किसान आंदोलन: 6 महीने की कहानी 6 यादगार तस्वीरों में देखिए

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वो 26 नवंबर 2020 की सुबह थी. दिल्ली और हरियाणा के बॉर्डरों को दिल्ली पुलिस ने सील कर रखा था. सिंघु बॉर्डर पर कई लेयर के बैरीकेड लगाए गए थे. कंटीली तारें, सीमेंट के स्लैब, रेत से भरे ट्रक, हथियारबंद जवान और मुस्तैद खड़े दंगारोधी वाहन.
ये तैयारी तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों को दिल्ली की तरफ़ बढ़ने से रोकने के लिए की गई थी.
दिल्ली पुलिस के इन बैरीकेडों की तस्वीरें जब मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों तक पहुँचीं तो सवाल उठा कि क्या एक लोकतांत्रिक देश में पुलिस नागरिकों को इस तरह से रोक सकती है? दिल्ली या भारत में कहीं और पहले इस तरह की सख़्त बैरिकेडिंग नहीं देखी गई थी.
दिल्ली को हरियाणा, पंजाब और आगे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से जोड़ने वाले नेशनल हाइवे 44 को हरियाणा की पुलिस ने कई जगह खोद दिया. सीमेंट के भारी स्लैब लगाकर रास्ता जाम कर दिया गया.
कई जगह टकराव हुआ और किसानों पर पानी की बौछारें की गईं, लेकिन तमाम बाधाओं को लांघते हुए किसान आख़िरकार 27 नवंबर की सुबह दिल्ली की सीमाओं पर पहुँच ही गए.
25 नवंबर को किसान पंजाब और हरियाणा से चले थे और 27 नवंबर को दिल्ली में डेरे डाल दिए थे. इस दौरान किसानों का कई जगह संघर्ष हुआ. इस संघर्ष से जुड़ी तस्वीरों ने देश भर का ध्यान खींचा और अब तक पंजाब तक सिमट कर रहा किसान आंदोलन राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में आ गया.

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बुज़ुर्ग सिख पर पुलिस की लाठी
किसान आंदोलन में शामिल एक बुज़ुर्ग सिख पर अर्द्ध-सैनिक बल के जवान के लाठी चलाने की ये तस्वीर देश भर में वायरल हुई थी. इसे पीटीआई के फ़ोटोग्राफ़र रवि चौधरी ने खींचा था.
इस तस्वीर के वायरल होने के बाद जहां किसानों के प्रति सहानुभूति पैदा हुई थी वहीं विपक्ष ने सरकार के किसानों के प्रति रवैये पर सवाल उठाए थे.
ये तस्वीर 27 नवंबर को सिंघु बॉर्डर पर ली गई थी. इस दिन यहां किसानों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई थी.
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इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा था, "बड़ी ही दुखद फ़ोटो है. हमारा नारा तो 'जय जवान जय किसान' का था लेकिन आज पीएम मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया. यह बहुत ख़तरनाक है."

दादी महिंदर कौर की वायरल तस्वीर
फ़िल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने किसान आंदोलन में शामिल पंजाब के बठिंडा की 88 साल की महिंदर कौर की एक तस्वीर को ट्वीट करते हुए उन्हें शाहीन बाग़ आंदोलन की दादी बताया था और कहा था कि वो सौ रुपए में प्रदर्शन करने के लिए उपलब्ध हैं.
कंगना ने लिखा था, "हा हा. ये वही दादी हैं जिन्हें टाइम मैगज़ीन की 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की लिस्ट में शामिल किया गया था....और ये 100 रुपये में उपलब्ध हैं."
इस तस्वीर में महिंदर कौर झुकी हुई कमर के बावजूद झंडा लिए पंजाब के किसानों के साथ केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ मार्च करती नज़र आ रही हैं
कंगना ने ट्वीट तो डिलीट कर दिया लेकिन इससे छिड़ी बहस ने और अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ दिया. दादी महिंदर कौर तस्वीर वायरल होने के बाद आंदोलन का चेहरा बन गईं. इस आंदोलन में महिलाओं के बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की कई तस्वीरें सामने आईं.

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सरकार के साथ वार्ता में अपना खाना खाते किसान
किसानों और सरकार के बीच अक्तूबर 2020 में वार्ता शुरू हो गई थी. आंदोलन के दौरान विज्ञान भवन में सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की वार्ताएँ हुईं.
इसी कड़ी में 5 दिसंबर को हुई वार्ता चार घंटे चली. इस दौरान किसान नेताओं ने लंच ब्रेक में सरकार की तरफ़ से पेश खाना न खाते हुए अपने साथ लाया हुआ खाना खाया.
फ़र्श पर बैठकर खाना खा रहे किसान नेताओं की तस्वीर भी वायरल हुई थी. किसानों ने साफ़ कह दिया था कि वो सरकार का दिया खाना नहीं खाएंगे.
हालांकि बाद में अगले दौर की वार्ता के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर भी किसानों के साथ खाना खाते नज़र आए.

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लाल किले पर निशान साहिब
किसान संगठनों ने 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड का आह्वान किया था. दो महीनों से आंदोलन कर रहे किसानों ने इसके लिए ख़ास तैयारियां की थीं. कई हज़ार ट्रैक्टर दिल्ली की सरहदों पर जमा हो गए थे.
इस दौरान दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतज़ाम किए थे. पुलिस और किसानों के बीच तय हुआ था कि ट्रैक्टर परेड आउटर रिंग रोड पर ही रहेगी और दिल्ली के केंद्रीय इलाक़े में घुसे बिना ही वापस बॉर्डरों पर लौट जाएगी.
लेकिन एक बड़ी भीड़ ने पुलिस के बैरीकेड लांघ दिए और ये समूह लाल किले तक पहुँच गया.
इसके बाद ट्रैक्टर परेड में शामिल किसानों और पुलिस के बीच जगह-जगह झड़पें शुरू हो गईं. लाल क़िले पर सिख युवाओं ने सिखों का धार्मिक झंडा निशान साहिब फहरा दिया.
ये तस्वीरें मीडियो और सोशल मीडिया पर लाइव दिखाई जा रहीं थीं. कई घंटों तक प्रदर्शनकारी किसान लाल क़िले में रहे.
किसान आंदोलन में अलगाववादी समूहों ख़ालिस्तानी तत्वों के शामिल होने के आरोप लगते रहे थे. इन तस्वीरों ने इन आरोपों को और हवा दे दी. बाद में फ़िल्म अभिनेता दीप सिद्धू को इस सिलसिले में गिरफ़्तार भी किया गया.

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ग़ाज़ीपर बॉर्डर पर रोए राकेश टिकैत
26 जनवरी को हुई ट्रैक्टर परेड के दौरान अराजकता का जो माहौल बना उसने किसान आंदोलन पर सवाल उठा दिए. ऐसा लगने लगा कि पुलिस अब आंदोलनकारियों पर एक्शन ले सकती है और उन्हें हटा सकती है.
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर भारी पुलिस बल भेज दिया गया. मीडिया में पुलिस एक्शन की ख़बरें चलने लगीं, और इसी दौरान शाम को मीडिया के सामने आए किसान नेता राकेश टिकैत रोने लगे.
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उनके आंसुओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भावनाओं का ऐसा उबाल पैदा किया कि रातोंरात ग़ाज़ीपुर बॉर्डर आंदोलन का केंद्र बन गया. राकेश टिकैत के आंसुओं ने उन्हें आंदोलन का नया हीरो बना दिया.
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