धर्म परिवर्तन करने वाली महिला की हाई कोर्ट से गुहार, पुलिस-मीडिया से बचाएं - प्रेस रिव्यू

दिल्ली हाई कोर्ट

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले की एक 29 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया है कि उसके मुस्लिम धर्म अपना लेने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस, कई मीडिया संगठन और निगरानी समूह उसको धमकियां दे रहे हैं.

द हिंदू अख़बार के अनुसार, महिला ने ख़ुद की, अपने परिवार की और अपनी निजता की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

महिला ने अपनी याचिका में कहा है कि वो दिल्ली में रहती है लेकिन मूलतः यूपी के शाहजहांपुर की रहने वाली है और उसने 'अपनी इच्छा से अपना धर्म परिवर्तन किया है और रोज़ाना मीडिया में उसके और उसके परिजनों के बारे में दुर्भावनापूर्ण सामग्री छापी जा रही है जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए.'

याचिका के अनुसार, महिला ने 27 मई को 'अपनी इच्छा से और बिना किसी धमकी या दबाव के' इस्लाम धर्म स्वीकार किया था.

याचिका में कहा गया है कि उसे 'अलग-अलग मीडियाकर्मियों' के 23 जून से फ़ोन कॉल आ रहे हैं और उसके धर्मांतरण की ख़बर प्रकाशित करने की धमकी दे रहे हैं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक मीडिया पर्सन ने उससे जबरन 20,000 रुपये ले लिए.

याचिका में कहा गया है, "यूपी के कुछ छोटे अख़बार और न्यूज़ पोर्टल कई न्यूज़ रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के धर्म परिवर्तन को लेकर पूरी तरह बेतुकी और ख़याली जानकारियां दे रहे हैं."

महिला

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महिला का आरोप है कि उसने इस विषय में 24 जून को दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

याचिका में यह भी कहा गया है कि 26 जून को महिला को सूचित किया गया कि उसके पिता को 'उत्तर प्रदेश पुलिस के कर्मचारी लेकर गए हैं और वे उसे भी उत्तर प्रदेश वापस ले जाने के लिए दिल्ली आ रहे हैं जहां उसे झूठी शिकायत/एफ़आईआर दर्ज कराने के लिए मजबूर किया जाएगा.'

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि उसे सुरक्षा देने के साथ-साथ दिल्ली हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से किसी राज्य, व्यक्ति या एजेंसी द्वारा ले जाने न दिया जाए.

याचिका में कहा गया है, "आस्था और विश्वास के मामले संवैधानिक स्वतंत्रता का मूल मंत्र है. आस्थावादियों के साथ-साथ अनीश्वरवादियों के लिए भी संविधान मौजूद है. संविधान प्रत्येक व्यक्ति की जीवन शैली या विश्वास का पालन करने की क्षमता की रक्षा करता है जिसका वह पालन करना चाहता/चाहती है."

बंगाल: चुनाव बाद हिंसा की जांच करने गई NHRC की टीम को मिलीं धमकियां

हिंसा

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कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद हुई हिंसा की जांच करने पहुंची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की टीम को कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ा है.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार की दोपहर जादवपुर में टीम के साथ धक्का-मुक्की की गई और धमकियां दी गईं.

टीम के साथ मौजूद रहे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के वाइस-चैयरमेन आतिफ़ रशीद ने कहा कि भीड़ ने उन्हें मारने और पकड़ने की कोशिश की और उनके साथ मौजूद सीआईएसएफ़ के जवानों से भी धक्का-मुक्की की गई.

जादवपुर के डीसीपी राशिद मुनीर ख़ान ने कहा है कि पुलिस को ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है.

आयोग की टीम चुनाव के बाद हुई हिंसा में तोड़े गए कुछ घरों के वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी तब उन्हें कथित तौर पर 20-25 लोगों ने आकर घेर लिया जिनमें महिला और पुरुष दोनों थे.

वीडियो कैप्शन, पश्चिम बंगाल हिंसा: 'सब जला दिया... न खाने को कुछ न पहनने को'

रशीद ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें वो कह रहे हैं, "कलकत्ता हाई कोर्ट ने जो कमिटी गठित की थी उसका सदस्य और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के वाइस-चैयरमेन होने के नाते मैं यहां आया था. हमें जो शिकायतें मिली थीं उसकी हम जांच करने आए थे. हमने यहां 40 से ज़्यादा ऐसे घर पाए हैं जिन्हें नुक़सान पहुंचा है और उन घरों में कोई नहीं रह रहा है."

"कुछ गुंडों ने हम पर हमला किया और लोकल पुलिस को हमने सूचित किया लेकिन कोई यहां पर नहीं पहुंचा."

पुलिस सूत्रों का कहना है कि टीम और कुछ लोगों के बीच बहसबाज़ी हुई थी.

21 जून को मानवाधिकार आयोग के चैयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) अरुण मिश्रा ने पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख राजीव जैन की अध्यक्षता में पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा की शिकायतों की जांच के लिए एक पैनल गठित किया था.

यह पैनल हाई कोर्ट के आदेश के बाद गठित किया गया था.

संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद पीएम मोदी की हाई लेवल मीटिंग

जम्मू

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जम्मू में एयर फोर्स बेस पर संदिग्ध ड्रोन हमले के मद्देनज़र मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बैठक हुई.

दैनिक जागरण के मुताबिक़, इस बैठक में देश के सामने उभरते सुरक्षा ख़तरों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक आधार वाली नीति तैयार करने पर ज़ोर दिया गया. अख़बार को यह जानकारी इस मामले से जुड़े लोगों ने दी है.

जम्मू एयर फ़ोर्स स्टेशन में घटना के दो दिन बाद हुई इस अहम बैठक के बारे में बैठक में शामिल एक व्यक्ति ने अख़बार से कहा कि सरकार उभरती चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने के लिए जल्द ही एक नीति लेकर आ रही है.

देश के सामने उभर रही नई और ग़ैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुक़ाबला करने के लिए विभिन्न मंत्रालय और विभाग इस नीति पर काम कर रहे हैं.

रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाएं, सभी प्रमुख हितधारकों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करके नीति के निर्माण के साथ-साथ इसके कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएंगी.

अब चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी को लेकर ट्विटर पर दर्ज हुई एफ़आईआर

ट्विटर

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ट्विटर की मुश्किलें समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. अब दिल्ली पुलिस के साइबर सेल ने ट्विटर पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी) अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म दिखाने के आरोप में उस पर एफ़आईआर दर्ज की है.

हिंदुस्तान अख़बार की ख़बर के अनुसार, अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर एफ़आईआर दर्ज की गई है.

उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा क़ानून (पॉक्सो) और सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून के तहत मामला दर्ज किया गया है.

वहीं, ट्विटर ने इस पर एक बयान जारी किया है कि वो बाल यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाता है.

ट्विटर की तरफ़ से कहा गया है कि 'हम बाल शोषण से जुड़ी सामग्रियों से मुक़ाबले के लिए सक्रिय दृष्टिकोण रखते हैं.'

"हम इंटरनेट पर बाल शोषण को लेकर आने वाली चुनौतियों से निपटने में सबसे आगे रहते हैं और हम लगातार बाल अपराध के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को जारी रखते हैं. हम इस मुद्दे पर कड़ाई से नज़र रखते हैं और इससे लड़ने के लिए ज़रूरी तकनीक और टूल्स पर ख़र्च भी करते हैं."

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