किसान आंदोलन: लौट जाएगा किसान संगठनों को विदेश से भेजा गया चंदा?

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय किसान यूनियन (एकता- उगराहां) का कहना है कि किसानों के परिवार के जो लोग विदेश में रह रहे हैं और वहाँ छोटे काम करते हैं, वैसे ही लोगों ने यूनियन की अपील पर पैसे भेजे थे.

संगठन के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां के अनुसार जिन लोगों ने चंदा भेजा है वो विदेश में या तो ट्रक ड्राइवर या मजदूर के रूप में काम करने वाले लोग हैं.

नए कृषि कानून के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन (एकता- उगराहां) अकेला सबसे बड़ा किसान समूह है.

इस महीने की शुरुआत में यूनियन ने अपील की थी कि आंदोलन जारी रखने के लिए उसे पैसों की ज़रूरत है. उसने लोगों से चन्दा देने की अपील की थी.

संगठन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने पत्रकारों से बात करते हुए माना कि अपील के बाद लोगों ने चंदे के रूप में आठ लाख रुपये संगठन के खाते में जमा किए.

लेकिन वो कहते हैं कि अभी ये पता नहीं है कि इस रक़म में से कितनी विदेश में रहने वाले किसानों के परिजनों ने भेजी है या भारत में रहने वालों ने जमा की है. ये रक़म कोकरीकलां के खाते में जमा हुई है.

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रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत

लेकिन इस बीच, संगठन का कहना है, "पंजाब एंड सिंध बैंक' के कोकरीकलां शाखा के मैनेजर ने उन्हें सरकार की तरफ से भेजा गया नोटिस दिखाया जिसमें कहा गया है कि विदेश से भेजा गया चंदे का पैसा 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' का उलंघन है क्योंकि संगठन ने खुद को विदश से प्राप्त होने वाले चंदे के लिए सरकार के पास पंजीकृत नहीं कराया है.

जानकारों का कहना है कि अगर पंजीकरण नहीं होता है तो विदेश से भेजी गई चंदे की रक़म भेजने वालों के खातों में लौटा दी जाएगी.

इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया के चाँद वाधवा ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि सिर्फ़ संगठन ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति भी विदेश से राशि ले रहा है तो उसे भी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' के तहत ख़ुद को पंजीकृत करवाना होगा.

वाधवा के अनुसार रिश्तेदार एक दूसरे को विदश से पैसे भेज सकते हैं जैसे बेटा अपने पिता को या परिवार को. उसी तरह उपहार के रूप में भी पैसे भेजे जा सकते हैं लेकिन जिसे ये मिल रहे हैं उसे ये स्पष्ट करना होगा कि किस मद में ये पैसे आ रहे हैं.

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विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम

'फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट' यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' के तहत कोई समाज सेवी संस्था या एनजीओ या संगठन अगर विदेशों से वित्तीय सहयोग या अनुदान लेती है तो उसे ये भी सुनिश्चित करना होगा कि ये अनुदान सामाजिक कार्य और राष्ट्रहित में ही इस्तेमाल किया जाएगा.

इसी साल सितंबर महीने में गृह मंत्रालय ने इस क़ानून में संशोधन भी किया और नए संशोधित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन कानून, 2020 को संसद के मॉनसून सत्र में मंजूरी भी मिली.

मंत्रालय ने जो इस संबंध में अधिसूचना जारी की उसके अनुसार, अब एनजीओ या संस्थानों के पंजीकरण के लिए पदाधिकारियों के आधार नंबर को देना आनिवार्य है. नए क़ानून में प्रावधान किए गए हैं कि विदेशी कोष हासिल करने संस्थाओं को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए कोष का अब 20 प्रतिशत तक ही खर्च करने की अनुमति होगी.

कुछ महीनों पहले केंद्र सरकार ने ये कहते हुए 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' में संशोधन किए हैं कि लोग विदश से आ रही रक़म की जानकारी ठीक से नहीं दे रहे हैं.

वीडियो कैप्शन, ब्रिटेन तक पहुंचा किसान आंदोलन

नोटिस आ रहे हैं...

सिंघु बॉर्डर पर किसानों के चल रहे आंदोलन में किसान संगठनों के बीच समन्वय का काम करने वाले परमजीत सिंह ने बीबीसी को बताया कि उन लोगों को भी सरकार के नोटिस मिलने लगे हैं जिनके रिश्तेदारों ने उनके खातों में विदेश से पैसे भेजे हैं.

वो कहते हैं, "हमारी जानकारी में मामले आ रहे हैं कि जो किसान आंदोलन में शामिल हैं उनके अपने रिश्तेदार भी अगर उनके खाते में पैसा भेज रहे हैं तो उन्हें भी नोटिस मिल रहा है."

भारतीय किसान यूनियन (एकता-उग्रहण) का कहना है कि वो इस पूरे मामले में क़ानूनी सलाह ले रही है और जल्द ही सरकार को इस बारे में लिखित जवाब देगी. उग्रहण का कहना है कि पंजाब के रहने वाले एनआरआई अगर अपनी मेहनत की कमाई से पैसे भेज रहे हैं तो इसमें हर्ज क्या है.

चाँद वाधवा का कहना है कि इसमें कोई हर्ज नहीं है लेकिन इसकी पहले से लिखित जानकारी सरकार को देना और अपने संगठन का विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम' के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य शर्त है. ये पंजीकरण भारत सरकार के गृह मंत्रालय में होता है.

संगठन ने ये ज़रूर स्वीकार किया कि उन्होंने अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया है और जब वो पंजीकरण करवाना चाहते थे तो इसकी आखिरी तारीख भी गुज़र गई है. संगठन के नेता कहते हैं कि वो कानूनी राय ले रहे हैं.

वहीं अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के सरदार वीएम सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन को ख़त्म करने के लिया सरकार हर तरह के विकल्पों का इस्तेमाल कर रही है. मगर वो कहते हैं कि आंदोलन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

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