कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के पहले दिन 80 लाख को लगा टीका, क्या रहा राज्यों का हाल?

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सोमवार को देश भर में शुरु हुए कोरोना वैक्शीन अभियान के तहत पहले ही दिन 80 लाख लोगों को टीका लगाया गया है. ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है.
भारत वैसे तो दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीन उत्पादक है लेकिन देश के नागरिकों को कोरोना वैक्सीन देने के मामले में यहां स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. अब तक देश के कुल पांच प्रतिशत आबादी ही वैक्सीन की दोनो डोज़ ले सकी है. कई राज्यों में अभी भी वैक्सीन की कमी है.
ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून से देश में सभी लोगों को मुफ़्त वैक्सीन देने की घोषणा की थी, जिसके मुताबिक भारत सरकार ने 21 जून से नई वैक्सीन नीति लागू की है जिसके तहत केंद्र सरकार वैक्सीन ख़रीद कर राज्य सरकारों को मुहैया कराएगी.
नई नीति के लागू होने के बाद वैक्सीनेशन की स्थिति पर क्या और कितना असर पड़ा है, यही पता करने की कोशिश हमारे सहयोगी संवाददाताओं ने की.
पश्चिम बंगाल में नहीं शुरू हो सका महाअभियान

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प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से
वैक्सीन की कमी के कारण पश्चिम बंगाल में सोमवार से टीकाकरण महाअभियान शुरू नहीं हो सका. राज्य सरकार ने फ़िलहाल प्रथामिकता समूह में शामिल लोगों को ही वैक्सीन लगाने का फ़ैसला किया है. उसने कहा है कि वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई मिलने के बाद 18 से 44 साल की उम्र वाले लोगों के लिए महाअभियान शुरू किया जाएगा.
स्वास्थ्य सेवा निदेशक डॉ. अजय चक्रवर्ती बताते हैं, "सबसे लिए वैक्सीन का महाअभियान शुरू नहीं करने का एक मक़सद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उमड़ने वाली भीड़ पर अंकुश लगाना भी है. फ़िलहाल जितना स्टॉक उपलब्ध है उससे रोज़ाना तीन लाख लोगों को वैक्सीन लगाई जा सकती है. लेकिन सरकार इसे बढ़ा कर रोज़ाना पांच लाख करना चाहती है. स्टाक आने के बाद इसे बढ़ाया जाएगा."
उनका कहना है कि 18 साल से ऊपर के उन लोगों को ही फ़िलहाल वैक्सीन दी जाएगी जो प्राथमिकता समूह में शामिल हैं. इनमें बसों के कर्मचारी, हॉकर, पत्रकार और स्वास्थ्य कर्मचारियों के परिवार शामिल हैं.
इस बीच, महाअभियान शुरू नहीं होने के बावजूद सोमवार सुबह तमाम सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर 18 साल से ऊपर के लोगों की लंबी कतारें देखी गईं. एक स्वास्थ्य कर्मी के पुत्र अभिषेक मंडल बताते हैं, "मैं कई दिनों से वैक्सीन के लिए परेशान था. लेकिन हर जगह भारी भीड़ थी. इसलिए आज सुबह पांच बजे ही यहां पहुंच गया. उम्मीद है आज पहला डोज़ लग जाएगा."
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक करीब 1.90 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है जो कुल आबादी का 25.2 फीसदी है. इस बीच, बंगाल में संक्रमितों और मौतों की तादाद भी तेजी से कम हो रही है. इसके साथ पाजिटिविटी रेट भी दो महीने में पहली बार घट कर 4.12 फीसदी हो गई है.
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नीरज सहाय, पटना से
बिहार सरकार ने दावा किया है कि आगामी छह महीनों में छह करोड़ लोगों को कोरोना टीके की डोज़ दे दी जायेगी. इसके लिए सोमवार शाम को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार टीकाकरण अभियान की शुरुआत करेंगे. अभियान शुरू होने के पहले पटना विमेंस कॉलेज के टीकाकरण केंद्र पर दोपहर एक बजे तक लगभग 150 लोगों ने कोवीशील्ड और कोवैक्सीन का पहला और दूसरा डोज़ लिया. बैलून और बैनरों से पटे टीकाकरण केन्द्रों पर धीरे- धीरे लोगों का आना दिन भर जारी है.
केंद्र के कार्यपालक सहायक अभय कुमार ने बताया, "शाम चार बजे तक डोज़ लेने वालों की संख्या 350 हो जाने की संभावना है. अमूमन इतने लोग ही हर दिन आ रहे हैं. इस बार 18+ आयु वर्ग वाले युवाओं की संख्या ज़्यादा है क्यूंकि जिलाधिकारी के आदेश के बाद 11 जून से ऑन- स्पॉट रजिस्ट्रेशन शुरू कर दी गयी है." वहीँ वैक्सीन की पहली डोज़ ले चुके 26 साल के अभिषेक कुमार ने बताया कि "घर में सबों ने टीका ले लिया है. अप्रैल- मई महीने में काफ़ी डर गया था. अब थोड़ी राहत है ". केंद्र पर मिली 34 साल की संगीता कुमारी ने कहा कि " पहले भी डोज़ लेने आई थी, लेकिन भीड़ देखकर लौट गयी. इस बार तो तुरंत वैक्सीन लग गया ".
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में अब तक 1.36 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है. इनमें से 1.16 करोड़ लोगों को पहली डोज़ और 20.48 लाख लोगों को दोनों डोज़ दी जा चुकी है.
राजस्थान सरकार के बचेंगे तीन हज़ार करोड़ रुपएमोहर सिंह मीणा, जयपुर से
18 से 44 वर्ष के लोगों का राजस्थान में एक मई से ही निशुल्क कोविड-19 का टीकाकरण किया जा रहा है. इस आयु सीमा के राज्य में 3 करोड़ 75 लाख लोगों के टीकाकरण का ख़र्च राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने वहन करने का फ़ैसला अप्रेल में ही कर लिया था, इसके लिए राज्य पर तीन हज़ार करोड़ का भार पड़ता.
लेकिन, अब केंद्र सरकार की 18 से 44 साल के लोगों को निशुल्क टीकाकरण की घोषणा से राजस्थान सरकार के तीन हज़ार करोड़ रुपए बचेंगे जिन्हें जनहित कार्यों में ख़र्च किया जाएगा.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 22 अप्रेल 2021 को प्रधनमंत्री को पत्र लिख कर 18 से 44 साल के लोगों को निशुल्क टीका लगाने की मांग की थी, लेकिन तब इस पर केंद्र सरकार ने कोई फ़ैसला नहीं लिया था.
केंद्र की घोषणा के बाद राजस्थान में 21 जून से शुरू हुए 18 से 44 साल के लोगों के निशुल्क टीकाकरण से खासा प्रभाव देखने को नहीं मिला. क्योंकि राज्य में पहले से ही निशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है.
राज्य में पहले से ही जारी निशुल्क टीकाकरण के कारण यहां युवाओं पर केंद्र सरकार के फ़ैसले का ख़ास प्रभाव नहीं है. राजधानी जयपुर में 85 केंद्रों पर टीकाकरण किया जा रहा है. हालांकि, अधिकतर केंद्रों पर ज़रूरत से कम डोज़ पहुंचने की शिकायत मिल रही है.
गांधी नगर के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के नर्सिंग अधिकारी लोकेश मीणा का कहना है, "सुबह 9 बजे से टीकाकरण शुरू होता है, लेकिन इससे पहले ही लोग टीका लगवाने के लिए केंद्रों पर पहुंच रहे हैं. लोगों में टीकाकरण को लेकर खासा उत्साह नज़र आ रहा है. लेकिन, डोज़ कम मिलने से समस्या हो रही है.
इसी टीकाकरण केंद्र की डॉक्टर साक्षी ग्रोवर बताती हैं, "रोज़ टीकाकरण केंद्र बदलते हैं और इसकी जानकारी भी समय से नहीं मिलती है. यह बड़ी समस्या बनी हुई है. केंद्र पर आने वाले लोगों को टीका लगाया रहे हैं."
युवाओं का कहना है कि वह एक महीने से वह टीका लगवाने के इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन कभी स्लॉट नहीं मिला तो कभी डोज़ नहीं होने से उनका इंतेज़ार बढ़ता गया.
जयपुर के 21 वर्षीय जितेंद्र कुमार, 28 वर्षीय रामसिंह सामोता ने आज टीके का पहला डोज़ लगवाया है. उनका कहना है कि वह लंबे समय से टीका लगवाने का इंतज़ार कर रहे थे.
राज्य में अब तक दो करोड़ आठ लाख लोगों को टीका लगाया जा चुका है. इनमें 1.74 करोड़ को पहली और 33.88 लाख लोगों को दूसरी डोज़ लगाई जा चुकी है.
कश्मीर में कोवैक्सीन की दूसरी डोज़ के लिए कम भीड़

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माजिद जहांगीर, कश्मीर से बीबीसी हिंदी के लिए
कश्मीर के सौरा इलाके में शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेसेज़ (स्कीम्स) के मैटरनिटी अस्पताल के कोविड सेंटर में सोमवार को दोपहर डेढ़ बजे तक कुल 19 लोगों ने कोविड वैक्सीन ली थी.
हालाँकि , जिस समय हम अस्पताल में गए उस समय वैक्सीन सेंटर में सन्नाटा था और सिर्फ़ डॉक्टर और उनके सहायक मौजूद थे. सेंटर में मौजूद डॉक्टर आसिया ने बताया कि हर दिन सौ से डैड सौ स्लॉट्स कोवैक्सीन की दूसरे डोज़ के लिए खुली हैं. उनका कहना था कि लोग इसलिए कम आ रहे हैं क्योंकि अस्सी फ़ीसद लोग पहले ही कोवैक्सीन की पहली डोज़ ली है.
असमः बिना स्लॉट बुक किए 18 साल से ऊपर के लोग लेने पहुंचे फ्री वैक्सीन
दिलीप कुमार शर्मा, डिब्रूगढ़ से बीबीसी हिंदी के लिए
असम के डिब्रूगढ़ शहर में मौजूद मारवाड़ी आरोग्य भवन अस्पताल में सरकार की तरफ से दी जा रही फ्री वैक्सीन लेने पहुंची 35 साल की मामोनी भोर ने बताया,"कोरोना की वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की बातें सुनने को मिल रही थी, इसलिए वैक्सीन लगाने को लेकर थोड़ी दुविधा में थी. इसके अलावा पंजीयन करने के बाद भी स्लॉट बुक नहीं कर पा रही थी. लेकिन फिर जब सुना कि सरकार 21 जून से 18 साल से ऊपर के लोगों को बिना स्लॉट बुक किए फ्री वैक्सीन देगी तो फिर हम लोगों ने मन बना लिया. मैंने और मेरी 18 साल की बेटी ने आज कोविशील्ड की पहली डोज़ ले ली है."
38 साल के अरिजीत रॉय ने भी आज वैक्सीन की पहली डोज़ लगवाई है. इतने विलंब से वैक्सीन लेने को लेकर वह कहते हैं, "मुझे वैक्सीन लेने को लेकर कोई संदेह नहीं था. लेकिन वैक्सीन मिलना काफ़ी मुश्किल हो गया था. दरअसल मैं काम के सिलसिले में अरुणाचल प्रदेश में अकेला रहता हूं और लॉकडाउन भी चल रहा है. इसलिए वैक्सीन नहीं ले पा रहा था. इसलिए आज कोविशील्ड ही ले ली. क्योंकि अब तो सरकार ने वैक्सीन फ्री भी कर दी है.'
चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत चल रहे मारवाड़ी आरोग्य भवन अस्पताल के मैनेजर बिस्वजीत डे ने बीबीसी से कहा,"राज्य सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हमारे अस्पताल में शुरू से कोरोना वैक्सीन दी जा रही है. लेकिन 23 मई के बाद लोगों का वैक्सीन लेना कम हो गया था. इसकी एक बड़ी वजह थी कि वैक्सीन लेने आने वालों को कोरोना टेस्ट करवाना पड़ता था. लेकिन आज से कोरोना टेस्ट को अनिवार्य नहीं रखा गया है. साथ ही 18 साल से ऊपर वाले लोगों को स्लॉट बुक करने की ज़रूरत भी नहीं है."

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बढ़ाया रोज़ाना टीके का लक्ष्यअनंत झणाणे, लखनऊ से
उत्तर प्रदेश सरकारन ने सोमवार से महा मुफ़्त वैक्सीनेशन अभियान शुरू किया है. इसमें लक्ष्य रखा गया है छह लाख टीका प्रति दिन का.
इस अभियान की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने 5 कालिदास मार्ग वाले सरकारी निवास के पास स्थित लखनऊ के सिविल अस्पताल में खुद तैयारियों का जायज़ा लेने पहुंचे और स्वस्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों से जानकरी लेते नज़र आए.
उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव चंद महीने दूर हैं और कोविड के ख़िलाफ़ जंग में सरकार अब पूरी ताक़त झोंकती नज़र आ रही हैं. जून के पहले बीस दिनों में सरकार औसतन 3.55 लाख वैक्सीन के डोज़ लगा रही है, इसे अब बढ़ा कर सरकार ने छह लाख करने का लक्ष्य रखा है.
रविवार तक के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के लगभग ढाई करोड़ से ज़्यादा (2,50,83, 802) लोगों को एक ख़ुराक मिल चुकी है, यानी राज्य की 23 करोड़ जनसंख्या में 10 प्रतिशत से ज़्यादा लोगों को एक डोज़ मिल चुकी है.
वहीं महज़ 39 लाख 80 हज़ार लोगों को ही वैक्सीन के दो डोज़ लग पाए हैं। शहरों में भले ही योगी सरकार मिशन मोड में दिखे लेकिन सबसे बड़ी चुनौती उन्हें ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रही है जहाँ पर अब भी टीकाकरण के दुष्प्रचार की वजह से लोगों में झिझक है.
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मध्य प्रदेश में एक दिन में 14 लाख 71 हज़ार लोगों को टीका शुरैह नियाज़ी, भोपाल से
मध्यप्रदेश में सोमवार को कोरोना टीकाकरण महाअभियान में 14 लाख 71 हज़ार लोगों को टीका लगाया गया. प्रदेश में 7 हज़ार सेंटर पर यह टीके लगाये गये. भोपाल सहित तमाम शहरों में टीके लगाने के लिये व्यवस्था की गई थी. अकेले राजधानी भोपाल में ही 1.60 लाख लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था.
भोपाल सहित अलग अलग शहरों में वैक्सीन लगाने वाले लोगों के लिये कई तरह के आफ़र दिये गये थे. भोपाल ज़िला प्रशासन सभी सेंटर पर वैक्सीन लगवाने वालों के मोबाइल नंबर पर विशेष ड्रा निकालने वाली है.
इसके अलावा भोपाल में 15 रेस्टोरेंट में खाने पर विशेष छूट दी गई है. इंदौर में वैक्सीन लगाने वालों को पौधे, चाय नाश्ता की व्यवस्था की गई थी.
हर शहर में अलग अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी सुबह से टीकाकरण अभियान में लग थे. कई जगहों पर लंबी लंबी लाइनें देखी गई जिसकी वजह से लोगों को टीका लगवाने के लिये एक एक घंटे से भी ज्यादा का इंतज़ार करना पड़ा.
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