चंदा कोचर के पति दीपक कोचर गिरफ़्तार, यहां तक कैसे पहुंचा मामला

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आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ़्तार कर लिया है.
ईडी ने डेढ़ साल पहले दोनों पति-पत्नी के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. एजेंसी कोचर दंपति से वीडियोकॉन समूह को बैंक से कर्ज़ देने में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ करती रही है.
मामले के जानकारों के हवाले से मीडिया में बताया गया है कि दीपक कोचर को कई घंटों की पूछताछ के बाद सोमवार रात क़रीब 8.30 बजे गिरफ़्तार किया गया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दीपक कोचर को 19 सितंबर तक ईडी की हिरासत में रखा गया है.

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क्या है मामला
लगातार नौ सालों तक आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहीं चंदा कोचर वीडियोकॉन समूह को लोन दिए जाने के मामलों में आरोपों का सामना कर रही हैं. आरोप हैं कि आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहते हुए उन्होंने अपने पद का ग़लत इस्तेमाल किया.
मीडिया ने यह मामला सबसे पहले एक व्हिसल ब्लोअर अरविंद गुप्ता की शिकायत के बाद उजागर हुआ. अरविंद गुप्ता वीडियोकॉन समूह में एक निवेशक थे.
उन्होंने साल 2016 में आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन समूह के बीच होने वाले लेन देन पर सवाल उठाए थे. उन्होंने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को लिखे पत्र में कोचर के कथित अनुचित व्यवहार और हितों के टकराव के बारे में जानकारी दी थी.
उस समय अरविंद गुप्ता की शिकायत पर बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया गया. इसके बाद उन्होंने दीपक कोचर द्वारा साल 2010 में प्रमोट की गई कंपनी एनयू पावर रिन्यूएबल्स के बारे में और अधिक जानकारियां जुटाईं.
2018 में इंडियन एक्सप्रेस ने जब इन वित्तीय गड़बड़ियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की तो यह मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन गया.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने मार्च में दावा किया था कि वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को आईसीआईसीआई बैंक ने अप्रैल 2012 में 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया.

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चंदा कोचर पर कथित रूप से अपने पति को आर्थिक फ़ायदा पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लगे.
आईसीआईसीआई बैंक ने स्वतंत्र जांच कराने का फ़ैसला लिया. बैंक ने 30 मई 2018 को घोषणा की थी कि बोर्ड व्हिसल ब्लोअर के आरोपों की 'विस्तृत जांच' करेगा.
फिर इस मामले की स्वतंत्र जांच की ज़िम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्णा को सौंपी गई. जनवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की जांच पूरी हुई और चंदा कोचर को दोषी पाया गया.
ये मामला इतना बढ़ गया था कि 4 अक्तूबर 2018 को उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. जबकि चंदा कोचर का कार्यकाल मार्च 2019 में पूरा होना था.
अप्रैल 2019 में सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में लिया और दीपक कोचर, वीडियोकॉन ग्रुप समेत कुछ अज्ञात लोगों के बीच हुए लेनदेन की शुरुआती जांच शुरू की.
सीबीआई ने चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश रचने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया.
ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामले की जांच शुरू की थी.
इस साल के शुरू में ईडी ने चंदा कोचर, दीपक कोचर और उनके स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों से संबंधित 78 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली थी.
अब चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को ईडी ने गिरफ़्तार कर लिया है.
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