हाथरस केस : पीड़ित परिवार को डराने धमकाने के आरोप पर क्या बोला हाथरस प्रशासन

हाथरस
    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हाथरस से

हाथरस में एक दलित लड़की के साथ कथित रूप से रेप हुए अब लगभग 19 दिन बीत चुके हैं. हालांकि पुलिस का कहना है कि मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें पता भी नहीं है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनकी मर्ज़ी के बग़ैर जो पार्थिव शरीर जला दिया, वो उनकी बेटी का था भी या नहीं.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस तरह से उसका अंतिम संस्कार किया है, उस पर पीड़ित परिवार और जनता का आक्रोश अभी तक थमा नहीं है.

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लेकिन इसके बीच में ऐसे वीडियोज़ सामने आए हैं जिनमें हाथरस ज़िले के डीएम कथित रूप से पीड़ित परिवार को डराने धमकाने की कोशिश करते दिख रहे हैं.

इसके बाद से लेकर ये ख़बर लिखे जाने तक उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस को एक छावनी में तब्दील कर दिया है.

हाथरस

पीड़ित परिवार से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा था, चाहें वह विपक्ष दलों के नेता पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी हों या टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन हों. हालांकि शनिवार को प्रशासन ने इसकी इजाजत दे दी.

पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश में इन नेताओं को पुलिस की ज़्यादतियां भी बर्दाश्त करनी पड़ीं.

ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन पर इस तरह के आरोप क्यों लग रहे हैं?

क्या कहता है पीड़िता का परिवार?

चिता
इमेज कैप्शन, पीड़िता की चिता

दो दिनों के बाद शनिवार को हाथरस प्रशासन ने मीडियाकर्मियों को पीड़ित परिवार से मिलने की इजाज़त दी है.

बीबीसी ने पीड़ित परिवार से बात करके ये जानने की कोशिश की है कि उन्हें प्रशासन की ओर से डराने और धमकाने से जुड़ी ख़बरों का आधार क्या है.

मृत युवती के रिश्तेदार ने बीबीसी से बात करते हुए बताया है, "बीते दो दिनों में एसआईटी की टीम के जाने के बाद यहां पर डीएम साहब आए हैं, ऐसा उल्टा सीधा बोल रहे हैं कि लड़की कोरोना से मर जाती तो क्या मुआवज़ा मिल जाता आप लोगों को. और ये बोलते हैं कि पोस्टमॉर्टम हो चुका है, बॉडी के चीथड़े उड़ चुके हैं. मैं यही बोलूंगा कि मैं अपनी दीदी के साथ हमेशा से रहा हूं. मैंने उन्हें हर हालत में देख लिया... पोस्टमॉर्टम के बाद देखने में क्या दिक्कत थी हमें."

पुलिस की ओर से कथित रूप से जबरन अंतिम संस्कार किए जाने की बात पर मृत युवती के रिश्तेदार ने अपनी बात रखी.

थाना चंदपा

वे कहते हैं, "हमें नहीं मालूम कि किसकी बॉडी को जला दिया गया. किसकी बॉडी पर पेट्रोल डालकर जला दिया गया. हमें जब तक इन सब सवालों के जवाब नहीं मिल जाते हैं तब तक हम किसी भी बात से संतुष्ट नहीं होंगे."

हालांकि डीजीपी एचसी अवस्थी ने परिवार के मर्जी के बिना मृतक लड़की के अंतिम संस्कार करने के आरोप पर कहा है कि मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता हूँ. यह निर्णय स्थानीय (प्रशासन) स्तर पर लिया गया था.

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मृतका के रिश्तेदार ने उस वीडियो के पीछे की कहानी भी बताई जिसमें हाथरस के ज़िलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार कथित रूप से पीड़ित परिवार को धमकाते दिख रहे हैं.

मृत युवती के रिश्तेदार कहते हैं, "आपने वो वीडियो देखा ही होगा, वो बोल रहे थे कि बार बार बयान न बदलें. पापा जी, कभी अधिकारियों से मिले नहीं. उन्होंने चारों तरफ से घेर लिया. डीएम साहब बोलते हैं कि यहां पर पाँच छह लोग बैठे हैं. वहां जा रहे हैं, दो लोग एक लोग. उनसे साइन करवा लिए हैं. वीडियो कॉल करवा दी है. ये सब दबाव नहीं है तो क्या है. सरकारी नौकरी और मुआवजे के दस्तावेज़ पर साइन करवा लिए. और पापा को बोल दिया कि घर पर जाकर सबके आगे हाथ जोड़कर बोल दो कि मीडिया वाले चले जाएं."

क्या कहता है प्रशासन?

गांव में तैनात पुलिस

हाथरस प्रशासन की ओर से एसडीएम प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया है कि मीडिया को रोके जाने की वजह एसआईटी के काम में आने वाली बाधाओं को रोकना था.

बीबीसी ने एसडीएम मीणा से पूछा कि हाथरस प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को डराया धमकाया क्यों जा रहा है. इस सवाल पर मीणा कहते हैं कि प्रशासन पीड़ित पक्ष को क्यों धमकाएगा.

लेकिन जब उनसे डीएम प्रवीण कुमार के वायरल वीडियो के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि "डीएम साहब का जो वीडियो जारी हुआ है, वो वीडियो ऑउट ऑफ़ कॉन्टेक्स्ट यानी संदर्भ रहित था. इसके बाद डीएम साहब ने उस वीडियो का आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया है. मेरी आपसी गुज़ारिश है कि जो आधिकारिक स्पष्टीकरण उसे संज्ञान में लेकर ही अपनी बात रखें."

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार ने इस वीडियो पर अपना स्पष्टीकरण दिया था, "पीड़ित परिवार के कुल छह परिजन उनके साथ बैठकर लगभग एक से डेढ़ घंटे तक वार्ता हुई. उन्होंने सभी मांगों पर सहमति दी. और उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था. और इस बातचीत का हमारे पास वीडियो है. और उसके बाद भी मुझे आज पता चला कि पीड़ित परिवार किसी बिंदु पर खुश नहीं है. इसके लिए मैं आज उनसे मिलने गया था. डेढ़ घंटे तक मेरी उनसे बातचीत हुई . और मैंने यही जानने का प्रयास किया कि इनकी नाराज़गी का क्या कारण है. लेकिन इस तरह से नकारात्मक जो ख़बरें चलाई जा रही हैं, उनका मैं खंडन करता हूं."

रेप को लेकर विवाद जारी

घटनास्थल पर मीडिया

प्रेम प्रकाश मीणा ने पीड़िता के साथ रेप होने या न होने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि "इस मामले में रेप की धारा लगी हुई है."

बीबीसी ने इस मामले में एसडीएम मीणा से सवाल किया कि जब एडीजी प्रशांत कुमार ने पीड़िता के साथ रेप ना होने की पुष्टि की है तो एफआईआर में रेप की धारा क्यों लगी हुई है.

इस पर मीणा कहते हैं, "इस सवाल का उत्तर आप मुझसे न पूछें तो उचित होगा क्योंकि जैसा मैंने कहा है कि ये एक आपराधिक मामला है. एसडीएम का संबंध आपराधिक मामलों में नहीं होता है, मेरा संबंध क़ानून व्यवस्था बनाए रखने में है. और मैं वही कर रहा हूँ."

पीड़िता के गाँव में अभी भी पुलिस का पहरा बना हुआ है. बाजरे के खेत से लेकर, पीपल की छाँव में सिर्फ वर्दी धारी ही नज़र आ रहे हैं.

और पीड़ित परिवार का सवाल सिर्फ एक है - उनके घर की बेटी को यूँ क्यों जला दिया गया.

मृत युवती के रिश्तेदार ने बीबीसी के साथ बात करते हुए एक सवाल पूछा है कि उनकी बहन के साथ दो-दो बार अत्याचार क्यों हुआ?

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