कश्मीर में लगातार हुई मुठभेड़ और मुहर्रम के जुलूस पर बल प्रयोग की कहानी

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी के लिए

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के नज़दीक पड़ने वाले पंथा चौक इलाक़े में शुक्रवार रात मुठभेड़ हुई, जिसमें भारतीय सुरक्षाबलों की गोली से तीन चरमपंथियों की मौत हो गई.

इस मुठभेड़ में केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस के एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) की भी जान चली गई.

शुक्रवार से हुई ये तीसरी मुठभेड़ थी. दो मुठभेड़ दक्षिण कश्मीर के शोपियां और पुलवामा ज़िलों में हुई और तीसरी श्रीनगर ज़िले में. इन मुठभेड़ों में 10 चरमपंथियों की मौत हुई और दो सुरक्षाबलों की.

शुक्रवार को संयुक्त सुरक्षा बल जिसमें पुलिस, सेना और सीआरपीएफ़ शामिल हैं, उन्होंने दावा किया कि शोपियां और पुलवामा में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ में सात चरमपंथियों की मौत हुई. इन दो मुठभेड़ों में भारतीय सेना ने अपना एक जवान खो दिया और गोलीबारी में एक अन्य ज़ख्मी हो गया.

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एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक़, गुरुवार देर रात बाइक सवार तीन चरमपंथियों ने पंथा चौक पर सीआरपीएफ़ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त नाका पार्टी पर गोलीबारी की, जिसके चलते सुरक्षाबलों ने पूरे इलाक़े को घेर लिया.

पुलिस ने कहा कि घेराबंदी और सर्च अभियान के दौरान चरमपंथियों ने दोबारा सुरक्षाबलों पर गोली चलाई, जिसके बाद चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी गोलीबारी हुई. इस घटना में तीन चरमपंथियों और एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई. शोपियां मुठभेड़ में एक चरमपंथी ने सरेंडर कर दिया.

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चरमपंथी की मां ने आत्मसमर्पण के लिए कहा

जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारी की पहचान बाबू राम के रूप में की गई है.

डीजीपी दिलबाग सिंह ने पत्रकारों को बताया कि बाबू राम जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ग्रिड के एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी थे. वो लंबे वक़्त से चरमपंथ-विरोधी अभियानों में हिस्सा ले रहे थे.

दिलबाग सिंह ने कहा कि अपना एक साहसी अधिकारी खोने के बावजूद हमने ज़िंदा बचे आख़िरी चरमपंथी को आत्मसमर्पण करने का मौक़ा दिया, लेकिन उसने आत्मसमर्पण नहीं किया.

सोशल मीडिया ग्रुप पर एक वीडियो क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें एक चरमपंथी ज़ुबैर अहमद की मां एक लाउडस्पीकर लगी गाड़ी में बैठी हैं.

माना जा रहा है कि ये पुलिस की गाड़ी हो सकती है. वीडियो में दिख रहा है कि वो अपने बेटे से घर के बाहर आने और सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए कह रही हैं.

शोपिंया मुठभेड़ में जान गंवाने वाले एक अन्य सैन्य अधिकारी की पहचान प्रशांत के रूप में हुई है. जो उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़रनगर में बुधन के रहने वाले थे.

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प्रशांत शर्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके गृह क्षेत्र मुजफ़्फ़रनगर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए.

समाचार एजेंसी एएनआई ने विक्टर फ़ोर्स के जम्मू और कश्मीर जीओसी ए. सेनगुप्ता के हवाले से कहा है कि (शोपिंया और पुलवामा मुठभेड़ में) मारे गए आठ में से सात चरमपंथियों की 2020 में भर्ती हुई थी और इन युवाओं को पाकिस्तान के हैंडलर और समाज के देश-विरोधी भावनाएं रखने वाले लोगों ने गुमराह कर भर्ती करवाया था.

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'इस साल 80 युवा चरमपंथी बने'

पुलिस ने शनिवार को बताया कि इस साल दक्षिण कश्मीर के 80 युवा चरमपंथ में शामिल हो गए.

पिछले कुछ सालों से दक्षिण कश्मीर में बड़ी संख्या में युवाओं ने चरमपंथ की राह पकड़ी है. पिछले चार साल में ज़्यादातर मुठभेड़ दक्षिण कश्मीर में हुई हैं.

हालांकि, पिछले तीन महीने में चरमपंथियों ने उत्तर कश्मीर के सुरक्षाबलों को भी निशाना बनाया है और दर्जन भर से ज़्यादा सुरक्षाबलों की जान ले ली. पुलिस ने इन हमलों में कई चरमपंथियों को मारने का दावा किया है.

डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने हाल में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में 200 से कम चरमपंथी सक्रिय हैं.

कश्मीर पर पैनी नज़र रखने वाले एक तबक़े का कहना है कि कश्मीर में पिछले तीस साल से मुठभेड़ हो रही हैं और ये कोई नई बात नहीं है कि एक और मुठभेड़ हो गई.

श्रीनगर के एक वरिष्ठ पत्रकार हारून रेशी कहते हैं कि दक्षिण या उत्तर कश्मीर में मुठभेड़ होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन बात ये है कि ये मुठभेड़ रोज़ाना होने लगी हैं.

उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक़ नहीं है कि बड़ी संख्या में चरमपंथियों की मौत हुई है. पुलिस ने पिछले चार महीने में अलग-अलग मुठभेड़ में कई चरमपंथियों को मारने का दावा किया है. इन गोलीबारी की घटनाओं में सुरक्षाबलों की भी जान गई. लेकिन सवाल है कि ये हो क्यों रहा है? दर्जनों चरमपंथियों को मारने के दावे के बावजूद ये रुकता हुआ नहीं दिख रहा है. हमें इसकी वजह को देखना होगा और समाधान निकालना होगा."

मुहर्रम के जुलूसों के दौरान बल प्रयोग

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मुहर्रम के जुलूसों के दौरान बल प्रयोग

शनिवार को श्रीनगर के बेमिना इलाक़े में मुहर्रम के जुलूस को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया. इस घटना में दो दर्जन लोग घायल हो गए.

ख़बरों के मुताबिक़, पुलिस ने शनिवार को आंसू गैस के गोले छोड़े और बेमिना इलाक़े में मुहर्रम का ग़म मनाते हुए जुलूस निकाल रहे लोगों पर पेलेट गन चलाई.

ख़बरों के मुताबिक, पांच लोगों को पेलेट इंजरी हुई, जिन्हें श्रीनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया.

ख़बरे कहती हैं कि कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया और "शनिवार को शोकाकुलों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पें देर शाम तक जारी रहीं."

श्रीनगर के डाउनटाउन इलाक़े के शिया समुदाय से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति ने बीबीसी से फ़ोन पर कहा कि सभी मुख्य सड़कें ब्लॉक कर दी गई हैं और मुख्य सड़कों पर मुहर्रम के जुलूस निकालने की इजाज़त नहीं दी गई.

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हालांकि वो कहते हैं कि अंदरूनी इलाक़ों में जुलूस निकाले गए, क्योंकि अंदरूनी इलाक़ों में सुरक्षाबलों की तैनाती नहीं है.

आशूरा, हज़रत इमाम हुसैन का शहादत दिवस रविवार को पूरे जम्मू-कश्मीर में मनाया गया. इसके साथ कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई.

इस दिन को बलिदान और शोक की निशानी के रूप में देखा जाता है. 1354 साल पहले इस्लामी महीने मुहर्रम की 10 तारीख़ को कर्बला की जंग में पैग़ंबर मोहम्मद के नाती हज़रत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी, जिसे इस दिन को ग़म के रूप में याद किया जाता है.

क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर कश्मीर प्रशासन हर साल जुलूसों पर प्रतिबंध लगाता है.

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