एंटीलिया केस: सचिन वाझे ने लिखा- अब जाने का वक़्त क़रीब- प्रेस रिव्यू

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राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार शाम मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाझे से 12 घंटे तक पूछताछ करने के बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है.
वाजे के ख़िलाफ़ आईपीसी की धाराओं 285, 465, 473, 506(2), 120 B के तहत केस दर्ज किया है.
अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, एनआईए के दक्षिण मुंबई स्थित दफ़्तर में जाने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक संदेश प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनके साथी पुलिस अधिकारी उन्हें फंसाने की कोशिश कर रहे हैं.
संदेश के अंत में उन्होंने ये भी लिखा कि "दुनिया को अलविदा कहने का वक़्त नज़दीक आ रहा है."
उद्धव ठाकरे सरकार ने पिछले शुक्रवार को सचिन वाजे को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट से बाहर किया था.
राज्य सरकार ने ये क़दम तब उठाया था जब थाणे निवासी मनसुख हिरेन की कथित हत्या में वाजे की कथित भूमिका होने की बात सामने आ रही थी.
इसके साथ ही मुकेश अंबानी के घर के बाहर बरामद की गई विस्फोटक से लदी एसयूवी के वहाँ पहुँचने में वाझे की कथित भूमिका सामने आ रही है.
लेकिन एनआईए की पूछताछ शुरू होने से पहले वाझे ने अपने वॉट्सऐप पर एक संदेश लगाया हुआ था जिसमें लिखा था -
"3 मार्च, 2004. सीआईडी के साथी अफसरों ने मुझे एक झूठे केस में गिरफ़्तार किया. उस गिरफ़्तारी की वजह आज तक स्पष्ट नहीं हुई है. मुझे लग रहा है कि इतिहास ख़ुद को दोहरा रहा है. मेरे साथी अधिकारी मुझे फिर झूठे केस में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बार थोड़ा अंतर है. तब मेरे पास शायद उम्मीद, धैर्य, जीवन और सर्विस के 17 साल थे. अब मेरे पास 17 सालों का जीवन, सर्विस और जीने का धैर्य नहीं बचा है. मुझे लगता है कि दुनिया को अलविदा कहने का वक़्त नज़दीक आ रहा है."
इस संदेश में वाझे ने 2004 के उस वाक़ये का ज़िक्र किया है जिसमें हिरासत में एक मौत की वजह से उन्हें सालों तक निलंबन झेलना पड़ा था. उन्हें पिछले साल ही नौकरी पर वापस बुलाया गया है.
एनआईए ने मुंबई पुलिस के दो सह-आयुक्तों नितिन अलकनुरे और श्रीपथ काले को बुलाया था. अलकनुरे विस्फोटक से लदी एसयूवी मामले में जाँच अधिकारी थे. वहीं श्रीपथ काले कथित हिरेन हत्याकांड में जांच अधिकारी हैं. एनआईए रविवार सुबह सचिन वाजे को अदालत में पेश कर सकती है.

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सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ एक महिला जज
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा है कि देश की सर्वोच्च अदालत में सिर्फ़ एक महिला जज का होना काफ़ी चिंता की बात है.
अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, जस्टिस चंद्रचूड़ ने ये बात सुप्रीम कोर्ट यंग लॉयर फोरम द्वारा जस्टिस इंदू मल्होत्रा के सम्मान में आयोजित किए गए विदाई समारोह में कही है.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदू मल्होत्रा रिटायर हो गई हैं और उनके बाद सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ़ एक महिला जस्टिस इंदिरा बनर्जी बची हैं जो कि अगले साल सितंबर में रिटायर हो जाएंगी.
जस्टिस इंदू मल्होत्रा पहली ऐसी महिला जज थीं जो कि बार से सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं. और वह सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने वाली सातवीं महिला जज थीं.

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डीजीसीए का आदेश, फ़्लाइट से उतारा जाए ठीक से मास्क ना पहने व्यक्ति
केंद्र सरकार ने बीते शनिवार एयरपोर्ट प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि विमान के अंदर या एयरपोर्ट परिसर में कोविड नियमों का पालन नहीं करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए.
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, डीजीसीए ने कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को विमान से उतारा जाए और सुरक्षाबलों के हवाले किया जाए.
डीजीसीए ने अपने आदेश में लिखा है, "एयरपोर्ट निदेशक और टर्मिनल प्रबंधक स्थितियों के अनुसार ये सुनिश्चित करें कि सभी यात्री ठीक से मास्क पहनें और एयर पोर्ट परिसर में भी सोशल डिस्टेंस का ख्याल रखें. अगर कोई यात्री कोविड- 19 प्रोटोकॉल का पालन न करे तो पर्याप्त चेतावनी के बाद उन्हें सुरक्षा एजेंसी को सौंपा जा सकता है. अगर ज़रूरत पड़े तो उन पर क़ानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है."
खालिस्तान समर्थक संगठन ने यूएन को दिया सात लाख का दान
संयुक्त राष्ट्र को बीती एक मार्च को भारत की ओर से प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थित संगठन सिख फोर जस्टिस की ओर से सात लाख रुपए की डोनेशन दी गई है.
अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, सिख फोर जस्टिस संगठन इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा किसान आंदोलनकारियों के साथ ग़लत व्यवहार की जाँच के लिए जाँच आयोग गठित करवाने के लिए प्रयास कर रहा है.
जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के दफ़्तर के प्रवक्ता ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है, "हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि एक मार्च को एसएफजी संगठन का प्रतिनिधित्व करते हुए एक व्यक्ति ने हमारे ऑनलाइन डोनेशन फंक्शन की मदद से दस हज़ार अमेरिकी डॉलर की डोनेशन दी है. हम तब तक ऑनलाइन दी गई डोनेशन को वापस नहीं करते हैं जब तक कि डोनेशन देने वाला व्यक्ति या संगठन संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित संस्थाओं की सूची में न हो."
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