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#FarmersProtest पर बोले अमित शाह, किसानों का प्रदर्शन राजनीतिक नहीं
केंद्र के नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ किसानों के जारी प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि ये क़ानून किसानों के कल्याण के लिए है. साथ ही उन्होंने किसानों के प्रदर्शन को गैर राजनीतिक बताया.
हैदराबाद नगर निगम के अंतिम दौर के चुनाव प्रचार के सिलसिले में अमित शाह रविवार को हैदराबाद में थे.
संवाददाताओं के साथ बातचीत में शाह ने कहा, "नए कृषि क़ानून किसानों के कल्याण के लिए हैं. लंबे समय के बाद किसान बंधन वाली व्यवस्था से बाहर आने जा रहे हैं. जो भी इनका राजनीतिक विरोध करना चाहता है करने दें. मैंने ये कभी नहीं कहा कि किसानों का प्रदर्शन राजनीतिक है और ऐसा कभी कहूँगा भी नहीं."
शाह प्रदर्शनकारी किसानों से पहले ही यह अपील कर चुके हैं कि वो बुराड़ी के मैदान में प्रदर्शन के लिए बैठें और जैसे ही वो निर्धारित जगह पर आते हैं केंद्र सरकार उनसे बातचीत करेगी."
हालांकि रविवार को प्रदर्शनकारी किसान इस बात पर डटे रहे कि वो बुराड़ी नहीं जाएंगे और केंद्र सरकार की ऐसी किसी शर्त को नहीं मानेंगे.
किसानों के प्रदर्शन की वजह से फ़ैला कोरोना तो अमरिंदर ज़िम्मेदारः खट्टर
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को कहा कि हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर पर जुटे किसानों की वजह से अगर राज्य में कोविड-19 महामारी की संख्या में इज़ाफ़ा होता है तो इसके लिए पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ज़िम्मेदार होंगे.
खट्टर ने यह ज़ोर देते हुए कहा कि हरियाणा में कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए विवाह, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों जैसे सामाजिक समारोहों में भाग लेने वाले लोगों की संख्या को सीमित करने का निर्णय लिया गया था.
हिसार में एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत में खट्टर ने कहा, "कोरोनो वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए, हमने पारिवारिक और राजनीतिक समेत सभी प्रकार के इनडोर समारोहों के लिए 100 और आउटडोर समारोहों के लिए 200 लोगों तक सीमित करने का फैसला किया था."
पंजाब के हज़ारों किसान तीन केंद्रीय कृषि क़ानूनों के विरोध में हरियाणा के रास्ते दिल्ली की सीमाओं पर पहुंचे हैं, इस पर खट्टर ने कहा कि "उन्हें आश्चर्य है कि पंजाब सरकार ने महामारी के बीच इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने वाले आंदोलन को क्यों प्रोत्साहित किया. यदि इस बीमारी का यहाँ प्रभाव पड़ा तो कौन ज़िम्मेदार कौन होगा?"
उन्होंने सवाल उठाया कि, "अगर (कोविड मरीज़ों की) संख्या (हरियाणा में) बढ़ती है तो मैं पंजाब सरकार को ज़िम्मेदार ठहराऊंगा."
शनिवार को खट्टर ने कहा था कि केंद्रीय कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के इस आंदोलन को कुछ राजनीतिक पार्टियाँ और संगठन स्पॉन्सर कर रहे हैं.
इस आंदोलन की शुरुआत में जब पंजाब से किसान हरियाणा के बॉर्डर होते हुए दिल्ली जाने की कोशिश में लगे थे तो हरियाणा सरकार ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की थी.
इसे उचित ठहराते हुए खट्टर ने कहा, "हमने उन्हें रोका और बताया कि दिल्ली में कोई भी इतनी बड़ी सभा की अनुमति नहीं देगा, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी और जबरन आगे बढ़ गए."
इसके बाद पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने हरियाणा के सीएम खट्टर के बयान पर तीखा प्रहार करते हुए उनसे पूछा कि क्या हरियाणा के किसान 'दिल्ली चलो' प्रदर्शन में शामिल नहीं हैं?
उन्होंने कहा, "खट्टर नकार रहे हैं कि उनके प्रदेश के किसान इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हैं. खट्टर उनकी तरफ खड़े होने के बजाए झूठ फैला रहे हैं लिहाजा उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता."
सरकार से बात को राज़ी हुए किसान लेकिन कोई शर्त स्वीकार नहीं
केंद्र के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने रविवार को कहा कि वो सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई भी शर्त नहीं मानेंगे.
इनमें सिंघु और टीकरी बॉर्डर से दिल्ली के बुराड़ी मैदान में जाने जैसी शर्तें शामिल हैं. सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर ही बीते तीन दिनों से किसान जमे हुए हैं.
भारतीय किसान यूनियन की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चधोनी ने कहा, "हम उनके (केंद्र के) प्रस्ताव में शामिल इस शर्त को नहीं मानते. हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन किसी भी शर्त को नहीं मानेंगे."
क्रांतिकारी किसान यूनियन के पंजाब के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, "सरकार ने हमें शर्तों के साथ बातचीत के लिए बुलाया है. बातचीत का माहौल बनाया जाना चाहिए. अगर कोई शर्त रखी जाएगी तो हम बात नहीं करेंगे."
सर्द मौसम में एक और रात गुजारने के बावजूद रविवार को चौथे दिन भी हज़ारों की संख्या में किसान केंद्र के नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.
रविवार की शाम को प्रदर्शनकारी किसानों को हरियाणा के खाप नेताओं का समर्थन मिल गया.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक ये खाप सोमवार को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ जुटेंगे और दिल्ली की तरफ कूच करेंगे.
हरियाणा के खाप प्रधान और दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा, "हम केंद्र से एक बार फिर नए कृषि क़ानूनों पर विचार करने का आग्रह करते हैं. हर किसी को अभिव्यक्ति अधिकार है."
सीनियर एडवोकेट एचएस फूलका भी प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के बाहर वकीलों के साथ एकत्र हुए.
इस दौरान उन्होंने कहा, "उनके प्रदर्शन को राजनीति का रंग देना ग़लत है. उनकी माँग जायज है और सरकार को उसे स्वीकार करना चाहिए."
उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से प्रदर्शन को बुराड़ी ले जाने का आग्रह किया है और कहा कि वो जैसे ही निर्धारित जगह पर पहुँचेंगे केंद्र सरकार उनसे बातचीत करने के लिए तैयार है.
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार ने 3 दिसंबर को किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है. लेकिन अब उनकी कुछ यूनियनों ने माँग की है कि यह वार्ता तुरंत आयोजित की जानी चाहिए. जैसे ही सभी प्रदर्शनकारी बुराड़ी में निर्धारित जगह पर पहुँचते हैं, केंद्र उनके साथ बातचीत के लिए तैयार है."
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) के एक प्रतिनिधि ने कहा, "अगर सरकार किसानों की माँग को सुनने के प्रति गंभीर है तो उसे इसके साथ शर्तें नहीं जोड़नी चाहिए. साथ ही यह भी नहीं मान कर चलना चाहिए कि बातचीत किसानों को नए कृषि क़ानूनों के लाभ को समझाने के लिए होगी."
इससे पहले शनिवार को केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने 32 किसान संगठनों को लिखे अपने एक पत्र में कोविड-19 का हवाला देते हुए किसानों से बुराड़ी स्थित संत निरंकारी मैदान में प्रदर्शन करने का आग्रह किया था.
इस पत्र में उन्होंने लिखा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के संबंध में विस्तृत वार्ता के लिए दिल्ली में चर्चा के लिए किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को भारत सरकार की तरफ से आगामी 3 दिसंबर, 2020 को आमंत्रित किया गया है.
उन्होंने लिखा कि "कोविड महामारी को देखते हुए किसानों के लिए बुराड़ी में एक बड़ा ग्राउंड तैयार किया गया है ताकि व्यवस्थित तरीके से उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखा जा सके. दिल्ली की सीमा पर एकत्रित सभी किसानों को आप बुराड़ी ग्राउंड पर लेकर आएं जहां किसानों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं."
बिना शर्त बात करे केंद्र सरकारः केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि केंद्र सरकार को किसानों से फौरन बातचीत करनी चाहिए.
उन्होंने ट्वीट किया, "केंद्र सरकार किसानों से तुंरत बिना शर्त बात करे."
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा, "हम इस संघर्ष का समर्थन कर रहे हैं. इस मामले में हम हस्तक्षेप करना भी नहीं चाहते और करेंगे भी नहीं."
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को उनसे जहां कहीं भी किसान और जत्थेबंदी बैठे हैं उनको वहीं रुकने देना चाहिए. वे कहते हैं, फ़र्ज़ तो ये बनता है कि गृह मंत्री, कृषि मंत्री, प्रधानमंत्री उनके पास जाते, मिलते उनको. नगर निगम के चुनाव प्रचार के लिए समय है. इससे इनकी मंशा का पता चलता है. किसान जहाँ भी बैठना चाहें उनको वहीं पर सुविधाएं मिलनी चाहिए."
दरअसल गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के कई दिग्गज नेता तेलंगाना में हैदराबाद नगर निगम के चुनाव प्रचार में जुटे हैं.
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