कोरोना के बीच कुंभ मेले में भीड़ पर उठे सवाल, प्रशासन ने खड़े किए हाथ

कुंभ मेला

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कोविड-19 संक्रमण के तेज़ी से बढ़ते मामलों के बीच उत्तराखंड के हरिद्वार में जारी कुंभ मेले में सोमवार को हज़ारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया.

सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिंदुओं की पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी में स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचे.

यहां व्यवस्था के काम में लगे अधिकारियों का कहना है कि भारी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से उन्हें कोरोना के कारण लगाई पाबंदियों का पालन करने में मुश्किलें पेश आ रही है.

हिन्दू धर्मावलंबियों का मानना है कि कुंभ के दौरान गंगा नदी में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

कुंभ मेला हर बारह सालों में एक बार होता है. ये इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में से किसी एक जगह होता है.

इस साल हरिद्वार में मेले का आयोजन ऐसे वक्त हो रहा है जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर का मुक़ाबला कर रहा है और यहां बीते कुछ दिनों से रोज़ाना बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

सात अप्रैल से देश में लगातार संक्रमण के एक लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं. 12 अप्रैल को देश में संक्रमण के 168,912 नये मामले दर्ज किए गए थे और 904 लोगों की मौत कोरोना से हुई. वहीं 11 अप्रैल को संक्रमण के 152,879 नये मामले और 10 अप्रैल को 145,384 नये मामले दर्ज किए गए थे.

जानकारों को स्थिति बिगड़ने का डर

स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों ने इससे पहले कार्यक्रम को रद्द करने की अपील की थी लेकिन सरकार ने ये कहते हुए मेले के आयोजन की अनुमति दी कि कोरोना के मद्देनज़र जारी किए गए सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाएगा.

हालाँकि सोमवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि नदी के घाटों पर सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों को लागू कर पाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो रहा है.

कुंभ मेला आईजी पुलिस संजय गुंजयाल ने कहा,"हम लोगों से लगातार कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए नियमों का पालन करने की अपील कर रहे हैं. लेकिन यहां काफी भीड़ है और चालान करना असंभव है."

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस जबरन लोगों को घाटों पर सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन करने के लिए कहती हैं तो यहां पर "भगदड़ जैसी स्थिति पैदा" हो सकती है.

पुलिस अधिकारी

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सोमवार को दो महीने चलने वाले कुंभ मेले सोमवती अमावस्या का दिन है. इस दिन गंगास्नान करने को बेहद पवित्र माना जाता है और बड़ी संख्या में लोग नदी में डुबकी लगाने पहुंचते हैं.

कुंभ मेले से पहले सरकार ने कहा था कि मेले में उन्हीं को आने की अनुमति दी जाएगी जिनकी कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव होगी और मेले में शिरकत करने वालों को कोरोना के कारण लागू किए गए सभी दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ेगा.

लेकिन मेले में आए कई जानेमाने साधु-संतों समेत कई लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.

इसके बाद सोमवार को हुए गंगास्नान के बाद चिंता जताई जा रही है कोरोना संक्रमण श्रद्धालुओं के बीच तेज़ी से फैल सकता है और ये भी संभव है कि ये वायरस यहां से लौटने वाले श्रद्धालुओं के साथ उनके गांवों और शहरों तक पहुंचे.

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भारत फिलहाल कोरोना महामारी की दूसरी लहर का मुक़ाबला कर रहा है. मिल रही रिपोर्टों के अनुसार देश के कई जगहों में अस्पतालों में बेड की कमी है. कई जगहों से जीवन बचाने वाली दवाओं की कमी की ख़बरें भी मिल रही हैं.

महाराष्ट्र में स्थिति अधिक भयावह है. पूरे देश में रोज़ाना कोरोना संक्रमण के जितने मामले दर्ज किए जा रहे हैं उसमें से 30 से 40 फीसदी केवल महाराष्ट्र में दर्ज किए जा रहे हैं.

कोरोना के तेज़ी से बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए महाराष्ट्र में रात का कर्फ्यू समेत कई पाबंदियां लगाई गई हैं. राज्य में लॉकडाउन लगाने को लेकर भी चर्चा जारी है और इस मुद्दे पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और आला अफ़सरों की बैठकों का दौर जारी है.

राजधानी दिल्ली में भी रात का कर्फ्यू लगाया गया है. उत्तर प्रदेश में अप्रैल के आख़िर तक स्कूल बंद करने की घोषणा की गई है. ऐसी स्थिति में कुंभ मेले के आयोजन को इजाज़त दिए जाने से जानकार नाराज़ हैं.

कुछ जानकारों का कहना है कि अगर कड़े कदम नहीं उठाए गए तो हालात और बिगड़ सकते हैं. जानकार कोरोना वैक्सीनेशन की मुहिम में तेज़ी लाने की सलाह दे रहे हैं और प्रशासन से दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील कर रहे हैं.

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण

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भारत सरकार ने कहा है कि वो दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने कोरोना महामारी को रोकने के लिए सबसे तेज़ी से लोगों को कोरोना वैक्सीन दी है.

सरकार ने कहा है कि उसने 85 दिनों में लोगों को वैक्सीन की 10 करोड़ डोज़ दी हैं जबकि अमेरिका ने इसके लिए 89 दिनों का वक़्त लिया और चीन ने ये काम 102 दिनों में किया.

टीकाकरण अभियान में और तेज़ी लाने के उद्देश्य से सरकार ने रविवार, 11 अप्रैल से बुधवार, 14 अप्रैल तक चार दिन का 'टीका उत्सव' मना रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे कोरोना के ख़िलाफ़ दूसरी बड़ी जंग की शुरुआत बताया है. उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि इस दौरान स्वयं जाकर टीका लगवाने में असमर्थ लोगों, पर्याप्त साधन या जानकारी के अभाव में टीका ना लगवा पाने वालों की मदद की जानी चाहिए.

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