लाल क़िले पर जब प्रदर्शनकारियों की भीड़ चढ़ गई, तब अंदर कौन फंसा था?

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- Author, गुरप्रीत सैनी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकाल रहे प्रदर्शनकारियों की भीड़ जब लाल क़िले पर चढ़ गई, उस वक़्त लाल क़िले के अंदर स्कूली छात्रों समेत कई लोग मौजूद थे.
इस बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली पुलिस के डीसीपी (नॉर्थ) एंटो अल्फोंस ने बताया कि 'लाल क़िले के अंदर उस वक़्त क़रीब 300 लोग थे, जिनमें बच्चे भी थे.'
ये वो कलाकार थे जिन्होंने गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लिया था.
आमतौर पर गणतंत्र दिवस परेड की झांकियां लाल क़िले तक आती हैं, फिर उन्हें अंदर ले जाया जाता है.
लेकिन पुलिस के मुताबिक़, क्योंकि किसानों ने अपनी ट्रैक्टर परेड वक़्त से पहले ही शुरू कर दी थी और वो फिर लाल क़िले की तरफ़ आ गए. 'जब तक झांकियां लाल क़िले में जा पातीं उससे पहले ही काफ़ी प्रदर्शनकारी लाल क़िले के अंदर घुस चुके थे और धीरे-धीरे भीड़ बढ़ती जा रही थी.'

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'जब झांकी पहुंच रही थी, तभी उपद्रव शुरू हो गया था'
रक्षा मंत्रालय के अधिकारी पवन और राष्ट्रीय रंगशाला कैंप की टीम पूरे वक़्त अंदर फंसे छात्रों के साथ थी.
पवन ने बीबीसी हिंदी को बताया, "जब हमारी झांकी लगभग दोपहर 12 बजे के आस-पास पहुंच रही थी, उस वक़्त उपद्रव शुरू हो गया था और फिर हमने बच्चों को आराम से पार्क में बैठा दिया. वहां तक कहीं किसी की पहुंच नहीं थी. फिर हम लाल क़िले के अंदर चले गए."
उन्होंने बताया कि इनमें लगभग 130 छात्र थे और बाक़ी झांकी वाली गाड़ी के ड्राइवर और टेक्निशियन थे. साथ ही रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय रंगशाला कैंप की टीम थी.
उनके मुताबिक़, इनमें अरुणाचल, असम, गुजरात, लद्दाख़ और तमिलनाडु के छात्र थे. छात्रों की उम्र 16 से 25 साल के बीच थी. पवन ने छात्रों की पहचान ज़ाहिर करने से इनकार कर दिया.

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चार से पांच घंटे तक फंसे रहे
पुलिस के मुताबिक़ कई प्रदर्शनकारी लाल क़िले के अंदर पहुंच गए थे. डीसीपी (नॉर्थ) की टीम ने बीबीसी हिंदी को बताया कि हालात बिगड़ते देख पुलिस ने इन कलाकारों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर लाल क़िले के अंदर सुरक्षित अलग-अलग जगहों पर रखा.
रक्षा मंत्रालय में अधिकारी पवन ने बताया कि 'कोई प्रदर्शनकारी छात्रों तक नहीं पहुंच पाया था. हम पूरी तरह से सुरक्षित थे. अंदर सीआईएसएफ़ की टीम थी और बाहर दिल्ली पुलिस की टीम थी.'
वो बताते हैं, "हमने छात्रों से कहा था कि हम थोड़ी देर में निकल जाएंगे. हमने उन्हें बताया कि बाहर कोई रैली चल रही है, इसलिए हम निकल नहीं पाएंगे. हमारी बसें फंसी हुई हैं."
पवन के मुताबिक़, "हमारी टीम पूरे वक़्त छात्रों के साथ थी. हमने उनको घर पर बात करने के लिए अपना फ़ोन दिया था. उन्होंने अपने मम्मी-पापा से बात की. हमने बच्चों के लिए पानी का इंतज़ाम करवाया. सीआईएसएफ़ ने भी कुछ इंतज़ाम करवाए. दिल्ली पुलिस ने नाश्ते का इंतज़ाम करवाया. इसके बाद उन्होंने बस की व्यवस्था करवाई और सुरक्षित हमें राष्ट्रीय रंगशाला कैंप छुड़वा दिया."

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पुलिस के मुताबिक़, बाहर हालात बिगड़ते देख मौक़ा मिलते ही पुलिस ने किसी तरह से कलाकारों को लाल क़िले से सुरक्षित निकाला. डीसीपी (नॉर्थ) एंटो अल्फोंस ने बताया कि इन्हें निकालकर नज़दीक ही दरियागंज जीओ मेस ले जाया गया, वहां चाय-नाश्ता कराने के बाद उन्हें सुरक्षा के साथ उन्हें वहां पहुंचा दिया गया, जहां उन्हें जाना था.
पवन बताते हैं कि जैसे ही उपद्रव ख़त्म हुआ तो दिल्ली पुलिस ने सभी को बसों में सुरक्षित तरीक़े से राष्ट्रीय रंगशाला कैंप पहुंचा दिया.
ये क़रीब 300 लोग चार से पांच घंटे तक लाल क़िले के अंदर फंसे रहे.

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80 बच्चों का एक समूह इंडिया गेट के नज़दीक फंसा था
इस साल सिर्फ झांकियां लाल क़िले तक गई थीं और परेड पहली बार नेशनल स्टेडियम पर ख़त्म हो गई थी.
परेड में सांकृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले समूहों में से एक ईस्टर्न ज़ोनल कल्चरल सेंटर, कोलकाता भी था.
ईस्टर्न ज़ोनल कल्चरल सेंटर, कोलकाता के 80 लोक कलाकारों ने ओडिशा के कालाहांडी का लोक नृत्य बजासल पेश किया था.
इस ग्रुप को लीड कर रहे ध्यानानंदा पंडा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि जब वो इंडिया गेट के नज़दीक थे और राजघाट के पास गांधी दर्शन में जहां वो रुके हैं, वहां के लिए निकल रहे थे. तभी पुलिस ने उन्हें बताया कि अभी उन्हें वहीं रुक जाना चाहिए क्योंकि आईटीओ पर जाम लगा है.
ध्यानानंदा पंडा बताते हैं कि उनके समूह में ज़्यादातर बच्चे ही थे. हालांकि उन्हें ये नहीं बताया गया था कि वहां बवाल हो गया है. उनके आस-पास ऐसी कोई घटना भी नहीं हुई थी, वो एक सुरक्षित जगह पर रुक गए थे.
वो चार पांच घंटे तक मान सिंह रोड पर खड़ी अपनी बस में बैठे रहे. वहां पहुंचे अधिकारियों ने बच्चों को नाश्ते के पैकेट दिए.
और जब रास्ता साफ़ हो गया तो पुलिस ने अपनी सुरक्षा में शाम को इस समूह को गांधी दर्शन पहुंचा दिया.
हालांकि कई प्रतिभागी बवाल होने से पहले ही वहां से निकल गए थे.
माउंट आबू पब्लिक स्कूल और विद्या भारती स्कूल के छात्रों ने भी गणतंत्र दिवस के सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, बीबीसी ने जब इन दोनों स्कूलों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उनके छात्र बवाल से पहले ही वहां से निकल चुके थे.
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