कोरोना महामारी से लड़ाई में उत्तर प्रदेश का हाल कितना बेहाल

जय प्रताप सिंह

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    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि राज्य में 18 साल से ज़्यादा क उम्र वालों के लिए एक हफ़्ते की वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन उन्हें ऐसे संकेत मिले हैं कि उन्हें एक कंपनी की तरफ से सप्लाई मिलने वाली है.

दूसरे राज्य भी लगातार वैक्सीन की कमी की शिकायतें कर रहे हैं.

दूसरे कुछ राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश भी वैक्सीन की कमी पूरा करने के लिए टेंडर जारी की तैयारी में है और स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने बताया ने कहा कि 21 मई को टेंडर खोला जाएगा.

स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया कि राज्य में ऑक्सीजन, दवाएं, हॉस्पिटल बेड उपलब्ध हैं और कहा कि अप्रैल के शुरुआती बीस दिन सबसे ज़्यादा चुनौतीपूर्ण थे.

उन्होंने कहा, "हम ये जानते हैं और मानते हैं कि ऑक्सीजन की किल्लत की वजह से बहुत सारे लोगों की घर के अंदर मृत्यु हुई."

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योगी आदित्यनाथ का दावा

जय प्रताप सिंह ने कहा, "महामारी में किसी देश के संसाधन कम पड़ सकते हैं."

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक़ दूसरी लहर में बढ़ी मौत की वजह है वायरस के वैरियंट का बेहद तेज़ी से फैलने वाला होना. उन्होंने कहा, "पिछले साल तो ऑक्सीजन की समस्या हुई नहीं थी."

ग़ौरतलब है कि अप्रैल के आख़िरी हफ्ते में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया था कि राज्य में न बिस्तर की कमी है, न ऑक्सीजन की कमी है, न रेमडेसिविर या जीवन रक्षक दवा की."

इस वक्तव्य को लेकर उनकी खासी आलोचना हुई थी क्योंकि सोशल मीडिया पर लगातार ऑक्सीजन, अस्पताल में बिस्तर, दवाओं और वेंटिलेटर की कमी से लेकर लोगों की मौत की बात हो रही थी.

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चुनाव और कोरोना

अगर आप मुख्यमंत्री योगी आदित्यानथ के अप्रैल के शुरुआती दिनों की ट्विटर टाइमलाइन देखें तो वो बंगाल और केरल में चुनावी भाषणों और यात्राओं की तस्वीरों से भरी हुई हैं. ये वो वक्त था जब राज्य में कोरोना तेज़ी से लोगों की जान ले रहा था.

दो अप्रैल को मुख्यमंत्री दफ़्तर से ट्वीट किया गया, "कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित रखने के साथ ही इस महामारी के उपचार के लिए प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में सभी प्रकार के संसाधन उपलब्ध हैं."

चार मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य में ऑक्सीजन की कमी से मौत के लिए 'जेनोसाइड' या 'जनसंहार' शब्द का इस्तेमाल किया था और इसे 'आपराधिक कृत्य' बताया था.

अदालत ने अपने आदेश में लखनऊ और मेरठ से आ रही ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत की खबरों की जांच करने को कहा और पूछा था, "हमें अपने लोगों को इस तरह कैसे मरने दे सकते हैं जब विज्ञान इतना विकसित हो गया है और आजकल ब्रेन सर्जरी भी हो रही है."

राज्य में कोविड-19 से भाजपा के चार विधायकों की मौत हो चुकी है.

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भाजपा नेताओं के सवाल

भाजपा के कई नेताओं ने भी राज्य में मेडिकल सुविधाओं पर सवाल खड़े किए हैं.

उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने 12 अप्रेल को एक पत्र में लिखा कि मरीज़ों को एंबुलेंस समय से नहीं मिल पा रहा है, कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या बहुत कम है, और लखनऊ में प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों में कोविड की जांच बंद करवा दी गई है.

केंद्रीय मंत्री संतोष सिंह गंगवार ने छह मई को प्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में शिकायत की कि "बरेली में मेडिकल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अधिकारी अपना फ़ोन नहीं उठाते जिससे मरीज़ों को काफ़ी असुविधा हो रही है."

भाजपा विधायक अरविंद गिरि ने लखीमपुर-खीरी के ज़िलाधिकारी को 29 अप्रैल को पत्र में लिखा कि "विगत 10 दिनों में दो दर्जन से अधिक प्रमुख साथियों के साथ सैकड़ों लोगों ने ऑक्सीजन के अभाव में जान दी है, यह ज़मीनी हकीकत है."

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'शवों की कोई डंपिंग नहीं'

गंगा में मिल रहे शवों पर स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें नदी में फेंके जाने के किसी भी आरोप से इनकार किया.

उन्होंने कहा, "कहीं कोई शव को डंप करने की व्यवस्था नहीं है. सभी जगह श्मशान घाट में लकड़ी पड़ी हुई है."

उत्तर प्रदेश सहित दूसरे प्रदेशों पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि वो अपने यहां कोरोना से हुई मौत को आधिकारिक आंकड़ों में कम करके दिखा रहे हैं, जबकि सही संख्या बहुत ज़्यादा है.

इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "उत्तर प्रदेश हमेशा निशाने पर रहेगा क्योंकि हम एक भाजपा शासित राज्य हैं और बहुत लोगों को ये पसंद भी नहीं है."

उन्होंने कहा कि राज्य में रिकॉर्ड किया गया कोविड मौत का आंकड़ा सिर्फ़ अस्पतालों में हुई मौत को दर्शाता है.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्देश

ग़ौरतलब है जिन लोगों को ऑक्सीजन, वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं से लैस बेड नहीं मिल पा रहे हैं, उनकी घरों में मौत हो रही है.

स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा, "ऐसे भी लोग थे जिनका टेस्ट नेगेटिव आ रहे थे, उन्होंने आरटीपीसीआर भी कराया, एंटीजन भी कराया, हर चीज़ में नेगेटिव आया, एक हफ़्ते बाद उनके फेफड़े इन्फ़ेक्ट हुए. जब तक वो घर से निकलकर (अस्पताल) पहुंचे तब तक उनकी मौत हो गई थी. तो हम इस बात को मानते हैं कि मौत हमारे यहां हुई हैं."

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार और अस्पतालों को कोरोना के संदिग्ध मरीजों की मौत संक्रमण से मौत के आंकड़ों में जोड़ने के निर्देश दिए हैं.

स्वास्थ्य मंत्री ने इन आरोपों से इनकार किया कि टेस्टिंग लैब से कहा गया है कि वो कम टेस्ट करें और कहा कि ऐसा करना राज्य के हित में नहीं है.

उन्होंने कहा कि "राज्य में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में आ रही है. जितना हमारा आवंटन था, उतना हमारे पास आ रहा है."

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गांवों में कोरोना की चुनौती

राज्य सरकार कोरोना संक्रमण दर घटने का दावा कर रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले क़रीब एक हफ़्ते से कोविड जांच का विशेष मेगा अभियान चलाया गया है.

लेकिन उत्तर प्रदेश में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र के मुतबिक़ उन्होंने 10 ज़िलों में लोगों से बात की है और उन्हें पता चला कि वहां कोई सरकारी टीम नहीं पहुंची थी.

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