पश्चिम बंगाल: 'सेना के नाम पर वोट' वाले चुनाव आयोग के विज्ञापन पर विवाद - प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल में अपने प्रिंट विज्ञापन में सुरक्षाबलों की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए लोगों से वोट डालने की अपील की.
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को अपने चुनावी कैंपेन में सुरक्षाबलों का ज़िक्र करने या उनके नाम पर वोट माँगने से मना करता है.
पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के मतदान के दिन यानी शनिवार को चुनाव आयोग का यह विज्ञापन प्रकाशित हुआ. विज्ञापन में 'अमर जवान ज्योति' का गहरा छायाचित्र और मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण का बनाया 'कॉमन मैन' दिखाया गया था.
विज्ञापन में 'कॉमन मैन' सैनिक की एक तस्वीर को श्रद्धांजलि दे रहा है. विज्ञापन में पूछा गया है: वो देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर देते हैं. आप देश के लिए वोट भी नहीं दे सकत?
इसके बाद विज्ञापन में कहा गया है, "मतदान न सिर्फ़ आपका अधिकार बल्कि आपका कर्तव्य भी है. निडर होकर वोट डालिए."
अख़बार के अनुसार इससे पहले चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और नेताओं को अपने चुनावी विज्ञापन, भाषणों या अभियानों में सैनिकों की तस्वीर इस्तेमाल करने या उनके नाम पर वोट न माँगने की नसीहत दी थी.
निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने स्वीकार किया है कि शायद ये पहली बार है जब इस तरह के विज्ञापन का इस्तेमाल किया गया है.
उन्होंने अख़बार से कहा, "चुनाव आयोग से अपने ख़ुद के नियमों का पालन करने की अपेक्षा तो होगी ही. आप पार्टियों को ऐसा करने से रोककर ख़ुद ऐसा नहीं कर सकते."
हालाँकि आयोग के एक मौजूदा वरिष्ठ अधिकारी ने विज्ञापन का बचाव किया. उन्होंने कहा, "हमारा मक़सद बिल्कुल अलग है. हम चुनावी फ़ायदे के लिए सुरक्षाबलों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारा मक़सद लोगों को वोट देने के लिए प्रेरित करना है."

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दिहाड़ी मज़दूर की बनाई लाइब्रेरी में आग, 11 हज़ार किताबें जलीं
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में ख़बर है कि मैसूर में एक दिहाड़ी मज़दूर की मेहनत से इकट्ठी की गई किताबों को आग लगा दी गई.
अख़बार लिखता है कि सैयद इशाक़ के मन में किताबों के लिए बहुत सम्मान है और उन्होंने 11,000 किताबें इकट्ठी की थी. अपनी दिहाड़ी की कमाई से ही उन्होंने इन किताबों को रखने के लिए छोटी-सी लाइब्रेरी भी बनाई थी लेकिन शुक्रवार सुबह किसी ने इसमें आग लगा दी.
सैयद इशाक़ की लाइब्रेरी में आग लगाने की घटना की चौतरफ़ा निंदा हो रही है और कुछ नागरिक समूह लाइब्रेरी को दोबारा बनाने के लिए आगे आए हैं.
63 वर्षीय इस बुजुर्ग की लाइब्रेरी में भगवद् गीता, बाइबल और कुरान समेत कई धार्मिक किताबें भी थीं. उन्होंने इस लाइब्रेरी को इलाके में रहने वाले लोगों के लिए भी खोल रखा था. लोगों के पढ़ने के लिए लाइब्रेरी में रोज़ाना 22 अख़बार भी आते थे.
पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की है और जाँच शुरू कर दी है. डीसीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रकाश गौड़ा ने अख़बार को बताया, "शुरुआती जाँच से ऐसा लगता है कि कुछ लोगों को सैयद इशाक़ का काम पसंद नहीं था और इसीलिए उन्होंने लाइब्रेरी को जलाने की योजना बनाई."

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अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुरूप था अमेरिकी नौसेना का अभियान: पेंटागन
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा है कि उसकी नौसेना का भारत के विशिष्ट आर्थिक ज़ोन में अभियान अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के अनुरूप है.
इस हफ़्ते अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ जॉन पॉल जोन्स के बिना अनुमति के लक्षद्वीप के पास विशिष्ट आर्थिक ज़ोन से गुजरने पर भारत ने विरोध दर्ज कराया था.
पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने इसके जवाब में कहा, "अमेरिकी नौसेना के जहाज़ जॉन पॉल जोन्स ने मालदीव के नज़दीक सामान्य रूप से अभियान किया और यह उसके 'फ़्रीडम ऑफ़ नैविगेशन' का हिस्सा था."
किर्बी ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुरूप है और अमेरिका अपने अधिकारों के साथ-साथ ज़िम्मेदारी को भी बनाए रखेगा.
वहीं, भारत का मानना है समुद्री क़ानून पर संयुक्त राष्ट्र के समझौते के तहत दूसरे देशों को किसी तटीय देश की अनुमति के बिना उसके विशेष आर्थिक ज़ोन में सैन्य अभ्यास करने और ख़ासकर हथियारों और विस्फोटक के इस्तेमाल का अधिकार नहीं है.
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