अमित शाह की बैठक में नहीं जाने वाले किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां कौन हैं

जोगिंदर सिंह उगराहां
इमेज कैप्शन, जोगिंदर सिंह उगराहां

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से किसान नेताओं को अनौपचारिक बातचीत के लिए दिये आमंत्रण पर भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि कुछ नेताओं को अकेले बैठक में नहीं जाना चाहिए था, इससे किसान संगठनों की एकता को लेकर शंकाएँ खड़ी हो सकती हैं.

जोगिंदर सिंह उगराहां इस बातचीत के लिए नहीं गए क्योंकि पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के इस नेता को बातचीत के लिए निमंत्रित नहीं किया गया.

ऐसे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि क्या किसान संगठनों में विभाजन हो सकता है.

बीबीसी पंजाबी सेवा के पत्रकार सरबजीत धालीवाल के मुताबिक़ इस बातचीत के लिए 13 किसान नेताओं को बुलाया गया है.

मौजूदा विरोध-प्रदर्शन में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब के 30 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं.

केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लाख़ों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी एक बड़ी संख्या पिछले 13 दिनों से हरियाणा-दिल्ली सीमा पर टिकरी और सिंघू बॉर्डर के पास बैठी है.

किसान संगठनों ने मंगलवार को देश व्यापी बंद का आह्वान किया था. बंद को आधिकारिक तौर पर सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक ही रखा गया था. इसी दौरान भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राकेश टिकैत का बयान आया कि केंद्रीय गृहमंत्री ने शाम सात बजे किसान नेताओं को मिलने के लिए बुलाया है.

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

शाम साढ़े चार बजे किसान नेताओं की एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस हुई जिसमें इस बात की घोषणा हुई कि 13 लोग गृहमंत्री से मिलने जाएंगे.

उन नेताओं के नाम इस तरह हैं.

1.राकेश टिकैत 2. गुरनाम चढूनी 3. हनन मुल्ला 4. शिवकुमार हक्का 5. बलबिर सिंह 6. जगजीत सिंह 7. रुलदू सिंह मानसा 8. मंजीत सिंह राय 9. बुट्टा सिंह बुरूजगिल 10. हरिंदर सिंह लखोवाल 11. दर्शन पाल 12. कुलवंत सिंह संधू 13. भोग सिंह मानसा

वीडियो कैप्शन, नए कृषि कानूनों से जुड़ा पूरा विवाद क्या है?

लेकिन जोगिंदर सिंह उगराहां ने बीबीसी पंजाबी से बताया है कि उन्हें आज की बैठक के लिए सरकार की ओर से कोई निमंत्रण नहीं मिला था.

शाम सात बजे जब राकेश टिकैत से पत्रकारों ने पूछा कि अमित शाह से बैठक कहां हो रही है तो उनका कहना था कि वो पता कर रहे हैं कि बैठक कहां हो रही है.

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

बैठक की जगह को लेकर भी बहुत भ्रम था. पहले कहा गया कि बैठक गृह मंत्रालय के दफ़्तर या अमित शाह के सरकारी आवास पर होगी फिर बताया गया कि बैठक पूसा इंस्टीट्यूट के गेस्ट हाउस में हो रही है.

लेकिन जोगिंदर सिंह उगराहां के बयान से यह प्रश्न उठना लाज़िमी है कि क्या किसानों के बीच किसी तरह का मतभेद है.

इस आशंका पर आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या से कहा कि इस बैठक के लिए सभी किसान संगठनों को लूप में नहीं रखा गया है, यह सरकार की ओर से आंदोलन में विभाजन करने की कोशिश हो सकती है.

हालांकि बातचीत से ठीक पहले राकेश टिकैत ने बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्या से दावा किया कि 13 किसान नेता बाक़ी सभी समूहों के प्रतिनिधि के तौर पर बैठक में शामिल हो रहे हैं और सब एक साथ हैं.

कौन हैं जोगिंदर सिंह उगराहां

जोगिंदर सिंह उगराहां को किसानों का जननेता कहा जाता है और वो भारत में किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं.

वो संगरूर ज़िले के सुनाम शहर के रहने वाले हैं और उनका जन्म और पालन-पोषण एक किसान परिवार में हुआ था.

भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद, उन्होंने खेती की ओर रुख़ किया और किसान हितों की लड़ाई में सक्रिय हो गए. उन्होंने साल 2002 में भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) का गठन किया और तब से वो लगातार किसानों के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं.

जोगिंदर सिंह उगराहां एक उत्कृष्ट वक्ता हैं और इस कला से वो लोगों को जुटाने में माहिर हैं. उनका संगठन पंजाब का एक प्रमुख किसान संगठन है. पंजाब का मालवा क्षेत्र इस संगठन का गढ़ माना जाता है.

संगरूर के एक स्थानीय पत्रकार कंवलजीत लहरागागा कहते हैं, "मैं पिछले 20-25 सालों से किसानों के हितों के लिए जोगिंदर सिंह उगराहां को लड़ते देख रहा हूं. वो हमेशा जनहित की बात करते हैं. मैंने कभी भी उन्हें निजी मुद्दे पर संघर्ष करते नहीं देखा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)