गुजरात: पिछले दो साल में हादसों के कारण 11 सौ मज़दूरों ने जान गंवाई -आज की बड़ी ख़बरें

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गुजरात के श्रम और रोजगार मंत्री दिलीप ठाकोर ने राज्य विधानसभा को बताया कि मरने वाले 1,128 मजदूरों में से 842 खेती से जबकि 286 निर्माण क्षेत्र से जुड़े थे. गुजरात में बीते दो साल के भीतर दुर्घटनाओं के चलते खेती और निर्माण क्षेत्रों में काम करने वाले 11 सौ से ज्यादा मजदूर मारे गए हैं.
चौंकाने वाली यह जानकारी राज्य के श्रम और रोजगार मंत्री दिलीप ठाकोर ने गुजरात विधानसभा को सोमवार को दी है.
दिलीप ठाकोर ने विधानसभा को बताया, "पिछले दो साल में दुर्घटनाओं से मरने वाले 1,128 मजदूरों में से 842 कृषि क्षेत्र से जबकि 286 निर्माण क्षेत्र के थे. इस दौरान सबसे अधिक 98 खेतिहर मज़दूर भावनगर में जबकि 37 निर्माण मज़दूर अहमदाबाद जिले में मारे गए."
गुजरात में फिलहाल खेती के कामों के लिए 28.65 लाख जबकि निर्माण गतिविधियों के लिए 6.65 लाख मज़दूर सूचीबद्ध है. इस तरह इन दोनों कामों के लिए 35 लाख से अधिक लोग मज़दूर के रूप में दर्ज़ हैं. राज्य सरकार के अनुसार, सबसे अधिक पंजीकृत खेतीहर मज़दूर आणंद जिले में 2.18 लाख हैं. वहीं, अहमदाबाद में सबसे अधिक एक लाख से ज्यादा निर्माण श्रमिक दर्ज़ हैं.
सरकार ने बताया है कि इस साल जनवरी में पांच साल के बाद खेतिहर मजदूरों के लिए रोज़ाना की न्यूनतम मज़दूरी को 178 रुपये से बढ़ाकर 324 रुपये कर दिया है. इसमें पहली बार दिया गया 56 रुपये का विशेष भत्ता भी शामिल है.

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कोविशील्ड की दूसरी डोज़ अब चार नहीं, आठ हफ़्ते बाद लगेगी
केंद्र ने कोविशील्ड की दूसरी डोज़ की समय सीमा बढ़ाकर चार से आठ हफ़्ते कर दी है. यह सिफ़ारिश टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह और कोविड-19 के लिए टीका प्रबंधन के राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह ने की है.
अध्ययन में पता चला है कि दूसरी डोज़ जब छह से आठ हफ़्तों के बीच दी गई तब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई. हालाँकि आठ सप्ताह बाद दूसरी ख़ुराक देने पर ऐसा नहीं हुआ.
इससे पहले कोविशील्ड की दोनों खुराकों के बीच चार से छह हफ़्ते का अंतर रखने पर सहमति बनी थी. हालाँकि यह भी बताया गया है कि दो खुराकों के बीच समय बढ़ाने की बात केवल कोविशील्ड वैक्सीन के लिए है. कोवैक्सीन के मामले में समय-सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनटीएजीआई और एनईजीवीएसी की अहम सिफ़ारिश को मान लिया है.

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ओमान के पूर्व सुल्तान क़बूस बिन सईद और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुज़ीबुर रहमान को गांधी शांति पुरस्कार
ओमान के पूर्व सुल्तान स्वर्गीय क़बूस बिन सईद अल सईद को 2019 का जबकि बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुज़ीबुर रहमान को साल 2020 के गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित करने का एलान किया गया है. साल 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पूरा होने के चलते इन सम्मानों को ख़ास माना जा रहा है.
इस सम्मान को शुरू करने का एलान गांधी के जन्म के 125 साल पूरा होने के मौक़े पर भारत सरकार ने किया था. और तब से (साल 1995) यह अवॉर्ड हर साल दिया जा रहा है. राष्ट्रीयता, नस्ल, भाषा, जाति, धर्म या लिंग की परवाह किए बिना सभी इंसानों को इस सम्मान के योग्य माना जाता है.
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली जूरी के दो पदेन सदस्य होते हैं. ये दो लोग भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल के नेता होते हैं. इसके अलावा दो प्रतिष्ठित व्यक्ति भी जूरी में होते हैं. अभी ये दो सदस्य लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक हैं.
इससे पहले इस महीने 19 मार्च को जूरी की बैठक हुई थी. जूरी सदस्यों के बीच पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से तय हुआ कि ओमान के दिवंगत सुल्तान क़बूस बिन सईद अल सईद को 2019 के लिए यह सम्मान दिया जाएगा. इस सम्मान के जरिए अहिंसक और अन्य गांधीवादी तरीकों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव के उनके उत्कृष्ट योगदान को मान्यता दी गई है.
इससे पहले जिन प्रमुख लोगों को ये पुरस्कार दिए गए हैं, उनमें तंजानिया के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जूलियस न्येरे, जर्मनी के राजनयिक गेरहार्ड फिशर, रामकृष्ण मिशन, समाजसेवी बाबा आम्टे, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति डॉ नेल्सन मंडेला, ग्रामीण बैंक ऑफ बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका के आर्कबिशप डेसमंड टूटू, श्री चंडी प्रसाद भट्ट और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन प्रमुख हैं.
2015 में यह पुरस्कार भारत के विवेकानंद केंद्र को जबकि 2016 में संयुक्त रूप से अक्षय पात्र फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल को दिया गया था. 2017 में एकल अभियान ट्रस्ट को जबकि 2018 में जापान के योही ससाकावा को यह अवार्ड दिया गया था. पुरस्कार के तहत विजेताओं को एक करोड़ रु की धनराशि के साथ-साथ प्रशस्ति पत्र, पट्टिका और पारंपरिक हस्तकला या हथकरघा का कोई उत्पाद भी दिया जाता है.

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शरद पवार ने किया देशमुख का बचाव
मुंबई पुलिस कमिश्नर के महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाए जाने के बाद सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके कहा कि देशमुख पर लगाए गए आरोप ग़लत हैं.
उन्होंने कहा कि 5 से 15 फ़रवरी तक देशमुख कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती थे और 16 से 27 फ़रवरी तक वो घर में आइसोलेट थे. इस कारण पुलिसकर्मी सचिन वाझे और देशमुख की मुलाक़ात संभव ही नहीं थी.
महाराष्ट्र के गृह मंत्री के इस्तीफ़े की बीजेपी की मांग को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जिस समय का आरोप है तब अनिल देशमुख अस्पताल में थे. उन्होंने कहा कि ये साफ़ है कि आरोप ग़लत हैं, इसलिए अनिल देशमुख के इस्तीफ़े का सवाल नहीं उठता.
उन्होंने कहा कि इन आरोपों से महाविकास अघाड़ी की सरकार पर कुछ असर नहीं होगा. शरद पवार ने सवाल उठाया कि मार्च के दूसरे हफ़्ते में पुलिस कमिश्नर जब उनसे मिले थे, तब उन्होंने ये जानकारी क्यों नहीं दी.
साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस पर कार्रवाई करना चाहते हैं तो करें या जांच करना चाहते हैं तो करें. उन्होंने कहा कि ये मेरा काम नहीं है. उन्होंने कहा, "मैंने रविवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से बात की. देशमुख पर जांच को लेकर फ़ैसला वही करेंगे."
शरद पवार की प्रेस वार्ता के दौरान ही बीजेपी की ओर से ट्वीट कर अस्पताल में भर्ती होने के दावे पर सवाल उठाए गए.
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बीजेपी के आईटी विभाग के इन-चार्ज अनिल मालवीय ने कहा, "शरद पवार ने दावा किया है कि अनिल देशमुख 5-15 फरवरी तक अस्पताल में थे और 16-27 फरवरी तक क्वारंटीन में थे. लेकिन अनिल देशमुख तो 15 फरवरी को एक प्रेस वार्ता कर रहे थे. झूठ ऐसे सीधे मुंह गिरते हैं."

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हुए कोरोना संक्रमित
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट करके बताया है कि वो कोरोना वायरस टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए हैं.
उन्होंने ट्वीट किया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है और उन्हें कोई परेशानी नहीं है.
उन्होंने बताया कि उन्होंने ख़ुद को आइसोलेट कर लिया है और वो डॉकट्र की निगरानी में हैं.
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सीएम रावत का नया विवादित बयान, 'आपने 2 बच्चे पैदा किए, 20 क्यों नहीं?'
वहीं, उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अपने काम के बजाए विवादित बयानों की वजह से चर्चा में बने हुए हैं. 'फटी जीन्स' के बाद अब उनका एक नया बयान सामने आया है.
उन्होंने कहा कि जो ग़रीब परिवार कोरोना काल में राशन के लिए परेशान थे, उन्हें अगर केंद्र सरकार की ओर से बांटा जा रहा राशन ज़्यादा चाहिए था तो उन्हें 20 बच्चे पैदा करने चाहिए थे.
राज्य के रामनगर में एक कार्यक्रम के दौरान तीरथ सिंह रावत ने कहा, "हर घर को 5 किलो राशन दिया गया. जिनके 10 थे (एक घर में) उनको 50 किलो, 20 थे तो क्विंटल भर राशन दिया गया. कुछ को जलन होने लगी कि 2 वालों को 10 किलो और 20 वालों को क्विंटल भर मिला. इसमें जलन कैसी? जब समय था तो आपने 2 ही पैदा किए 20 क्यों नहीं पैदा किए?"
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भारत में कोरोना पहुंचने के बाद जब देश में सख़्त लॉकडाउन लगा तो अर्थव्यवस्था मुश्किल में आ गई थी और करोड़ों लोगों के सामने भूख का संकट खड़ा हो गया था. इसे देखते हुए केंद्र ने पीएम ग़रीब कल्याण योजना के तहत राशन बांटा था और हर घर के लिए प्रति व्यक्ति के हिसाब से पांच किलो अनाज और एक किलो दाल दी जा रही थी.
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रावत ये भी कह गए कि अमेरिका ने भारत को 200 साल तक ग़ुलाम बनाकर रखा.
उन्होंने कहा, "अन्य देशों की तुलना में भारत कोरोना संकट से निपटने के मामले में बेहतर काम कर रहा है, वहीं अमेरिका, जिसने हमें 200 साल तक ग़ुलाम बनाए रखा और दुनिया पर राज किया, वर्तमान समय में संघर्ष कर रहा है."
इससे पहले भी तीरथ सिंह रावत ने महिलाओं के पहनावे को लेकर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि औरतों को फटी हुई जीन्स में देखकर हैरानी होती है.
उनके इस बयान की काफ़ी आलोचना हुई. जिसके बाद उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनकी बात का बुरा लगा है तो वो माफ़ी चाहते हैं.

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कोरोना: भारत में बीते 24 घंटे में 46,951 मामले, 212 मौत
भारत में कोरोना मामलों का फिर बढ़ना लगातार जारी है. बीते 24 घंटे में देश में कोविड-19 संक्रमण के 46,951 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 212 लोगों की मौत हुई है.
भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, पिछले 24 घंटे में कोरोना से ठीक हुए लोगों की संख्या 21,180 रही.
अब कोरोना के कुल संक्रमित मामलों की संख्या देश में 1 करोड़ 16 लाख 46 हज़ार 81 हो गई है. वहीं अब तक 1 करोड़ 11 लाख 51 हज़ार 468 लोग ठीक हो चुके हैं.
सक्रिय मामलों की संख्या इस वक़्त 3 लाख 34 हज़ार 646 है. वहीं कुल मौतों का आंकड़ा 1 लाख 59 हज़ार 967 जा पहुंचा है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, भारत में अब तक कोरोना वैक्सीन के 4 करोड़ 50 लाख 65 हज़ार 998 डोज़ लगाए जा चुके हैं.
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