बिहार चुनावः वो सीटें जहां बेहद नज़दीकी अंतर से हारे महागठबंधन के उम्मीदवार

तेजस्वी यादव

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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि महागठबंधन बीस सीटों पर बेहद कम अंतर से हारा है और कई सीटों पर बड़ी तादाद में पोस्टल बैलट को अमान्य घोषित किया गया है. तेजस्वी ने पोस्टल बैलट को दोबारा गिने जाने की मांग भी की है.

तेजस्वी यादव ने गुरुवार को दिए अपने बयान में कहा था, "हमें लगता है कि अगर गिनती ईमानदारी से हुई होती तो हमें 130 से अधिक सीटें मिलती. कई विधानसभाओं में पोस्टल बैलट की गिनती आख़िर में हुई है. ऐसी भी सीटें हैं जहां 900 से अधिक पोस्टल बैलट खारिज कर दिए गए."

हाल में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 125 जबकि महागठबंधन ने 110 सीटों पर जीत हासिल की है.

चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक़ ऐसी 11 सीटें हैं जिन पर महागठबंधन के प्रत्याशी 2 हज़ार से कम वोटों के अंतर से हारे हैं.

  • सबसे नज़दीकी मुक़ाबला हिलसा सीट पर रहा जहां राष्ट्रीय जनता दल के अत्री मुनी उर्फ़ शक्ति सिंह को जनता दल यूनाइटेड के कृष्ण मुरारी शरण उर्फ़ प्रेम मुखिया ने 12 वोटों से हरा दिया. नालंदा लोकसभा की इस सीट पर 1022 लोगों ने नोटा पर बटन दबाया है.
  • बारबीघा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार गजानंद शाही सिर्फ़ 113 मतों से चुनाव हारे हैं. इस सीट पर 3639 लोगों ने सभी उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा पर बटन दबाया है.
  • भोरे विधानसभा सीट पर जनता दल यूनाइटेड के सुनील कुमार ने महागठबंधन में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (एम-एल) के जितेंद्र पासवान को 462 वोटों से हराया है.
  • बछवारा सीट पर भाजपा के सुरेंद्र मेहता ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के अवधेश कुमार राय को 464 वोटों से चुनाव हराया.
  • चकाई विधानसभा सीट पर स्वतंत्र उम्मीदवार सुमित कुमार सिंह ने राजद उम्मीदवार सावित्री देवी को 581 वोटों से हराया है. इस सीट पर कुल 723 पोस्टल वोट पड़े थे जिनमें से 246 राजद उम्मीदवार को मिले. यहां 6520 लोगों ने नोटा को वोट दिया.
  • परबत्ता सीट पर राजद उम्मीदवार दिगंबर प्रसाद तिवारी जदयू उम्मीदवार डॉक्टर संजीव कुमार से 951 वोटों से हारे हैं. यहां नोटा को 1916 वोट मिले.
  • मुंगेर सीट पर राजद उम्मीदवार अविनाश कुमार विद्यार्थी भाजपा उम्मीदवार प्रणव कुमार से 1244 वोटों से हारे. इस सीट पर 3063 लोगों ने नोटा को वोट दिया.
  • सकरा सीट पर कांग्रेस के उमेश कुमार राम जदयू के अशोक कुमार से 1537 मतों से चुनाव हारे. यहां 4389 लोगों ने नोटा को वोट दिया.
  • महिषी सीट पर राजद के गौतम कृष्णा जदयू के गंजेश्वर शाह से 1630 वोटों से चुनाव हारे हैं. यहां 3005 लोगों ने नोटा को वोट दिया.
  • झाझा सीट पर राजद के राजेंद्र प्रसाद जदयू के दामोदर रावत से 1679 मतों से चुनाव हारे. इस सीट पर 6271 ने सभी उम्मीदवारों को नकार कर नोटा पर बटन दबाया.
  • परिहार सीट पर भाजपा की गायत्री देवी ने राजद की रितु जायसवाल को 1729 वोटों से हराया. इस सीट पर 3589 लोगों ने नोटा को वोट दिया.
बिहार में चुनाव

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वोटों की गितनी में गड़बड़ी का तेजस्वी का आरोप

तेजस्वी यादव का आरोप है कि पोस्टल बैलट की गिनती में गड़बड़ी हुई है और नतीजों को प्रभावित किया गया है.

वहीं ऐसी 11 सीटें हैं जिनमें महागठबंधन के प्रत्याशी दो हज़ार से कम के अंतर से चुनाव जीते हैं.

रामगढ़ सीट से सुधाकर सिंह सिर्फ़ 189 मतों के अंतर से चुनाव जीते हैं. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को हराया है.

वहीं डेहरी सीट से राजद के ही फ़तेह बहादुर सिंह भी सिर्फ़ 464 मतों के अंतर से जीते. इसी तरह कुरहानी सीट से राजद के अनिल कुमार साही 712 मतों से तो बखरी से सीपीआई के सूर्यकांत पासवान 777 मतों से चुनाव जीते.

एनडीए ने तेजस्वी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. जदयू नेता अजय आलोक कहते हैं, "तेजस्वी को जनादेश का सम्मान करना आना चाहिए. ये साबित करता है कि अभी अपरिपक्वता उनकी राजनीति पर हावी है. वो संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान भी नहीं करते हैं. चुनाव आयोग की सफाई के बाद भी चुनाव आयोग पर उंगली उठा रहे हैं. ईवीएम को कोस रहे हैं."

बिहार में चुनाव

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अजय आलोक कहते हैं, "जिन लोगों को जनादेश का मतलब नहीं पता है, जो सिर्फ़ बूथ लूट कर जनादेश लेना जानते हैं वो इस जनादेश का मतलब नहीं समझ रहे हैं. एनडीए को 125 सीटें मिली हैं, वो सिर्फ 110 पर रुक गए हैं. हमारी सीटें ज़्यादा हैं, वोट प्रतिशत ज़्यादा है, पॉपुलर वोट ज़्यादा हैं. फिर भी कहते हैं कि धांधली हो गई हैं. आधारहीन आरोप लगा रहे हैं."

वहीं राजद के युवा नेता जयंत जिज्ञासु तेजस्वी की मांग को सही ठहराते हुए कहते हैं कि यदि विपक्ष को नतीजों पर शक है तो चुनाव आयोग को दोबारा गिनती करनी चाहिए.

कई सीटों पर राजद के भी कम अंतर से जीतने के सवाल पर जयंत कहते हैं, "जहां हम कम अंतर से जीते हैं वहां भी दोबारा गिनती हो जाए. हम इसके लिए तैयार हैं."

जयंत कहते हैं, "एक वोट से हार भी हार होती है लेकिन सवाल ये है कि क्या वो हार जनता ने तय की है या चुनाव आयोग ने. हम सब ये मानते हैं कि हम हारे नहीं है बल्कि हराए गए हैं. इसकी ठोस वजह ये है कि मुख्यमंत्री के कार्यालय की ईमानदारी भी सवालों में है. दिन भर एनडीए और महागठबंधन की बीच कड़ा मुकाबला दिखाया जाता रहा ताकि ये लगे ही नहीं कि धांधली हुई है."

वो कहते हैं, "हिलसा सीट पर रिटर्निंग अधिकारी ने राजद उम्मीदवार को पहले जीत की मुबारकबाद दी और फिर बाद में बताया कि वो 12 वोटों से हार गए हैं. कई सीटों पर हमारे उम्मीदवारों से दोबारा गिनती का फॉर्म भरवाया गया और इसी बीच विपक्षी उम्मीदवारों को जीत का सर्टिफिकेट दे दिया गया. इस पूरे खेल की जांच होनी चाहिए."

चिराग पासवान

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जीत का अंतर बढ़ाने में लोजपा की भूमिका

जदयू का कहना है कि एनडीए को चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिला है और अगर लोजपा ने भीतरघात न किया होता तो जीत का अंतर और बड़ा होता.

अजय आलोक कहते हैं, "लोजपा ने महागठबंधन की बी टीम बनकर काम किया और करीब साठ सीटों पर हमें नुकसान पहुंचाया. इतने गहरे भीतरघात के बावजूद हमने बहुमत हासिल किया है. ये साबित करता है कि जनता ने हमारे अब तक के काम पर मुहर लगाई है. इस बहुमत पर सवाल उठाना जनता का अपमान है."

बछवाड़ा सीट पर 464 वोटों से हारने वाले अवधेश कुमार राय का मानना है कि उन्हें धांधली से हराया गया है.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं. चुनाव आयोग को स्वतः संज्ञान लेकर जांच करनी चाहिए. ये सिर्फ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ही भावना नहीं है, बिहार की जनता भी यही सोच रही है."

राय कहते हैं, "चुनाव में ये मायने नहीं रखता कि कोई दस वोट से हारा या बीस वोट से. हारना और जीतना तो किसी को है लेकिन जो चुनाव आयोग पर सवाल उठे हैं वो गंभीर हैं. संवैधानिक संस्था पर सवाल उठना दुर्भाग्यपूर्ण है. इन सवालों के जवाब मिलने चाहिए."

वहीं चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज किया है. अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी एचआर श्रीनिवास ने कहा है कि हिलसा सीट पर राजद की मांग पर पोस्टल बैलट दोबारा गिने गए थे और नतीजे में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.

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