कुंभ में कोरोना से महामंडलेश्वर की मौत, दूसरा सबसे बड़ा अखाड़ा हुआ बाहर - प्रेस रिव्यू

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक निरंजनी अखाड़े ने कुंभ से बाहर होने का फ़ैसला लिया है. मध्य प्रदेश के निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर कपिल देव दास का कुंभ में भाग लेने के बाद कोरोना संक्रमण से निधन हो गया है. वो 65 साल के थे.
स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने अख़बार को बताया है कि कुंभ में शामिल 68 शीर्ष साधु संक्रमित हो गए हैं. निरंजनी अखाड़ा जूना अखाड़े के बाद दूसरा सबसे बड़ा नागा संन्यासी अखाड़ा है. अखाड़े ने कहा है कि शाही स्नान के बाद उसके लिए कुंभ समाप्त हो गया है.
मेला प्रशासन के मुताबिक गुरुवार को कुल 332 लोग संक्रमित पाए गए हैं. मेला प्रशासन के पास कोरोना संक्रमण की वजह से हुई कुल मौतों का आँकड़ा नहीं है. प्रशासन के मुताबिक अप्रैल 12 के बाद से 79301 लोगों का टेस्ट हुआ है जिनमें से 745 संक्रमित पाए गए हैं.
निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने कहा है कि हरिद्वार के उनके कैंप में अधिकतर साधुओं और श्रद्धालुओं में कोविड जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं. इसे देखते हुए संतों ने 17 अप्रैल से मेला समाप्त करने का फ़ैसला लिया है. कुंभ मेला अधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल को समाप्त होना है. अगला शाही स्नान 27 अप्रैल को है.
भारत और पाकिस्तान की वार्ता में मदद कर रहे हैं- संयुक्त अरब अमीरात

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात ने भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता कराने के अपने प्रयासों की पुष्टि की है. अमेरिका में यूएई के राजदूत ने एक बयान में कहा है कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच स्वस्थ और सक्रिय रिश्ते स्थापित करवाने की कोशिशें कर रहा है.
राजदूत यूसल अल ओतीबा ने कहा, 'जहां दो देशों के बीच हमारा प्रभाव होता है वहां हम मदद करने की कोशश करते हैं. ताज़ा उदाहरण भारत और पाकिस्तान का है.'
उनसे जब पूछा गया कि क्या यूएई भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है तो उन्होंने कहा कि बिलकुल कर रहा है. उन्होंने कहा कि भले ही भारत और पाकिस्तान बहुत अच्छे दोस्त ना बनें लेकिन दोनों के बीच अगर बातचीत भी शुरू कराना ही यूएई का मकसद है.
इसी बीच समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि इस साल जनवरी में भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ और पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों के बीच दुबई में वार्ता हुई थी. ये जम्मू-कश्मीर में तनाव कम करने की कोशिश थी.
फिर संकट में प्रवासी मज़दूर

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल कोविड लॉकडाउन की वजह से गांव वापस लौटे प्रवासी मज़दूरों के हालात में कोई ख़ास सुधार नहीं हुआ है. अब फिर से लॉकडाउन की संभावनाओं के बीच प्रवासी मज़दूरों के लिए हालात और भी मुश्किल हो सकते हैं.
लेबर यूनियन नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि मार्च 2020 में वापस लौटे प्रवासियों की हालत में बहुत सुधार नहीं हुआ है. अब फिर से उन्हें काम छिनने का डर सता रहा है. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव अमरजीत कौर का कहना है कि मज़दूरों को लग रहा है कि यदि फिर से लॉकडाउन लगा तो वो फंस जाएंगे.
ऐसे में उन्होंने बड़े शहरों से गांव की तरफ पलायन शुरू कर दिया है. इसकी एक वजह ये भी है कि ठेके पर काम करवाने वाले ठेकेदार उन्हें लॉकडाउन के दौरान मज़दूरी देने को तैयार नहीं है.
अमरजीत कौर ने बताया कि यूनियन को मुंबई, दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र के शहरों से मज़दूरों के फिर से पलायन करने की रिपोर्टें मिल रही हैं.
कोरोना महामारी को देखते हुए महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. भारत में वायरस की दूसरी लहर के दौरान बड़ी तादाद में मामले सामने आ रहे हैं जिसके मद्देनज़र फिर से लॉकडाउन लगाए जाने की आशंकाएं पैदा हुई हैं.
अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी से चिंतित है भारतः रावत

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल विपिन रावत ने एक बयान में कहा है कि भारत अमेरिकी सैनिकों के अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाने को लेकर चिंतित है.
रावत ने ये भी कहा कि भारत चीन के ख़िलाफ़ डटकर खड़ा रहा है और उसे पीछे नहीं हटाया जा सकता है.
रावत ने कहा, 'भारत अपनी उत्तरी सीमाओं पर डटकर खड़ा रहा है और हमने दिखा दिया है कि हमें ज़बरदस्ती पीछे नहीं हटाया जा सकता है. हमने यथास्थिति बनाए रखते हुए दुनियाभर का समर्थन भी हासिल किया है.'
अफ़ग़ानिस्तान के बारे में बात करते हुए रावत ने कहा कि भारत की वहां शांति को लेकर चिंताएं हैं और भारत चाहता है कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति लौटे.
उन्होंने कहा कि यदि नेटो और अमेरिकी सैनिकों की वापसी से शांति आती है तो हमें ख़ुशी होगी लेकिन हमारी चिंता ये है कि इससे जो खालीपन पैदा होगा उससे दूसरी ताकतों को जगह नहीं मिलनी चाहिए.
रावत ने कहा कि भारत अफ़ग़ानिस्तान के विकास में हर संभव मदद करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि कई देश हैं जो अफ़ग़ानिस्तान में दाख़िल होने की ख़्वाहिश रखते हैं.
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