बदायूं से ग्राउंड रिपोर्ट: पुजारी पर लगे बलात्कार के आरोप से गाँव वाले आहत

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बदायूं से, बीबीसी हिन्दी के लिए
बदायूं ज़िले के उघैती थाने से मेवली गाँव की दूरी क़रीब पाँच किलोमीटर है. गाँव में प्रवेश करते ही वह मंदिर पड़ता है, जिसके पुजारी और अन्य दो लोगों पर 50 वर्षीय एक महिला के साथ गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप लगा है.
महिला का मायका मेवली गाँव में ही है और मंदिर से उसकी दूरी एक किलोमीटर से भी कम है. महिला की ससुराल मेवली से क़रीब 10 किलोमीटर दूर क्यावली गाँव में है.
ईंट के बने छोटे से एक कमरे के घर में बाहर गुमसुम बैठी महिला की माँ किसी को भी देखते ही रोने लगती हैं.
बीबीसी से बातचीत में कहती हैं, "बेटी अक़्सर मंदिर में पूजा करने आती थी. रविवार को छुट्टी रहती थी तो उस दिन ज़रूर आती थी. इस रविवार को नहीं आई तो पुजारी ने शाम को फ़ोन करके बुलाया. लेकिन पता नहीं उसके साथ ये सब कैसे हो गया और उसे मार डाला गया. मेरी बेटी को भगवान न्याय ज़रूर देंगे."
पीड़ित माँ की चार लड़कियाँ हैं. पति की काफ़ी पहले मौत हो चुकी है. घर में अकेली ही रहती हैं. तीन लड़कियों की शादी बदायूं से बाहर हुई है. जिस लड़की की मौत हुई है, नज़दीक होने के कारण वही इनके पास कभी-कभी आ जाया करती थी. वो बताती हैं कि लड़की आंगनबाड़ी में काम करती थी और अपने घर का पूरा ख़र्च वही चलाती थी क्योंकि उसके पति मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और कोई काम नहीं करते हैं.
वो बताती हैं कि अगले दिन वे लोग जब मंदिर पहुँचे, तो वहाँ पुजारी सत्यनारायण मौजूद थे. वो कहती हैं, "मंदिर में जगह-जगह ख़ून दिख रहा था. पुजारी के कपड़ों पर भी. हम लोगों ने पूछा तो बोले कि कुएँ से महिला को निकालते समय लग गया होगा. जब हंगामा मचने लगा तो पुजारी ग़ायब हो गया. पुलिस वाले चाहते तो पकड़ लेते लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया."
घर में मौजूद था बेटा
आंगनबाड़ी सहायिका की निर्मम हत्या के मामले में पीड़ित परिवार स्थानीय पुलिस के रवैए से काफ़ी आहत हैं. मृत महिला की चार बेटियाँ और एक बेटा है. दो बेटियों की शादी हो चुकी है. 18 वर्षीय बेटा उस वक़्त घर में ही मौजूद था, जब रविवार रात क़रीब 12 बजे पुजारी अपने दो साथियों के साथ उसकी मां को मृत अवस्था में घर के बाहर छोड़ गए थे.
बेटा बताता है, "वे लोग माँ की बॉडी को दरवाज़े पर छोड़ गए. पुजारी बोले कि कुएँ में गिर गई थी. अगले दिन सुबह हम लोग थाने गए और पुलिस को मामला बताया लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं सुनी. फिर मैंने अपने जीजा को बुलाया. उनके साथ फिर थाने पर गए. लेकिन वहाँ पुलिस वाले किसी दूसरे मामले में व्यस्त थे. फिर हम लोगों ने 112 नंबर पर डायल किया तो कुछ देर बाद पुलिस मौक़े पर पहुँच गई. इसके बाद थाने की पुलिस भी वहाँ आ गई और आगे की कार्रवाई की गई."
परिजनों को यह शिकायत है कि पुलिस अगर समय रहते कार्रवाई करती तो पुजारी उसी दिन पुलिस की गिरफ़्त में आ जाता, लेकिन पुलिस ने 'जानबूझकर पुजारी को भगाने में मदद की.'
परिजनों ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया है कि उघैती थाने के तत्कालीन थानेदार राघवेंद्र सिंह ने एफ़आईआर दर्ज करने की बात तो दूर, फ़रियाद तक नहीं सुनी और इतनी गंभीर घटना के बावजूद मौक़े पर जाने की भी ज़रूरत नहीं समझी.
इस बात को पुलिस के उच्च अधिकारी भी स्वीकार करते हैं. बदायूं के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि स्थानीय पुलिस की लापरवाही साफ़ थी, इसी वजह से थानाध्यक्ष को निलंबित भी किया गया है.
हालांकि क्यावली गाँव में मृतका के घर में मौजूद बदायूं के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सिद्धार्थ वर्मा इस बात से इनकार करते हैं कि थाने पर शिकायत नहीं सुनी गई. उनका कहना था, "17 घंटे बाद कार्रवाई और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद एफ़आईआर की बात सही नहीं है. पुलिस को जैसे ही परिजनों की ओर से तहरीर मिली, एफ़आईआर तुरंत दर्ज की गई. अगले ही दिन दो अभियुक्तों को पकड़ भी लिया गया."

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पुलिस ने मंदिर को सील किया
सत्यनारायण जिस मंदिर में पुजारी हैं, वह मेवली गाँव के बिल्कुल प्रवेश द्वार पर है. घटना के बाद मंदिर को सील कर दिया गया है और किसी को भी पुलिस के बनाए घेरे से अंदर जाने की इजाज़त नहीं है, मीडिया को भी नहीं. स्थानीय थाने के तीन-चार पुलिसकर्मी मंदिर के बाहर तैनात किए गए हैं.
गाँव के लोग इस मामले पर ज़्यादा कुछ बोलना नहीं चाहते लेकिन वे मंदिर के पुजारी पर लगे गंभीर आरोपों से सदमे में हैं और आहत भी.
मंदिर के ठीक बगल वाला घर नंदू मौर्य का है. नंदू मौर्य उस समय बदायूं शहर में अपना ऑपरेशन कराने गए थे जब यह घटना घटी.
मंदिर के बारे में वो कुछ इस तरह बताते हैं, "इसे 50-60 साल पहले ठाकुर भूप सिंह ने बनवाया था. उन्होंने अपनी क़रीब 20 बीघे ज़मीन भी मंदिर के ही नाम कर दी थी. उनके बाद रामदास जी यहाँ पुजारी बनकर आए. वो काफ़ी दिनों तक रहे. रामदास जी बहुत बड़े महात्मा थे. उनकी मूर्ति भी मंदिर में लगी है. सत्यनारायण छह-सात साल से यहाँ पुजारी हैं."
मेवली गाँव के लोगों से पता चला कि पुजारी सत्यनारायण क़रीब सात साल पहले यहाँ आए और मंदिर में पूजा-पाठ करने लगे. मेवली गाँव के ही रहने वाले और यहाँ पोस्टमास्टर के तौर पर काम करने वाले सतीश चंद्र बताते हैं कि पूजा-पाठ के अलावा वो तंत्र-मंत्र और झाड़-फूँक भी करते थे और उसी से संबंधित लोगों को दवाइयाँ भी देते थे.
गाँव के कुछ लोगों ने बताया कि मृत महिला भी अक्सर इस मंदिर में आती थी. गाँव वालों के मुताबिक़, महिला के पति को कुछ मानसिक परेशानी थी, जिसके निदान की उम्मीद लिए वह पुजारी सत्यनारायण के पास आया करती थीं. महिला के परिजन भी इस बात की पुष्टि करते हैं.
मेवली गाँव के ही मंटू गुप्ता बताते हैं कि पुजारी सत्यनारायण के आने से पहले इस मंदिर में वाल्मीकि और जाटव समाज को छोड़कर सभी जातियों के लोग जाते थे लेकिन इनके आने के बाद लोगों ने आना जाना बंद कर दिया. वो कहते हैं, "पहले हर साल बड़े यज्ञ होते थे और गाँव के सभी लोग यहाँ आते थे. लेकिन अब लोग दूसरे मंदिरों में जाते हैं. गाँव में कई मंदिर हैं. यहाँ ज़्यादातर ठाकुर और मौर्य जाति के लोग ही जाते हैं, अन्य नहीं."
लेकिन मंटू गुप्ता के पास इसकी कोई वजह नहीं है. वो कहते हैं कि मंदिर में जबसे तंत्र-मंत्र जैसी चीजें होने लगीं तो लोगों ने जाना कम कर दिया. हाँ, मंदिर न जाने की बात कई लोग कहते हैं, जबकि वो आस्तिक हैं और दूसरे मंदिरों में जाते हैं. पुजारी सत्यनारायण का गाँव के लोगों के साथ उठना-बैठना भी था, लेकिन चुनिंदा लोगों के यहाँ ही.

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उसी गाँव में छुपा था पुजारी, ढूँढ़ नहीं पाई पुलिस
गुरुवार को महिला के गाँव क्यावली में अफ़सरों के अलावा नेताओं का भी तांता लगा रहा. बदायूं के पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव, मौजूदा सांसद संघमित्रा समेत कई नेता आते-जाते रहे.
बरेली ज़ोन के एडीजी अविनाश चंद्र ने पुजारी पर 50 हज़ार का इनाम घोषित कर दिया था लेकिन गुरुवार रात क़रीब 10 बजे पुजारी पुलिस की गिरफ़्त में आ गए.
पुजारी चार दिन से उसी मेवली गांव में अपने किसी शिष्य के यहाँ रह रहे थे.
यही नहीं, पुजारी सत्यनारायण को पुलिस सीधे तौर पर पकड़ भी नहीं पाई, बल्कि जब वो बाइक पर सवार होकर कहीं भागने की फ़िराक में थे, उसी समय कुछ गाँववालों ने उन्हें पकड़कर पुलिस को सौंप दिया.
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