1990 से अब तक न जाने कितने मकान तबाह हो चुके हैं.
कश्मीर में 1990 से लेकर अब आम लोगों की सैकड़ों संपत्तियों को इसी तरह से नुक़सान पहुंचा है. ऐसा तब होता है, जब सुरक्षा बल घरों में छिपे चरमपंथियों को हटाने की कोशिश करते हैं. कुछ नागरिकों का कहना है कि इस नुक़सान के लिए मुआवज़ा लेना बहुत मुश्किल होता है.
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