किसान आंदोलन: 'हम महिलाएं चूल्हा चौका भी वहीं लगा लेंगी'

    • Author, सरबजीत धालीवाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"अगर हमारे किसान भाई ही गाँवों में नहीं रहेंगे तो हम यहाँ रह कर क्या करेंगे? हम उनके साथ ही खड़े रहेंगे."

"इसके लिए चाहे हमें अपने घर सड़कों पर ही क्यों न बनाने पड़ें. हम चूल्हा चौका भी वहीं लगा लेंगे."ये कहना है पंजाब के पटियाला के तरेड़ी जट्टां गाँव की भूपिंदर कौर का जिनके बेटे दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन में शामिल हैं.

बीते दस दिनों से दिल्ली की सीमा पर तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ लाखों की संख्या में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

दिल्ली की सीमा पर डटे इन इन किसानों के घर की महिलाएं भी अब तैयार हैं और कहती हैं कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वो प्रदर्शन करने दिल्ली पहुँच जाएँगी.

किसानों की ज़िम्मेदारियां

इन महिलाओं का दावा है कि अब गाँव में कोई आपसी लड़ाई नहीं रही, वो प्रदर्शन करने गए किसानों की ज़िम्मेदारियों को संभालने के लिए भी तैयार हैं.

भूपिंदर कौर कहती हैं, "गाँव के लोग कहते हैं कि अगर हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ा तो गाँव की सारी औरतें साथ जाएंगी."

"अगर मोदी सरकार नहीं मानी तो हम औरतें सड़कों पर आ जाएंगी. हमारे मन में कोई डर, भय नहीं है. हम अपना हक़ लेकर ही रहेंगे."

एक दूसरी महिला गुरमेल कौर कहती हैं, "गाँव में आपस में अब कोई लड़ाई नहीं रही."

"पहले हम लड़ते थे या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन अब हम सब एक हैं. एक ही माँ के बच्चे बन गए हैं."

'प्रदर्शन में भी जाएँगे'

वे कहती हैं कि अगर हमारे बच्चे भूखे रहेंगे तो हम घर से प्रसाद (रोटियाँ) पका-पका कर भेजेंगे.

साथ ही गुरमेल ये भी कहती हैं, "हम बारी-बारी से प्रदर्शन में भी जाएँगे."ये महिलाएं घर में बैठ कर आँसू गैस के गोले छोड़ने, पानी की तेज़ धार और लाठीचार्ज में किसानों के घायल होने के समाचार भी सुन रही हैं.

इन समाचारों से इन महिलाओं पर पड़ने वाले असर के बारे में भी हमने उनसे पूछा.

इस पर भूपिंदर कौर कहती हैं, "जाको राखे साइयां मार सके ना कोय. जो उस परमात्मा को करना है, वो करना ही है. सरकार कुछ नहीं करती."

"हमारे मन में कोई डर नहीं है, अगर होता तो हमारे बच्चे वहां नहीं जाते."

'मंडियों में हमारे बच्चे रो रहे हैं'गांव की एक अन्य महिला दिलजीत कौर कहती हैं, "मंडियों में हमारे बच्चे रो रहे हैं. अगर सब कुछ चला गया तो हम क्या करेंगे?"

यह पूछने पर कि क्या बच्चों से बात होती है तो ये महिलाएं कहती हैं हाँ, उनसे बात होती है.

"सुबह भी बात हुई थी. वो कह रहे थे कि सब ठीक चल रहा है. हम अपनी लड़ाई के लिए गए हैं और जब हमें हमारे हक़ मिल जाएँगे तो हम वापस मुड़ेंगे."

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