इंदौर में बुज़ुर्ग बेघरों को ट्रक में बैठाकर शहर से बाहर छोड़ने का मामला

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से, बीबीसी हिंदी के लिए
देश में स्वच्छता में नंबर एक का मुक़ाम रखने वाले इंदौर नगर निगम के कुछ कर्मचारियों की ऐसी तस्वीर सामने आयी है जिसमें निगम प्रशासन आलोचनाओं के घेरे में आ गया है.
नगर निगम कर्मचारियों का एक वीडियो शुक्रवार को वायरल हुआ जिसमें निगम के कुछ कर्मचारी सड़क किनारे रहने वाले बुज़ुर्गों और भिखारियों को एक डंपर में भरकर शहर के बाहर छोड़ने चले गये. उसके बाद स्थानीय लोगों के विरोध की वजह से उन बुज़ुर्गों को दूसरी जगह ले जाया गया.
जानकारी के मुताबिक़, ये कर्मचारी बुज़ुर्ग भिखारियों को शहर की सीमा के पार शिप्रा नदी के क़रीब छोड़कर जाने वाले थे. स्थानीय लोगों ने जब देखा तो उन्होंने इस पर आपत्ति की जिसके बाद कर्मचारी उन्हें वहां से लेकर चले गये.

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इस वायरल वीडियो में इंदौर के नगर निगम की असंवेदनशीलता देखी जा सकती है. वीडियो में ऐसे लोग भी थे जो चलने की स्थिति में भी नहीं थे और उस स्थिति में नगर निगम के कर्मचारी उन्हें और उनके सामान को उठाकर गाड़ी में रख रहे हैं.
इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश में इस वक़्त कड़ाके की ठंड पड़ रही है और इस स्थिति में इन्हें किसी रैन बसेरा में ले जाने की बजाय शहर के बाहर छोड़ दिया गया.
सीएम ने सस्पेंड किए कर्मचारी
जैसे ही यह ख़बर फैली तो कांग्रेस सहित अन्य लोगों ने इस पर आपत्ति की और देर शाम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया और दो कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश दे दिया.
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शिवराज सिंह चौहान ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुये ट्वीट किया, "आज इंदौर में नगर निगम कर्मचारियों द्वारा वृद्धजनों के साथ अमानवीय व्यवहार के संबंध में मुझे जानकारी मिली. इस मामले में ज़िम्मेदार नगर निगम उपायुक्त सहित दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और कलेक्टर इंदौर को बुज़ुर्गों की समुचित देखभाल करने का निर्देश दिया है. बुज़ुर्गों के प्रति अमानवीय व्यवहार किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. मेरे लिये नर सेवा ही नारायण सेवा है. हर वृद्ध को आदर, प्रेम और सम्मान मिलना चाहिए; यही हमारी संस्कृति है और मानव धर्म भी."
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर निगम उपायुक्त प्रताप सोलंकी को निलंबित कर दिया गया. साथ ही दो अन्य निगम कर्मियों को बर्खास्त किया गया है.
इस मामले में सरकार ने जांच के आदेश भी दिये है कि आख़िर किस अधिकारी ने यह आदेश दिया था कि इन लोगों को शहर के बाहर कर दिया जाये ताकि शहर स्वच्छ रह सकें.
विपक्ष का सरकार पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इस वीडियो को लेकर सरकार पर निशाना साधा था.
कमलनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा- "इंदौर नगर निगम की शर्मनाक हरकत, बुज़ुर्गों को निगम की गाड़ी में जानवरों की तरह भरा. शर्म करो शिवराज"
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उधर, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस वीडियो को शेयर किया और लिखा, "इंदौर, मप्र की ये घटना मानवता पर एक कलंक है. सरकार और प्रशासन को इन बेसहारा लोगों से माफ़ी माँगनी चाहिए और ऑर्डर लागू कर रहे छोटे कर्मचारियों पर नहीं बल्कि ऑर्डर देने वाले उच्चस्थ अधिकारियों पर एक्शन होना चाहिए."
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जानकारी के मुताबिक़, इन लोगों को रैन बसैरा लेकर जाना चाहिये था लेकिन निगम के अधिकारी के कहने पर इन्हें शहर से उठाकर शिप्रा नदी के पास ले जाया गया और उसके बाद उन्हें वहां छोड़ा जाना था. लेकिन स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया. उसके बाद उन्हें शहर भर में घुमाते रहे और अंत में उन्हें रैन बसैरा में छोड़ा गया.
नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया, "यह घटना अमानवीय है और इस पर फ़ौरन कार्रवाई की गई है. हमारी कोशिश है कि इस तरह के मामले आगे न आये इसलिये विभाग जल्द ही दिशानिर्देश जारी कर रहा है."
इस मामले में अभिनेता सोनू सूद भी आगे आ गये है. उन्होंने एक वीडियो में कहा कि, "जहां बुज़ुर्गों को इंदौर शहर सीमा से बाहर रखने का प्रयत्न किया गया. मुझे और आप सबको मिलकर इन्हें छत देने की कोशिश करना चाहिए. मैं बुज़ुर्गों को उनका हक़ दिलाना चाहता हूं और उनके सिर पर छत दिलाना चाहता हूं. उनके खाने-पीने का प्रबंध और ध्यान रखने की कोशिश करना चाहता हूं लेकिन यह सब कुछ इंदौरवासियों के बिना मुश्किल है."
उन्होंने कहा कि इंदौरवासियों को एक ऐसा उदाहरण पेश करना चाहिये ताकि बड़े-बुज़ुर्ग कभी भी अकेला महसूस न करें.
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