ट्विटर को भारतीयों की चिंता है तो नियमों का पालन करना होगा: रवि शंकर प्रसाद

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भारतीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि अगर सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में काम करना है तो उन्हें यहाँ के क़ानूनों को मानना होगा.
हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार को दिये एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "भारत एक गणतंत्र है और सोशल मीडिया कंपनियाँ यहाँ आकर व्यापार करने और लाभ कमाने के लिए आज़ाद हैं. सोशल मीडिया के ज़रिए उन्होंने आम लोगों को सशक्त बनाया है लेकिन हमारा नज़रिया भी स्पष्ट है. अगर आपको यहाँ काम करना है तो यहाँ के संविधान और क़ानून को मानना होगा."
सोशल मीडिया पर लगाम लगाने और इसके ज़रिये आम लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगाम लगाने की चिंताओं के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी किये गए दिशा-निर्देश किसी व्यक्ति विशेष के ख़िलाफ़ नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "सरकार और प्रधानमंत्री की आलोचना की हम इजाज़त देते हैं लेकिन यहाँ मामला सोशल मीडिया के ग़लत इस्तेमाल का है. अगर किसी को शिक़ायत करनी है तो क्या वो किसी दूसरे देश में जाकर शिक़ायत दर्ज कराये."
"सरकार चाहती है कि सोशल मीडिया क्षेत्र की कंपनियाँ शिक़ायतों का निपटारा पंद्रह दिनों में करें और इस बाबत सरकार को महीने में एक रिपोर्ट सौंपे; सरकार के नियमों का पालन करने के लिए कंप्लायंस अफ़सर की नियुक्ति करें. क्या हम उनसे चाँद माँग रहे हैं?"
बातचीत के दौरान उन्होंने व्हॉट्सऐप के यूज़र्स को भरोसा दिलाया कि आम लोगों को उनके चैट ट्रेस होने को लेकर कोई चिंता नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "हम उन संदेशों की जानकारी माँगते हैं जो पहले ही पोस्ट किये जा चुके हैं और सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं. ऐसे संदेश जो दंगे फैला सकते हैं, जो मॉब लिंचिग से जुड़े हो सकते हैं, जो महिलाओं को ग़लत तरीक़े से पेश करते हों, बच्चे के शोषण से जुड़े हों या फिर जो देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करते हों. "
उन्होंने सवाल किया, "अगर कोई महिला सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही अपनी मॉर्फ्ड तस्वीर के बारे में शिकायत करना चाहती हो, या कोई मां ये शिकायत करना चाहे कि उनकी बेटी का एक्स-बॉयफ्रेंड उसकी ग़लत तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा है तो क्या वो अमेरिकी जा कर शिकायत करेगें?"
उन्होंने कहा "सरकार जानना चाहती है कि इस तरह के संदेशों की शुरूआत कहाँ से हुई और कहीं ऐसा तो नहीं कि ये संदेश सबसे पहले सीमापार से भेजे गये हों."
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हाल ही में ट्विटर ने अपने दफ़्तर पर पुलिस जाँच को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी को ख़तरा हो सकता है.
इसके उत्तर में क़ानून मंत्री ने कहा कि भारत में लाभ कमाने के लिए काम कर रही किसी निजी अमेरिकी कंपनी को गणतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लेक्चर देने की ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा, "अगर उन्हें वाकई चिंता है तो वो अपने यूज़र्स की शिक़ायतें सुनने के लिए पहले एक उचित फ़ोरम तो बनायें. पुलिस ने पहले ही बता दिया है कि क़ानून के तहत जाँच में सहयोग करना हर व्यक्ति और संस्थान का फ़र्ज़ है. पुलिस ने उन्हें पेश होने के लिए कहा था जिसके जवाब में उन्हें कहा गया कि अमेरिका जाइये. इसलिए पुलिस उन्हें समन देने गई थी. ट्विटर या फिर उसके कर्मचारियों को डरने की कोई ज़रूरत नहीं है."

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ट्विटर को मोदी सरकार का आख़िरी नोटिस, 'सद्भावना दिखाई, अब अंजाम भुगतना होगा'
इससे पहले आईटी ऐक्ट के तहत नये नियमों का पालन ना करने को लेकर भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर को आख़िरी नोटिस भेजा था.
26 और 28 मई को भी सरकार ने इसी मसले पर ट्विटर को नोटिस भेजा था.
ट्विटर की ओर से इन नोटिसों के जवाब भी दिए गए थे, जिन्हें मंत्रालय ने संतोषजनक नहीं पाया.
5 जून को भेजे गये नोटिस में लिखा था कि "इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इस बात से निराशा हुई है कि 28 मई और 2 जून को मंत्रालय को दिये अपने जवाब में ना तो आपने मंत्रालय की ओर से माँगा गया स्पष्टीकरण दिया और ना ही नियमों को मानने के प्रति कोई प्रतिबद्धता दिखाई."
"आपके जवाब से स्पष्ट है कि ट्विटर ने अभी तक नये नियमों के आधार पर अनिवार्य चीफ़ कम्प्लायंस अफ़सर के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. साथ ही, आपके द्वारा नामित रेज़िडेंट ग्रीवेन्स ऑफ़िसर और नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन भारत में ट्विटर के कर्मचारी नहीं हैं. आपके द्वारा दिया गया ट्विटर के दफ़्तर का पता भी एक भारतीय लॉ फ़र्म का है. ये भी नियमों के ख़िलाफ़ है."
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नोटिस में क्या था?
नोटिस में लिखा था कि "महत्वपूर्ण सोशल मीडिया संस्थानों पर लागू होने वाले नये नियम 26 मई 2021 से प्रभाव में आ गए हैं और इन्हें लागू हुए एक हफ़्ता बीत चुका है, लेकिन ट्विटर ने इन नियमों पर अमल करने से इनकार किया है. इन नियमों पर अमल ना करने के नतीजे ट्विटर को भुगतने होंगे."
"नोटिस के मुताबिक़, अगर ट्विटर इन नियमों का पालन नहीं करता है तो आईटी ऐक्ट के सेक्शन-79 के आधार पर उसे इंटरमीडियरी (मध्यवर्ती) प्लेटफॉर्म होने की वजह से मिलनेवाली छूट ख़त्म कर दी जाएगी. नियमावली सात में इसका स्पष्ट ज़िक्र भी किया गया है."
इस नोटिस में भारत ने ट्विटर के संचालन के इतिहास का भी ज़िक्र किया है जिसमें लिखा है कि "इन नियमों पर अमल ना करना दिखाता है कि ट्विटर अपने मंच पर भारतीयों को सुरक्षित माहौल मुहैया कराने के प्रति गंभीर नहीं है. दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत अमेरिका के अलावा उन शुरुआती देशों में से एक रहा है, जहाँ ट्विटर को उत्साहजनक तरीक़े से मौके दिए गए."
"भारत में एक दशक से ज़्यादा वक़्त तक संचालन के बाद इस बात पर भरोसा करना मुश्किल है कि ट्विटर ऐसा तंत्र बनाने से इनकार कर रहा है जो इस मंच पर भारतीयों की समस्याओं को तयशुदा वक़्त में पारदर्शी तरीक़े और ईमानदारी से सुलझाने का मौका देगा. ऐसा तंत्र तैयार करने में सक्रिय भूमिका अदा करना तो दूर, ट्विटर क़ानून में ऐसे प्रावधान होने के बावजूद इन पर अमल करने से इनकार कर रहा है."
नोटिस के अंत में चेतावनी दी गई कि "26 मई 2021 से लागू होने वाले नियमों की नाफ़रमानी के नतीजे ट्विटर को भुगतने होंगे. हालांकि, सद्भावना के तहत ट्विटर को ये अंतिम नोटिस दिया जा रहा है कि वो आईटी ऐक्ट, 2000 के सेक्शन 79 के तहत नियमों का तत्काल प्रभाव से पालन करे. ऐसा ना होने पर आईटी ऐक्ट और भारत के अन्य दंडात्मक क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी."

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ब्लू टिक पर हल्ला
इसके अलावा शनिवार सुबह भारत के उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर-संघचालक मोहन भागवत के निजी ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक हट जाने को लेकर हल्ला रहा.
ब्लू टिक एक वेरिफ़ाई हो चुके ट्विटर अकाउंट का निशान होता है. नायडू के अकाउंट से ब्लू टिक हटने के बाद अंदेशा जताया गया कि सरकार के साथ जारी आईटी क़ानून विवाद को लेकर ट्विटर ने कोई कार्रवाई की है. लेकिन बीबीसी से बातचीत में ट्विटर के एक प्रवक्ता ने कहा कि जुलाई 2020 के बाद से कोई ट्वीट ना करने के कारण नायडू के ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक अपने आप हट गया था.
शनिवार को ही नायडू और भागवत के हैंडल पर ब्लू टिक दोबारा दिखने लगा था.
ट्विटर की पॉलिसी के मुताबिक़, किसी अकाउंट के काफ़ी समय सक्रिय ना रहने पर ऐसा होता है.
मोहन भागवत ने मई 2019 को ट्विटर जॉइन करने के बाद से अब तक कोई ट्वीट नहीं किया है.

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पहले भी हुए टकराव
पिछले कुछ महीनों में भारत सरकार और ट्विटर के बीच कई मौक़ों पर टकराव हुआ है. फ़रवरी 2021 में ट्विटर ने कहा था कि केंद्र सरकार ने उन्हें आईटी एक्ट के सेक्शन-69ए के तहत कई ट्विटर अकाउंट्स को निलंबित करने का अनुरोध किया था.
इसके बाद ट्विटर ने कुछ अकाउंट ब्लॉक किए थे और कुछ पर पाबंदियाँ लगाई थीं, लेकिन बाद में कहा था कि "केंद्र सरकार ने जिस आधार पर ट्विटर अकाउंट्स बंद करने को कहा, वो भारतीय क़ानूनों के अनुरूप नहीं हैं."
इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर को निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहने का एक नोटिस थमाया था.
24 मई को दिल्ली पुलिस की एक टीम 'टूलकिट मैनिपुलेशन मीडिया' मामले की जाँच के सिलसिले में ट्विटर इंडिया के कई दफ़्तरों में पहुँची थी. इसी दिन दिल्ली पुलिस ने इन मामलों को लेकर ट्विटर इंडिया को एक नोटिस भेजा था.
ये मामला बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा के आरोप से जुड़ा है, जिसमें पात्रा ने कांग्रेस पर टूलकिट इस्तेमाल करके बीजेपी और देश की छवि ख़राब करने का आरोप लगाया था.
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टूलकिट विवाद
ट्विटर ने पात्रा की ओर से टूलकिट की तस्वीरें दिखाने वाले ट्वीट को 'मैनिपुलेटेड मीडिया' की श्रेणी में रखा था.
मैनिपुलेटेड मीडिया मतलब ऐसी तस्वीर, वीडियो या स्क्रीनशॉट जिसके ज़रिए किए जा रहे दावों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह हो और इसके मूल रूप को एडिट किया गया हो या उससे छेड़छाड़ की गई हो.
पुलिस की कार्रवाई के तुरंत बाद तो ट्विटर की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी, लेकिन 27 मई को ट्विटर ने प्रतिक्रिया देते हुए भारत में अपने स्टाफ़ की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. ट्विटर की आपत्तियों के जवाब में आईटी मंत्रालय ने ट्विटर पर जमकर हमला बोला.
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, "सरकार ट्विटर की ओर से किए गए दावों को पुरज़ोर तरीक़े से ख़ारिज करती है. भारत में बोलने की आज़ादी और लोकतांत्रिक तरीक़ों को मानने की एक शानदार परंपरा रही है. ट्विटर का बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपने शर्तें थोपने की कोशिश है."

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मौजूदा नोटिस का मक़सद
25 फ़रवरी को भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 को अधिसूचित किया.
नये नियमों के अनुसार सोशल मीडिया सहित सभी मध्यस्थों को ड्यू डिलिजेंस या उचित सावधानी का पालन करना होगा. अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें क़ानून के द्वारा दी गईं सुरक्षाएं नहीं मिलेंगी. इन नियमों के अनुसार ग़ैर-क़ानूनी जानकारी को हटाने की ज़िम्मेदारी भी मध्यस्थों की होगी.
जिन सोशल मीडिया मध्यस्थों के 50 लाख से ज़्यादा उपभोक्ता हैं उनके लिए सरकार ने कहा कि उन्हें एक मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी जो अधिनियम और नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए ज़िम्मेदार होगा.
साथ ही इन बड़े मध्यस्थों को क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ चौबीसों घंटे समन्वय के लिए एक नोडल संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी जो शिकायत निवारण तंत्र के अंतर्गत कार्यों को करेगा.
इन पदों पर उन्हीं लोगों की नियुक्ति होगी जो भारत के निवासी हों. साथ ही प्राप्त शिकायतों के विवरण और शिकायतों पर की गई कार्रवाई के साथ-साथ इन सोशल मीडिया मध्यस्थों द्वारा सक्रिय रूप से हटाई गई सामग्री के विवरण का उल्लेख करते हुए एक मासिक अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी.
सरकार ने इन नियमों को लागू करने के लिए प्लैटफ़ॉर्म्स को 26 मई तक का वक़्त दिया था. सरकार के मुताबिक़ ट्विटर ने 26 मई तक सभी आदेशों का पालन नहीं किया है.
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