मुस्लिम बुज़ुर्ग के वायरल वीडियो मामले में ट्विटर और पत्रकारों पर मुक़दमा, पुलिस जाँच जारी

बुजुर्ग समद सैफी

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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में एक मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई के मामले में ट्विटर और कई पत्रकारों पर एफ़आईआर करने के बाद यूपी पुलिस ने कहा है कि अभी मामले की जाँच चल रही है.

जाँच अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्र ने बीबीसी को बताया, "अभी मामले की जाँच जारी है. और एफ़आईआर भी दर्ज की जा सकती है. वीडियो एडिट करने वाले व्यक्ति और वीडियो वायरल करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया जाएगा. झूठा बयान देने पर भी मुक़दमा दर्ज किया जा सकता है."

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मंगलवार को दर्ज मुक़दमे में ट्विटर, ट्विटर कम्यूनिकेसंश इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर, पत्रकार राना अय्यूब, समाचार वेब पोर्टल द वायर, पत्रकार सबा नक़वी, कांग्रेस नेता मस्कूर उस्मानी, कांग्रेस नेता सलमान निज़ामी और कांग्रेस नेता डॉ. शमा मोहम्मद को अभियुक्त बनाया गया है.

ये मुक़दमा एक एडिटेड वीडियो को वायरल करने के संबंध में दर्ज किया गया है. इस वीडियो में पीड़ित बुजुर्ग की पिटाई होती दिख रही है.

पुलिस ने ये एफ़आईआर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153, 153ए, 295ए, 505, 120बी और 34 के तहत की है. पुलिस इंस्पेक्टर नरेश सिंह की शिकायत पर ये मुक़दमा दर्ज किया गया है.

वहीं ट्विटर का कहना है कि अभी उसे इस बारे में जानकारी नहीं है. भारत में ट्विटर की एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "ट्विटर आपराधिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करता है. अभी हमें इस बारे में जानकारी नहीं है."

एफ़आईआर की कॉपी

एफ़आईआर

एफ़आईआर में शिकायतकर्ता पुलिस अधिकारी की तरफ़ से कहा गया है, "उक्त लोगों ने घटना की सत्यता को जाँचे बिना घटना को सांप्रदायिक रंग दे दिया और लोक शांति को अस्त-व्यस्त करने और धार्मिक समूहों के बीच विभाजन के उद्देश्य से वीडियो प्रचारित प्रसारित किया गया."

पुलिस इस वीडियो को वायरल किए जाने के पीछे आपराधिक षडयंत्र की भी जाँच कर रही है.

ट्विटर एक सोशल मीडिया कंपनी है, जिसे आईटी एक्ट के तहत भारत में क़ानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्राप्त थी. लेकिन भारतीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ भारत सरकार ने ट्विटर से सुरक्षा वापस ले ली है.

सरकार ने नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में ग्रीवांस अधिकारी नियुक्त करने के लिए कहा था. सरकार का तर्क है कि अभी तक ट्विटर ने ऐसा नहीं किया है.

हालाँकि ट्विटर का कहना है कि उसे इस बारे में भारत सरकार की तरफ़ से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है. ट्विटर की प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा है, "अभी इस संबंध में हमें भारत सरकार की तरफ़ से कोई नोटिस नहीं मिला है. ट्विटर भारत में कंप्लायेंस अधिकारी नियुक्त कर चुका है."

आईटी एक्ट के तहत मिली सुरक्षा हटने के बाद ट्विटर का इंटरमीडियरी प्लेटफ़ॉर्म होने का दर्जा समाप्त हो जाएगा और फिर ट्विटर पर प्रकाशित हर सामग्री के लिए उसकी आपराधिक ज़िम्मेदारी तय की जा सकेगी.

एफ़आईआर में यूपी पुलिस की तरफ़ से कहा गया है कि ट्विटर से संबंधित वीडियो हटाने को कहा गया था, लेकिन इस दिशा में कंपनी ने कोई क़दम नहीं उठाया.

वहीं भारत सरकार के सूचना प्राद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने ट्विटर पर जारी एक बयान में कहा है कि ट्विटर को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त मौक़े दिए गए थे, लेकिन ट्विटर ने अभी तक सरकार के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया है. ये दिशानिर्देश 26 मई को प्रभावी हो गए थे.

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रविशंकर प्रसाद ने कहा है, "भारत की संस्कृति उसके विशाल भूगोल की तरह भिन्न है. कई मामलों में सोशल मीडिया पर प्रसार की वजह से छोटी सी चिनगारी से आग लगा सकती है, ख़ासकर फ़ेक न्यूज़ के ख़तरे के कारण. इंटरमीडियरी गाइडलाइंस लाने की एक वजह ये भी थी."

उत्तर प्रदेश की घटना का ज़िक्र करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, "यूपी में जो हुआ है वह फ़र्ज़ी ख़बरों से लड़ने में ट्विटर की मनमानी का उदाहरण है. ट्विटर अपने फ़ैक्ट चैक तंत्र के बारे में अति उत्साही रहा है, लेकिन यह यूपी जैसे कई मामलों में कार्रवाई करने में विफल रहा है और ग़लत सूचना से लड़ने में इसकी असंगति को दर्शाता है."

बीबीसी को दिए बयान में ट्विटर ने कहा है, "हमने एक अंतरिम अनुपालन अधिकारी नियुक्त कर लिया है, जिसकी जानकारी जल्द ही भारत सरकार को दे दी जाएगी. ट्विटर नए दिशानिर्देशों का पालन करने का पूरा प्रयास कर रहा है."

अभी तक किसी से पूछताछ नहीं

जाँच अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्र ने बीबीसी को बताया है कि वीडियो वायरल करने के संबंध में दर्ज किए गए मुकदमें में अभियुक्तों से पूछताछ की जाएगी और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें गिरफ़्तार भी किया जा सकता है.

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उन्होंने कहा कि इस मुक़दमे की सूचना अभियुक्तों को दी गई है और यूपी पुलिस की टीमें उन तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं. पत्रकारों और ट्विटर पर धार्मिक उन्माद भड़काने और आपराधिक षडयंत्र रचने का मुक़दमा दर्ज किया गया है.

हालाँकि एफ़आईआर दर्ज होने के बाद पत्रकार मोहम्मद जुबैर ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया है.

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उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "मैंने जो वीडियो पोस्ट किए थे, डिलीट कर दिए हैं. पीड़ित ने जो जय श्री राम का नारा ज़बरदस्ती लगवाने का दावा किया था, उसकी पुलिस अधिकारियों और इस मामले पर रिपोर्ट कर रहे पत्रकारों से मेरी बातचीत के आधार पर इस समय पुष्टि नहीं हो सकी है."

राना अय्यूब ने भी अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है और ट्विटर पर कहा है, "मैंने अब्दुल पर हमले के बारे में जो ट्वीट किए थे, वो एक वीडियो और कई न्यूज़ रिपोर्टों पर आधारित थे, ये रिपोर्टें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित हुई थीं."

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राना अय्यूब ने कहा, "जहाँ तक पुलिस जाँच का सवाल है, इसमें दूसरा नेरेटिव पेश किया गया है, मैं सच के सामने आने का इंतज़ार करूँगी. मैं ऐसी ख़बरें साझा करती हूँ, जो सच दिखाती हैं और इससे समाज में शांति और सौहार्द को बढ़ावा मिलता है. मैं पीड़ित को न्याय मिलने का इंतज़ार करूँगी."

गाज़ियाबाद के लोनी में हुआ क्या था?

बुजुर्ग से पिटाई के मामले में ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने तीन अभियुक्तों- परवेश गुर्जर, कल्लू और आदिल को गिरफ़्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश की जा रही है.

एक वायरल वीडियो में पीड़ित बुजुर्ग समद सैफ़ी ने दावा किया था कि उन्हें ऑटो सवार कुछ लोगों ने अगवा किया, उनकी पिटाई की, दाढ़ी काट दी और जय श्री राम का धार्मिक नारा लगाने के लिए मजबूर किया. ये घटना पाँच जून की है.

7 जून को स्थानीय समावजादी पार्टी नेता इदरीश पहलवान के साथ किए एक फ़ेसबुक लाइव वीडियो में बुजुर्ग ने कहा था कि वो पीटने वाले युवकों को नहीं जानते हैं.

बुजुर्ग की पिटाई का एक और वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक युवक बुजुर्ग की दाढ़ी काटता दिख रहा है, हालाँकि इस वीडियो में आवाज़ नहीं है.

वहीं ग़ाज़ियाबाद पुलिस का कहना है कि जाँच के बाद पता चला है कि पीड़ित बुजुर्ग मारपीट करने वाले अभियुक्तों को पहले से जानते थे.

एक बयान में गाज़ियाबाद पुलिस ने कहा है, "बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता के वायरल वीडियो के संबंध में पता चला है कि बुजुर्ग 5 जून को बुलंदशहर से बेहटा, लोनी बॉर्डर आया, जहाँ से एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य अभियुक्त परवेश गुर्जर के घर बंथला, लोनी गया था. परवेश के घर पर कुछ समय में अन्य लड़के कल्लू, पोली, आरिफ़, आदिल और मुशाहिद आ गए और परवेश के साथ मिलकर मारपीट शुरू कर दी."

पुलिस ने बयान में कहा है कि अब्दुल समद ताबीज़ बनाने का काम करते हैं और अभियुक्तों को पहले से जानते हैं और मुख्य अभियुक्त परवेश को ताबीज़ भी बना कर दिया था.

हालाँकि इस संबंध में पीड़ित बुजुर्ग से बात नहीं हो सकी है. कई प्रयासों के बाद भी उनके परिवार ने उनसे बात नहीं करवाई और बताया कि वो बीमार हैं और अलीगढ़ में इलाज करा रहे हैं. हालाँकि उनके बेटे तैय्यब सैफ़ी ने मंगलवार को फिर वही आरोप दोहराए, लेकिन धार्मिक नारे लगवाने का ज़िक्र नहीं किया.

एफ़आईआर की कॉपी

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वीडियो की जाँच

इस मामले की जाँच कर रही ग़ाज़ियाबाद पुलिस को अभी मूल वीडियो नहीं मिला है.

जाँच अधिकारी अखिलेश मिश्र ने बीबीसी को बताया, "हमारे पास अभी मूल वीडियो नहीं है, हम उसे प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं. ये वीडियो किसने एडिट किया है, ये भी अभी पता नहीं चल पाया है. जल्द ही हम मूल वीडियो और एडिट करने वाले व्यक्ति तक पहुँच जाएँगे."

जाँच अधिकारी के मुताबिक़ अभी तक पता चला है कि ये वीडियो बुजुर्ग से मारपीट करने वाले अभियुक्तों ने ही बनाया था.

समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता इदरीश पहलवान ने अब्दुल समद के साथ 7 जून को फ़ेसबुक लाइव किया था जिसमें उन्होंने अपने साथ मारपीट करने और धार्मिक नारे लगवाने के आरोप लगाए थे.

इदरीश पहलवान ने बीबीसी को बताया था कि ये मुद्दा सबसे पहले उन्होंने ही उठाया था. हालाँकि अब इदरीश पहलवान ने भी अपना फ़ोन बंद कर लिया है और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है.

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