 टेलीफ़ोन नंबरों के लीक हुए वैश्विक डेटाबेस सबसे पहले फ़ॉरबिडन स्टोरीज़ और एमनेस्टी इंटरनेशनल को मिले जिसे उन्होंने दुनिया भर के 16 मीडिया संस्थानों के साथ साझा किया.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का भी एक नंबर जो वह कभी इस्तेमाल करते थे, इस कथित सूची में है.

स्पाइवेयर गोपनीय तरीक़े से फ़ोन, कंप्यूटर या अन्य उपकरणों को अनलॉक कर सकता है, जानकारी एकत्र कर सकता है और उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना इसे किसी अन्य डिवाइस में स्थानांतरित कर सकता है.

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हालांकि इसरायली कंपनी ने कहा है कि वो चरमपंथ और अन्य गंभीर अपराधों से लड़ने के लिए केवल सरकारी एजेंसियों को पेगासस बेचती है.

जनसत्ता अख़बार लिखता है कि कंपनी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं.

इसरायली कंपनी एनएसओ ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा है कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फ़ॉरबिडेन स्टोरीज़ के डेटा गुमराह करने वाले हैं.

कंपनी का कहना है कि ये डेटा उन नंबरों के नहीं हो सकते हैं जिनकी सरकारों ने निगरानी की है. इसके अलावा एनएसओ ने कहा है कि वो अपने ग्राहकों की खुफ़िया गतिविधियों से वाकिफ़ नहीं है. पेगासस सॉफ़्टवेयर संबंधित फ़ोन पर आने-जाने वाले हर कॉल का ब्योरा जुटाने में सक्षम है.

वहीं कल मानसून सत्र के पहले दिन केंद्रीय दूरसंचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैश्नणव ने लोकसभा में फ़ोन टैपिंग मामले पर सरकार का पक्ष रखा.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, वैष्णव ने कहा, "एक वेब पोर्टल पर कल रात एक अति संवेदनशील रिपोर्ट प्रकाशित की गई जिसमें बढ़ा-चढ़ाकर कई आरोप लगाए गए. ये रिपोर्ट संसद के मॉनसून सत्र के एक दिन पहले प्रकाशित हुई. ये संयोग नहीं हो सकता."

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उन्होंने कहा,"इससे पहले भी वॉट्सऐप पर पेगासस के इस्तेमाल को लेकर मिलते-जुलते दावे किए गए हैं. वो बेबुनियाद थे और सभी पार्टियों ने उनका खंडन किया था. 18 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश प्रतीत होती है,"

रविवार को इस चर्चित रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दुनिया भर में सैकड़ों पत्रकारों और दूसरे चर्चित लोगों के फ़ोन टैप किए गए हैं. इनमें भारत के कई लोग शामिल हैं. खु़द वैष्णव का नाम भी संभावित लोगों की सूची में है.

बतौर आईटी मंत्री संसद में अपने पहले भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि "अत्यधिक सनसनीखेज़ कहानी" ने कई तरह के संगीन आरोप लगाए हैं, लेकिन उनके पीछे कोई सार नहीं है.

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