मेट्रो मैन श्रीधरन का मानना- मोदी सरकार की बेवजह आलोचना करने वाले देशभक्त नहीं

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पलक्कड़, केरल
केरल के पलक्कड़ विधानसभा क्षेत्र के पल्लंचतनूर गांव में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का एक मिला-जुला समूह अपने नेता की एक झलक पाने के लिए लंबा इंतज़ार कर रहा है. जिस इंसान ने समय से पहले परियोजनाओं को पूरा करके अपनी साख बनाई, वे सूर्यास्त के समय आयोजित दिन की अपनी पहली बैठक के लिए क़रीब एक घंटे लेट थे.
सूरज पहले ही ऊंचे ताड़ के पेड़ों के पीछे जा चुका था और एक नरम झोंके माहौल को ठंडा कर दिया था. शाम की इस सभा ने पल्लंचतनूर की एकरसता को तोड़ दिया था और वहां मौजूद हर शख़्स अच्छे मूड में लग रहा था.
डॉक्टर ई श्रीधरन जब अपनी कार से वहां पहुंचे तो भीड़ ने 'मेट्रो मैन, मेट्रो मैन' के नारे के साथ उनका ज़ोरदार स्वागत किया.
लोग भी उनसे मिलने के लिए आपस में उलझ गए. पलक्कड़ के 88 वर्षीय बीजेपी प्रत्याशी दुबले-पतले से हैं और उन्हें पैदल चलना पसंद है.
ई श्रीधरन ने माकपा के नेतृत्व वाली वामपंथी दलों की कथित 'भ्रष्ट सरकार' को हराने के लिए भीड़ से उन्हें और अपनी पार्टी को वोट देने की अपील की.
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी साफ़ छवि से पार्टी को फ़ायदा होगा. वहीं श्रीधरन ने जब बोला कि उन्होंने कई मेट्रो बनाई हैं और अब केरल में एक स्वच्छ सरकार बनाएंगे तो लोगों ने उनके पक्ष में नारे लगाए.

श्रीधरन का ख़ेमा आश्वस्त नहीं दिखता
दिल्ली सहित देश के अन्य शहरों में मेट्रो नेटवर्क बनाने के लिए डॉ. ई श्रीधरन को लोग प्यार से 'मेट्रो मैन' कहते हैं.
पूरे देश में उनके लाखों प्रशंसक हैं. लेकिन क्या पलक्कड़ के लोग भी उनसे इतना प्यार करते हैं कि वे यहां से जीत जाएं.
हालांकि इस पर उनका ख़ेमा आश्वस्त नहीं दिखा. उनके प्रचार के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से आए एक विचारक ने मुझसे पूछा कि क्या उनके प्रत्याशी को इस बार एक मौका मिलेगा. इसके बाद तुरंत ही उन्होंने जोड़ा कि लोगों में तो ई श्रीधरन को लेकर स्वीकृति के भाव दिख रहे हैं.
इस गाँव की एक महिला ने हमसे कहा कि वह स्वच्छ छवि के चलते ई श्रीधरन को वोट करेंगी. वहीं 2016 में कांग्रेस को वोट देने वाले एक बूढ़े शख़्स ने भी उनका समर्थन करते हुए कहा कि वे निश्चित तौर पर श्रीधरन को वोट देंगे. हालांकि इस गाँव में ऐसे लोग अल्पमत में दिखे. यह गांव कांग्रेस पार्टी का गढ़ है.

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तमिलनाडु के साथ लगने वाली पलक्कड़ सीट वास्तव में हिंदू बहुल है. लेकिन इसके बावजूद 2016 में यहां से कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी शफी पेरंबिल ने जीत दर्ज की थी. 2019 लोकसभा चुनाव में भी यहां से कांग्रेस को ही जीत मिली थी.
समूचा चुनाव क्षेत्र डॉक्टर ई श्रीधरन और नरेंद्र मोदी के पोस्टरों और उनके पक्ष में नारों से पटा हुआ है. यहां पोस्टर से बाहर झांकते मेट्रो मैन के मुस्कुराते चेहरे से बचना मुश्किल है.
श्रीधरन खुद अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिखे. वह दावा करते हैं कि उनकी पार्टी का लक्ष्य किंगमेकर बनने का है.
बीबीसी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ''हम अच्छी-ख़ासी सीटें जीतने में सफल रहेंगे. मेरा मानना है कि इस बार भाजपा क़रीब 40 सीटों तक जीत लेगी. हम 75 सीटें तक जीत सकते हैं. हम सत्ता में नहीं भी आ पाए तो कम से कम किंगमेकर तो ज़रूर बन जाएंगे. यह हम ही तय करेंगे कि केरल को कौन चलाएगा."
हालांकि इतनी सीटों की चाह रखना बेहद आशावादी हो जाना है. पार्टी के कई नेताओं ने पहचान न बताने की शर्त पर मुझसे कहा कि यदि बीजेपी दोहरे अंकों यानी 10 तक भी पहुंच गई तो वे जश्न मनाएंगे.
विश्लेषकों और अनुभवी पत्रकारों का मानना है कि पार्टी को दो या तीन सीटों के लिए भी संघर्ष करना पड़ सकता है. इससे पहले 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार राज्य की कोई सीट (नेमोम) जीतने में कामयाब हुई थी.

'रैलियों का आनंद ले रहा हूं'
राज्य में एकमात्र चरण में छह अप्रैल को होने वाले चुनाव में बीजेपी की संभावनाएं बढ़ाने के लिए बेक़रारी दिखाते हुए केंद्रीय नेतृत्व ने साफ छवि के धनी डॉ. ई श्रीधरन को चुना है.
वास्तव में 88 साल की उम्र में किसी के करियर को बदलना बेहद कठिन होता है. ऐसे में अब उन्हें राजनीति में आकर कैसा महसूस हो रहा है. उन्होंने कहा, "इतनी रैलियों को संबोधित करना थोड़ा तनावपूर्ण होता है, लेकिन मैं इसका आनंद ले रहा हूं."
देश भर में उनके लाखों प्रशंसक हैं लेकिन वे सबसे ज़्यादा किसे पसंद करते हैं? हालांकि उनसे यह सवाल पूछने की ज़रूरत नहीं है. उनके साथ जो भी थोड़ा समय बिताएगा, उसे पता चल जाएगा कि मेट्रो मैन कट्टर मोदी समर्थक हैं. उनके अनुसार जो कोई भी प्रधानमंत्री या उनकी सरकार या बीजेपी की बेवजह आलोचना करता है, वो देशभक्त नहीं है.
वो कहते हैं, "मोदी सरकार ने लोगों का जीवन स्तर और देश की छवि सुधारने के लिए बहुत सारे नए विचार और क़दम उठाए हैं. बहुत सारी चीज़ें हुई हैं. लेकिन कुछ लोग हैं जो हर चीज़ का विरोध करते हैं."
मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि मोदी की आलोचना देश-विरोधी है? मेट्रोमैन ने ज़ोर से 'हां' करते हुए कहा, "वे लोग देशप्रेमी नहीं हैं. असल में वे केवल बीजेपी के ख़िलाफ़ हैं. वे नहीं चाहते कि बीजेपी सत्ता में आए."
उन्होंने आगे कहा कि बिना वजह सरकार की आलोचना करना भी देश के ख़िलाफ़ है.
श्रीधरन के अनुसार, "अगर रचनात्मक आलोचना होती है तो कोई भी इसे मानेगा. लेकिन आलोचना यदि केवल सरकार की छवि धूमिल करने के लिए की जा रही है, ख़ासकर अंतरराष्ट्रीय मामलों में, तो यह देश के ख़िलाफ़ है. वे वास्तव में देश को प्यार करने वाले लोग नहीं हैं."

मोदी को वाजपेयी-मनमोहन से भी ऊंचा स्थान देते हैं श्रीधरन
डॉक्टर श्रीधरन एक ईमानदार और सख़्त पेशेवर के बतौर जाने जाते हैं. उन्होंने दिल्ली मेट्रो जैसे कई प्रोजेक्ट को समय से पहले पूरा किया. ज़्यादा समय और धन ख़र्च किए बिना इंजीनियरिंग चमत्कार माने जाने वाले कोंकण रेलवे जैसी कठिन परियोजना को पूरा करने का भी श्रेय उन्हें मिलता है.
उनके बारे में माना जाता है कि वे राजनीतिक हस्तक्षेप को कभी बर्दाश्त नहीं करते थे. यह भी कहा जाता है कि अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री भी उनका सम्मान करते थे. दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित भी उनके प्रशंसकों में शामिल थीं.
लेकिन डॉ. श्रीधरन ने नरेंद्र मोदी को इन सबसे उच्च स्थान दिया है और उन्हें इनकी आलोचना तक पसंद नहीं है. वह उन लोगों का सम्मान करते हुए नहीं दिखते जो मानते हैं कि मोदी के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सिद्धांतों को ख़त्म किया जा रहा है.
अमेरिकी संस्था 'फ्रीडम हाउस' और स्वीडन की 'वीडीएम' ने हाल में भारत में लोकतंत्र के क्षरण पर चिंता जताई है. इस पर श्रीधरन ने कहा कि ये सभी भारत में जो हुआ है उससे बहुत जलते हैं.
उन्होंने कहा, "क्या आप जानते हैं कि 10 साल पहले भारत की मिलिट्री पावर क्या थी? और आज क्या है? इस बारे में हमसे सभी ईर्ष्या करते हैं. आज भारत दुनिया का चौथा सबसे ताक़तवर मिलिट्री पावर है.''
हालांकि आलोचक मानते हैं कि मोदी के शासनकाल में भारत में लोकतंत्र कमज़ोर हुआ है. इनके राज में असहमति की आवाज़ को दबाया जा रहा है.
इस मामले में श्रीधरन कहते हैं, "यह बिल्कुल ग़लत है. यह सब उनका निजी नज़रिया है. आमतौर पर हमारे नागरिकों की राय सबसे अहम हैं. आख़िर भारत ने मोदी को दूसरी बार फिर से क्यों चुना?"

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'किसान आंदोलन बिचौलियों का है प्रदर्शन'
डॉ. श्रीधरन किसानों के विरोध खारिज़ करते हुए आंदोलनकारियों को मोदी विरोधी क़रार देते हैं. उनकी नज़र में विरोध करने वाले बिचौलिए हैं किसान नहीं.
मेट्रो मैन पूछते हैं, "क्या आंदोलनकारियों में से किसी ने तीनों कानूनों को देखा है? क्या वे एक भी किसान विरोधी प्रावधान के बारे में बता सकते हैं. इसके बाद भी आंदोलन चल रहा है. मेरी राय में आंदोलन करने वाले वास्तव में किसान नहीं, बिचौलिए हैं. इससे किसानों को बहुत नुक़सान हुआ है."
मालूम हो कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हज़ोरों लोग पिछले चार महीनों से खेती के तीन क़ानूनों के खिलाफ़ दिल्ली की सीमा पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.
आंदोलनकारियों का मानना है कि ये क़ानून किसान विरोधी हैं. इस पर श्रीधरन का अनुमान है कि यह आंदोलन अगले छह महीने में ख़त्म हो जाएगा, क्योंकि आंदोलन का मक़सद केवल मोदी विरोध है.

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पिछले महीने जब उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, तब डॉ. श्रीधरन ने मोदी सरकार की 'मेट्रो नीति' और रेलवे के कुछ हिस्सों के निजीकरण करने की मंशा का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि इस बारे में उनका रुख़ आज भी वही है.
उन्होंने कहा, "रेलवे में इतना समय गुज़ारने के चलते मेरा अनुभव अलग है. सरकार जिस तरह से रेलवे के सभी हिस्सों का निजीकरण चाह रही है, मैं उससे असहमत हूँ. मेट्रो मैन के रूप में मैं वर्तमान मेट्रो नीति से भी सहमत नहीं हूं. पिछले तीन-चार सालों से मैं सरकार की मेट्रो नीति के खिलाफ़ लड़ रहा हूं. इस गलत नीति के कारण ही सभी शहरों तक मेट्रो ले जाने में हम नाकाम रहे हैं. हमने अपनी असहमतियों को लिखकर प्रधानमंत्री को भेजा है. उन्होंने अधिकारियों से मेरी आपत्तियों की जांच करने को कहा है.''
बीजेपी में शामिल होते समय पार्टी के सीएम दावेदार या मुख्य चेहरे के रूप में उन्हें पेश किया जा रहा था, लेकिन अब इस बारे में पार्टी में कोई बात नहीं कर रहा है. आख़िर क्यों? थोड़ा रुकने के बाद मेट्रो मैन ने कहा, "मैं सीएम बनने के लिए बीजेपी में कभी शामिल नहीं हुआ. पार्टी ने हमसे कोई वादा भी नहीं किया है. मैं यहां इसलिए आया हूं कि राज्य की सेवा करने के लिए मेरे लिए बीजेपी सबसे अच्छी पार्टी है."
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