लक्षद्वीप विवाद: बीफ़ बैन, डर फैलाने के गंभीर आरोप पर प्रशासक ने कहा, सबकुछ नियमों के मुताबिक़

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- Author, शुभम किशोर (दिल्ली से) और केंज़-उल मुनीर (केरल से)
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
लक्षद्वीप में पिछले कुछ दिनों से बीफ़ बैन, नए क़ानून, पंचायत चुनाव के नियमों में बदलाव के प्रस्ताव का विरोध हो रहा है.
लेकिन लक्षद्वीप प्रशासक प्रफुल पटेल ने कहा है कि सब कुछ नियमों के मुताबिक़ हो रहा है और विरोध के स्वर केरल से अधिक उठ रहे हैं. उनका कहना है कि लक्षद्वीप में सिर्फ़ वहीं लोग विरोध कर रहे हैं, जिनका कोई निहित स्वार्थ है.
लक्षद्वीप के कावाराती में रहने वाले 47 साल के सैफ़ुद्दीन (बदला हुआ नाम) और उनका 10 लोगों का परिवार मछली पकड़ने का काम करता है. लेकिन पिछले एक हफ़्ते से अधिक समय से उनका काम ठप है.
हाल ही में आए तौक्ते तूफ़ान में उनकी नाव को नुक़सान हुआ, जिसके कारण वो समुद्र में नहीं जा पा रहे. तूफ़ान और मौसम का क़हर इन द्वीपों के लिए कोई नई बात नही है. लोग अक्सर इनसे निपटने के लिए तैयार रहते हैं.
लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. सैफ़ुद्दीन का कहना है कि उनकी इस हालत के लिए ज़िम्मेदार "सिर्फ़ एक आदमी हैं- प्रफुल पटेल", जिन्हें पाँच दिसंबर 2020 को लक्षद्वीप का प्रशासक नियुक्त किया गया था. पटेल पर पिछले कुछ दिनों में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
लक्षद्वीप एक केंद्र शासित प्रदेश है, यहाँ कोई विधानसभा नहीं है. राज्य की कमान राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त प्रशासक के हाथों में होती है. पटेल पर लक्षद्वीप के लोग "वहाँ की संस्कृति, रहने, खाने के तरीक़ों को नुक़सान पहुँचाने और बेवजह डर फैलाने" की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं. उनका कहना है कि हाल के कई प्रस्तावित नियम "लोकतांत्रिक मर्यादा के ख़िलाफ़" हैं.

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सरकार ने नए नियमों की ड्रॉफ़्ट नोटिफ़िकेशन जारी की है. यहाँ के आम लोग, पंचायत और सांसद का कहना है कि ये नोटिफ़िकेशन, नियमों को ताक पर रखकर और बिना चुने हुए प्रतिनिधियों की सलाह के लाए गए हैं.
इनमें बीफ़ बैन, पंचायत चुनाव में उन लोगों के लड़ने पर पाबंदी, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, लोगों की गिरफ़्तारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नए नियम शामिल हैं. ये सभी अभी ड्राफ़्ट हैं, जिन्हें अगर गृह मंत्रालय की मंज़ूरी मिल जाए, तो ये क़ानून की तरह लागू हो जाएँगे.
लेकिन इन सभी फ़ैसलों को वापस लेने और पटेल को पद से हटाने की माँग हो रही है.
अधिकारियों के हाथ में ज़्यादा पावर देने का आरोप
सैफ़ुद्दीन का कहना है कि कई दशकों से वो अपनी नाव को समुद्र के किनारे एक शेड में रखा करते थे. लेकिन हाल ही में ज़िला प्रशासन की तरफ़ से उन्हें एक नोटिस भेजा गया कि वो शेड ग़ैर-क़ानूनी है.
"नोटिस भेजे जाने के एक दिन के भीतर रात के 12 बजे हमारे शेड तोड़ दिए गए. हम कोर्ट जाते, तब तक उन्हें तोड़ा जा चुका था. ये शेड मेरे पैदा होने के पहले के बने हुए थे, मेरे पिता भी अपनी नाव को सुरक्षित रखने के लिए इसी का इस्तेमाल करते थे."
"अब हमारे पास नाव रखने की जगह नहीं है, प्रशासन के आदेश के कारण, इन्हें पानी में ही छोड़ना पड़ता है, इसलिए जब तूफ़ान आया तो नाव को बहुत नुक़सान हुआ. समुद्र के किनारे से नाव के शेड हटाने का आदेश पहले कभी नहीं दिया गया."

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बीबीसी से वहाँ के एक मछुआरे ने ऐसे नोटिस की कॉपी वॉट्सऐप पर शेयर की. डिप्टी कलेक्टर के दफ़्तर से जनवरी में जारी किए गए इस नोटिस में लिखा है कि ग़ैर-क़ानूनी ढाँचे को "इस नोटिस के मिलने के दो दिनों के अंदर हटाया जाए, अन्यथा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी."
पटेल ने इसे "स्थानीय प्रशासन की अतिक्रमण के ख़िलाफ़ कार्रवाई" बताया है.
इस मामले को लेकर केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसपर सुनवाई चल रही है.
डर
लेकिन लोगों को डर है कि अब ऐसी घटनाएँ आम हो जाएँगी. इलाक़े के रहने वाले एक और वयक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि लोगों में डर है कि उनकी ज़मीनें आने वाले समय में छिन सकती हैं, क्योंकि एक नए प्रावधान के तहत लक्षद्वीप डेवेलपमेंट अथॉरिटी को कई अधिकार दिए गए हैं.
28 मार्च 2021 को जारी किए गए एक ड्राफ़्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, "सरकार किसी भी जगह को प्लानिंग एरिया घोषित कर सकती है."

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लक्षद्वीप के सांसद, मोहम्मद फ़ैसल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "इस नई बॉडी को असीमित शक्तियाँ दे दी जाएँगी, यहाँ पर पटेल 50 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण की बात कर रहे हैं, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत नई इमारतें बनाने की बात हो रही है, हम विकास के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन हमें ये समझना होगा, ये छोटे-छोटे द्वीप हैं, यहाँ पर ऐसे निर्माण करने से लोगों को काफ़ी मुश्किले होंगी."
"और सबसे बड़ी बात है कि यहाँ के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में इसे लेकर फ़ैसला करने का अधिकार नहीं होगा, सारे अधिकार एक व्यक्ति के हाथ में चले जाएँगे."
हालाँकि पटेल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि ये प्रावधान "इलाक़े के विकास और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए हैं." उन्होंने कहा कि सभी नियमों का पालन किया गया है.
फ़ैसल ने आरोप लगाया कि इन सबको लेकर कोई विरोध न हो, इसलिए लोगों को गिरफ़्तार करने के लिए एक नया कड़ा क़ानून लाने के प्रावधान भी हैं.

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एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्यूलेशन ड्राफ़्ट
पटेल के आने के बाद 29 जनवरी को एक एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्यूलेशन ड्राफ़्ट तैयार किया गया है. इसके तहत किसी भी व्यक्ति को एक साल तक बिना 'पब्लिक डिस्कोर्स' के हिरासत में रखा जा सकता है.
एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं कि लक्षद्वीप उन इलाक़ों में शामिल है, जहाँ देश में सबसे कम अपराध रिकॉर्ड किए गए हैं. यहाँ रहने वाले एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "एक ऐसी जगह जहाँ अपराध होते ही नहीं हैं, वहाँ ऐसे कड़े क़ानूनों की क्या ज़रूरत?"
फ़ैसल का आरोप है कि ये क़ानून जिसे 'गुंडा एक्ट' भी कहा जा रहा है, इसलिए लाए जा रहे हैं, ताकि "कोई सड़क पर उतर पर विरोध न कर सके. ये हमारे संवैधानिक अधिकारों को छीनने की कोशिश है."
प्रफुल पटेल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि हाल ही में हुए कुछ आपराधिक मामलों को देखते हुए इस क़ानून की ज़रूरत पड़ी.
"डेढ़ से दो महीने पहले कोस्ट गार्ड ने लक्षद्वीप के पास से ड्रग्स की बहुत बड़ी खेप पकड़ी है. उसकी क़ीमत 500 करोड़ से ज़्यादा है. वहां पर एके-47 राइफ़ल भी पकड़ी गई है. गांजा की तस्करी इस छोटे लक्षद्वीप में बड़े पैमाने पर हो रही है."
"निर्दोष लोगों को इससे से डरने की ज़रूरत नहीं है."

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मुस्लिम बहुल आबादी, लेकिन बीफ़ पर बैन का प्रावधान
लोगों का आरोप है कि पटेल की कोशिश वहाँ के खानपान को बदलने की भी है.
फ़रवरी 2021 को एक और नोटिफ़िकेशन जारी किया गया, जिसमें बीफ़ पर बैन लगाने की बात कही गई है. किसी भी व्यक्ति को "प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बीफ़ बेचने, रखने, स्टोर करने, ट्रांसपोर्ट करने, बेचने के लिए प्रदर्शित करने या बीफ़ और इससे जुड़ा कोई प्रोडक्ट ख़रीदने" पर पांबदी होगी.
साल 2011 की जनगणना के मुतबिक़ लक्षद्वीप में 96 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी मुसलमानों की है. यहाँ के लोगों का कहना है कि बीफ़ उनका मुख्य भोजन है.
कावाराती पंचायत के चेयरमेन अब्दुल क़ादिर ने बीबीसी से कहा, "यहाँ पर ज़्यादातर आबादी मुसलमानों की है, ये हमारा मुख्य खाना है, हमें ये अपना खाना खाने से रोकना चाहते हैं. बीफ़ के कारोबार से भी कई लोग जुड़े हैं, उन पर रोज़गार का संकट आ गया है."
सांसद फ़ैसल कहते हैं, "हमें इस बात से नाराज़गी है कि वो हमें अपनी पसंद का खाना भी नहीं खाने देना चाहते, मिड डे मील में भी बीफ़ बंद कर दिया गया है."
एनिमल प्रिवेंशन रिग्यूलेशन के तहत जारी किए गए इस ड्राफ़्ट में गाय, भैंस और बैल का ज़िक्र है.
फ़ैसल कहते हैं, "अगर आपको जानवरों को बचाने की चिंता है, तो ये नियम उन जानवरों के लिए लाए जाते, जो इन द्वीपों के इकोसिस्टम के लिए बहुत ज़रूरी हैं."
पटेल ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि इसे "सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है. देश के कई हिस्सों में ऐसे नियम लागू हैं और इन पर पहले चर्चा हो चुकी है."
दो बच्चों से ज़्यादा हैं, तो नहीं लड़ सकते पंचायत चुनाव
फ़ैसल और पंचायत से जुड़े लोगों का आरोप है कि पटेल पंचायत और जनप्रतिनिधि की ताक़तों को कम करना चाहते हैं. फ़ैसल का आरोप है कि नए नियम "पंचायत से ताक़त छीनकर प्रशासक के हाथ में ताक़त" देने के लिए बनाए गए हैं.
28 मार्च को जारी पंचायत रेग्लूलेशन ड्राफ़्ट में एक और प्रावधान है, जिसकी आलोचना हो रही है. प्रावधान के मुतबिक़ किसी भी ऐसे व्यक्ति को चुनाव लड़ने की इजाज़त नहीं होगी, जिसके दो से अधिक बच्चे हों.
अब्दुल क़ादिर कहते हैं, "ये सीधे तौर पर लोकतांत्रिक अधिकार छीनने की कोशिश है. आप एक बेबुनियाद नियम बनाकर किसी को चुनाव लड़ने से कैसे रोक सकते हैं."
पटेल ने आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि ऐसे नियम दूसरे राज्यों में भी हैं और इनमें कुछ ग़लत नहीं है.
'लोगों में डर का माहौल'
48 साल के डॉ. मुनीर मानिकफ़ैन पिछले 17 सालों से मिनिकॉय द्वीप पर लोगों का इलाज कर रहे हैं. बीबीसी से फ़ोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "इन सबके कारण लोगों में डर फैल गया है."
बीबीसी से बात करते हुए कुछ दूसरे लोगों ने भी डर की बात की, लेकिन इन मुद्दों पर ऑन रिकॉर्ड बोलने को तैयार नहीं हुए.
मानिकफ़ैन कहा, "मुझे लगता है कि ये पहली बार नहीं है कि इस तरह की कोशिश हो रही है. पहले भी एक प्रशासक ने नियम बदलने का प्रयास किया था लेकिन वो उसे बहुत दूर तक नहीं ले जा सके. प्रफुल पटेल उसी एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं."
मानिकफ़ैन ने कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे भी पटेल की ख़राब नीतियों को ज़िम्मेदार बताया.
उन्होंने कहा कि पिछले प्रशासक ने कोरोना को देखते हुए लक्षद्वीप आने पर पाबंदी लगाई थी, पटेल ने नियमों में ढील दी "जिसके कारण अब हर द्वीप पर मामले हैं."
उन्होंने कहा कि वहाँ बुनियादी स्वास्थ्य व्यवस्था ख़राब है और लोगों को बहुत दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है.
हालांकि पटेल ने कहा कि कोरोना के दौरान सभी फ़ैसले गाइडलाइन के तहत लिए गए. उन्होंने कहा, "दिसंबर तक द्वीप को पूरी तरह से बाहरी दुनिया के लिए बंद रखना सही नहीं था."
राजनीतिक पार्टियों का विरोध
बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मसले पर ट्विट किया, "लक्षद्वीप समुद्र में भारत का गहना है. सत्ता में बैठे अज्ञानी इसे नष्ट कर रहे हैं. मैं लक्षद्वीप के लोगों के साथ खड़ा हूं."
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक ट्वीट कर लिखा, "आपको लगता होगा कि बीजेपी पहले उन जगहों को बर्बाद करेगी, जहाँ वो चुन कर आई है, इससे पहले कि वो वहाँ जाए, जहाँ उनकी मौजूदगी नहीं है. लेकिन ऐसा लगता है कि उनका सिद्धांत है - अगर नहीं टूटा है, तो तोड़ दो."
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थरूर ने एक ट्वीट कर दावा किया है कि इस मुद्दे को लेकर बीजेपी के युवा मोर्चा के आठ सदस्यों ने इस्तीफ़ा दिया है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी लोगों की माँगों को समर्थन देने की बात की है.
राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल और इलामरण करीम ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर मामले में दख़ल देने की अपील की है.
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इनके अलावा कई लोग सेव लक्षद्वीप (लक्षद्वीप को बचाओ) नाम से ट्विटर पर हैशटैग ट्रेंड कराने की कोशिश भी कर रहे हैं, इनमें लेखक और फ़िल्म निर्माता भी शामिल हैं.
प्रफुल पटेल ने और क्या कहा?
पटेल ने बीबसी से बातचीत में आरोप लगाया कि वो मछुआरों समेत वहां रहने वाले कई लोगों के लिए विकास के प्लान लेकर आए हैं जिनकी कोई चर्चा नहीं की जा रही.
उन्होंने कहा, "हमने 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने की बात की है, महिला शक्तिकरण की, ये सवाल आप क्यों नहीं पूछते." पटेल ने कहा कि पंचायत के सदस्य और सांसद का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया में उनकी राय नहीं ली जा रही है, बेबुनियाद है.
उन्होंने कहा, "हमने पब्लिक नोटिफ़िकेशन निकाला है, आपत्ति माँगी है, सबकुछ नियमों के अनुसार किया जा रहा है. सबकुछ उन लोगों की जानकारी में है. सभी आरोप बेबुनियाद हैं. ये पीड़ा उन लोगों की है जो ग़ैर-क़ानूनी काम कर रहे हैं. 70 साल में कुछ नहीं हुआ, विकास होगा तो सबकुछ सामने आ जाएगा."
इस सवाल पर कि क्या ड्राफ़्ट नोटिफ़िकेशन जिनपर आपत्ति माँगी गई थी और जिनकी अब अवधि ख़त्म हो गई, क्या इन्हें गृह मंत्रालय के पास मंज़ूरी के लिए भेज दिया गया है?
पटेल ने कहा, "अभी मुझे इस बारे में सटीक जानकारी नहीं है."
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