मेहुल चोकसी की नई तस्वीरें आईं सामने, सूजी आँखें और हाथ में चोट: प्रेस रिव्यू

मेहुल चोकसी

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भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की डोमिनिका में गिरफ़्तारी के बाद उनकी पहली तस्वीर सामने आई है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' की ख़बर के अनुसार एंटीगा न्यूज़रूम नाम की एक वेबसाइट ने चोकसी की तस्वीर प्रकाशित की है और दावा किया है कि वो एंटीगा की मुख्य विपक्षी पार्टी यूपीपी को आर्थिक तौर पर मदद कर रहे थे.

वेबसाइट ने अपनी ख़बर में डोमिनिका पुलिस की हिरासत में कैद मेहुल चोकसी की दो तस्वीरें छापी हैं.

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चोकसी की जो दो तस्वीरें सामने आई हैं उनमें से एक में वो सलाखों के पीछे दिखते हैं और उनकी आँखों में सूजन है.

दूसरी तस्वीर उनके में हाथ में आई चोट की है. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि उनका वजन पहले के मुकाबले काफ़ी कम हो गया है.

अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एंटीगा न्यूज़रूम ने खुद ये तस्वीरें ली हैं या फिर उन्हें मेहुल चोकसी के वकीलों के ज़रिए ये तस्वीरें मिली हैं.

चोकसी के वकीलों ने कहा है कि उन्हें एंटीगा से अगवा कर डोमिनिका ले जाया गया था ताकि उनका भारत प्रत्यर्पण किया जा सके.

भारत में बैंक घोटाले में नाम आने के बाद मेहुल चोकसी ने एंटीगा और बारबूडा की नागरिकता ले ली थी. बीते तीन साल से वो यहीं रह रहे हैं. इस सप्ताह वो एंटीगा से लापता हो गए थे जिसके बाद वो डोमिनिका में पकड़े गए थे.

हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी पर सरकारी बैंक पीएनबी से 13,500 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है.

भारत में कोरोना महामारी

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कोरोना से अपनों को खोने वालों को सरकार देगी पेंशन

भारत सरकार ने कोविड-19 महामारी में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों को पेंशन देने का एलान किया है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को बताया कि महामारी से प्रभावित परिवारों को पीएम केयर्स फंड की चिल्ड्रेन स्कीम से पेंशन दिया जाएगा.

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यह पेंशन कोरोना के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों, अपने पति या पत्नी को खोने वाले व्यक्ति, बच्चों की क़ानूनी अभिभावकों या उन्हें गोद लेने वाले माता-पिता को मिलेगी.

एक अन्य महत्वपूर्ण फ़ैसले में केंद्र सरकार ने स्टेट इश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) के तहत मिलने वाली पेंशन भी बढ़ी दी है. यह पेंशन कोविड-19 के कारण जान गँवाने वालों के आश्रित परिजनों को मिलेगी.

दिल्ली, छत्तीसगढ़ और केरल जैसे कई राज्यों में भी सरकारों ने कोविड-19 में अनाथ हुए बच्चों के लिए सहायता राशि का ऐलान किया है.

कोरोना वैक्सीन

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होटलों के कोरोना वैक्सीन पैकेज देने पर ख़फ़ा सरकार, राज्यों को लिखी चिट्ठी

समाचार वेबसाइट मिंट में छपी एक ख़बर के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो उन संस्थाओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएं जो कोविड-19 के मद्देनज़र जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके कोरोना टीकाकरण का पैकेज दे रही हैं.

सरकार ने कहा है कि इसे तुरंत रोका जाना चाहिए.

इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोहर अगानी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र लिखा है.

पत्र में कहा गया है, "स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि होटलों के साथ मिल कर कुछ निजी अस्पताल कोविड वैक्सीनेशन पैकेज दे रहे हैं. ये राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन है."

अपने पत्र में मनोहर अगानी ने लिखा कि सरकारी और निजी के कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स के अलावा काम की जगहों और बड़े-बूढ़ों और अक्षम लोगों के लिए घरों में कोरोना टीकाकरण किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा स्टार होटलों जैसी किसी और जगह पर टीकाकरण करना दिशानिर्देशों का उल्लंघन है इसे तुंरत बंद किया जाना चाहिए.

ट्विटर

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आईटी नियम: ट्विटर ने भारत सरकार को अब तक नहीं दी जानकारी

अंग्रेज़ी अख़बार एशियन एज में छपी एक ख़बर के अनुसार गूगल, फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसी बड़ी मीडिया कंपनियों में नए डिजिटल नियमों के तहत भारत सरकार को जानकारी दे दी है लेकिन ट्विटर ने अब तक ऐसा नहीं किया है.

सरकारी सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि ट्विटर ने न तो आईटी मंत्रालय को अब तक इस बात की जानकारी दी है कि कंपनी के लिए भारत में उसका चीफ़ क्म्प्लायंस अफ़सर कौन होगा और न ही ये बताया है कि उसका नोडल अफ़सर और ग्रीवान्स अफ़सर कौन होगा.

हाल में जारी किए गए आईटी नियमों के तहत सभी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों में इन अहम पदों पर काम करने वाले कंपनी के कर्मचारी होने चाहिए और भारत में रहने वाले होने चाहिए. साथ ही इनकी जानकारी कंपनी को भारत सरकार को देनी होगी.

अख़बार के अनुसार बीते सप्ताह नए आईटी नियमों के प्रभाव में आने के बाद गूगल, फ़ेसबुक, व्हाट्सऐप, कू, शेयरचैट, टेलीग्राम और लिंक्डइन जैसी बड़ी सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज़ ने सरकार को ये जानकारी दे दी है. लेकिन ट्विटर ने अब तक ऐसा नहीं किया है.

इससे पहले गुरुवार को सरकार की तरफ़ से आई कड़ी प्रतिक्रिया के बाद ट्विटर ने भारत में अपनी कंपनी के लिए काम करने वाले एक वकील की जानकारी सरकार को दी थी. ट्विटर ने कहा था कि वो कंपनी के नोडल अफ़सर और ग्रीवान्स अफ़सर नियुक्त किए गए हैं.

इससे पहले ट्विटर ने कहा था कि उसके दफ्तर में दिल्ली पुलिस का आना उसे 'डराने' की कोशिश है. ट्विटर के इस बयान का दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने कड़ा विरोध किया है.

भारत सरकार ने भी कहा था कि ट्विटर उस पर ग़लत आरोप लगा रहा है.

केंद्र सरकार ने कहा था, "ट्विटर भारत को बदनाम करने और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश कर रहा है."

वीडियो कैप्शन, Cover Story: मोदी सरकार ने 7 साल में कितने वादे पूरे किए?

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