परमबीर सिंह के 'लेटर बम' से महाराष्ट्र की शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार कितनी परेशान

अनिल देशमुख

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    • Author, टीम बीबीसी हिंदी
    • पदनाम, दिल्ली

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जमकर सियासी हलचल हो रही. एक तरफ़ महाराष्ट्र सरकार गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफ़े के दबाव में है, तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र एटीसी ने मनसुख हीरेन के केस में एक बड़ी सफलता पाने का दावा किया है.

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का पत्र सामने आने के बाद महाराष्ट्र में विरोध प्रदर्शन, बयानबाज़ी, इस्तीफ़े की मांग, बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ दिनभर महाराष्ट्र में सरगर्मियाँ तेज़ रहीं.

अब तो परमबीर सिंह अपने आरोपों के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुके हैं.

20 मार्च को परमबीर सिंह का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखा एक पत्र सामने आया था. पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अनिल देशमुख ने शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हर महीने 100 करोड़ रुपये की वसूली का टार्गेट दिया था.

ये आरोप लगने की देर थी कि विपक्ष में बैठी बीजेपी ने अनिल देशमुख से तुरंत इस्तीफ़ा मांगना शुरू कर दिया. लेकिन आरोपों से घिरे गृह मंत्री अनिल देशमुख के बचाव में खड़े हो गए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार. देशमुख शरद पवार के क़रीबी माने जाते हैं.

वहीं, इसी बीच मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक रखने और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में भी एक नया मोड़ आया. इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

मुकेश अंबानी के घर के बाहर जिस स्कॉर्पियो गाड़ी में विस्फोटक मिले थे, उसके मालिक मनसुख हिरेन की कुछ दिनों बाद मौत हो गई थी. मनसुख हिरेन का शव पाँच मार्च को ठाणे में मिला था.

मुंबई एटीएस ने इस मामले को सुलझाने का दावा किया है. इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

कौन हैं दो लोग

परमबीर सिंह

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गिरफ़्तार किए गए लोगों में एक शख़्स निलंबित पुलिस कर्मचारी विनायक शिंदे हैं और दूसरा एक बड़ा बुकी नरेश है.

इन दोनों को ही कोर्ट ने 30 मार्च तक एटीएस की हिरासत में भेज दिया है.

विनायक शिंदे को लखनभईया एनकाउंटर मामले में उम्रक़ैद की सज़ा हो चुकी है. बताया जा रहा है कि 2020 में परोल पर रिहा होने के बाद वो सचिन वाझे के संपर्क में थे.

वीडियो कैप्शन, मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाझे अंबानी मामले में कैसे फंसे?

खास बात ये भी है कि इस मामले को एनआईए को देने के आदेश मिलने के कुछ घंटों बाद ही एटीएस को इसे सुलझाने में सफलता मिल गई.

एटीएस में आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे की निगरानी में इस मामले की जांच चल रही थी. उन्होंने एक फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए मामला सुलझने की जानकारी दी.

शिवदीप लांडे ने लिखा, “अति संवेदनशील मनसुख हिरेन मर्डर केस की गुत्थी सुलझी. मैं अपने पूरे एटीएस पुलिस फ़ोर्स के सभी साथियों को दिल से सैल्यूट करता हूँ, जिन्होंने पिछले कई दिनों से रात-दिन एक करके इस केस में न्यायपूर्ण तरीक़े से परिणाम निकाला. ये केस मेरे पुलिस करियर के अब तक के सबसे जटिल केस में से एक रहा.”

कौन हैं शिवदीप लांडे

इस ख़बर के साथ ही शिवदीप लांडे भी चर्चा में आ गए. शिवदीप लांडे बिहार की राजधानी पटना में अपनी तैनाती के दौरान काफ़ी चर्चा में रहे हैं. उन्हें “पटना के रॉबिनहुड” के नाम से भी जाना जाता है. अब वो महाराष्ट्र में तैनात हैं.

शिवदीप लांडे शिवसेना नेता विजय शिवतरे के दामाद हैं. उनकी पत्नी का नाम ममता शिवतरे है. विजय शिवतरे महाराष्ट्र में जल संसाधन राज्यमंत्री रह चुके हैं. वह शिवसेना के प्रवक्ता भी बनाए गए थे. लेकिन, 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस नेता संजय जगताप से हार का सामना करना पड़ा था.

सचिन वाझे फ़िलहाल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में हैं. एनआईए मुकेश अंबानी मामले की जाँच कर रही है. इस मामले में सचिन वाझे की भूमिका की भी जाँच हो रही है. एनआईए के मुताबिक़ वाझे इस मामले में शामिल थे.

रविवार को क्या-क्या हुआ

सचिन वाझे

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रविवार सुबह से ही मुंबई में अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन होने लगे थे.

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने नागपुर और मुंबई में विरोध प्रदर्शन करते हुए गृह मंत्री अनिल देशमुख का इस्तीफ़ा मांगा और मामले की जाँच कराने की मांग की.

वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “एक सीनियर पुलिस अफ़सर और पूर्व पुलिस कमिश्‍नर ने राज्‍य के सीएम को पत्र लिखकर गृह मंत्री पर बड़े सवाल उठाए हैं, आरोप लगाए हैं. इसकी गंभीरता से जाँच होनी चाहिए. अगर मुंबई पुलिस की यह हालत है तो आप महाराष्‍ट्र की कल्‍पना कर सकते हैं.”

बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने कहा, “सचिन वाझे की वसूली गैंग महाराष्‍ट्र के गृहमंत्री के लिए हर महीने 100 करोड़ की वसूली करती थी. उद्धव सरकार को 15 महीने हो गए इसलिए सरकार को 1500 करोड़ के भ्रष्‍टाचार का हिसाब देना होगा.”

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी इस्तीफ़े की मांग करते हुए कहा, “अनिल देशमुख को तुरंत इस्‍तीफ़ा देना चाहिए. मुख्‍य मुद्दा एक उद्योगपति के घर के पास विस्‍फोटक मिलने का है. मैं केंद्र सरकार से हस्‍तक्षेप करने की अपील करता हूँ. राज्‍य सरकार इस मामले की जाँच नहीं कर सकती.”

एक तरफ अनिल देशमुख पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बढ़ रहा है, वहीं, महाविकास अघाड़ी पर भी संकट के बादल मँडरा रहे थे.

शरद पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस

एनसीपी प्रमुख शरद पवार और अनिल देशमुख

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इसके बाद शरद पवार ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की और अनिल देशमुख का बचाव किया.

शरद पवार ने कहा, “अनिल देशमुख पर लगे आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनके इस्तीफ़े पर विचार मुख्यमंत्री करेंगे.” साथ ही कहा कि इससे सरकार की छवि पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने परमबीर सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “सचिन वाझे की बहाली का फ़ैसला मुंबई के पूर्व कमिश्नर ने लिया था, ना कि मुख्यमंत्री ने. मैं ये कह सकता हूँ कि इसका सरकार पर कोई असर नहीं होगा. गृह मंत्री के ख़िलाफ़ लगे आरोपों पर जाँच कराने का महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के पास पूरा अधिकार है.”

शरद पवार ने जाँच कराने के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो का नाम भी सुझाया. उन्होंने कहा, “मैं परमबीर सिंह के दावों की जाँच करने के लिए पूर्व आईपीएस अधिकारी जूलियो रिबेरो की मदद लेने का मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सुझाव दूँगा.”

हालाँकि, शरद पवार के सुझाव के बाद जूलियो रिबेरो ने इस मामले में जाँच करने से इनकार कर दिया. जूलियो रिबेरो मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर रह चुके हैं. उनकी एक ईमानदार अफसर की छवि रही है. वो सीआरपीएफ़ के महानिदेशक भी रह चुके हैं.

जूलियो रिबेरो ने न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, “ये बहुत ही मुश्किल स्थिति है और मैं नहीं जानता कि ये कहाँ तक जाएगा. बेहतर है कि राजनेता इसे ख़ुद सुलझा लें.”

जूलियो रिबेरो ने ये भी कहा, “मैं जाँच के लिए उपलब्ध नहीं हूं. किसी ने भी मुझसे संपर्क नहीं किया है, किसी भी मामले में अगर वो मुझसे संपर्क करते हैं, तो भी मैं उपलब्ध नहीं हूँ.”

इस्तीफ़े से इनकार

देवेंद्र फडणवीस

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वहीं, इसके बाद दिल्ली में शरद पवार के घर पर बैठक हुई. जिसमें संजय राउत और एनसीपी नेता जयंत पाटिल, अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले भी शामिल हुईं. इसमें कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद थे.

बैठक से बाहर आकर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अनिल देशमुख के इस्तीफ़े का सवाल ही नहीं है. उनके इस्तीफ़े की ज़रूरत नहीं है. मामले की जाँच महाराष्ट्र एटीएस और एनआईए कर रही है.

जयंत पाटिल ने कहा कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने किसी को ख़ुश करने के लिए चिट्ठी लिखी है. सचिन वाझे को शिवसेना से जोड़ना ग़लत होगा.

वहीं, विपक्ष में बैठी बीजेपी भी सरकार का लगातार निशाना साध रही है. शरद पवार की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “गृह विभाग के कारोबार पर सवाल उठाने वाले परमबीर सिंह पहले व्यक्ति नहीं हैं. इससे पहले महाराष्ट्र के डीजी सुबोध जायसवाल ने गृह विभाग में होने वाली रिश्वतखोरी, तबादले के बारे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को एक रिपोर्ट सौंपी थी. लेकिन सीएम ने इस पर कार्रवाई नहीं की.”

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “शरद पवार साहब महाराष्ट्र सरकार को बचाने की ज़िम्मेदारी अपने कंधे पर लिए हुए हैं, क्योंकि उन्होंने ही इस सरकार को बनाया है. इसलिए वो मानते हैं कि वो अपने प्रोडक्ट को सुरक्षित रखें.”

उन्होंने कहा कि शरद पवार ने ये तो कहा कि सचिन वाझे को परमबीर सिंह ने बहाल किया था, लेकिन ये फ़ैसला बिना आशीर्वाद के संभव नहीं था.

वहीं, शिवसेना नेता संजय राउत ने देशमुख के इस्तीफ़े को लेकर जवाब दिया. उन्होंने कहा, “अगर एनसीपी प्रमुख ने फ़ैसला किया है कि आरोपों की जाँच होनी चाहिए, तो उसमें ग़लत क्या है? कोई भी कोई आरोप लगा सकता है. अगर लोग मंत्रियों को इस्तीफ़े इसी तरह लेते रहे, तो सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा.”

वीडियो कैप्शन, महाराष्ट्र की सियासत में एक चिट्ठी से आया भूचाल

परमबीर सिंह के दस्तख़

शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान परमबीर सिंह पर ही सवाल खड़े कर दिए थे. शरद पवार ने कहा कि परमबीर सिंह ने देशमुख पर आरोप तो लगाए, लेकिन कोई प्रमाण नहीं दिए गए. पत्र में यह नहीं कहा गया कि पैसा किसके पास गया. वहीं, पत्र पर परमबीर सिंह के दस्तख़त भी नहीं थे.

उन्होंने परमबीर सिंह के पत्र लिखने के समय पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्होंने ट्रांसफ़र होने के बाद ही ये आरोप क्यों लगाए.

इसके जवाब में परमबीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि सीएम को वो पत्र उन्होंने ही भेजा है. उन्होंने न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, “सीएम उद्धव ठाकरे को मेरी ईमेल आईडी से ही पत्र भेजा गया है.”

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

उद्धव ठाकरे और शरद पवार

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महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस शामिल हैं. इस मामले पर महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी और वरिष्ठ नेता एचके पाटिल ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट,अशोक चह्वाण और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले से बातचीत की है.

बालासाहेब थोराट और अशोक चह्वाण पत्र में लगे आरोपों के मामले में सीएम उद्धव ठाकरे से मिलेंगे. उन्होंने कहा कि अंतिम फ़ैसला मुख्यमंत्री का होगा.

वहीं, कांग्रेस के ही नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस को कोई स्टैंड लेने की सलाह दे डाली है.

उन्होंने ट्वीट किया, “परमबीर सिंह जो भी कह रहे हैं, अगर वो सच है, तो शरद पवार जी से सवाल पूछना चाहिए क्योंकि मौजूदा महाराष्ट्र सरकार के आर्किटेक्ट हैं. कांग्रेस को इस मसले पर कोई स्टैंड लेना चाहिए.”

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