कर्नाटक : किसानों पर मंत्री के 'मर जाओ' वाले बयान की सीएम येदियुरप्पा ने की निंदा

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक में कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच बीजेपी सरकार के मंत्री का एक ऑडियो क्लिप वायरल हो गया है जिसमें वो एक किसान एक्टिविस्ट को "जाओ और मर जाओ" कहते सुनाई दे रहे हैं.
एक किसान नेता ने मुफ़्त मिलने वाले चावल की मात्रा कम होने को लेकर उनसे सवाल किए थे जिसके जवाब में मंत्री ने कथित तौर पर ऐसा कहा. इस ऑडियो क्लिप से सामने आने के बाद प्रदेश में बीजेपी सरकार की आलोचना हो रही है.
राज्य के खाद्य मंत्री उमेश विश्वनाथ कट्टी और किसान एक्टिविस्ट के बीच वायरल हुई इस ऑडियो क्लिप के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने खेद प्रकट किया और हर महीने होने वाली चावल की सप्लाई की मात्रा 2 किलोग्राम से बढ़ाकर 5 किलोग्राम कर दी है
ऑडियो क्लिप में सुना जा सकता है कि किसान एक्टिविस्ट ने मंत्री से पूछा कि उनके विभाग ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाले चावल को पांच किलोग्राम से कम कर दो किलोग्राम क्यों किया, वो भी ऐसे वक्त जब लोग महामारी से जूझ रहे हैं. इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार ने खाने की सामग्री में कटौती नहीं की है, अब चावल दो किलो मिल रहा है लेकिन साथ ही तीन किलो रागी या ज्वार दिया जा रहा है.
किसान एक्टिविस्ट को कहते हुए सुना जा सकता है, "लेकिन सर, ये पर्याप्त नहीं होगा. इस लॉकडाउन में हमारी कमाई कम हो गई है. हमें ज्वार भी नहीं मिल रहा, तब तक हम भूखे रहें या मर जाएं."
इसके जवाब में मंत्री को कहते हुए सुना जा सकता है, "बेहतर है आप मर जाएं. इसीलिए हमने देना (पांच किलो चावल) छोड़ दिया. ये सही वक्त है किसानों के मर जाने का. आप कृपया मुझे कॉल न करें."
सीएम ने की बयान की निंदा
इसके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि उनके मंत्री का ऐसा कहना "सही नहीं" है और मंत्री को ऐसी "असंवेदनशील" बात नहीं चाहिए थी.
लेकिन इस बयान के बाद बेलगावी जिले के उमेश विश्वनाथ कट्टी ने अपने बचाव में कहा, "अगर वो पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें मर जाना चाहिए, तो मैं उनसे क्या कहूं?"
सरकार के एक मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रदेश में लॉकडाउन जैसी कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं.
तकनीकी सलाहकार समिति ने सरकार को फरवरी में कोरोना महामारी की दूसरी लहर की संभावना के बारे में चेतावनी दी थी. लेकिन दूसरी महामारी के मद्देनज़र प्रदेश में पहले से तैयारियां नहीं की गईं.
पिछले छह दिनों में प्रदेश में कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने वालों की संख्या में रोज़ाना ढाई हज़ार से छह हज़ार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हालांकि 26 और 28 अप्रैल को आंकड़ों में थोड़ी कमी दखी गई थी. 28 अप्रैल को प्रदेश में 39,047 पॉज़िटिव मामले दर्ज किए गए लेकिन इसके एक दिन बाद लॉकडाउन लगाए जाने के कारण 35,024 मामले दर्ज किए गए. अकेले बेंगलुरू में कोरोना संक्रमण के 19,637 मामले दर्ज किए गए. गुरुवार को प्रदेश में एक दिन में सबसे अधिक 270 लोगों की जान कोविड-19 के कारण गई.
बीबीसी ने मंत्री कट्टी से बात करने की कोशिश की लेकिन वो उपलब्ध नहीं थे. उनके सेक्रेटरी ने बीबीसी को बताया कि "वैक्सीन लेने के बाद वो आराम कर रहे हैं."
इस पूरे मामले पर राजनीतिक मामलों के जानकार डॉ संदीप शास्त्री ने बीबीसी से कहा, "ये सत्ता में बैठे व्यक्ति के अहंकार की निशानी है. ऐसा पहले भी राज्य के कई मंत्री कर चुके हैं."
उन्होंने कहा, "जब आपके हाथ में ताकत होती है तो आपको संयम, विनम्रता, और धैर्य बनाए रखने की क्षमता दिखानी चाहिए, लेकिन लगता है कि हमारे नेताओं ने अब तक कुछ सीखा नहीं है. हमने देखा है कि कैसे अहंकार और विनम्रता न रखने के कारण लोगों की ज़िंदगी मुश्किल में पड़ी है."
"जब आप किसी ज़िम्मेदार पद पर होते हैं तो आपसे उम्मीद की जाती है कि आप हर तरह के सवालों के जवाब दें, आपको किसी बात से व्यक्तिगत तौर पर आहत नहीं होना चाहिए और स्थिति के मुताबिक़ काम करना चाहिए."
हालांकि उन्होंने सीएम द्वारा फिर से राशन में 5 किलोग्राम चावल देने के फ़ैसले की तारीफ़ की. उनके मुताबिक़, "सप्लाई कम करना एक असंवेदनशील फ़ैसला था.
2013 में शुरू हुई थी योजना
मुफ्त में चावल देने की योजना साल 2013 में तत्कालीन सीएम सिद्धारमैय्या लेकर आए थे. तब गरीबों को राशन में सात किलोग्राम चावल दिया जाता था.
लेकिन दो साल पहले जब बीजेपी सत्ता में आई, तो इसकी मात्रा घटाकर पांच किलोग्राम कर दी गई.
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सिद्धारमैय्या ने बीबीसी हिंदी से कहा, "बीजेपी सरकार ने दो किलो चावल कम कर दिया और उसकी जगह पर तीन किलो रागी या ज्वार देने लगे. लेकिन लोग ये नहीं लेना चाहते,उन्हें चावल चाहिए. लेकिन इस सरकार को लोगों की परवाह नहीं है और वो इसे नहीं बदलना चाहती. हमारी सरकार उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश से चावल खरीदती थी."
उन्होंने कट्टी के बयान को "ग़ैर-जिम्मेदाराना" बताते हुए कहा कि वो "मंत्री के पद पर रहने के हकदार नहीं हैं. मैं मांग करता हूं कि येदियुरप्पा उन्हें मंत्री पद से हटाएं."
दो साल पहले भी कट्टी के एक बयान के कारण विवाद खड़ा हो गया. उन्होंने उस वक्त एक अलग उत्तर कर्नाटक राज्य की मांग की थी.
उन्होंने ये भी कहा था कि वो उस राज्य के मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे. उन्होंने कहा था, "अगर मैं नहीं तो आने वाले वक्त में मेरा बेटा सीएम बन जाएगा."
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