जम्मू-कश्मीर में एनजीओ और अख़बार के दफ़्तर पर एनआईए के छापे: प्रेस रिव्यू

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हिन्दुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के अनुसार राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में कई ग़ैर-सरकारी संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और एक बड़े अख़बार के दफ़्तर पर छापा मारा.
एजेंसी के मुताबिक़ ये छापे उनपर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और चरमपंथी गतिविधियों की मदद के लिए धन जुटाने के संदेह में मारे गए.
ख़बर में कहा गया है कि एनआईए ने श्रीनगर और बांदीपोरा में दस जगहों के अलावा बेंगलुरु में भी एक जगह छापा मारा.
इनमें जम्मू-कश्मीर कोअलिशन ऑफ़ सिविल सोसायटी के कोऑर्डिनेटर ख़ुर्रम परवेज़ का घर और दफ़्तर तथा ग्रेटर कश्मीर अख़बार का दफ़्तर शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि एनआईए बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की लोगों को "धमकाने वाली" एक एजेंसी बन गई है और ये छापे "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ की जा रही कार्रवाइयों का एक और उदाहरण" है.
मोदी को क्लीन चिट देने पर झूठे आरोप लगाए गए- गुजरात दंगों के एसआईटी चीफ़

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2002 के गुजरात दंगे मामलों की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के प्रमुख रहे पूर्व सीबीआई प्रमुख आरके. राघवन ने आरोप लगाया है कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने पर उन पर 'झूठे आरोप' लगाए गए.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, राघवन ने इस सप्ताह आई अपनी जीवनी में यह भी बताया है कि बोफ़ोर्स घोटाला जिसकी वो जांच कर रहे थे उसमें यूपीए सरकार ने गड़बड़ी की थी.
राघवन ने गुजरात एसआईटी से मार्च 2017 में इस्तीफ़ा दे दिया था और उन्हें अगस्त में मोदी सरकार ने साइप्रस का उच्चायुक्त नियुक्त कर दिया था.
जांच के दौरान उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला था जो यह साबित कर सके की 2002 के गुजरात दंगों की साज़िश में तत्कालीन मोदी सरकार शामिल थी.
'ए रोड वेल ट्रेवल्ड' नामक अपनी जीवनी में उन्होंने लिखा है, "मेरे ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगाए गए. मैंने यह तर्क मानने से इनकार कर दिया था कि राज्य प्रशासन की मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाने वाले दंगाइयों के साथ मिलीभगत थी."
"एसआईटी का मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर स्पष्ट रुख़ राज्य और दिल्ली में उनके विरोधियों के लिए ठीक नहीं था. उन्होंने मेरे ख़िलाफ़ याचिकाएं दायर कीं और मुझ पर मुख्यमंत्री का पक्ष लेने का आरोप लगाया. यह भी अनाधिकारिक सूचनाएं थीं कि मेरी टेलीफ़ोन की बातचीत की निगरानी के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया. हालांकि, वे निराश हुए क्योंकि उन्हें दोषी सिद्ध करने के लिए कुछ नहीं मिला."
अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक तेज़ी से पटरी पर लौट रहीः पीएम मोदी

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इकोनॉमिक टाइम्स को एक इंटरव्यू में कहा है कि भारत कोविड-19 के बावजूद वर्ष 2024 तक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बन सकता है.
महामारी फैलने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था जितनी उम्मीद थी उससे कहीं तेज़ गति से पटरी पर लौट रही है और हाल में सुधारों के लिए किए गए प्रयास दुनिया के लिए ये संकेत है कि नया भारत बाज़ार और बाज़ार को चलाने वाली शक्तियों में भरोसा करता है.
उन्होंने कहा कि सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी ताकि ये सुनिश्चित हो सकते कि भारत सारे विश्व के लिए निवेश की दृष्टि से सबसे पसंदीदा जगह समझा जाए.
सोशल मीडिया पोस्ट परकेस दर्ज करने पर बोला सुप्रीम कोर्ट

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देश के सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न राज्यों में सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर लोगों पर मामले दर्ज करने को लेकर कड़ा संदेश दिया है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के मुताबिक़, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि 'सरकार की आलोचना करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के कारण हम देश के नागरिकों को देश के एक कोने से दूसरे कोने में नहीं घसीटते रह सकते हैं.'
यह चेतावनी पश्चिम बंगाल पुलिस के उस समन के बाद आई है जो उसने दिल्ली के एक व्यक्ति के लिए जारी किया था. दरअसल, इस शख़्स ने राज्य में लॉकडाउन के नियमों को लागू नहीं किए जाने की आलोचना की थी.
जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बैनर्जी की खंडपीठ ने कहा कि 'सीमा रेखा पार मत करिए. भारत को आज़ाद ही रहने दीजिए. हम, सुप्रीम कोर्ट होने के नाते यहां पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हैं. संविधान द्वारा सुप्रीम कोर्ट इसलिए बनाया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य किसी आम नागरिक को परेशान न करे.'
'कुछ ज़िले कोविड की जांच नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे'

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देश के शीर्ष निजी डाइग्नोस्टिक लैब्स में से एक लैब के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा है कि देश के कुछ ज़िलों में सरकारी प्रशासन कोरोना वायरस की टेस्टिंग की प्रक्रिया 'नियंत्रित' करने की कोशिशों में लगे हुए हैं ताकि 'अच्छा स्कोरकार्ड' दिखाया जा सके.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट में थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर और फ़ाउंडर ए. वेलुमनी के हवाले से कहा गया है कि कोरोना की जांच भले ही निजी लैब के लिए खोल दी गई हों लेकिन ज़िला स्तर पर सरकारें अभी भी निजी केंद्रों को नियंत्रित कर रही हैं.
उन्होंने कहा, "यह आज पहले से भी कहीं ज़्यादा हो रहा है. हमसे कहा जा चुका है कि हम विभिन्न राज्यों के कई ज़िलों में सैंपल न लें क्योंकि हम ग़लत तरीक़े से पॉज़िटिव मामले दिखा रहे हैं."
थायरोकेयर देश में शीर्ष पांच डायग्नोस्टिक सेंटर में शामिल है और महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे कोरोना से सबसे प्रभावित राज्यों में सैंपल इकट्ठा कर रहा है.
वेलुमनी कहते हैं, "कम से कम 100 ज़िलों में हमारे रोज़ाना 2,000 सैंपल कम हो रहे हैं क्योंकि एक मंशा बिलकुल साफ़ है कि वे अधिक पॉज़िटिव मामलों का स्कोर कार्ड नहीं दिखाना चाहते हैं. वे एक अच्छा स्कोर कार्ड दिखाना चाहते हैं."
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