नीरव मोदी: लंदन में कैसे किए गए थे गिरफ़्तार, भारत लाने में कितना वक़्त लगेगा?

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, गगन सभरवाल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैं बीबीसी के अपने दफ़्तर में काम कर रही थी, तब मुझे ब्रिटेन के प्रमुख अख़बारों में शामिल टेलीग्राफ़ की एक ख़बर का ट्विटर नोटिफ़िकेशन मिला था.
मेरी आँखों के सामने हेडलाइन थी- 'एक्सक्लूसिव, भारत के मोस्ट वॉन्टेंड और 1.15 बिलियन पाउंड की धोखाधड़ी के अभियुक्त नीरव मोदी लंदन में खुले आम घूम रहे हैं.'
मेरी पहली प्रतिक्रिया यही थी कि क्या यह ख़बर सच है? क्या जिस नीरव मोदी की तलाश भारत में है, वो फिलहाल लंदन में रह रहा है? मैंने जल्दी से उस ट्वीट पर क्लिक किया. उसमें एक वीडियो था.
ये वीडियो वायरल हो गया था. इसमें क्रीम ब्राउन जैकेट वाले नीरव मोदी से एक शख़्स सवाल पूछने की कोशिश कर रहा है. यह इंटरव्यू अपने आप में मजाक़िया लगता था, क्योंकि हर सवाल के जवाब में नीरव मोदी का जवाब एक ही था- 'नो कमेंट्स'.
सवालों से बचने के लिए नीरव मोदी ब्रिटेन के सबसे अधिक व्यस्त सड़क, ऑक्सफ़र्ड स्ट्रीट में एक कैब रोक कर उसमें बैठ जाते हैं.
द टेलीग्राफ़ के पत्रकार मिक ब्राउन और नीरव मोदी की यह मुलाक़ात मार्च, 2019 में हुई थी. तब से लेकर अब तक यह स्टोरी मुझे अचरज में डालती रही है कि किस तरह मिक ब्राउन और उनकी टीम भारत के मोस्ट वॉन्टेड शख़्स में से एक नीरव मोदी को ट्रैक किया होगा.
मिक वह करने में कामयाब हुए थे, जो भारत सरकार और उसके अधिकारी नहीं कर पाए थे. मिक ब्राउन ने यह कैसे किया होगा? ये जानने के लिए मैंने उनसे मुलाक़ात की और जानने की कोशिश की कि उन्होंने नीरव मोदी का पता कैसे लगाया.
पढ़िए ये बातचीत.....
नीरव मोदी और उनकी स्टोरी में आपकी दिलचस्पी कब और कैसे हुई थी?
मिक ब्राउन- यह 2018 दिसंबर की बात है, जब मुझे नीरव मोदी पर एक पीस लिखने को कहा गया था. वह एक साल से फ़रार थे और तब हमने आपस में बात करना शुरू किया कि ये दिलचस्प स्टोरी हो सकती है. इस शख़्स के साथ क्या हुआ? आख़िरकार ये शख़्स कहाँ है?
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
इसके बाद मैंने एक स्टोरी की, जिसमें नीरव मोदी के करियर और हीरा कारोबारी के तौर पर उनकी असाधारण कामयाबी का ज़िक्र था. उस स्टोरी के कुछ दिनों के बाद ही मुझे जानकारी मिली कि नीरव मोदी लंदन में ही हैं और उन्होंने हीरे का कारोबार नए सिरे से शुरू किया है और फिर से सक्रिय हो गए हैं.
इसके बाद हमने इसकी पड़ताल शुरू की और जल्दी ही नीरव मोदी के लंदन में होने की पुष्टि हो गई. इतना ही नहीं उनके लंदन से हीरा कारोबार में सक्रिय होने की भी जानकारी मिली.
कुछ दिनों तक हमने उनकी निगरानी की, तब हमें मालूम चला कि उनका एक रूटीन है, जिसके मुताबिक़ वे सेंट्रल लंदन की दाहिनी ओर सेंटर प्वाइंट की जगह के अपने अपार्टमेंट से निकलने के बाद कुछ क़दम चलकर सोहो स्क्वायर पहुँचते हैं, जहाँ उनका दफ़्तर है. हम इस नतीजे पर भी पहुँचे कि वह इस रूटीन का हमेशा पालन करते हैं.
यानी आपको एक आर्टिकल के बाद जानकारी मिली और आपने उस लीड पर काम किया, काफ़ी रिसर्च की और फिर नीरव मोदी तक पुहँचे.
मिक ब्राउन - जी, बिलकुल सही कहा आपने.
इसके बाद क्या हुआ? यह पुष्टि हो गई कि यह शख़्स नीरव मोदी हैं और उनका रूटीन पता चल गया है, फिर आपने क्या किया?
मिक ब्राउन- इसके बाद हम जासूसों के अंदाज़ में उनके ऑफिस पहुँचे. हम सुबह-सुबह ही पहुँच गए थे. लेकिन शायद वे हम लोगों से भी पहले वहाँ पहुँच गए थे या फिर हमने उन्हें प्रवेश करते नहीं देखा. जब हमने उन्हें पहली बार देखा, तब नीरव मोदी इमारत के अंदर ही थे, वे पहले फ़्लोर में खिड़की के पास खड़े थे. ख़ूबसूरत-सी इमारत में उनका दफ़्तर था, ऐसे में हम लोग उनके बाहर निकलने का इंतज़ार करने लगे थे.
मेरे सहयोगी रॉबर्ट मेंडिक सोहो स्क्वायर के छोटे से पार्क में ऐसी जगह मौजूद थे, जहाँ से उस खिड़की पर नज़र रखना संभव था. मोदी के इमारत से बाहर निकलने पर उन्होंने मुझे संकेत भी दिया. मैं इमारत के सामने के दरवाज़े के बाहर खड़ा था. नीरव मोदी वहाँ से निकले और फुटपाथ की ओर बढ़ गए थे.
उस दिन मेरे साथ एक वीडियोग्राफ़र भी थे, हमने कुछ क़दमों तक नीरव मोदी का पीछा किया. सोहो स्ट्रीट में कुछ क़दम चलने के बाद मैंने कहा, 'गुड मार्निंग मिस्टर मोदी'. उन्होंने पीछे मुड़कर देखा.
एक अनजान शख़्स से इस तरह के अभिवादन से वे चौंक गए थे. फिर मैंने उन्हें बताया कि मैं द टेलीग्राफ़ में काम करता हूँ और कुछ सवाल पूछना चाहता है. वे काफ़ी हैरत में लग रहे थे- मैं ऐसा कह सकता हूँ. लेकिन तुरंत ही उन्होंने ख़ुद पर काबू कर लिया और कहा 'नो कमेंट'. लेकिन मैं लगातार कोशिश करता रहा और उनसे सवाल पूछता रहा और उन्होंने बार-बार 'नो कमेंट' कहा.

इमेज स्रोत, Getty Images
इसके बाद वे चलते रहे और सोहो स्ट्रीट से ऑक्सफ़र्ड स्ट्रीट पहुँच गए. ऑक्सफ़र्ड स्ट्रीट में दिन के समय काफ़ी भीड़ होती है. वे उस स्ट्रीट को पार करके दूसरी ओर खड़े हो गए थे, टैक्सी लेने के लिए. मैं उनकी बगल में खड़ा था.
इस जगह पर मैं उनसे सवाल पूछता रहा और वे 'नो कमेंट, नो कमेंट' कहते रहे. मैं सोच रहा था कि उन्हें चल कर कहीं भीड़-भाड़ वाले इलाक़े से दूर खड़ा होना चाहिए था. लेकिन वे वहाँ खड़े रहे और मैं उनसे कहता रहा कि यह काफ़ी व्यस्त समय है और आपको ऑक्सफ़र्ड स्ट्रीट में टैक्सी नहीं मिलेगी.
लेकिन वे वहाँ खड़े रहे और मैं उनसे वही सवाल दोहराता रहा. इस दौरान मैंने उनको टैक्सी दिलाने में मदद की पेशकश भी की. हालाँकि कुछ देर में एक टैक्सी आई और वे टैक्सी लेने में कामयाब हुए. वे जैसे ही टैक्सी में बैठे गए, उन्होंने अपना मोबाइल फ़ोन निकाल लिया था. काफ़ी जल्दी से वे फ़ोन करने लगे थे, शायद अपने वकील या फिर अपने दफ़्तर को.
क्या आपने कभी सोचा था कि आप भारत के एक मोस्ट वॉन्टेड शख़्स को तलाश लेंगे, जिन्हें तलाशने में भारतीय अधिकारी नाकाम रहे हैं.
मिक ब्राउन- नहीं, मैंने कभी कल्पना नहीं की थी. यह मेरे लिए किस्मत की बात थी और मेरे सहयोगी रार्बट मेंडिक की विशेषज्ञता की भी, जो नौकरशाही से डील करने में एक्सपर्ट हैं और आप जानते हैं कि ऐसी परिस्थितियों में कई पहलुओं को स्थापित करना होता है और इसके बाद आपको केवल धैर्यपूर्वक सवाल पूछने थे.
नीरव मोदी कहाँ रहते हैं, यह पता लगाना मेरे ख़याल से सबसे रोमांचक था. इसके बाद उन पर नज़र रखने के बाद इस बात की पुष्टि हुई कि जिस नीरव मोदी की तलाश हो रही थी, वो शख़्स यही हैं.
क्योंकि उनकी क़द काठी में किसी तरह का बदलाव नहीं था. हालाँकि उनका वज़न थोड़ा बढ़ा हुआ था और उन्होंने छोटी-सी मूछें रखनी शुरू कर दी थी. लेकिन हम उनका पता लगाने में कामयाब रहे. उन्होंने उस वक़्त ऑस्ट्रिच की खाल से बनी जैकेट पहनी हुई थी और वो काफ़ी महंगी जैकेट थी. लोगों की इस जैकेट में भी ख़ूब दिलचस्पी देखने को मिली.

इमेज स्रोत, Getty Images
क्या आपने कभी सोचा था कि ये वीडियो वायरल हो जाएगा और आपको इतनी प्रतिक्रियाएँ मिलेंगी?
मिक ब्राउन- हमें यह तो मालूम हो गया था कि यह काफ़ी बड़ी स्टोरी है और हम यह भी जान चुके थे कि वे भारत के एक मोस्ट वांटेड शख़्स हैं. लेकिन मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस पर इतनी प्रतिक्रियाएँ मिलेंगी. दरअसल वह ख़बर भारत के हर न्यूज़ बुलेटिन में दिखाई गई.
पत्रकारिता में मेरा करियर बहुत लंबा रहा है, लेकिन मैं कभी ऐसी असाधारण ख़बर का हिस्सा नहीं रहा था.
नीरव मोदी कौन हैं और उन्हें भारत क्यों छोड़ना पड़ा?
49 साल के नीरव मोदी का जन्म गुजरात में हुआ था, वे बेल्जियम के एंटवर्प शहर में पले बढ़े. नीरव मोदी का परिवार पिछले कई पीढ़ियों से हीरे के कारोबार में शामिल रहा है.
जब नीरव मोदी 19 साल के थे, तब वे अपने पिता दीपक मोदी के साथ मुंबई लौट आए और अपने अंकल के साथ कारोबार शुरू किया. नीरव के अंकल मेहुल चौकसी भारत में रिटेल ज्वैलरी की कंपनी गीतांजली समूह के प्रमुख थे. नीरव मोदी ने अपने अंकल के साथ क़रीब 10 साल तक काम किया और इस दौरान उन्होंने हीरा कारोबार से जुड़ी बारीकियों को सीखा.

इमेज स्रोत, Getty Images
इसके बाद नीरव मोदी ने भारत में अपना ख़ुद का हीरे का कारोबार शुरू किया. उन्होंने फ़ायरस्टार डायमंड नाम से एक कंपनी शुरू की. 2010 में उन्होंने अपने नाम से ब्रैंड की शुरूआत की और धीरे धीरे नीरव मोदी ब्रैंड काफ़ी लोकप्रिय हो गया.
हीरा कारोबारियों और लग्ज़री ज्वैलरी ब्रैंड मालिकों में वे सबसे ज़्यादा चर्चित होते गए और उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन और हॉन्गकॉन्ग सहित कई जगहों पर अपने स्टोर खोले. 2017 में फ़ोर्ब्स ने उन्हें 1.75 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ भारत का 84वाँ सबसे अमीर शख़्स बताया था.
चर्चित हीरा कारोबारी कैसे वाटेंड लिस्ट में आया?
जनवरी, 2018 में नीरव मोदी ने भारत छोड़ दिया था. इसके कुछ दिनों के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी बैंक पंजाब नेशनल बैंक ने उनके और उनके चाचा मेहुल चौकसी के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत की.
इस शिकायत के मुताबिक़ इन दोनों ने बैंक के 14 हज़ार करोड़ रुपये की रक़म की धोखाधड़ी की है. बैंक का कहना था कि इन दोनों ने फ़र्जी गारंटी के आधार पर दूसरे लोगों से क़र्ज़ लिया है. हालाँकि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी किसी तरह की फ़र्जीवाड़े से इनकार करते रहे हैं.
जनवरी, 2018 में भारत से भागने के बाद नीरव मोदी सेंट्रल लंदन के सेंटर प्वाइंट इलाक़े के क़रीब 80 मिलियन पाउंड के अपने अपार्टमेंट में रह रहे थे, जबकि भारतीय अधिकारी उन्हें तलाश रहे थे.
नीरव मोदी 14 महीने तक इस अपार्टमेंट में रहे और लंदन के सोहो स्क्वायर के पास हीरो का नया कारोबार शुरू करने में कामयाब रहे.

इमेज स्रोत, Getty Images
लेकिन द टेलूग्राफ़ के मिक ब्राउन के इंटरव्यू के कुछ दिनों के बाद नीरव मोदी को गिरफ़्तार किया गया. नीरव मोदी को 19 मार्च, 2019 को लंदन में होबर्न के मेट्रो बैंक ब्रांच से गिरफ़्तार किया गया, जहाँ वे अपना बैंक अकाउंट खुलवाने गए हुए थे.
इसके बाद से ही नीरव मोदी एचएमपी वैंडज़वर्थ जेल में रह रहे हैं. 1851 में बनी इस जेल में क्षमता से कहीं ज़्यादा क़ैदी रहते हैं. मई, 2020 में लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में नीरव मोदी के प्रत्यपर्ण का मामला चल रहा था.
इस दौरान उन्होंने कई बार ज़मानत की अपील की, लेकिन उन्हें ज़मानत नहीं मिली है, हालाँकि वे ज़मानत के लिए 40 लाख पाउंड का बांड भरने की पेशकश कर चुके हैं. उनकी ज़मानत की अर्ज़ी इसलिए ख़ारिज हो जाती है, क्योंकि अदालत को पैसे के बल पर उनके फ़रार होने की आशंका है.
अब अदालत ने नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है. गुरुवार को इस मामले में कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया और कहा कि मुंबई की आर्थर रोड जेल उनके लिए ठीक रहेगी. तब तक नीरव मोदी को कस्टडी में रखा जाएगा. कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका भी खारिज कर दी है.
कोरोना लॉकडाउन के कारण नीरव मोदी वीडियो लिंक के ज़रिए कोर्ट में उपस्थित हुए थे. जस्टिस सैमुअल गूज़ी ने कहा कि नीरव मोदी पर जो आरोप हैं, उसके जवाब उन्हें भारत में देने चाहिए. हालाँकि नीरव मोदी इसके ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं.
नीरव मोदी के पास क्या विकल्प हैं?
ऐसे में बीबीसी ने लंदन स्थित ग्लोबल लीगल सोल्यूशन के वकील हरजाप सिंह भंगेल से यह जानने की कोशिश की कि नीरव मोदी को भारत लाने में कितना लंबा वक़्त लगेगा?
इसके जवाब में हरजाप सिंह भंगेल ने बताया, "अदालत के फ़ैसले के बाद उन्हें भारत भेजा जा सकता है. अब ये आदेश ब्रिटेन के गृह मंत्री प्रीति पटेल के पास जाएगा और उन्हें फ़ैसला करना है कि के ये आदेश जारी किए जाएँ या नहीं."
"वे दो महीने में इस पर फ़ैसला ले सकती हैं. हालाँकि नीरव मोदी इसके ख़िलाफ़ तुरंत हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं."

इमेज स्रोत, Getty Images
भंगेल के मुताबिक़, "मामले की सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट फ़ैसला लेगा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का फ़ैसला सही है या नहीं. अगर इस बीच में प्रीति पटेल उन्हें भारत भेजे जाने का आदेश दे देती हैं, तो नीरव मोदी के पास एक और मौक़ा होगा, जहाँ वे उस फ़ैसले के विरोध में अपील कर सकते हैं. यानी उनके पास एक ही समय में अपील करने के दो मौक़े होंगे."
"हाईकोर्ट दोनों पर एक ही वक़्त में सुनवाई कर सकता है. यह भी संभव है कि हाईकोर्ट एक ही दिन में दोनों अपीलों पर सुनवाई करके अपना फ़ैसला सुनाए."
ऐसे में क्या प्रीति पटेल नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का आदेश देने से इनकार कर सकती हैं?
इसकी संभावना पर हरजाप सिंह भंगेल ने बताया, "कई वजहों से प्रीति पटेल इनकार भी कर सकती हैं, एक तो दोहरी सज़ा मिलने की आशंका और दूसरा अगर उन्हें नीरव मोदी की जान को ख़तरा लगेगा, तो वह इनकार कर सकती हैं. इसके अलावा उन्हें मानवाधिकार क़ानून और यूरोपीय मानवाधिकार कंवेंशन के मुताबिक़ भी देखना होगा. अगर उन्हें लगेगा कि नीरव मोदी को टॉर्चर किया जा सकता है, राजनीतिक सोच के चलते प्रताड़ित किया जा सकता है, तो वह आदेश देने से इनकार कर सकती हैं."
कितना समय लगेगा?
अगर प्रीति पटेल, नीरव मोदी को भारत भेजने वाला आदेश नहीं देती हैं, तो भारत सरकार के पास क्या विकल्प होगा?
इस बारे में हरजाप सिंह भंगेल ने कहा, "यह तो उन पर निर्भर करेगा कि उन्होंने किन वजहों से इनकार किया है. अगर मान लीजिए वह कहती हैं कि भारत के जेलों की स्थिति दयनीय है, तो भारत सरकार को उन्हें भरोसा दिलाना होगा कि जेलों की स्थिति भले दयनीय हो, लेकिन हम इस मामले में विशेष व्यवस्थाएँ कर रहे हैं. उन्हें दूसरे क़ैदियों के साथ नहीं रखेंगे. ब्रिटेन जैसी सुविधाओं में रखेंगे."
मोटे तौर पर ऐसी परिस्थितियों में नीरव मोदी को भारत प्रत्यार्पित करने में कितना वक़्त लग सकता है?
इस बारे में हरजाप सिंह भंगेल ने कहा, "अभी तो हाईकोर्ट में ही नीरव मोदी के पास दो अपील करने का मौक़ा है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी है. इसके अलावा यूरोपीय कोर्ट भी है, जिससे विजय माल्या को राहत मिली हुई है."
"इसके अलावा मौजूदा समय में कोरोना संक्रमण के चलते कई कोर्ट बंद हैं. सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है और काफ़ी बैकलॉग हैं. इन सभी कारणों को देखना होगा. कम से कम एक साल तो लगेगा ही, दो साल भी लग सकते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















