हाथरस मामला: प्रियंका गांधी के साथ हुई बदसलूकी की होगी जांच - प्रेस रिव्यू

प्रियंका गांधी

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पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस जाते समय कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ हुई बदसलूकी की पुलिस आयुक्त कार्यालय जांच करेगा.

नोएडा पुलिस ने इस मामले में जांच के आदेश देते हुए कहा है कि कोई सक्षम महिला अधिकारी इस मामले की जांच करेगी.

बीते शनिवार को हाथरस जा रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को रोकने के लिए डीएनडी पर भारी पुलिस बल तैनात की गई थी. इस दौरान पुलिस ने लाठियां भी चलाईं.

इसी समय की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई जिसमें एक पुलिसकर्मी ने प्रियंका गांधी के कुर्ते को पकड़ रखा था.

अख़बार जनसत्ता ने इस ख़बर को प्रकाशित किया है.

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हाथरस

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हाथरस मामला: अस्पताल की रिपोर्ट का दावा, नहीं बना कोई शारीरिक संबंध

हाथरस मामले में अपनी अंतिम राय देते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ॉरेंसिक मेडिसिन ने कहा है कि उन्हें किसी भी तरह के वजाइनल या एनल इंटरकोर्स के साक्ष्य नहीं मिले हैं.

यह ख़बर द हिंदू ने प्रकाशित की है.

हालांकिविभाग ने शारीरिक शोषण होने के सुबूत मिलने की बात कही है.

शनिवार को जारी की गई ये फोरेंसिक रिपोर्ट आगरा की एक लैब द्वारा जारी शुरुआती एफ़एसएल रिपोर्ट के संदभ में बनाई गई है, जिसमे स्पर्म नहीं मिलने की बात कही गई है.

आगरा लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही एडीजी ने रेप न होने की बात की थी.

कोरोना

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पांच सौ रूपये में मिल रही कोरोना की नेगेटिव रिपोर्ट

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के आंकड़े कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. हफ़्तों से हर रोज़ कोरोना के अस्सी से नब्बे हज़ार नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं. लेकिन इसी दौरान धांधली का एक बेहद ख़तरनाक मामला भी सामने आया है.

इटावा के एक अस्पताल में रिश्वत लेकर कोरोना टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट देने का मामला सामने आया है.

अख़बार नवभारत टाइम्स ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी है.

अख़बार लिखता है कि इसके लिए बक़ायदा एक रैकेट काम कर रहा था. मामला तब सामने आया जब इस फ़र्जीवाड़े में शामिल दलालों ने एक सिपाही को भी पांच सौ रूपये लेकर निगेटिव रिपोर्ट थमा दी. इसके बाद रविंद्र नाम के इस सिपाही ने सिविल लाइंस थाने में आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज करवाया है.

अस्पताल में कोविड-19 जांच के लिए ट्रूनेट मशीन लगी है, जिससे कुछ घंटों में ही रिपोर्ट मिल जाती है. अख़बार के अनुसार इसी मशीन का प्रयोग करके यह सारा ग़लत काम किया जा रहा था और लोगों से 500 से 2000 रूपये तक लेकर मन-मुताबिक़ रिपोर्ट उन्हें सौंप दी जा रही थी.

अख़बार लिखता है कि इस बारे में जब सीएमओ एनएस तोमर से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने ऐसी किसी भी जानकारी से अनभिज्ञता जताई.

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