जम्मू में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान एकाएक क्यों आए पुलिस के निशाने पर- ग्राउंड रिपोर्ट

रोहिंग्या

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    • Author, मोहित कंधारी
    • पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिंदी के लिए
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जम्मू में भथिंडी के किरयानी तालाब मोहल्ले में शनिवार देर शाम से तनाव का माहौल था. इसकी बड़ी वजह थी कि 155 रोहिंग्या शहर के मौलाना आज़ाद स्टेडियम से घर नहीं लौटे थे. ये लोग पुलिस के बुलावे पर अपने काग़ज़ों की जाँच कराने दिन में ही वहाँ गए थे.

लेकिन दिनभर चली जाँच के बाद जम्मू कश्मीर पुलिस ने कुछ लोगों को तो घर जाने की इजाज़त दे दी, लेकिन वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में जमा हुए रोहिंग्या को जम्मू कश्मीर पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के बीच कठुआ ज़िले की उप-जेल हीरानगर के 'होल्डिंग सेंटर' में भेज दिया.

फ़ाइल फ़ोटोः जम्मू के नरवल बारा इलाके में महिलाएँ और बच्चे

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देर शाम जम्मू कश्मीर पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल रैंक अधिकारी मुकेश सिंह ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी साझा की थी कि जम्मू में अवैध रूप से रह रहे जिन आप्रवासियों के पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक़, वैध यात्रा दस्तावेज़ नहीं थे, उन्हें हीरानगर के 'होल्डिंग सेंटर' भेजा गया है.

जम्मू कश्मीर के गृह विभाग की फरवरी 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, 6523 रोहिंग्या पाँच ज़िलों में 39 कैंप्स में रहते हैं.

पुलिस ने रोहिंग्या के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई ऐसे समय की है, जब उनमें से कुछ के पास से फ़र्जी दस्तावेज़, जिनमें आधार कार्ड और पासपोर्ट शामिल हैं, बरामद हुए थे.

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रिश्तेदारों के इंतज़ार में रात गुज़ार दी

अपने रिश्तेदारों के इंतज़ार में बहुत से परिवारों ने बिना कुछ खाए-पिए जाग कर रात गुज़ार दी.

रविवार सुबह होते ही पुलिस की सख़्त कार्रवाई से बचने के लिए बड़ी संख्या में रोहिंग्या अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर का सामान लेकर सड़क पर उतर आए और वापस जाने में आनाकानी करने लगे.

कहाँ जाना है, किस के पास जाना है, किसी को कुछ नहीं पता था. सब बस चले जा रहे थे. काले रंग के बुर्के पहने महिलाएँ छोटे बच्चों को गोद में लेकर चल रही थी और उनके रिश्तेदार घर का सामान लेकर उनके पीछे-पीछे आ रहे थे.

उबड़-खाबड़ रास्ते से होते हुए जब ये लोग भथिंडी में 'मक्का मस्जिद' के पास पहुँचे, तो बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाकर वापस भेजने की कोशिश की, लेकिन रोहिंग्या नहीं माने.

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'कुछ पता नहीं'

रास्ते में चलते-चलते एक रोहिंग्या महिला, जिनकी गोद में छह महीने का बच्चा था, उन्होंने बीबीसी हिंदी के कहा, "कहाँ ले जाएँगे, कहाँ नहीं ले जाएँगे, अभी हम भी चिंता कर रहे हैं. छोटा बच्चा है. अभी छह महीने का भी नहीं है. अभी दूध कैसे पिलाऊँगी रास्ते में? बोतल कहाँ से मिलेगी, गर्म पानी कहाँ से मिलेगा. हमारे पास पैसे भी नहीं हैं. कहाँ ले जा रहे हमको नहीं पता."

यह महिला अपने परिवार के साथ, जिसमें तीन बच्चे हैं, नौ साल से जम्मू में रह रही थी. उनका कहना था उनकी समझ में नहीं आ रहा कि पुलिस उन्हें क्यों तंग कर रही है, जब उन्होंने कुछ नहीं किया.

चलते-चलते रोहिंग्या भथिंडी की गलियों में जमा हो गए. किसी ने अपने बच्चों को घर का बना खाना खिलाया, तो कोई बिस्किट का पैकेट ले कर आया और बच्चों के हाथों में थमा दिया.

इस बीच किरयानी तालाब इलाक़े में दिन भर दुकानें बंद रहीं और रोहिंग्या बस्ती में सन्नाटा पसरा रहा.

सरकार की ओर से भी इलाक़े में सुरक्षाबलों की तैनाती बड़े पैमाने पर की गई थी.

वहाँ मौजूद हर एक आदमी के चेहरे पर उदासी साफ़ नज़र आ रही थी. छोटे छोटे झुंड बना कर वो लोग आपस में अपने भविष्य कि चिंता करते नज़र आए.

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बीबीसी हिंदी से बात करते हुए वहाँ मौजूद एक बुजुर्ग रोहिंग्या दीन मोहम्मद ने बताया, "मैं अपना सामान लेकर अपने बच्चों के साथ कहीं भी जाने को तैयार हूँ. हम जहाँ भी जाएँगे, एक साथ जाएँगे. चाहे जेल हो ,पानी हो या पहाड़. अपने बच्चों के साथ ही रहेंगे. उन्हें अकेला नहीं छोड़ेंगे."

जिस किसी से भी बात हुई, उनमें से कोई अपने सगे रिश्तेदार से नहीं मिल पाने के ग़म में परेशान था, तो कोई आने वाले कल को लेकर.

मोहम्मद हारुन ने बीबीसी हिंदी से कहा, "हमें समझ नहीं आ रहा हम यहाँ से कहाँ जाएँगे. इतना लंबा समय बीत गया जम्मू में, कभी किसी ने यहाँ तंग नहीं किया. न जाने अब क्यों अचानक पुलिस वाले जाँच के नाम पर हमें तंग कर रहे हैं."

हारुन कहते हैं, "जब तक हमारे देश में शांति बहाल नहीं हो जाती, हम वापस नहीं जा सकते. अगर हिंदुस्तान की सरकार को कोई परेशानी है, तो हमें किसी दूसरे देश के हवाले कर देना चाहिए, हम वहाँ चले जाएँगे. अगर हिंदुस्तान की सरकार ऐसा करती है, तो हम पर बहुत बड़ा एहसान होगा. आख़िर हम कब तक ज़ुल्म सहेंगे."

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परेशानी

जम्मू में लंबे समय से रह रहे रोहिंग्या कारोबारी मोहम्मद रफ़ीक़ी परेशानी की हालत में वहाँ घूम रहे थे.

उन्होंने कहा, "हम सबने हिंदुस्तान में पनाह ली थी. सब के पास UNHRC का कार्ड है. हम हिंदुस्तान सरकार का धन्यवाद करते हैं. हम अपने देश जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमे थोड़ा वक्त मिलना चाहिए ताकि हम अपने आप को संभाल सकें और अपने परिवार की सुरक्षा कर सकें."

पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए मोहम्मद ज़ुबैर ने कहा,"किसी एक आदमी की ग़लती की वजह से सबको सज़ा नहीं मिलनी चाहिए. हमारी तो ऐसी कोई ग़लती नहीं है. हो सकता है बीच में एक दो आदमी ने ग़लती की हो, लेकिन उनकी वजह से सबको तक़लीफ़ नहीं दी जानी चाहिए."

13 साल से जम्मू में रह रहे मोहम्मद यूनुस ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल करते हुए कहा, "मैं पूछना चाहता हूँ मेरा कसूर क्या है. अपने मुल्क़ में मैंने अपने माता पिता को खोया. उसके बाद अपनी जान बचाकर हम हिंदुस्तान आए. यहाँ भी हम पर ज़ुल्म हो रहा है."

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मोहम्मद यूनुस ने कहा, "हमारी ग़लती बस इतनी है कि हम मुस्लिम है. अब हम यहाँ नहीं रहना चाहते. हम 2008 में हिंदुस्तान आए थे, तब क्यों नहीं पकड़ा हमें. आज क्यों पकड़ रहे हैं. हम अपने देश वापस जाना चाहते हैं."

हालाँकि देर शाम पुलिस अधिकारियों ने रोहिंग्या परिवारों को कुछ दिनों की मोहलत देते हुआ है कहा कि वो जल्दी से जल्दी अपना हिसाब किताब कर लें, ताकि किसी का पैसा बकाया न रह जाए.

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