रमेश चेन्निथला: केरल कांग्रेस का खेवनहार जो हिंदी बोलने में हैं धुरंधर

केरल, रमेश चेन्निथला

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भारत के दक्षिणी राज्य केरल में अगर कोई एक ऐसा राजनेता है, जो किसी दिल्लीवाले की तरह धड़ल्ले से हिंदी बोल सकता है, तो वो हैं छोटे कद के रमेश रामकृष्णन नायर. उन्हें लोग रमेश चेन्निथला के नाम से ज़्यादा जानते हैं.

रमेश चेन्निथला कांग्रेस के वो नेता हैं, जो केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे यानी यूडीएफ़ के चुनाव जीतने की सूरत में मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

सच कहें तो केरल जैसे राज्य में रमेश चेन्निथला की हिंदी बोलने की इस क़ाबिलियत का कोई ख़ास महत्व है नहीं. इसकी वजह भी बिल्कुल साफ़ है. यहां जो लोग अन्य भाषाएं भी जानते हैं, वो भी मलयालम में ही बातचीत को तरज़ीह देते हैं.

लेकिन, ये रमेश चेन्निथला की हिंदी बोलने की क़ाबिलियत ही है, जिसने उन्हें राज्य के कई बड़े और ताक़तवर नेताओं के साथ काम करते हुए भी अपना 'राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने' में मदद की है.

अच्छी हिंदी बोल लेने के कारण ही, रमेश चेन्निथला, पहले कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (एनएसयूआई), फिर इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) और फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (ओआईसीसी) में तमाम लोगों के बीच अपना नेटवर्क बनाने में सफल रहे.

लोगों से संबंध का फ़ायदा उठाने की अपनी इसी क्षमता के कारण ही 17 साल पहले रमेश चेन्निथला अपने गृह राज्य केरल की राजनीति में पांव जमाने में सफल रहे थे.

केरल, रमेश चेन्निथला

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सियासी ज़िंदगी के अहम साल दिल्ली में बिताए

केरल में कांग्रेस की रणनीतिक पैनल के सदस्य जॉन सैमुअल ने बीबीसी को बताया, "पहले एनएसयूआई और आईवाईसी के अध्यक्ष और फिर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव होने के चलते, रमेश चेन्निथला ने दिल्ली में अपनी सियासी ज़िंदगी के लगभग 15 बरस बिताए हैं."

"नतीजा ये हुआ कि वो केरल के एक और कद्दावर कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ऊमेन चांडी की तरह राज्य में अपने लिए मज़बूत सियासी ज़मीन नहीं तैयार कर सके. इसीलिए, आज उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी यही है कि वो बहुत अच्छी हिंदी बोल लेते हैं."

रमेश चेन्निथला, केरल में कांग्रेस के कद्दावर नेता और सूबे के सबसे ताक़तवर मुख्यमंत्री के. करुणाकरन के शागिर्द रहे हैं. करुणाकरन ने ही, रमेश चेन्निथला को 28 साल की उम्र में राज्य का सबसे युवा मंत्री बनाया था.

फिर भी रमेश चेन्निथला ने बड़ी ख़ामोशी से केरल में करुणाकरन समर्थक कांग्रेसी नेताओं के 'आई' गुट से दूरी बना ली. करुणाकरन समर्थकों के इस समूह को आज भी 'आई' गुट कहा जाता है.

अन्य राज्यों में कांग्रेस के गुटों की तरह केरल में भी कांग्रेस मोटे तौर पर दो गुटों में बंटी हुई है. पहला तो है 'आई' गुट जिसकी अगुवाई कभी करुणाकरन करते थे. दूसरा गुट 'ए' के नाम से जाना जाता है, जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री एके एंटनी और ऊमेन चांडी जैसे नेता शामिल हैं.

'ए' गुट के उलट 'आई' गुट असल में रमेश चेन्निथला, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल और के. सुधाकरण जैसे नेताओं का एक नेटवर्क है.

वीडियो कैप्शन, एक वक़्त था, जब कोरोना से निपटने के लिए केरल की तारीफ़ हो रही थी.

केरल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच कायम किया अच्छा संतुलन

केरल कांग्रेस का 'आई' गुट एक साथ मिलकर भी काम करता है और कई बार ये पार्टी के भीतर विघटन का बायस भी बन जाता है. वर्ष 2004 में जब रमेश चेन्निथला राज्य की राजनीति में वापस आए और विधानसभा चुनाव लड़ा तो उसके नतीजों ने चौंकाया नहीं. चेन्निथला चुनाव हार गए थे.

हैरानी की बात ये है कि विधानसभा का चुनाव हार जाने के बावजूद, रमेश चेन्निथला को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया गया और उनके नेतृत्व में पार्टी ने लगभग हर चुनाव जीता. और, ऊमेन चांडी से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के बावजूद, रमेश चेन्निथला उनके मुख्यमंत्री रहते हुए बड़े अच्छे तालमेल के साथ काम करते रहे थे.

जॉन सैमुअल कहते हैं कि, "उन्होंने केरल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच अच्छा संतुलन क़ायम कर लिया था."

इसके बाद भी, रिकॉर्ड नौ बरस तक केरल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहने के बावजूद, जब रमेश चेन्निथला मंत्री बने तो ऊमेन चांडी ने उन्हें बहुत मामूली-सा मंत्रालय थमा दिया था.

कांग्रेस के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि, "रमेश चेन्निथला ने दिल्ली में अपने नेटवर्क का फ़ायदा उठाते हुए ऊमेन चांडी को झटका दिया और राज्य के गृह मंत्री बन गए. जबकि केरल में इससे पहले तीन दशक तक कोई भी मंत्री स्वतंत्र रूप से गृह मंत्री नहीं बनाया गया था. गृह विभाग हमेशा मुख्यमंत्री अपने ही पास रखा करते थे."

वीडियो कैप्शन, सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश पर बवाल क्यों?

लोगों के बीच बनाई अपनी अलग छवि

केरल प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव ज्योतिकुमार चमकाला ने कहा कि, "गृह मंत्री के तौर पर रमेश चेन्निथला का कार्यकाल बेहद शानदार रहा. वो इसलिए भी और लोकप्रिय हो गए क्योंकि उन्होंने मनी लॉन्डरिंग करने और ऊंची ब्याज दरों पर ग़रीबों को क़र्ज़ देने वाले साहूकारों के ग़रीबों का पैसा हज़म करने के ख़िलाफ़ ऑपरेशन कुबेर शुरू किया था. इससे ग़रीबों का बहुत भला हुआ था."

एक राजनीतिक विश्लेषक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि, "गृह मंत्री रहते हुए जब किसी पुलिस अधिकारी ने दो नक्सली नेताओं का सफ़ाया करने का मशविरा दिया, तो रमेश चेन्निथला ने इस सुझाव को सिरे से ख़ारिज कर दिया था. ये मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के कार्यकाल के बिल्कुल उलट फ़ैसला था."

"पिनराई विजयन के दौर में तो आठ नक्सली नेताओं को मौत के घाट उतार दिया गया, क्योंकि मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के इन सुझावों को ख़ारिज नहीं किया."

इसीलिए जब रमेश चेन्निथला, विधानसभा में विपक्ष के नेता बने, तो पार्टी कार्यकर्ताओं को लगा कि वो विरोधाभासी संकेत दे रहे हैं.

केरल, रमेश चेन्निथला

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वो मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ बाढ़ प्रभावित इलाक़ों का दौरा कर रहे थे. उनके साथ नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में शामिल हो रहे थे. कुछ पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के साथ हर जगह जाने के अपने इसी तौर-तरीक़े के कारण रमेश चेन्निथला ने लोगों की विश्वसनीयता गंवा दी.

ये तो सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला था, जिसे लेकर रमेश चेन्निथला ने अपनी पार्टी की लाइन पिनराई विजयन की सरकार से अलग की और कहा कि स्वामी अयप्पा के मंदिर में वो औरतें नहीं जा सकतीं, जिनकी माहवारी हो रही हो.

2018 में जब सबरीमाला का आंदोलन अपने शिखर पर था, तब रमेश चेन्निथला ने मुझसे कहा था कि, "हमें लोगों की आस्था के मसले में नहीं पड़ना चाहिए. और मेरा यक़ीन कीजिए इस मसले पर लोग हमारी बात पर भरोसा करेंगे, न कि बीजेपी की."

"पिछले महीने हुए चुनाव में वोटिंग के लिए लाइन में लगी महिलाओं की भारी तादाद ने रमेश चेन्निथला के पार्टी सहयोगियों को इशारा दिया कि सबरीमाला पर उनके स्टैंड को जनता के बीच काफ़ी समर्थन मिला है."

रमेश चेन्निथला

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एलडीएफ़ सरकार पर लगाए कई आरोप

सबरीमाला मंदिर विवाद से ही रमेश चेन्निथला ने वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे की सरकार के ख़िलाफ़ आरोपों की बौछार करनी शुरू की.

राजनीतिक विश्लेषक और वकील ए. जयशंकर ने कहा कि, "रमेश चेन्निथला बहुत सब्र वाले नेता हैं. वो बहुत चालाक भी हैं. उन्होंने कई घोटालों की छोटी मोटी जानकारियां उजागर करके एलडीएफ़ सरकार पर कई आरोप लगाए. फिर चाहे वो स्प्रिंक्लर घोटाला हो, ब्रूअरीज़ और डिस्टिलरीज़ को लाइसेंस देने की नीति हो या मछली पकड़ने वाली विदेशी नौकाओं का मामला. मछली मारने की विदेशी नौकाओं के विवाद ने केरल के तटीय इलाक़ों की 42 सीटों पर असर डाला है."

केरल में विधानसभा चुनाव का प्रचार ख़त्म होने के बाद, कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक़ था. ये उस माहौल के ठीक उलट था, जब स्थानीय निकायों के चुनाव में पार्टी की करारी हार हुई थी.

उस हार के बाद ही पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य में दख़ल देते हुए ऊमेन चांडी से अपील की कि वो अपने अघोषित राजनीतिक संन्यास को छोड़कर पार्टी की मदद करें.

हालांकि, स्थानीय निकायों के चुनाव में हार के बावजूद रमेश चेन्निथला अपने रवैये पर अडिग रहे थे. जॉन सैमुअल कहते हैं कि, "उन्होंने पहले भी ऊमेन चांडी के साथ बड़े आराम से काम किया था. चांडी ने सत्ता में आने पर पार्टी की नीतियां तय करने के लिए एक कमेटी बनाई. मोटे तौर कहें तो ये पार्टी का घोषणापत्र बनाने वाली समिति थी."

"मुझे ऊमेन चांडी ने कहा था कि मैं इस समिति की अध्यक्षता करूं. रमेश चेन्निथला नियमित रूप से हमसे मिलते रहते थे और एक पेशेवर नेता की तरह हर बात पर खुल कर चर्चा करते रहते थे. उन्होंने कभी भी इस बात पर ऐतराज़ नहीं किया कि ऊमेन चांडी ने मुझे इस समिति का अध्यक्ष क्यों बनाया था."

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पिनराई विजयन के कामों का आगे बढ़ाने की चुनौती

रमेश चेन्निथला ने 'समृद्ध केरल यात्रा' की शुरुआत की और राज्य की सभी 140 विधानसभा सीटों का दौरा किया.

एक अख़बार के राजनीतिक संवाददाता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि, "रमेश चेन्निथला की ये यात्रा पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने में ज़बरदस्त तरीक़े से कामयाब रही. और जब इस यात्रा की आख़िरी रैली तिरुवनंतपुरम में हुई थी, तो रमेश चेन्निथला के आलोचक भी उनकी रैली के प्रति उत्साह देख कर हैरान रह गए थे."

राजनीतिक विश्लेषक केए जैकब ने बीबीसी से कहा कि, "रमेश चेन्निथला ने ये बात बड़े क़रीब से समझी है कि किस तरह मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने सत्ता का इस्तेमाल करके ग़रीबों की ज़िंदगी बेहतर बनाई है."

"सच तो ये है कि पिनराई विजयन ने जैसा प्रशासन देने की शुरुआत की है, उसे आगे बढ़ाने के लिए रमेश चेन्निथला सबसे उपयुक्त व्यक्ति होंगे, जिससे राज्य के लोगों का भला हो. हां, ये बात तो अहमियत रखती ही है कि चेन्निथला किस तरह के लोगों को अपना सलाहकार बनाते हैं."

ए. जयशकंर ने कहा कि, "अगर आप तड़के चार बजे भी रमेश चेन्निथला के गेस्ट हाउस का दरवाज़ा खटखटाएंगे, तो वो आपका स्वागत मुस्कुराकर ही करेंगे. वो हमेशा तैयार ही मिलते हैं."

तो, अब सवाल ये है कि, "क्या रमेश चेन्निथला केरल की जनता के चेहरों पर मुस्कान ला सकेंगे?"

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