चीन भेज रहा है एलएसी पर और सैनिक, असलहे, मिसाइल - प्रेस रिव्यू

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पूर्वी लद्दाख के इलाक़े में डिसइंगेजमेंट को लेकर भारत और चीन के बीच नौ दौर की सैन्य वार्ता हुई है, लेकिन इस बीच चीनी सेना 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव को कम करने का कोई संकेत नहीं दे रही है.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, चीनी सेना ने तिब्बत में आर्टिलरी गन, स्व-चालित होवित्जर और सरफेस-टू- मिसाइल इकाइयों की तैनाती बढ़ा दी है.
इंडियन नेशनल सिक्योरिटी प्लानर्स के अनुसार, पीएलए तीनों सेक्टरों में नई तैनाती कर रहा है और सैनिकों और भारी सैन्य उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह भेज रही है, साथ ही पैंगोंग त्सो के फिंगर क्षेत्रों में नया निर्माण कर रही है.
वहीं टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, सीमा पर तनाव के बीच भारत एलएसी पर निगरानी बढ़ाने जा रहा है.
अख़बार के मुताबिक़, भारत चीन के साथ लगने वाली उत्तरी सीमाओं पर अपनी सर्विलांस क्षमता बढ़ाने जा रहा है. वहीं बड़ी संख्या में ड्रोन, सेंसर, सैनिक सर्वेक्षण और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण तैनात करेगा ताकि पीएलए की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके और घुसपैठ का पता लगाने के लिए भी कदम मज़बूत हों.
बाइडन ने शी को लेकर कहा, 'उनके शरीर में कोई लोकतांत्रिक हड्डी नहीं'

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राष्ट्रपति जो बाइडन का मानना है कि चीन के साथ अमेरिकी प्रतिद्वंद्विता दो विश्व शक्तियों के बीच संघर्ष के बजाय "चरम प्रतिस्पर्धा" का रूप ले लेगी.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, बाइडन ने कहा कि उनके प्रशासन वाले अमेरिका और चीन के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी, लेकिन वो जो रिश्ता बनाना चाहते हैं वो संघर्ष का नहीं होना चाहिए.
बाइडन ने रविवार को अमेरिकी चैनल सीबीएस के साथ इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद से उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से बात नहीं की है. लेकिन उन्होंने कहा कि अपने-अपने देशों के उपराष्ट्रपति रहते हुए वो दोनों कई बार मिले हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, बाइडन ने कहा, "वो बहुत सख़्त हैं. मैं आलोचक के तौर पर ये नहीं कह रहा हूं, ये सच्चाई है - उनके शरीर में कोई लोकतांत्रिक हड्डी नहीं है."
ट्रंप की जगह बाइडन के कुर्सी संभालने के कुछ वक़्त बाद ही चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि "इस बहुत कठिन और असाधारण वक़्त के बाद, चीन और अमेरिका दोनों के लोग बेहतर भविष्य के अधिकारी हैं."
चीन ने बाइडन प्रशासन के विश्व स्वास्थ्य संगठन में बने रहने और पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते में लौटने के फ़ैसले का स्वागत किया था.
हालांकि नए प्रशासन में व्यापार, ताइवान, मानवाधिकारों और दक्षिण चीन सागर पर अमेरिकी नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना नहीं है, जिसने शी की सरकार को नाराज़ कर दिया है.
हालांकि बाइडन ने कहा कि वो अमेरिका और चीन के रिश्तों को ट्रंप की तरह नहीं चलाएंगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रुख पर केंद्रित रहेंगे.

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टीएमसी को बंगाल जल्द दिखाएगा 'राम कार्ड': पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल जल्द ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को राम कार्ड दिखाएगा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, पूर्व मिदनापुर के औद्योगिक शहर हल्दिया में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ममता सरकार के आने के बाद कोई परिवर्तन नहीं हुआ, सिर्फ लेफ्ट का पुनर्जीवन हुआ, वो भी सूद समेत.
उन्होंने कहा, "ये भ्रष्टाचार, अपराध, हिंसा और लोकतंत्र पर हमलों का पुनर्जीवन था."
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "बंगाल फुटबॉल को पसंद करता है. लिहाज़ा मैं उसी भाषा में बोलता हूं कि तृणमूल ने एक के बाद एक कई सारे फाउल किए हैं. ये फाउल है कुशासन का. विपक्षी दलों के नेताओं पर हमले, भ्रष्टाचार का. बंगाल की जनता ये देख रही है और जनता जल्द ही उन्हें राम कार्ड दिखाएगी."

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कश्मीर अमेरिकी दिवस प्रस्ताव पर भारत का एतराज़
न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली ने पांच फरवरी को कश्मीर अमेरिकी दिवस घोषित किए जाने का गवर्नर एंड्रयू कुओमो से अनुरोध करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया.
जनसत्ता अख़बार के मुताबिक़, इस पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये लोगों को विभाजित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के समृद्ध सांस्कृतिक व सामाजिक ताने-बाने की ग़लत व्याख्या करने की स्वार्थी वर्गों की चिंताजनक कोशिश है.
असेंबली सदस्य नादर सायेघ और 12 अन्य सदस्यों के प्रायोजित प्रस्ताव में कहा गया है कि कश्मीरी समुदाय ने हर कठिनाई को पार किया है, दृढ़ता का परिचय दिया है और अपने को न्यूयॉर्क प्रवासी समुदायों के एक स्तम्भ के तौर पर स्थापित किया है.
इसमें कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य विविध सांस्कृतिक, जातीय व धार्मिक पहचानों को मान्यता देकर सभी कश्मीरी लोगों की धार्मिक, आवागमन व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समेत मानवाधिकारों का समर्थन करने के लिए प्रयासरत है.
वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के एक प्रवक्ता ने इस प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हमने कश्मीर अमेरिकी दिवस संबंधी न्यूयॉर्क असेंबली का प्रस्ताव देखा है. अमेरिका ती तरह भारत भी एक जीवंत लोकतांत्रिक देश है और 1.35 अरब लोगों का बहुलवादी लोकाचार गर्व की बात है.'
उन्होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जिसे अलग नहीं किया जा सकता. हम लोगों को विभाजित करने के लिए जम्मू-कश्मीर के समृद्ध एवं सामाजिक ताने-बाने को ग़लत तरीके से दिखाने की निहित स्वार्थों की कोशिश को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं.''
प्रवक्ता ने प्रस्ताव संबंधी प्रश्न का उत्तर देते हुए शनिवार को कहा, ''हम भारत-अमेरिका साझेदारी और विविधता भरे भारतीय समुदाय से जुड़े सभी मामलों पर न्यूयॉर्क स्टेट में निर्वाचित प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे.''
यह प्रस्ताव तीन फरवरी को न्यूयॉर्क असेम्बली में पारित किया गया था, जिसमें कुओमो से पांच फरवरी, 2021 को न्यूयॉर्क राज्य में 'कश्मीर अमेरिकी दिवस' घोषित करने का अनुरोध किया गया है.
न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास ने इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए सायेघ और 'द अमेरिकन पाकिस्तानी एडवोकेसी ग्रुप' की सराहना की.
पाकिस्तान पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने और उसे जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के रूप में दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित करने के कारण भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग जुटाने के असफल प्रयास करता रहता है.
भारत पाकिस्तान से कह चुका है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा तथा इससे जुड़े मामले उसके आंतरिक मामले हैं.
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