किसानों के आंदोलन को बयाँ करती वायरल हुई एक तस्वीर

    • Author, गीता पांडे
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

भारत में जारी किसानों के प्रदर्शन के दौरान यूं तो कई तस्वीरें सामने आई हैं, लेकिन उनसे से एक तस्वीर वायरल हो चुकी है जिसमें अर्धसैनिक बल का एक जवान बुज़ुर्ग सिख किसान को लाठी मारता नज़र आ रहा है.

इस तस्वीर को समाचार एजेंसी पीटीआई के फ़ोटो-जर्नलिस्ट रवि चौधरी ने अपने कैमरे में क़ैद किया और फिर यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.

इस तस्वीर की वजह से राजनीतिक रस्साकसी भी हुई जहां विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की है.

विपक्षी नेताओं को कहना है कि ये तस्वीर बताती है कि मोदी सरकार किसानों के साथ कैसा बर्ताव कर रही है लेकिन भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि तस्वीर में नज़र आ रहे बुज़ुर्ग सिख को लाठी नहीं लगी थी.

बीते कई दिनों से बड़ी संख्या में किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर जुटे हुए हैं.

किसानों के हितों पर असर

प्रदर्शनकारी किसान मोदी सरकार के हालिया क़ानून का विरोध कर रहे हैं जिसके बारे में उनका दावा है कि ये क़ानून किसान विरोधी है.

किसान जिस क़ानून का विरोध कर रहे हैं, उसे मोदी सरकार सुधार बता रही है, लेकिन किसानों का दावा है कि ये उनके हितों के विपरीत है.

मोदी सरकार का कहना है कि सुधारों की वजह से कृषि में निजी क्षेत्र के लिए राह बनेगी, लेकिन इससे किसानों के हितों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन सरकार के इस दावे से असहमत किसानों ने बड़ी संख्या में दिल्ली की ओर मार्च किया लेकिन राह में अवरोधक लगाकर उन्हें दिल्ली में दाख़िल होने से रोका गया.

किसानों को रोकने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवानों को तैनात किया गया. दोनों के बीच टकराव भी हुआ.

वायरल तस्वीर

पुलिस ने किसानों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दाग़े और वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया. हालांकि दिल्ली पुलिस ने बाद में किसानों को दिल्ली के बुराड़ी मैदान में आकर धरना प्रदर्शन करने की इजाज़त दे दी लेकिन किसानों ने वहां जाने से मना कर दिया और वो सभी पिछले छह-सात दिनों से सीमा पर ही डटे हुए हैं.

बुज़ुर्ग सिख पर लाठी लहराते अर्धसैनिक बल के जवान की तस्वीर बीते शुक्रवार सिंघु बॉर्डर की है.

इस बारे में पीटीआई के फ़ोटो जर्नलिस्ट रवि चौधरी ने फ़ैक्ट चेक साइट बूमलाइव.कॉम को बताया, "वहां पथराव हो रहा था, अवरोधकों को तोड़ा जा रहा था. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में एक बस भी क्षतिग्रस्त हो गई थी."

उनका कहना है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मारना शुरू कर दिया और तस्वीर में नज़र आ रहे सिख बुज़ुर्ग को भी मारा गया.

ये तस्वीर तेज़ी से वायरल हुई जिसे ट्विटर, फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर हज़ारों लोगों ने शेयर किया.

बीजेपी के आईटी सेल की दलील

कई लोगों ने इस तस्वीर के साथ जय जवान जय किसान नारे का भी ज़िक्र किया.

ये नारा साल 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने तब दिया था जब भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हो रही थी.

तब उन्होंने इस नारे के ज़रिए देश-निर्माण में किसान और सैनिक का महत्व बताया था.

विपक्षी कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी ने भी इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए लिखा, "बड़ी ही दुखद फ़ोटो है. हमारा नारा तो जय जवान जय किसान का था, लेकिन आज पीएम मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया. यह बहुत ख़तरनाक है."

वहीं भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी के दावे पर सवाल उठाया और तीन सेकेंड की एक क्लिप शेयर करते हुए दावा किया कि बुज़ुर्ग सिख को लाठी नहीं मारी गई थी और उन्होंने इसे एक 'प्रोपैगेंडा' बताया.

किसानों से बातचीत

लेकिन अमित मालवीय के दावे को बूमलाइव.कॉम ने ग़लत बताया और ज़्यादा अवधि का वीडिया जारी करते हुए उस बुज़ुर्ग सिख की पहचान सुखदेव सिंह के रूप में की और उससे बात भी की.

घायल हुए सुखदेव ने बूमलाइव.कॉम को बताया कि उन्हें एक नहीं बल्कि दो जवानों ने मारा.

पंजाब और हरियाणा के प्रदर्शनकारी किसानों की तस्वीरें भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं.

सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत सरकार के रवैये पर चिंता जताई. उनके इस रुख़ पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

हालांकि सरकार ने किसानों को बातचीत का न्योता दिया, जिसका मंगलवार को कोई नतीजा नहीं निकला. दोनों के बीच अब गुरुवार को बातचीत प्रस्तावित है.

इस बीच बड़ी संख्या में आए किसानों ने दिल्ली के सीमाओं पर डेरा डाल रखा है. उनका कहना है कि सरकार जब 'काला क़ानून' वापस लेगी, वो तभी यहां से हटेंगे.

किसानों का कहना है कि वो अपने साथ राशन-पानी लेकर पूरी तैयारी से आए हैं.

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