सचिन वाझे, परमबीर सिंह, अनिल देशमुख- इनसे जुड़े वो सवाल, जिनके जवाब मिलने अभी बाक़ी हैं

अनिल देशमुख

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

महाराष्ट्र में चल रहे ताज़ा सियासी घमासान की शुरुआत तो देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर से हुई थी.

लेकिन इसमें कब सचिन वाजे की एंट्री हुई, कब मामला पुलिस कमिशनर की कुर्सी को छूते हुए गृह मंत्री की कुर्सी तक पहुँच गया, लोगों को पता ही नहीं चला.

अब बात महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन में दरार तक पहुँच गई है. अपराध के इस मामले पर राजनीति अब हावी होती नज़र आ रही है.

सचिन वाझे, मनसुख हिरेन, परमबीर सिंह, अनिल देशमुख - ये वो नाम हैं, जो रोज़ इस मामले में मीडिया में सुनाई और दिखाई दे रहे हैं. ऐसा लगता है कि इन्ही चेहरों के बीच सिमट कर रह गया है पूरा केस.

लेकिन इस मामले के एक महीने बाद भी कुछ ऐसे बुनियादी सवाल हैं, जिनके जवाब मिलना बाक़ी हैं.

25 फरवरी से अब तक क्या-क्या हुआ?

उन सवालों को जानने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि पिछले एक महीने में पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

25 फरवरी 2021 - रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास एक लावारिस एसयूवी (स्कोर्पियो) खड़ी मिली थी. इस एसयूवी में जिलेटिन की छड़ें मिली थीं. राहत की बात थी कि वो छड़े जुड़ी नहीं थी, इस वजह से बम की तरह उनका इस्तेमाल नहीं हो सकता था. साथ ही स्कोर्पियो के पीछे एक इनोवा भी खड़ी थी.

5 मार्च 2021 - मनसुख हिरेन की मौत की ख़बर आई. मुंबई पुलिस अपनी जाँच में इस नतीजे पर पहुँची थी कि मनसुख हिरेन ही तब उस स्कोर्पियो के मालिक थे. हालाँकि बाद में एक थ्योरी ये भी सामने आई कि पैसा ना चुका पाने की एवज में उन्होंने वो गाड़ी एक दूसरे व्यक्ति से ली थी.

8 मार्च 2021 - एंटीलिया मामले की जाँच एनआईए को सौंप दी गई.

13 मार्च 2021 - एनआईए ने 12 घंटे की पूछताछ के बाद मुंबई पुलिस के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर सचिन वाझे को गिरफ़्तार किया.

14 मार्च 2021 - एनआईए को इनोवा कार, मुंबई पुलिस के मेन्टेनेंस दफ़्तर से मिली. मनसुख की पत्नी ने आरोप लगाया कि वाझे ही स्कोर्पियो गाड़ी का इस्तेमाल नवंबर 2020 से फरवरी 2021 तक कर रहे थे.

17 मार्च 2021 - मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का तबादला हुआ.

20 मार्च 2021 - परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखी और अनिल देशमुख पर निशाना साधा.

22 मार्च 2021 - परमबीर सिंह सीबीआई जाँच की माँग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे.

पिछले एक महीने में इतना कुछ हुआ, लेकिन कुछ बुनियादी सवालों के ही जवाब अब तक नहीं मिले हैं.

ये रिपोर्ट उन्हीं सवालों को टटोलने की एक कोशिश है. इसके लिए हमने बात की पुलिस महकमें में ऊँचे पदों पर रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों से, ताकि उन सवालों तक पहुँच सकें.

परमबीर सिंह

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सवाल 1- मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिलेटीन स्टिक रखने का उद्देश्य क्या था?

25 फरवरी को मुकेश अंबानी के मुंबई वाले घर के बाहर एक स्कोर्पियो गाड़ी मिली, जिसमें 20 जिलेटिन की छड़े थी. एक महीने बाद ना तो मुंबई पुलिस, ना तो एनआईए ना तो मुंबई एटीएस की तरफ़ से इस बारे में कोई पुख़्ता जानकारी मिल पाई है कि ऐसा करने वाले की आख़िर मंशा क्या थी?

बीबीसी से बातचीत में मुंबई के पूर्व डीजीपी पीएस पसरिचा ने कहा, "अब तक यही नहीं पता चला कि पूरे प्लॉट का मक़सद क्या था? 20 जिलेटिन की छड़ों से पूरी बिल्डिंग को कोई नुक़सान नहीं होने वाला था. ये इतनी हाई इंटेंसिटी का विस्फोट नहीं कर सकता था. ज़्यादा से ज़्यादा दीवारों को नुक़सान होता, आस-पास के लोगों में एक डर पैदा कर सकता था.

लेकिन ये डर कौन और किसके ज़हन में पैदा करना चाहता था, ये 'हेतु' पता लगाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है. इस मक़सद का पता चलते ही मनसुख हिरेन की मौत, पुलिस वालों और नेताओं की मिली भगत का पता चल सकता है."

एक महीने बाद भी इसका जवाब नहीं मिला है. यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग कई थ्योरी सामने ज़रूर आई है. कोई कह रहा है कि इसके पीछे पैसा वसूली का मक़सद था, कोई कह रहा है कि सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए पूरी क़वायद की गई है- लेकिन इन तमाम थ्योरी के पीछे किसी भी जाँच एजेंसी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया. सब वजहों का आधार अटकलें ही हैं.

मुकेश अंबानी का घर एंटीलिया

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सवाल 2 : मुकेश अंबानी के घर को क्यों टारगेट किया गया?

ये भी बहुत चौंकाने वाली बात है कि देश के इतने बड़े उद्योगपति के घर के बाहर सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया, धमकी भरी चिट्ठी मिली, ख़ुद एंटीलिया के सिक्योरिटी गार्ड ने सबसे पहले स्कोर्पियो गाड़ी के बारे में पुलिस को ख़बर की.

लेकिन अभी तक इस बारे में एक सूचना सामने नहीं आई है कि आख़िर टारगेट उनके घर को ही क्यों किया गया? क्या अपराधी किसी धोखे का शिकार हो गए? अपराधी कुछ और करना चाहता था और कुछ ग़लत हो गया?

साजिश के लिए मुंबई में मुकेश अंबानी का घर ही क्यों चुना गया, वहाँ और दूसरे बड़े नामचीन लोग रहते हैं, फिल्मी सितारे, खेल जगत से जुड़े लोग, दूसरे उद्योगपति रहते हैं, सभी को छोड़ कर मुकेश अंबानी को ही क्यों टारगेट किया गया, इस सवाल का जवाब भी अभी तक नहीं मिला है.

वीडियो कैप्शन, मुकेश अंबानी के घर के पास मिली विस्फोटक सामग्री

सवाल 3 : सचिन वाझे का निलंबन वापस कैसे, क्यों और किसके कहने पर हुआ?

मुंबई के पूर्व में पुलिस कमिश्नर रहे आईपीएस आफ़िसर जूलियो रिबेरो ने एक निजी चैनल से बातचीत में इस केस से जुड़े कई ऐसे ही सवाल उठाए हैं.

ग़ौरतलब है कि परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिख कर गृह मंत्री पर टारगेट देकर वसूली करवाने के आरोप लगाए थे.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने उन आरोपों की जाँच करने के लिए जूलियो रिबेरो का ही नाम सुझाया था.

रिबेरो ने इससे इनकार कर दिया था. लेकिन सोमवार को निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने पूरी जाँच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े किए हैं.

सचिन वाझे के मामले में उन्होंने कहा, "16 साल के निलंबन को अचानक किसके आदेश पर वापस लिया गया. कैसे उनकी पुलिस फ़ोर्स में वापसी की बात केवल कमिश्नर और एडिशनल सेक्रेटरी गृह विभाग को ही पता थी. ये ना केवल असामान्य बात थी बल्कि अवैधानिक भी थी."

स्कोर्पियो कार

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सवाल 4 : रोज़ मिलती नई गाड़ियों का राज़ क्या है?

अब मनसुख हिरेन मौत मामले की जाँच कर रही मुंबई एटीएस को गोवा से वोल्वो गाड़ी मिलने की बात सामने आ रही है. फ़िलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

इसके पहले स्कोर्पियो और इनोवा की बात सामने आई थी.

इसका जवाब अभी तक नहीं मिला है कि आख़िर स्कोर्पियो और इनोवा, दोनों गाड़ियाँ पुलिस की ही थीं? इन्हें कौन चलाया करता था? मुंबई में गाड़ियों के नंबर प्लेट और चेसिस नंबर बदलना इतना आम क्यों और कैसे है?

मंगलवार को मुंबई एटीसी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर सचिन वाझे की कस्टडी एनआईए से माँगने की बात कही है. हालाँकि ये भी सच है कि अब मनसुख हिरेन मौत मामले की आधिकारिक जाँच एनआईए के पास है.

सवाल 5:वाझे कैसे 6 रिपोर्टिंग लाइन को दरकिनार करते हुए कमिश्नर को रिपोर्ट करते रहे?

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर जूलियो रिबेरो ने ये भी सवाल उठाया है कि सचिन वाझे एक असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर ही थे, लेकिन सीधे पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट करते थे.

दोनों पदों के बीच 6 रिपोर्टिंग रैंक और आते हैं. इतना ही नहीं असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर होते हुए क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट की कमान उनको सौंपी गई थी. आम तौर पर क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट को हेड करने की ज़िम्मेदारी सीनियर इंस्पेक्टर को दी जाती है.

आख़िर ऐसा कैसे हो रहा था?

ये तमाम सवाल हैं, जिससे पता चलता है कि मुंबई के पुलिस महकमें के अंदर अनुशासन की कितनी कमी थी. परमबीर सिंह के पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए ये कैसे संभव हुआ, इस सवाल का जवाब ढूँढने की ज़रूरत है, जो अब तक नहीं पता चला है.

सचिन वाजे

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सवाल 6 : पुलिस-अपराधी-नेता के बीच साँठगाँठ

परमबीर सिंह ने चिट्ठी लिख कर जो आरोप गृह मंत्री पर लगाएं हैं, उसके बाद उन पर भी कई सवाल खड़े होते हैं.

पूर्व आईपीएस अधिकारी और पूर्व सीआईसी यशोवर्धन आज़ाद कहते हैं, "मामला अभी तक इसलिए भी फँसा हुआ है, क्योंकि सचिन वाझे ने एनआईए कस्टडी में क्या बयान दिया है, ये आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है. बहुत कुछ उनके बयान पर निर्भर करता है. साफ़ बात है कि वाझे ने इस पूरी घटना को अंजाम अकेले नहीं दिया. इसके पीछे पुलिस अधिकारियों का सपोर्ट था या सत्ता में बैठे नेताओं का भी, अब वो किसका नाम लेते हैं, ये देखना होगा. तभी पता चलेगा कि मुंबई में पुलिस अपराधी और नेताओं का नेक्सस किस लेवल का था."

वे कहते हैं कि वाझे को जिस तरह सर्विस में वापस लिया गया, वो अकल्पनीय है. वाझे पर मर्डर जैसे संगीन आरोप थे, वो शिवसेना में रहे, वो निलंबित थे, राज्य के गृह मंत्रालय विभाग के अफ़सर ने इनके लिए नोटशीट लिखी, सत्ता में बैठे नेताओं ने सपोर्ट किया. इन सबका मतलब ही ये हैं कि वाझे की नज़दीकी नेताओं से थी. वो नेताओं से मिलते रहते थे.

उन्होंने कहा, "पूर्व पुलिस कमिश्नर ने चिट्ठी लिख कर जो आरोप गृह मंत्री पर लगाएं हैं, उसकी जाँच होनी चाहिए. हालाँकि उनकी चिट्ठी के बाद परमबीर सिंह की साख भी ज़रूर कम हुई है. वो इतने दिनों तक चुप क्यों रहे. लेकिन चिट्ठी में जो तथ्य दिए हैं, उनको साबित करने या ख़ारिज करने की ज़रूरत तो है. इन सवालों के जवाब तक ही मिलेंगे जब कोर्ट के निर्देश पर पूरे प्रकरण की जाँच हो."

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