पाकिस्तान-चीन के साझा बयान का भारतीय विदेश मंत्रालय ने किया विरोध: आज की बड़ी ख़बरें

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पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान उसमें कश्मीर के ज़िक्र पर भारत ने नाराज़गी जताई है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग सक्सेना ने कहा है कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का कुछ हिस्सा भारत के क्षेत्र में हैं जिस पर पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्ज़ा किया हुआ है.
उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू कश्मीर के मामले में यथास्थिति बदलने की किसी भी देश की कोशिश का कड़े शब्दों में विरोध करते हैं. हम उम्मीद करते हैं कि भारत के अंदरून मामलों में कोई देश हस्तक्षेप नहीं करेगा."
हालांकि इससे पहले ख़बरें आई थीं कि चीन ने पाकिस्तान से कहा कि वो ऐसी किसी भी 'एकतरफ़ा' कार्रवाई का विरोध करता है जिससे कश्मीर में परिस्थितियां जटिल हो जाएं.
दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी चीन में थे जिन्होंने चीन में अपने समकक्ष वांग यी को भारतीय स्थिति के बारे में अपने देश की चिंताओं की जानकारी दी, जिसके जवाब में चीन ने कहा कि "वो किसी एकतरफ़ा कार्रवाई को पसंद नहीं करेगा."
दक्षिणी प्रांत हैनान में चीनी और पाकिस्तानी विदेश मंत्रियों की दूसरी रणनीतिक वार्ता में कश्मीर का मुद्दा शामिल था.
तब्लीग़ी जमात के विदेशियों को 'बलि का बकरा' बनाया गया- बॉम्बे हाई कोर्ट

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बहुचर्चित तब्लीग़ी जमात मामले में शुक्रवार को अहम फ़ैसला सुनाया है. कोर्ट ने दिल्ली के निज़ामुद्दीन के मरकज़ में तब्लीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 29 विदेशी नागरिकों के ख़िलाफ़ दायर की गई एफ़आईआर को रद्द कर दिया है.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि "मीडिया में मरकज़ में शामिल विदेशियों को लेकर बड़ा प्रोपोगैंडा चलाया गया और ऐसी तस्वीर बनाई गई कि कोविड-19 बीमारी का वायरस फैलाने के लिए यही लोग ज़िम्मेदार हैं."
इन विदेशी नागरिकों पर टूरिस्ट वीज़ा की शर्तों का उल्लंघन कर तब्लीग़ी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने का आरोप लगाया गया था, जिसके चलते इन पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं, महामारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और फ़ॉरेनर्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.
विदेशी नागरिकों के अलावा, पुलिस ने छह भारतीय नागरिकों और याचिकाकर्ताओं को शरण देने वाली मस्जिदों के ट्रस्टियों के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया था.
औरंगाबाद पीठ के जस्टिस टीवी नलवड़े और जस्टिस एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की. ये याचिकाकर्ता आइवरी कोस्ट, घाना, तंज़ानिया, जिबूती, बेनिन और इंडोनेशिया के नागरिक हैं.
दरअसल पुलिस ने दावा किया था कि उसे गुप्त जानकारी मिली है कि ये लोग अलग-अलग इलाक़ों की मस्जिदों में रह रहे हैं और लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर नमाज़ अदा कर रहे हैं, जिसके बाद सभी याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.
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हालांकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वो मान्य वीज़ा लेकर भारत आए थे, जिसे भारत सरकार ने ही जारी किया था और वो भारत की संस्कृति, परंपरा, आतिथ्य और भारतीय भोजन का अनुभव करने के लिए यहां आए थे.
उनका कहना है कि एयरपोर्ट पर पहुंचने पर उनकी स्क्रीनिंग हुई थी और कोविड-19 वायरस का टेस्ट हुआ था और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही उन्हें एयरपोर्ट से बाहर निकलने की इजाज़त दी गई थी.
उनके मुताबिक़ यहां तक कि उन्होंने ज़िला पुलिस अधीक्षक को भी अहमदनगर ज़िले में पहुंचने की जानकारी दी थी. लेकिन 23 मार्च को लॉकडाउन हो जाने की वजह से गाड़ियां चलनी बंद हो गई थीं, होटल और लॉज बंद हो गए थे, इसकी वजह से मस्जिदों ने उन्हें आसरा दिया. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने ज़िला कलेक्टर के आदेशों का उल्लंघन करने जैसा कोई ग़ैर-क़ानूनी काम नहीं किया है.
कोर्ट के आदेश के "अनुसार प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया में मरकज़ में शामिल विदेशियों को लेकर बड़ा प्रोपोगैंडा चलाया गया और ऐसी तस्वीर बनाई गई कि देश में कोविड-19 बीमारी का वायरस फैलाने के लिए यही लोग ज़िम्मेदार हैं. एक तरह से इन विदेशियों का उत्पीड़न किया गया."
"एक तरफ जब कोरोना महामारी या आपदा अपने पैर पसार रही थी तब राजनीति से प्रेरित एक सरकार बलि का बकरा तलाश रही थी, और ऐसा लगता है कि इन विदेशियों को बलि का बकरा बना दिया गया. सभी हालात और कोरोना संक्रमण से जुड़े ताज़ा आंकड़े बताते हैं याचिकाकर्ताओं के ख़िलाफ़ इस तरह के कदम उठाने की ज़रूरत नहीं थी."
"वक्त आ गया है कि इस मामले में विदेशियों के ख़िलाफ़ कदम उठाने के लिए अब पछतावा जताया जाए और जो हानि हो चुकी है उसे सुधारने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएं."
बाबरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर तक फ़ैसला सुनाने को कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले की सुनवाई पूरी करने की समय सीमा को एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है. पहले ये समय सीमा 31 अगस्त तक थी.
सुप्रीम कोर्ट कवर करने वाले बीबीसी के सहोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने शुक्रवार को ये आदेश दिया. शीर्ष अदालत ने अब कहा कि ट्रायल कोर्ट के जज 30 सिंतबर 2020 तक मामले का फ़ैसला सुनाएं.
इस बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती अभियुक्त हैं.
शीर्ष अदालत ने ये आदेश विशेष जज सुरेंद्र कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया, जिसमें उन्होंने मामले का फ़ैसला सुनाने के लिए और वक़्त मांगा था.
दिल्ली पुलिस ने विस्फोटक के साथ गिरफ़्तार किया संदिग्ध आईएसआईएस चरमपंथी

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दिल्ली पुलिस का कहना है कि एक कथित आईएसआईएस ऑपरेटिव को विस्फोटक उपकरण के साथ पकड़ा गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस शख़्स को शुक्रवार रात आईईडी के साथ सेंट्रल दिल्ली के रिज रोड एरिया से गिरफ़्तार किया गया. इस दौरान दोनों तरफ़ से गोलीबारी भी हुई.
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (स्पेशल सेल) प्रमोद कुशवाहा ने बताया, "अभियुक्त को गोलीबारी के बाद धौला कुआँ और करोल बाग़ के बीच रिज रोड इलाक़े से गिरफ़्तार कर लिया गया."
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस का कहना है कि अभियुक्त उस वक़्त बाइक पर सवार था, जब दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने उसे रोकने की कोशिश की.
एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया है कि आईईडी प्रेशर कुकर में रखा हुआ था लेकिन अभी तक इसका वज़न पता नहीं चल पाया है.
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और बम निरोधक दस्ता बरामद आईईडी का परीक्षण करेंगे, उसके बाद ही सटीक जानकारी मिल पाएगी.
इलाक़े में चलाया गया सर्च ऑपरेशन
एएनआई के मुताबिक़, इस गिरफ़्तारी के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडोज़ ने रिज रोड इलाक़े में बुद्धा जयंती पार्क के पास सर्च अभियान चलाया है.
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दिल्ली पुलिस ने बताया है कि गिरफ़्तार किया गया यह व्यक्ति 'हाई लेवल आईएसआईएस ऑपरेटिव' है और उसके पास से 30 बोर की पिस्टल, 4 ज़िंदा कारतूस बरामद किये गए हैं.
पुलिस का कहना है कि यह शख़्स अपने कई पहचान और पते बता रहा है. उस पर अन्य धाराओं के साथ ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम के तहत मुक़दमा दर्ज किया जाएगा.
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