क़ानूनी चुनौती में उलझे डिजिटल न्यूज़ पर मोदी सरकार के नए नियम

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में डिजिटल दौर में लगातार लोकप्रिय होते जा रहे सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स को विनियमित करने के लिए भारत सरकार ने जो नए आईटी नियम बनाए हैं उन्हें अब क़ानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

नए नियमों का विरोध केवल अमरीकी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स ही नहीं कर रहे, भारत के अपने डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स ने भी इन्हें अदालत में चुनौती दी है.

बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) के साथ-साथ एक पत्रकार की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया और दो हफ़्तों के भीतर जवाब माँगा.

मुख्य न्यायाधीश संजीव बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा की ओर से दायर एक लंबित याचिका को भी, जिसे इस महीने की शुरुआत में स्वीकार किया गया था, इस रिट याचिका के साथ टैग कर दिया है.

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय से आईटी नियम, 2021 को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 (1) (ए) का उल्लंघन घोषित करने का आग्रह किया है.

डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन ऑनलाइन समाचार मीडिया का एक संगठन है जो प्रिंट और टीवी चैनलों में शामिल पारंपरिक मीडिया हाउस का हिस्सा है.

ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म

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याचिका दायर करने वालों में एसोसिएशन के 13 सदस्य हैं, जिनमें एबीपी नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड, अमर उजाला लिमिटेड, डीबी कॉर्प लिमिटेड, एक्सप्रेस नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड, एचटी डिजिटल स्ट्रीम लिमिटेड, आईई ऑनलाइन मीडिया सेवा, जागरण प्रकाशन लिमिटेड, लोकमत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, एनडीटीवी कन्वर्जेंस लिमिटेड, टीवी टुडे नेटवर्क लिमिटेड, द मलयाला मनोरमा कंपनी, टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड और उषोदय इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड.

डीएनपीए का दावा है कि केवल वो प्लेटफ़ॉर्म जो सिर्फ़ ऑनलाइन चलते हैं वो नए आईटी नियमों के दायरे में आते हैं और पारंपरिक मीडिया के वेबसाइट इसके दायरे में नहीं आते.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ 26 मई से लागू हुए सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 से यूज़र्स की प्राइवेसी को ख़तरा बढ़ा है और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों के स्टाफ़ के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमों का ख़तरा भी बढ़ गया है.

10 जून को, मद्रास उच्च न्यायालय ने आईटी नियमों के ख़िलाफ़ संगीतकार टीएम कृष्णा द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.

मद्रास हाई कोर्ट, दिल्ली, केरल और कर्नाटक के बाद नए नियमों की वैधता पर विचार करने वाला देश का चौथा उच्च न्यायालय बन गया.

मार्च में, व्हाट्सऐप ने नियमों के भाग II के तहत 'ट्रेसेबिलिटी क्लॉज़' को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख़ किया था.

बाद में गूगल ने भी नियमों के ख़िलाफ़ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

मार्च में ही ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया संगठन 'द वायर' ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, उसके बाद 'द क्विंट' भी अदालत पहुँचा.

डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन की दलीलों के मुख्य अंश:

*आईटी नियम, 2021 उन संस्थाओं के आचरण को क़ानून बनाने का प्रयास करता है जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के दायरे में भी नहीं हैं.

*व्यापक आईटी नियम, 2021 विरासत वाले मीडिया घरानों (लिगेसी मीडिया) के साथ बिना किसी परामर्श के पारित किए गए, जो सबसे अधिक प्रासंगिक हितधारकों में से एक हैं.

*यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जिसके तहत नियम पारित किए गए हैं.

*याचिका में आगे कहा गया है कि आईटी नियम सरकार को जो शक्ति प्रदान करना चाहता है वह मनमाना, अचूक और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.

*आईटी नियम, 2021 स्पष्ट और व्यक्तिपरक आधार पर सामग्री को प्रतिबंधित करके बोलने की आज़ादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास करता है, जिसे पहले ही सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है.

*आईटी नियम, 2021 निगरानी और भय के युग की शुरुआत करना चाहते हैं.

*नियम 18 (3) और 19 (3) के ख़िलाफ़ भी आपत्ति दर्ज की गई है, जिसके लिए मासिक अनुपालन रिपोर्ट के प्रकाशन की आवश्यकता है. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इन प्रावधानों का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रभाव पड़ेगा और इससे संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) का उल्लंघन होगा.

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सोशल मीडिया भी इन नए नियमों से नाख़ुश

पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार की ओर से ट्विटर पर कथित सरकार विरोधी ट्वीट को हटाने का दबाव बढ़ा है जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच काफ़ी तनाव है.

लेकिन कई विशेषज्ञों के अनुसार इससे पहले बीजेपी, मोदी सरकार और उनके मंत्री ट्विटर से काफ़ी प्रभावित थे और अपनी बात और काम को आगे बढ़ाने के लिए ट्विटर का काफ़ी इस्तेमाल करते रहे हैं. स्वयं प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर पर लगभग सात करोड़ लोग फ़ॉलो करते हैं.

भारत में सोशल मीडिया कंपनियों को डर है कि उनका हाल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर जैसा हो सकता है जिन पर प्रशासन जब चाहे अंकुश लगाता रहता है. किसी शहर या राज्य में क़ानून-व्यवस्था के तहत उठाए गए क़दमों में इंटरनेट सुविधाएं बंद करा देना भी शामिल हो गया है.

भारत सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के सामान्य यूज़र्स की शिकायतों की सुनवाई करने वाले ऑफ़िसर की मदद से उनकी शिकायत के निवारण और समय पर समाधान के लिए उसे सशक्त बनाना है.

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