छत्तीसगढ़ महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा-लड़कियां सहमति से संबंध बनाती हैं, फिर रेप केस करती हैं

महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

छत्तीसगढ़ में इन दिनों राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के एक बयान पर सियासी गलियारे में बहस शुरू हो गई है.

महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बिलासपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि लड़कियों को प्रेम में पड़ने से पहले विचार करना चाहिए.

किरणमयी नायक ने महिलाओं के धोखा खाने संबंधी एक सवाल के जवाब में कहा, "अधिकांश मामलों में लड़कियां पहले सहमति से संबंध बनाती हैं. लिव-इन में भी रहते हैं और उसके बाद फिर एफ़आईआर करते हैं, रेप के ऑफेंस की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं. तो मैं सभी से ये अनुरोध करुंगी कि अपने रिश्ते, अपने स्टेटस को पहले देखें-समझें और ऐसे रिश्तों में यदि आप पड़ते हैं तो उसका परिणाम हमेशा बुरा होता है."

महिला आयोग की अध्यक्ष

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विपक्षी दल भाजपा ने जहां महिला आयोग की अध्यक्ष को अपना बयान वापस लेने और माफ़ी माँगने के लिये कहा है, वहीं राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आयोग की अध्यक्ष का बचाव करते हुए कहा है कि महिला आयोग की अध्यक्ष ने अपने अनुभव के आधार पर बयान दिया होगा.

भूपेश बघेल ने कहा, "महिला आयोग की किसी बात पर मैं टिप्पणी नहीं करुंगा. संवैधानिक पद है और उन्होंने यदि कुछ कहा है तो अपने अनुभव के आधार पर कहा होगा, आंकड़ों के आधार पर कहा होगा."

रायपुर शहर की महापौर रह चुकीं किरणमयी नायक वकालत के पेशे में रही हैं और 12 साल पहले उन्होंने 'देह संबंधी क़ानूनों का आलोचनात्मक अध्ययन' विषय में पीएचडी की है.

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प्रेम, धोखा और मुक़दमा

किरणमयी नायक कहती हैं, "मैं अपने बयान पर क़ायम हूं. जिस दिन मैंने यह बयान दिया, उसी दिन एक पुलिस कांस्टेबल के ख़िलाफ़ शिकायत लेकर एक महिला उपस्थित हुई थी. महिला को पता था कि जिस पुलिस वाले के साथ वह रहती है, वह पहले से ही विवाहित और तीन बच्चों का पिता है. महिला चाहती थी कि वह पूर्व पत्नी से तलाक़ लेकर उसके साथ विवाह कर ले."

किरणमयी नायक का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में उनके पास इस तरह के या इससे मिलते-जुलते 18-20 मामले सामने आ चुके हैं.

लेकिन कबीरधाम ज़िले की रहने वाली 29 साल की संयुक्ता (बदला हुआ नाम) का कहना है कि धोखे में रख कर ली गई सहमति को क्या महिला की सहमति की तरह देखा जा सकता है?

उन्होंने कुछ समय पहले ही अपने प्रेमी के ख़िलाफ़ यौन शोषण की रिपोर्ट दर्ज़ कराई है.

वे कहती हैं, "जिस आदमी से मैं प्रेम करती थी, उसने शादी का वादा किया था. यह तो मुझे दो साल बाद पता चला कि वह पहले से विवाहित है और उसे दो बच्चे हैं. मेरे पास यौन शोषण का मामला दर्ज करवाने के अलावा कोई चारा नहीं था. ऐसे धोखेबाज़ व्यक्ति को मैं आजीवन कारावास दिलाना चाहती हूं, जिससे दूसरों को सबक़ मिले."

भाजपा नेता और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष हर्षिता पांडेय का कहना है कि किरणमयी नायक का बयान महिला विरोधी है.

इन दिनों राष्ट्रीय महिला आयोग की सलाहकार का दायित्व निभा रही हर्षिता पांडेय ने बीबीसी से कहा, "जिस तरह का सामाजिक तानाबाना है, वहां रेप जैसे मामलों में महिलाएं मुश्किल से शिकायत करने के लिए सामने आती हैं. ऐसी स्थिति में इस तरह का बयान शिकायत के लिए सामने आने वाली महिलाओं को हतोत्साहित करेगा और यौन प्रताड़ना के आरोपी पुरुषों को बल मिलेगा."

हर्षिता पांडेय

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हर्षिता पांडेय का कहना है कि कुछ उदाहरणों के कारण किसी विषय का सामान्यीकरण नहीं किया जा सकता. उनका कहना है कि महिला आयोग की अध्यक्ष का बयान इस संस्था पर महिलाओं का भरोसा कम करने वाला साबित होगा.

उन्होंने कहा, "किरणमयी नायक जिस संवैधानिक पद पर बैठी हैं, उसका काम ही है कि वह महिलाओं को न्याय दिलाये. लेकिन अध्यक्ष जिस तरह के पूर्वाग्रह के साथ काम कर रही हैं, उससे लगता है कि आयोग की भूमिका एंटी वुमन कमीशन की हो गई है. उन्हें इस मामले में माफ़ी माँगनी चाहिए."

पिछले कई सालों से चाइल्ड ट्रैफ़िकिंग और महिला अधिकारों के लिये काम कर रही चेतना चाइल्ड एंड वुमंस वेलफ़ेयर सोसायटी की निदेशक इंदू साहु के पास ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसमें पुलिस किसी मामले को दर्ज ही नहीं करती.

वे बताती हैं कि हाल ही में घरों में काम करने वाली एक महिला की 18 साल की एक बच्ची लापता हो गई. पुलिस ने यह कहते हुए मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया कि लड़की बालिग़ है, अपनी मर्ज़ी से किसी लड़के के साथ कहीं चली गई होगी, लौट कर आ जाएगी.

इंदू साहु कहती हैं, "मान लिया कि बच्ची अपनी मर्ज़ी से चली गई होगी. कल्पना करें कि उसका प्रेमी गर्भवती होने के बाद उसे छोड़ दे या उसे कहीं बेच दे तो क्या इसलिए वो शिकायत का अधिकार खो देती है कि उसने अपनी मर्ज़ी से युवक के साथ संबंध बनाये थे? महिला आयोग के अध्यक्ष का बयान ना केवल असंवेनशील है, बल्कि यह क़ानून में व्यक्त उस अवधारणा के भी ख़िलाफ़ है, जिसमें किसी महिला के कहे पर तब तक अविश्वास नहीं किया जा सकता, जब तक कि वह ग़लत साबित न हो जाये."

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विश्वसनीयता पर सवाल

देश में औसतन हर दिन बलात्कार के 88 मामले दर्ज होते हैं और इनमें हर दिन छत्तीसगढ़ में दर्ज होने वाले मामलों की संख्या छह है.

इसी साल विधानसभा में प्रस्तुत एक जानकारी के अनुसार जनवरी 2019 से जनवरी 2020 तक राज्य में बलात्कार के 2575 मामले दर्ज किये गये हैं.

2018 में राज्य में बलात्कार के 2081 मामले दर्ज किये गये थे, जिनमें नाबालिग़ों की संख्या 1219 थी. इनमें से 41 मामले तो ऐसे थे, जिनमें पीड़ित की उम्र छह साल से कम थी. 80 पीड़िताओं की उम्र 12 साल से कम थी. इसी तरह 557 बच्चों की उम्र 16 साल से कम थी.

2017 में भी राज्य में दर्ज बलात्कार के 1908 मामलों में 1134 नाबालिग़ थे, जिनमें 47 बच्चे छह साल से कम उम्र के थे. 77 की उम्र 12 से कम थी और 396 की उम्र 16 साल से कम थी.

हाईकोर्ट की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला इन आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहती हैं, "इन आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि बलात्कार के आधे से अधिक मामलों में पीड़िता नाबालिग़ है. पॉक्सो एक्ट में सहमति या असमहति का सवाल ही बेमानी है. आप उम्मीद करते हैं कि छह साल की बच्ची सहमति या असहमति के सवालों के दायरे में आ सकती है? "

वे कहती हैं, "यौन शोषण के दूसरे मामले भी इसी तर्ज़ पर होते हैं. दबाव और प्रलोभन की शिकार महिला को क्या इसलिए शिकायत का अधिकार नहीं है क्योंकि संबंध बनाने में उसकी सहमति थी? महिला की ही शिकायत पर सवाल खड़े करके उसे ही समझाश देना बरसों की पुरुषवादी सोच का ही नतीजा है. महिला आयोग की अध्यक्ष का यह बयान महिलाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने वाला है. इस पितृसत्तात्मक सोच से उबरना ज़रुरी है."

प्रियंका का दावा है कि माओवाद प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में यौन शोषण के मामले सामने आते हैं. वहां तो रिपोर्ट दर्ज कराना भी टेढ़ी खीर है.

वे बीजापुर का उदाहरण देते हुये बताती हैं कि 2015 में बीजापुर के पाँच गांवों में 16 आदिवासी महिलाओं के साथ सुरक्षाबल के जवान द्वारा बलात्कार का मामला ख़ारिज कर दिया गया था. बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी जाँच में इसे सही माना और फिर महिलाओं को मुआवज़ा देने का आदेश जारी किया गया.

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प्रियंका कहती हैं, "हर मामला अपनी तरह का होता है. महिलाओं ने किसी तरह अपने ऊपर होने वाली यौन हिंसा का प्रतिकार करना शुरु किया है, उसकी शिकायत दर्ज कराना शुरु किया है तो उसका समर्थन करना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि किरणमयी नायक अपने बयान के लिये ज़रुर खेद जताएंगी."

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