कोविड-19 वैक्सीन के बारे में वह सब जो आप जानना चाहते हैं

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- Author, प्रवीण शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
रविवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) ने सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन सीमित इस्तेमाल की इजाज़त दे दी.
भारत बायोटेक की वैक्सीन का नाम कोवैक्सिन है और यह कोविड-19 के लिए देश की पहली स्वेदशी वैक्सीन है.
लेकिन, डीजीसीआई के इन्हें इस्तेमाल करने का अप्रूवल दिए जाने के बाद ही इस फ़ैसले पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए. कांग्रेस समेत एक तबक़े ने इस वैक्सीन के प्रभावी होने पर सवाल उठाए और पूछा कि जब इसके तीसरे चरण के ट्रायल्स अभी पूरे नहीं हुए हैं फिर भी इनके इस्तेमाल की इजाज़त कैसे दी जा सकती है?
दो जनवरी को सरकार ने पूरे देश में कोरोना वैक्सीन लगाने का ड्राई रन दोबारा चलाया. इसमें वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया. हालांकि, इस सबके बावजूद कोरोना वैक्सीन को लेकर कई तरह के सवाल लोगों के मन में हैं.
यहां हम ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैः
कोरोना वैक्सीन कब उपलब्ध हो सकती है?
इस बारे में सटीक रूप से बताना मुश्किल है, लेकिन इस तरह के अनुमान हैं कि अगले 15 दिन में वैक्सीन को लगाना शुरू किया जा सकता है. वैक्सीन लगाने का काम चरणबद्ध तरीक़े से होगा.
मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर संदीप बुद्धिराजा कहते हैं, "जिस तरह की चर्चाएं हैं उसके लग रहा है कि जनवरी में वैक्सीन लगनी शुरू जाएगी."
क्या सभी को इस वैक्सीन को लगवाना पड़ेगा?
पब्लिक हेल्थ फ़ाउंडेशन की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि आदर्श स्थिति यही है कि बच्चों को छोड़कर सभी को यह वैक्सीन लगनी चाहिए. वे कहती हैं, "इन वैक्सीन्स का ट्रायल 18 साल से कम उम्र के लोगों पर नहीं हुआ था."
किन्हें सबसे पहले यह वैक्सीन दी जाएगी?
वैक्सीन लगाने का काम चरणबद्ध तरीक़े से होगा. प्राथमिकता वाले ग्रुप को सबसे पहले यह वैक्सीन लगाई जाएगी. डॉ. कुमार कहती हैं, "म्यूनिसिपल और दूसरे प्रशासनिक लोग, डॉक्टर्स और चिकित्सा से जुड़े लोग जो कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में फ्रंटलाइन पर काम कर रहे हैं, उन्हें सबसे पहले यह वैक्सीन लगाई जाएगी. 50 साल से ऊपर के और दूसरी बीमारियों से ग्रस्त लोग भी इसी ग्रुप में आएंगे और उन्हें भी शुरुआती चरण में ही वैक्सीन लगाने की कोशिश की जाएगी."
50 साल से कम के मगर दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोग भी क्या प्राथमिकता वाले ग्रुप में आएंगे?
डॉ. कुमार के मुताबिक़, ये लोग प्राथमिकता वाले ग्रुप में नहीं आएंगे, क्योंकि ये डिमांड और सप्लाई का मामला है. जितनी वैक्सीन आएंगी उन्हें सबसे पहले कोविड-19 के मरीज़ों की देखभाल और इलाज के काम में सीधे तौर पर लगे हुए लोगों को दिया जाएगा.
जितने ज्यादा लोगों तक वैक्सीन पहुँच जाएगी उतनी ही जल्दी हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाएगी. डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि ऐसा पाया गया है कि तक़रीबन 70 फ़ीसद लोगों को वैक्सीन लग जाने पर हर्ड इम्युनिटी पैदा हो जाती है.

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पहले चरण में कितने लोगों को कवर किया जाएगा?
पहले चरण में 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की योजना है. बाद में जैसे-जैसे वैक्सीन उपलब्ध होगी उस हिसाब से इसका दायरा बढ़ाया जाएगा. इसमें पहले 10 करोड़ लोग और बाद में 20 करोड़ लोगों को इसी चरण में वैक्सीन लगाई जानी है.
पहला चरण कब तक पूरा हो जाएगा?
इस काम में महीनों का वक़्त लगेगा और यह सब वैक्सीन की सप्लाई पर निर्भर करेगा. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और वैक्सीन लगाने वाले मैनपावर की बड़ी भूमिका होगी.
कैसे लगाई जाएगी वैक्सीन?
इन्हें दो डोज़ में दिया जाएगा. वैक्सीन पॉइंट्स बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिग क़ायम रखने की कोशिश की जाएगी. जिन लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी उनका डेटाबेस बनाया जाएगा और उसी हिसाब से उन्हें वैक्सीन लगाई जाएगी.
वैक्सीन कितनी सुरक्षित है?
कोरोना वैक्सीन की रिसर्च की पूरी अवधि ही 9-10 महीने की है, ऐसे में फ़िलहाल इसकी सेफ्टी पर कोई संदेह नहीं है. किसी भी दूसरी वैक्सीन के जैसे ही इसकी टेस्टिंग हुई है. हालांकि, डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं, "इसके लॉन्ग टर्म इफ़ेक्ट को देखा जाना बाक़ी है. कई वर्षों में ही किसी वैक्सीन के असर का पूरा पता चलता है. लेकिन, दुनिया में आज तक इतने बड़े लेवल पर टेस्ट हुई वैक्सीन को वापस नहीं लेना पड़ा है."
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, "सभी वैक्सीन्स की सेफ्टी काफ़ी अच्छी है. इनमें मामूली बुख़ार, सिरदर्द या इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर दर्द होता है. ओवरऑल अगर कोई वैक्सीन 50 फ़ीसदी तक प्रभावी होती है तो उसे सफल माना जाता है."
क्या वैक्सीन लगाने के बाद भी कोरोना हो सकता है?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, "इसके आसार बेहद कम हैं. और अगर किसी को दोबारा संक्रमण हो भी जाता है तो वह उतना गंभीर नहीं होगा और इससे निमोनिया या मौत होने के आसार कम रहते हैं."

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कोरोना के नए स्ट्रेन पर वैक्सीन प्रभावी होगी?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, "अध्ययनों के आधार पर कहा जा रहा है कि जो मौजूदा वैक्सीन हैं वे कोरोना में हो रहे बदलावों से भी बचाव में असरदार होंगी. ख़ासतौर पर कोवैक्सिन एक इनेक्टिवेटिट होल वायरस वैक्सीन है. ये वैक्सीन इसलिए असरदार होती हैं क्योंकि ये पूरे वायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी बनाती हैं और ऐसे में अगर वायरस में बदलाव भी हो तो भी उनमें उससे लड़ने की क्षमता होती है."
कितनी बार लगानी होगी वैक्सीन और क्या होगा इसका शेड्यूल?
इस वैक्सीन की दो डोज़ होंगी. इसमें पहली डोज़ और दूसरे डोज़ के बीच का अंतर 21 से 28 दिन का होगा. डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि ऐसा पाया गया है कि पहला डोज़ लगने के 10-14 दिन के बाद असर होना शुरू हो जाता है और यह बढ़ता चला जाता है.
क्या कोरोना के मौजूदा मरीज़ों को भी वैक्सीन लगाई जाएगी? जिन्हें कोरोना हो चुका है क्या उन्हें भी लगाई जाएगी वैक्सीन?
कोरोना मरीज़ के पूरी तरह से रिकवर होने के 14 दिन बाद उसे वैक्सीन लगाई जा सकती है. लेकिन, चूंकि मौजूदा महामारी के वक़्त में वैक्सीन की उपलब्धता कम होगी, ऐसे में कोरोना से रिकवर हुए मरीज़ों को बाद में वैक्सीन लगाई जा सकती है.
मैक्स हेल्थकेयर के डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, "जब कोई नेचुरल बीमारी होती है तो उसमें कुछ वक़्त में इम्युनिटी मिल जाती है. लेकिन, कोरोना के मामले में हमें यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कितनी लंबी चलेगी. कुछ लोगों को दोबारा भी संक्रमण हुआ है. ऐसे में कोरोना से रिकवर हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लेने की सलाह दी जा रही है."
हालांकि, वे कहते हैं कि कोरोना से संक्रमित हुए लोग तीन से छह हफ्ते के लिए इससे सुरक्षित हो जाते हैं और ऐसे में उन्हें वैक्सीन देने की कोई जल्दी नहीं है.
अगर कोई दूसरी डोज़ लगवाने से चूक गया तो क्या होगा?
अगर डोज़ मिस हो जाती है तो दूसरी डोज़ कभी भी लगवा सकते हैं. अभी भारत में इसका कोई प्रोटोकॉल तय नहीं है. लेकिन, ये जितनी जल्दी लगवा ली जाए उतना अच्छा है.
क्या दोनों डोज़ एक जैसी होनी चाहिए?
एक वैक्सीन की दो डोज़ लगनी हैं और दोनों डोज़ एक ही ब्रैंड की होनी चाहिए. यानी अगर आप पहली डोज़ कोवैक्सिन की लगाते हैं तो दूसरी वैक्सीन भी कोवैक्सिन की ही होनी चाहिए.
जिन्होंने कोविड के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी ली है क्या उन्हें भी वैक्सीन लगानी पड़ेगी?
इस तरह के मरीज़ों को भी कोरोना से रिकवर हो दूसरे मरीज़ों की तरह ही माना जाएगा.
क्या गर्भवती महिलाएं यह वैक्सीन लगवा सकती हैं?
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं कि अभी भारत में जो ट्रायल्स हुए हैं और वैक्सीन्स का एप्रूवल 18 साल से ज्यादा उम्र के और ऐसी महिलाएं जो गर्भवती नहीं हैं उनके लिए है. आगे के ट्रायल्स में इन चीज़ों को देखा जाएगा.
क्या डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी?
डायबिटीज़ के मरीज़ ज्यादा रिस्क वाले लोगों में हैं और उन्हें वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर दी जाएगी.
किस उम्र के बच्चों को वैक्सीन दी जा सकती है?
ये पहली वैक्सीन है जो कि 12 साल से कम के बच्चों के लिए नहीं है. वयस्कों को ही लगाने को इसमें प्राथमिकता दी जा रही है.
इनका क्या साइड इफ़ेक्ट हो सकता है?
इसमें बुख़ार आना, सिरदर्द जैसे जैसी चीज़ें शुरुआत में दिखाई देती हैं, जो कोई बड़ी दिक़्क़त की बात नहीं है. डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं, "गंभीर साइड इफ़ेक्ट्स काफ़ी दुर्लभ हैं, लेकिन, ऐसे साइड इफ़ेक्ट्स हमने दूसरी वैक्सीन्स के साथ भी देखे हैं. फ़ाइज़र की वैक्सीन में एलर्जी के कुछ मामले आए हैं, लेकिन कहा जा रहा है कि भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सिन में ऐसा नहीं होगा. ओवरऑल सभी इंजेक्शन सेफ़ हैं."
अगर कोई वैक्सीन नहीं लेना चाहता है तो क्या होगा?
डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं कि वैक्सीनेशन में लोगों की जागरूकता ज़रूरी है. सरकार अपनी ओर से लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है. जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता पैदा होगी वे इसे लगवाने के लिए सामने आएंगे.
भारत में कितनी तरह की वैक्सीन उपलब्ध होने की संभावना है?
फाइजर और बायोटेक की दो वैक्सीन्स एमआरएनए वैक्सीन हैं और इन्हें बेहद ठंडा तापमान चाहिए. इनके साथ स्टोरेज की दिक्क़त है. डॉ. प्रीति कुमार कहती हैं, "हमारा मौजूदा कोल्ड चेन इतने कम तापमान को मेंटेन रखने वाला नहीं है. इन वैक्सीन्स ने भी डीसीजीआई में एप्रूवल के लिए एप्लाई किया है. लेकिन, इन्हें उपयोग में लाना मुश्किल है."
इस हिसाब से फ़िलहाल सीरम इंस्टीट्यट की एस्ट्राज़ेनेका वाली और भारत बायोटेक-आईसीएमआर की वैक्सीन्स के ही देश में इस्तेमाल होने के ज्यादा आसार हैं क्योंकि इन्हें सामान्य फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है.
मौजूदा वक़्त में क़रीब 7 वैक्सीन्स एप्रूवल्स के अलग-अलग स्तरों पर हैं.
डीसीजीआई के अप्रूवल के क्या मायने हैं?
डीसीजीआई ने जो एप्रूवल दिया है उस हिसाब से भारत बायोटेक की वैक्सीन को फ़ील्ड में उतारने में वक़्त लगेगा. ऐसे में एस्ट्राज़ेनेका ही फ़िलहाल इस्तेमाल होगी.
वैक्सीन लगने के बाद क्या बिना मास्क लगाए घूम सकते हैं?
वैक्सीन लगाने के बाद भी मास्क लगाना ज़रूरी है. डॉ. कुमार कहती हैं, "वैक्सीन एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय है. सामाजिक दूरी, मास्क और दूसरे उपाय करना वैक्सीन लगवाने के बाद भी ज़रूरी होगा."
डॉ. बुद्धिराजा कहते हैं कि वैक्सीन लगाने के बाद मास्क न पहनने की सोच ग़लत है. सामाजिक दूरी, मास्क कम से कम एक-डेढ़ साल ज़रूरी रहेंगे. वे कहते हैं, "सबसे ज़्यादा सेफ़्टी मास्क से मिलती है."
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