ट्विटर सबसे बड़े लोकतंत्र पर शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा: भारत सरकार

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लाइव कवरेज

  1. मोदी सरकार शर्म से झुकाए सर: कांग्रेस

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    कांग्रेस ने ट्विटर विवाद में आईटी मंत्रालय की ओर से जारी बयान को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस ने बयान के एक हिस्से को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है, “मोदी सरकार को अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए.”

    दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद ट्विटर की ओर से किए गए दावे पर आईटी मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी किया. कांग्रेस ने बयान के जिस हिस्से को लेकर सरकार पर हमला बोला है, उसमें ‘भारत-चीन विवाद’ का ज़िक्र है.

    मंत्रालय के बयान में कहा गया है, “एक ऐसे वक़्त जब भारत और चीन दोतरफ़ा बातचीत के ज़रिए सीमा मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान में जुटे थे तब ट्विटर ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कुछ हिस्से को चीन के हिस्से के तौर पर दिखाया.”

    कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ‘सीमा से जुड़े मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान’ को रेखांकित किया है और इसे लेकर सरकार पर हमला किया है.

    सुरजेवाला ने ट्विटर पर लिखा है, “मोदी सरकार को अपना सिर शर्म से झुका लेना चाहिए! ये शहीदों के नाम पर वोट माँगती है लेकिन राजनीतिक फ़ायदे के लिए उन्हें भुला देती है. लद्दाख में चीन के हमले के वक़्त हमारे क्षेत्र की हिफ़ाज़त करते हुए 22 जवानों ने अपनी जान क़ुर्बान की... लेकिन भारत सरकार को लगता है कि ये ‘शांतिपूर्ण समाधान’ था.”

    बीते साल जून में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ था. इसमें भारत के 20 जवानों की मौत हो गई थी. तब चीन ने अपनी सेना को हुए नुक़सान की जानकारी नहीं दी थी लेकिन इस साल फ़रवरी में चीन ने बताया था कि इस संघर्ष में उसके पाँच सैनिक मारे गए थे.

  2. पाकिस्तान: डाकुओं का वो हथियार, जिसके सामने पुलिस भी लाचार

  3. ट्विटर सबसे बड़े लोकतंत्र पर शर्तें थोपने की कोशिश में: आईटी मंत्रालय

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    ट्विटर के साथ जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने उसकी ‘आशंका और आपत्तियों को ख़ारिज’ किया है.

    आईटी मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “सरकार ट्विटर की ओर से किए गए दावों को पुरज़ोर तरीक़े से ख़ारिज करती है. भारत में बोलने की आज़ादी और लोकतांत्रिक तरीक़ों को मानने की एक शानदार परंपरा रही है.”

    इस बयान में आगे कहा गया है, “ट्विटर का बयान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपने शर्तें थोपने की कोशिश है.”

    सरकार ने ये भी कहा है कि भारत में ट्विटर इस्तेमाल करने वाले लोगों का बड़ा समूह है. भारत से उसकी बड़ी कमाई भी होती है लेकिन वो यहां शिकायतें दूर करने के लिए अधिकारी नियुक्त नहीं करना चाहते हैं और न ही ऐसा तंत्र बनाना चाहते हैं.

    इसके पहले ट्विटर ने कहा था कि वो भारत में ‘अपने स्टाफ़ की सुरक्षा को लेकर चिंतित’ है.

    सरकार ने कहा है, “ट्विटर समेत सोशल मीडिया फ़र्म के प्रतिनिधि भारत में सुरक्षित हैं और हमेशा रहेंगे.”

    इससे पहले ट्विटर ने गुरुवार सुबह एक बयान जारी कर कहा था, "बीजेपी नेताओं के कुछ ट्वीट्स पर 'मैनिपुलेटेड मीडिया' का टैग लगाने के जवाब में पुलिस के ज़रिए डराने-धमकाने की रणनीति अपनाने के कारण वो चिंतित है.''

    विवाद की शुरुआत

    भारत में सोशल मीडिया के नए नियमों को लेकर सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे फ़ेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप और गूगल से विवाद चल ही रहा है, लेकिन ट्विटर और भारत सरकार में एक और मामले को लेकर विवाद पैदा हो गया है.

    इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी जब बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की छवि ख़राब करने के लिए टूलकिट बनाया है.

    पात्रा के इस ट्विट को बीजेपी अध्यक्ष समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी रीट्वीट किया था.

    कांग्रेस ने इसे फ़र्ज़ी क़रार दिया था और ट्विटर ने इस पर 'मैनिपुलेटेड' मीडिया (यानी ऐसी पोस्ट जो तथ्यात्मक तौर पर ग़लत हो) का टैग लगा दिया था.

    संबित पात्रा

    इमेज स्रोत, Getty Images

    कांग्रेस ने पात्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज कराई है. केंद्र सरकार ने ट्विटर से मैनिपुलेटेड टैग को हटाने के लिए भी कहा था लेकिन ट्विटर ने अभी तक नहीं हटाया है.

    मामला और ज़्यादा बढ़ गया जब दिल्ली पुलिस की एक टीम ट्विटर इंडिया के दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ़्तर पहुँची.

    मीडिया में ख़बरें आने लगीं कि पुलिस ने दफ़्तर पर छापा मारा है लेकिन बाद में पुलिस ने सफ़ाई दी कि उनकी टीम केवल ट्विटर के दफ़्तर में नोटिस देने गई थी.

    पुलिस की कार्रवाई के तुरंत बाद तो ट्विटर की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी लेकिन गुरुवार को ट्विटर ने भारत सरकार के सोशल मीडिया नियमों के जवाब में अपनी प्रतिक्रिया दी और उसी में पुलिस की कार्रवाई का ज़िक्र किया.

    बाद में भारत सरकार ने ट्विटर पर जमकर हमला किया.

    दिल्ली पुलिस ने भी गुरुवार को कहा कि ट्विटर के अधिकारी उन्हें मामले की जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.

  4. कार्टून: सेलिब्रेशन तो बनता है

  5. ब्लैक फ़ंगस को दिल्ली सरकार ने महामारी घोषित किया

    दिल्ली में ब्लैक फ़ंगस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया गया है.

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    दिल्ली के राज्यपाल ने एपिडेमिक एक्ट के तहत गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी की.

    दिल्ली में ब्लैक फ़ंगस या म्यूकोरमाइकोसिस के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

    दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ब्लैक फ़ंगस इंफ़ेक्शन यानी म्यूकॉरमाइकोसिस बीमारी का सबसे पहला मामला दर्ज किया गया था.

    बाद में दिल्ली के मैक्स, अपोलो, और फ़ोर्टिस जैसे कई अस्पतालों में भी ब्लैक फ़ंगस के मरीज़ पहुँचना शुरू हो गए हैं, जिनमें से कई मरीज़ों की मौत भी हो चुकी है.

    सरकार के अनुसार अब तक दिल्ली में छह सौ से ज़्यादा मामले आ चुके हैं.

    सर गंगाराम अस्पताल से जुड़े वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मनीष मुंजाल मानते हैं कि ये एक गंभीर बीमारी ज़रूर है, लेकिन इससे डरने की ज़रूरत नहीं है.

    वे कहते हैं, “ब्लैक फ़ंगस या म्यूकॉरमाइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं है. ये नाक, कान और गले ही नहीं, शरीर के अन्य अंगों को भी नुक़सान पहुँचाती है. लेकिन बीते कुछ दिनों से ये बीमारी एक बड़ा रूप अख़्तियार कर रही है, क्योंकि ये बीमारी इम्यून सिस्टम यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने की वजह से होती है. पहले हम ये बीमारी कीमोथेरेपी, अनियंत्रित डायबिटीज़, ट्रांसप्लांट मरीज़ों, और बुज़ुर्ग लोगों में देखते थे. लेकिन कोविड के बाद को-मॉर्बिडिटी और ज़्यादा स्टेरॉइड लेने वाले मरीज़ों में भी ये बीमारी नज़र आने लगी है.”

    ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन अभी तक बाज़ार में 7000 रुपए में मिलते हैं लेकिन ये इंजेक्शन अब सिर्फ़ 1200 रुपए में मिलेगा.

    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस इंजेक्शन को लॉन्च किया है.

  6. सरकार बनाम सोशल मीडिया: नए निर्देश असहमति और आलोचना दबाने की कोशिश हैं?

  7. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए संदीप सोनी से.

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  8. कोरोना वैक्सीन की कमी, डर और अफ़वाह: भारत के गाँवों में टीकाकरण का हाल

  9. मशहूर यूट्यूबर गिरफ़्तार, हीलियम बैलून से कुत्ते को उड़ाने की थी कोशिश

    भारत के एक जाने-माने यूट्यूबर गौरव शर्मा को गिरफ़्तार कर लिया गया है. गौरव ने हीलियम बैलून से अपने कुत्ते को बांधकर उसे उड़ाने की कोशिश की थी.

    गौरव शर्मा ने उसका वीडियो बनाकर अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था.

    32 साल के गौरव शर्मा यूट्यूब पर काफ़ी मशहूर हैं और उनके 40 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स हैं.

    गौरव ने कहा कि उन्होंने ऐसा करते समय सुरक्षा के सारा ध्यान रखा था लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों की आपत्ति के बाद उन्होंने वो वीडियो हटा दिया था.

    लेकिन पुलिस का कहना है कि उन्होंने जानवरों के लिए काम करने वाली ग़ैर-सरकारी संस्था पीएफ़ए की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की और फिर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है.

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  10. कोरोना से हुई मौतों पर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ‘आधारहीन और झूठी’: केंद्र सरकार

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    केंद्र सरकार ने भारत में कोविड-19 की स्थिति पर न्यूयॉर्क टाइम्स में आई रिपोर्ट को ‘आधारहीन और झूठा’ बताते हुए ख़ारिज कर दिया है.

    केंद्र सरकार के मुताबिक़, “इसमें कोई सुबूत नहीं दिए गए हैं और ये पूरी तरह ग़लत तरह से लगाए गए अनुमानों पर आधारित है.”

    न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो दिन पहले एक ख़बर छापी थी और जिसमें भारत में कोविड-19 से हुई मौतों को लेकर अलग-अलग तरह से अनुमान लगाए गए थे.

    रिपोर्ट ने भारत के 24 मई 2021 तक के आधिकारिक आंकडे को सामने रखा था. इसके मुताबिक़ उस दिन तक संक्रमितों की कुल आधिकारिक संख्या दो करोड़ 69 लाख और मरने वालों की संख्या क़रीब तीन लाख सात हज़ार थी.

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में मरने वालों की सही संख्या सामने नहीं आ रही है. जो आंकड़े सामने आए हैं वो ‘कम’ हैं. अख़बार की रिपोर्ट में तीन अलग-अलग स्थितियों का ज़िक्र किया गया है.

    रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में संक्रमितों की वास्तविक संख्या 40 करोड़ से 70 करोड़ तक हो सकती है.

    पहली स्थिति में कहा गया है कि अब तक मरने वालों की संख्या कम से कम छह लाख हो सकती है.

    दूसरी स्थिति में जिसकी अख़बार के मुताबिक़ सबसे ज़्यादा संभावना है, कहा गया है कि मरने वालों की संख्या 16 लाख हो सकती है.

    अख़बार की रिपोर्ट में एक तीसरी स्थिति का भी ज़िक्र किया गया है जिसके मुताबिक़ भारत में अब तक 42 लाख लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है.

    कोरोना से मरने वालों के अलावा अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में कोरोना संक्रमितों के बारे में भी अनुमान लगाया है.

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में अब तक कम से कम 40 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं.

    अख़बार के अनुसार ज़्यादा संभावना है कि अब तक 54 क़रोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं और स्थिति अगर अत्यधिक ख़राब हुई तो इसकी बात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि भारत में अब तक कोरोना संक्रमितों की संख्या 70 करोड़ तक पहुँच गई है.

    न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया कि भारत में केसों और मरने वालों की संख्या के विश्लेषण के लिए उसने, “एक दर्जन से ज़्यादा एक्सपर्ट से बात की. बड़े पैमाने पर हुए एंटी बॉडी टेस्ट के नतीजों को ध्यान में रखा और तब देश में हुई तबाही का सही पैमाने के कई संभावित अनुमान सामने आए.”

    केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट को आधारहीन बताते हुए ख़ारिज कर दिया है.

    हालांकि, भारत में भी कई समाचार पत्रों ने अपनी रिपोर्टों में दावा किया है कि अलग-अलग शहरों और प्रदेशों में कोरोना से जितनी मौतें बताई गई हैं, मरने वालों की संख्या उनसे कहीं ज़्यादा है.

  11. रोहिंग्या 'होल्डिंग सेंटर' में कोरोना संक्रमण, 53 पॉज़िटिव

  12. अलग-अलग वैक्सीन के टीके लगाने की हो जांच: डॉक्टर पॉल, नीति आयोग के मुताबिक़ कोविड प्रोटोकाल के तहत एक ही वैक्सीन के लगने चाहिए दोनों टीके

    नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा है कि प्रोटोकॉल के तहत किसी भी व्यक्ति को एक ही कोरोना वैक्सीन की दोनों ख़ुराक मिलनी चाहिए.

    अगर किसी को अलग-अलग वैक्सीन की दो डोज़ दी गई हैं तो ये चिंता का मामला 'नहीं' है. उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर ज़िले के एक गांव से ये ख़बर सामने आई है कि कुछ लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ 'कोविशील्ड' की दी गई जबकि दूसरी डोज़ 'कोवैक्सीन' की दी गई.

    सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का ज़िला है. रिपोर्टों के मुताबिक़ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने माना है कि ऐसी ग़लती हुई है.

    इस बारे में पूछे जाने पर डॉक्टर पॉल ने कहा कि इस मामले की जाँच होनी चाहिए.

    उत्तर प्रदेश में कोरोना वैक्सीन को लेकर पहले भी लापरवाही सामने आ चुकी है. बीते दिनों शामली ज़िले में कुछ महिलाओं को कोरोना वैक्सीन की जगह एंटी रैबीज़ टीका लगाने की शिकायत सामने आई थी.

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  13. कोरोना: गंगा किनारे रेत में दबाए गए शवों को परंपरा का हिस्सा बताना कितना सही?

  14. टूलकिट मामला: ट्विटर ने कहा, भारत में स्टाफ़ की सुरक्षा को लेकर हैं चिंतित

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    माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने कहा है कि वो भारत में अपने स्टाफ़ की सुरक्षा को लेकर चिंतित है.

    टूलकिट विवाद को लेकर ट्विटर और भारत सरकार पिछले कुछ दिनों से आमने-सामने हैं.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, "ट्विटर का कहना है कि बीजेपी नेताओं के कुछ ट्वीट्स पर 'मैनिपुलेटेड मीडिया' का टैग लगाने के जवाब में पुलिस के ज़रिए डराने-धमकाने की रणनीति अपनाने के कारण वो चिंतित है.''

    बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विट कर आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की छवि ख़राब करने के लिए टूलकिट बनाया है.

    पात्रा के इस ट्विट को बीजेपी अध्यक्ष समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी रीट्विट किया था.

    कांग्रेस ने इसे फ़र्ज़ी क़रार दिया था और ट्विटर ने इस पर 'मैनिपुलेटेड' मीडिया (यानी ऐसी पोस्ट जो तथ्यात्मक तौर पर ग़लत हो) का टैग लगा दिया था.

    कांग्रेस ने संबित पात्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज कराई है.

    केंद्र सरकार ने ट्वीटर को मैन्युपुलेटेड मीडिया का टैग हटाने के लिए कहा था लेकिन ट्विटर ने अभी तक वो नहीं हटाया है.

    इस बीच सोमवार (24 मई) को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल की एक टीम ट्विटर इंडिया के दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ़्तर पहुँची थी. मीडिया में इसे छापा और तलाशी कहा जाने लगा था लेकिन बाद में पुलिस ने कहा कि उनकी टीम सिर्फ़ नोटिस देने के लिए ट्विटर के दफ़्तर गई थी.

    ट्विटर ने उस घटना पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी.

    गुरुवार को भी ट्विटर ने भारत सरकार के नए डिजिटल नियमों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार की घटनाओं का ज़िक्र किया.

    ट्विटर ने अपनी प्रतिक्रिया में दिल्ली पुलिस का सीधे तौर पर नाम भी नहीं लिया है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ट्विटर ने कहा है, "अभी, हम भारत में अपने कर्मचारियों के संबंध में हाल की घटनाओं और उन लोगों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संभावित ख़तरे से चिंतित हैं जिनकी हम सेवा करते हैं. हम, भारत और दुनिया भर में नागरिक समाज में कई लोगों के साथ, हमारी वैश्विक सेवा की शर्तों को लागू करने के साथ-साथ नए आईटी नियमों के मूल तत्वों के जवाब में पुलिस द्वारा धमकाने की रणनीति के उपयोग के संबंध में चिंतित हैं."

    नए डिजिटल नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को भारत में एक अनुपालन अधिकारी नियुक्त करने, शिकायत प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने और क़ानूनी आदेश के 36 घंटों के भीतर सामग्री को हटाने के लिए कहा गया है.

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    ट्विटर ने कहा है कि वो भारत में लागू क़ानून का पालन करने का प्रयास करेंगे, लेकिन साथ में यह भी कहा कि वो पारदर्शिता के सिद्धांतों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गोपनीयता की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध हैं.

    उन्होंने कहा कि भारत सरकार से उनकी बातचीत जारी रहेगी. ट्विटर के अनुसार सहोयागात्मक रवैया अपनाना ज़रूरी है और जनता के हितों की रक्षा करना सामूहिक ज़िम्मेदारी है.

  15. ब्रेकिंग न्यूज़, लक्षद्वीप: राहुल गांधी ने मोदी से की हस्तक्षेप की अपील

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर लक्षद्वीप के लोगों का भविष्य ख़तरे में है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की गुज़ारिश करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रफुल खोड़ा पटेल के नेतृत्व वाले प्रशासन की नीतियों के कारण यहां लोगों का भविष्य ख़तरे में है.

    पीएम को लिखी चिट्ठी में उन्होंने लिखा, "प्रशासन ने जनता के चुने प्रतिनिधियों से चर्चा किए बिना ही बड़े बदलावों का प्रस्ताव पेश किया है."

    उन्होंने लिखा कि लक्षद्वीप के लोग इन आदेशों का विरोध कर रहे हैं और पीएम को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए.

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    राहुल गांधी ने लिखा है कि विकास और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर कम अपराध वाले इस प्रदेश में विरोध की आवाज़ों को दबाने की कोशिश की जा रही है.

    उन्होंने लिखा कि प्रशासन के जारी किए नए आदेशों से ज़मीन के मालिकाना हक़ पर असर पड़ेगा, साथ ही पर्यावरण सुरक्षा को लेकर उठाए गए क़दम कमज़ोर हो जाएंगे.

    थोड़े से फ़ायदे के लिए लोगों की आजीविका और स्थायी विकास के तरीक़ों को सूली पर चढ़ाया जा रहा है.

    उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर ये सुनिश्चित करने की गुज़ारिश की है कि प्रशासन के हाल में जारी किए प्रस्ताव को वापस लिया जाए.

    प्रफुल खोड़ा पटेल

    इमेज स्रोत, TWITTER/PRAFUL PATEL

    क्या है मामला?

    लक्षद्वीप में पिछले कुछ दिनों से बीफ़ बैन, नए क़ानून, पंचायत चुनाव के नियमों में बदलाव के प्रस्ताव का विरोध हो रहा है.

    सरकार ने नए नियमों की ड्रॉफ़्ट नोटिफ़िकेशन जारी किया है. यहाँ के आम लोग, पंचायत और सांसद का कहना है कि ये नोटिफ़िकेशन, नियमों को ताक पर रखकर और बिना चुने हुए प्रतिनिधियों की सलाह के लाए गए हैं.

    इनमें बीफ़ बैन, पंचायत चुनाव में उन लोगों के लड़ने पर पाबंदी, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, लोगों की गिरफ़्तारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नए नियम शामिल हैं. ये सभी अभी ड्राफ़्ट हैं, जिन्हें अगर गृह मंत्रालय की मंज़ूरी मिल जाए, तो ये क़ानून की तरह लागू हो जाएँगे.

  16. कोरोना वैक्सीन पर केंद्र ने राज्यों को अकेला नहीं छोड़ा: नीति आयोग

    विनोद पॉल

    इमेज स्रोत, VK PAUL

    नीति आयोग ने कहा है कि कुछ राज्यों के नेता वैक्सीन को लेकर रोज़ टीवी पर आकर लोगों को गुमराह करके डरा रहे हैं जबकि उन्हें पता है कि वास्तविक हालात क्या हैं.

    वैक्सीन अभियान के लिए नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर विनोद पॉल की ओर से जारी बयान में सवाल-जवाब के रूप में बताया गया है कि केंद्र सरकार वैक्सीनेशन के लिए क्या कर रही है.

    इसमें कहा गया है कि कोविड-19 के टीकाकरण अभियान को लेकर देश में कई भ्रम फैले हुए हैं जो झूठ और आधी सच्चाई पर आधारित हैं.

    इसमें कहा गया है कि यह पूरी तरह से भ्रामक बात है कि केंद्र की ओर से राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दी जा रही है.

    नीति आयोग के मुताबिक़, “केंद्र तय दिशानिर्देशों के तहत पूरी पारदर्शिता से राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन मुहैया करवा रहा है. राज्यों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पहले ही सूचित कर दिया जा रहा है. आने वाले समय में वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ेगी और ज़्यादा सप्लाई भी हो सकेगी.”

    आगे कहा गया है, “हमारे कुछ नेताओं का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है जो वैक्सीन को लेकर तथ्यों की पूरी जानकारी होने के बावजूद रोज़ टीवी पर आते हैं और लोगों के बीच डर फैलाते हैं. यह राजनीति करने का समय नहीं है. हम सभी को इस युद्ध में संगठित होना होगा.”

    ‘विदेश से भी वैक्सीन ख़रीदने की कोशिश में है केंद्र

    नीति आयोग ने इस बात को भी झूठ बताया है कि केंद्र सरकार विदेश से वैक्सीन ख़रीदने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं कर रही.

    आयोग की ओर से जारी दस्तावेज़ के अनुसार, “सरकार 2020 के मध्य से ही लगातार सभी बड़ी वैक्सीन बनाने वाली विदेशी कंपनियों के संपर्क में है. फ़ाइज़र, जॉनसन एंड जॉनस और मॉडर्ना के साथ कई दौर की बात हो चुकी है. सरकार ने उन्हें भारत में वैक्सीन बनाने के लिए हर मदद का प्रस्ताव भी दिया.”

    “यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से वैक्सीन ख़रीदना किसी दुकान में जाकर कोई चीज़ खरीदकर लाने जैसा नहीं है. वैक्सीन की सप्लाई सीमित है और कंपनियों की अपनी प्राथमिकताएं हैं. वे अपने मूल देश को भी प्राथमिकता देती हैं, जैसा कि हमारे देश की कंपनियों ने हमारे लिए किया. जैसे ही फाइज़र ने वैक्सीन उपलब्ध होने का संकेत दिया, केंद्र सरकार ने कंपनी के साथ वैक्सीन को जल्द से जल्द आयात करने की कोशिशें शुरू कर दीं. भारत सरकार के कारण ही स्पूतनिक वैक्सीन के ट्रायल में तेज़ी आई है.”

    वैक्सीन

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    केंद्र ने राज्यों को अकेला नहीं छोड़ा’

    नीति आयोग का कहना है कि केंद्र सरकार ने राज्यों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा है. उसके मुताबिक़,केंद्र सरकार फंडिंग जैसे भारी काम कर रही है ताकि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाया जाए और विदेशी वैक्सीन को भारत लाया जाए. केंद्र वैक्सीन ख़रीदकर उन्हें मुफ्त में लोगों को लगाने के लिए राज्यों को दे रहा है. राज्यों को इस बारे में सब जानकारी है.”

    वह कहते हैं, “भारत सरकार ने राज्यों की मांग पर उन्हें यह इजाज़त भी दे दी कि वे ख़ुद वैक्सीन ख़रीद सकें. राज्यों को अच्छी तरह पता है कि देश में वैक्सीन की उत्पादन क्षमता क्या है और विदेश से वैक्सीन खरीदने में क्या मुश्किलें हैं.”

    नीति आयोग के अनुसार, भारत सरकार ने जनवरी से अप्रैल तक पूरा वैक्सीन अभियान चलाया और मई की तुलना में यह अच्छी तरह से चला. मगर ‘जो राज्य तीन महीनों में हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को अच्छी तरह से कवर नहीं सके, वे चाहते थे कि पूरी प्रक्रिया का विस्तार करके और विकेंद्रीकरण किया जाए.’

    आगे लिखा गया है, “स्वास्थ्य सुविधाएं देना राज्यों का विषय है और राज्यों की ओर से उन्हें अधिक शक्तियां देने की मांग के कारण ही भारत में उदार वैक्सीन नीति बनाई गई है. राज्यों की ओर से ग्लोबल टेंडर डालने की कोशिश का नाकाम रहने का मतलब वही है जो हम राज्यों को पहले दिन से कह रहे हैं. यानी दुनिया में वैक्सीन की कमी है और तुरंत वैक्सीन खरीद पाना संभव नहीं.”

    नीति आयोग ने इस बात को भी भी झूठ बताया कि भारत ने वैक्सीन निर्माओं को समय पर मंज़ूरी नहीं दी.

    आयोग के मुताबिक, “केंद्र सरकार ने अमेरिका के दवा नियामक एफ़डीए, ईएमए, ब्रिटेन के एमएचआरए, जापान की पीएमडीए और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंज़ूर वैक्सीन को भारत लाने का रास्ता अप्रैल में ही सरल कर दिया था. इन वैक्सीन को ट्रायल नहीं करने होंगे. अभी किसी विदेशी वैक्सीन कंपनी का आदेवन हमारे ड्रग कंट्रोलर के पास लंबित नहीं है.”

    नीति आयोग ने कहा है कि केंद्र सरकार भारत में बन रही वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कोशिशें कर रही है.

    ‘वैज्ञानिक लेंगे बच्चों के टीकाकरण का फ़ैसला

    नीति आयोग ने यह भी कहा है कि ‘दुनिया में कहीं पर भी बच्चों को वैक्सीन नहीं दी जा रही हैं और अभी तक WHO ने ऐसा करने की सलाह नहीं दी है.’

    यह कहा गया है कि जल्द ही भारत में भी बच्चों को लेकर ट्रायल शुरू होंगे. बयान के मुताबिक़, “ऐसे शोध आए हैं कि बच्चों के लिए वैक्सीन सुरक्षित हैं जो कि उत्साहजनक बात है. भारत में भी जल्द बच्चों को लेकर ट्रायल शुरू होंगे.”

    एक बार फिर राजनेताओं का ज़िक्र करते हुए नीति आयोग ने कहा, “बच्चों को टीका लगाने का फैसला वॉट्सऐप ग्रुप में फैले पैनिक के आधार पर नहीं लिया जा सकता क्योंकि कुछ राजनेता इसमें भी राजनीति करना चाहते हैं. हमारे वैज्ञानिक, ट्रायल के बाद आने वाली जानकारियों के अध्ययन के बाद इस बारे में फैसला लेंगे.”

  17. ब्रेकिंग न्यूज़, सरकार ने किया नए आईटी नियमों का बचाव, नियमों को यूज़र्स की सुरक्षा के लिए बताया

    सोशल मीडिया

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    केंद्र सरकार ने नए आईटी नियमों पर हो रहे विवाद को लेकर सफ़ाई दी है.

    आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को कहा सरकार लोगों के निजता की अहमियत अच्छी तरह समझती है और इसका पूरा सम्मान करती है.

    उन्होंने कहा, “इन नियमों का एकमात्र मक़सद उन मैसेज़ की शुरुआत करने वाले का पता लगाना है जिनका नतीजा, अपराध के रूप में देखने को मिलता है.”

    रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नए नियम सिर्फ़ सोशल मीडिया के दुरुपयोग रोकने के लिए बनाए गए हैं.

    उन्होंने कहा, “सरकार लोगों की आलोचना और सवाल पूछने के अधिकार का स्वागत करती है. ये नियम सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाली आम जनता को सशक्त करने के लिए हैं.”

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    नए नियमों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को एक शिकायत निवारण व्यवस्था बनानी होगी और शिकायतों का निबटारा करने वाले ऑफ़िसर का नाम भी सार्वजनिक करना होगा.

    इस अधिकारी को 24 घंटों में शिकायत का पंजीकरण करेगा और 15 दिनों में उसका निपटारा करना होगा.

    सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया को चीफ़ कंप्लाएंस ऑफ़िसर, नोडल कंटेन्ट पर्सन और एक रेज़ीडेट ग्रीवांस ऑफ़िसर नियुक्त करना होगा और ये सब भारत में ही होंगे.

    शिकायतों के निपटारे से जुड़ी रिपोर्ट भी उन्हें हर महीने जारी करनी होगी. हालाँकि सोशल मीडिया कंपनियाँ इसका विरोध करती आई हैं.

    वॉट्सऐप ने भारत सरकार ने इन नियमों को अदालत में चुनौती दी है. कंपनी का दावा है कि नए आईटी नियमों के कारण यूज़र्स के निजता के अधिकार का उल्लंघन करना होगा.

  18. पाँच जुलाई को अमेज़न का सीईओ पद छोड़ देंगे जेफ़ बेज़ोस

    जेफ़ बेज़ोस

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    अमेज़न के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जेफ बेज़ोस ने कहा है कि वो पाँच जुलाई को कंपनी में अपना पद छोड़ देंगे.

    किताब बेचने वाली ऑनलाइन दुकान के तौर पर अमेज़न को शुरू करने वाले बेज़ोस ने बुधवार को कहा उनके बाद कंपनी के एंडी जेसी कंपनी में सीईओ पद का कार्यभार संभालेंगे.

    वरिष्ठ टेक्नॉलजी रिपोर्टर डेव ली के ने बताया है कि कंपनी के शेयरहोल्डर्स की एक बैठक में बेज़ोस का कहना था कि ये तारीख उनके लिए बेहद ख़ास है.

    बेज़ोस ने कहा कि यह तारीख इसलिए चुनी गई है क्योंकि 27 साल पहले 1994 में इसी तारीख़ को कंपनी बनी थी.

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    अब क्या करेंगे बेज़ोस?

    फरवरी में बेज़ोस ने कहा था कि वो कंपनी में अपने पद से इस्तीफ़ा देंगे लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया था कि वो ऐसा कब तक करेंगे.

    उनकी जगह आने वाले ऐंडी जेसी फिलहाल कंपनी का क्लाइउट कंम्यूटिंग बिज़नेस संभालते हैं.

    53 साल के एंडी जेसी हॉर्वर्ड बिज़नेस स्कूल में पढ़ाई पूरी करने के बाद 1997में अमेज़न में आए थे.

    सीईओ के पद से हटने के बाद जेफ़ बेज़ोस कंपनी के एक्सिक्यूटिव चेयर पर होंगे और कंपनी के नए उत्पादों और मुहिम को लेकर काम करेंगे.

    वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार माना जा रहा है कि वो अंतरिक्ष अनुसंधान पर काम करने वाली अपनी कंपनी ब्लू ओरिजिन को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे.

  19. भारत में कोरोना के 2 लाख 11 हज़ार से ज़्यादा नए केस

    कोरोना

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    भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 2,11,298 नए मामले दर्ज किए गए जबकि 3,847 लोगों ने दम तोड़ दिया.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, पिछले दिन 2,83,135 संक्रमितों ने बीमारी को मात दी.

    भारत में अब तक कोविड-19 के कुल 2,46,33,951 मामले दर्ज किए गए हैं और बीमारी के कारण 3,15,235 लोगों की मौत हुई है.

    आंकड़े

    देश में फ़िलहाल एक्टिव केस 24,19,907 हैं और अब तक 20,26,95,874 लोगों को टीका लग चुका है.

  20. कोरोना वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई 90 दिनों में पता लगाएं एजेंसियां - बाइडन

    बाइडन

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    कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इंटेलिजेंस एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे इस बात की जांच करें कि यह वायरस कहां से आया और तीन महीनों के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश करें.

    एक बयान जारी कर बाइडन ने अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों से कहा कि वे ‘अपने प्रयास तेज़ करें और 90 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश करें’.

    कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आया था. तब से लेकर अब तक दुनिया भर में इसके 16 करोड़ 80 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं और कम से कम 35 लाख लोगों की जान जा चुकी है.

    चीनी प्रशासन ने शुरू में सामने आए संक्रमण के मामलों का संबंध वुहान की एक सीफ़ूड मार्केट से पाया था. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस जानवरों से इंसानों में पहुंचा है.

    मगर हाल में अमेरिकी मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, कुछ ऐसे सबूत हैं जो इस ओर इशारा करते हैं कि यह वायरस चीन की एक प्रयोगशाला से लीक हुआ है.

    मगर चीन ने इन ख़बरों को खारिज करते हुए कहा है कि यह वायरस अमेरिका की किसी लैब से निकला है.