पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, चीन बोला- 'हम एकतरफ़ा कार्रवाई के ख़िलाफ़' - प्रेस रिव्यू

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हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान से कहा कि वो ऐसी किसी भी 'एकतरफ़ा' कार्रवाई का विरोध करता है जिससे कश्मीर में परिस्थितियाँ जटिल हो जायें.
दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी चीन में थे जिन्होंने चीन में अपने समकक्ष वांग यी को भारतीय स्थिति के बारे में अपने देश की चिंताओं की जानकारी दी, जिसके जवाब में चीन ने कहा कि 'वो किसी एकतरफ़ा कार्रवाई को पसंद नहीं करेगा.'
दक्षिणी प्रांत हैनान में चीनी और पाकिस्तानी विदेश मंत्रियों की दूसरी रणनीतिक वार्ता में कश्मीर का मुद्दा शामिल था.
दो दिवसीय रणनीतिक वार्ता के अंत में जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि "पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति, उसकी चिंताओं, स्थिति और वर्तमान मुद्दों पर चीनी पक्ष को जानकारी दी है."
चीनी पक्ष ने दोहराया कि कश्मीर मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक है, जो एक तथ्य है और यह संबंधित सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से शांति से और ठीक से हल किया जाना चाहिए.
चीन ने कहा कि वो किसी भी ऐसी एकपक्षीय कार्रवाई का विरोध करता है जो स्थिति को जटिल करे.
हालांकि, चीन ने ऐसी ही टिप्पणी पिछले वर्ष अगस्त में भारत द्वारा कश्मीर का स्पेशल स्टेटस छीने जाने पर भी की थी. और तब से चीन कई बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परीषद में पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर चुका है, जिसमें उसे ज़्यादा सफलता नहीं मिली.
इस संयुक्त बयान को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बयान के बाद जारी किया गया जिसमें उन्होंने चीन और पाकिस्तान को 'अच्छे भाई' और 'अच्छे सहयोगी' बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच तैयार हो रहा इकोनॉमिक कोरिडोर चीन और पाकिस्तान के रिश्ते और मज़बूत करेगा.
एक अन्य बयान में चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चीन और पाकिस्तान के बीच कोविड-19 की वैक्सीन के रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए आपसी सहमति बनी है.

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भारत में चीन के लोगों की पाकिस्तानियों की तरह होगी जाँच
चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच भारत सरकार कुछ और कठोर निर्णय ले रही है.
द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़, विदेश मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि अब से चीनी व्यापारियों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और वक़ालत समूहों के लिए वीज़ा को 'पूर्व सुरक्षा मंज़ूरी' लेनी होगी.
अख़बार ने दावा किया है कि इन श्रेणियों में वीज़ा लेने वालों की गतिविधियों पर नज़र रखी जायेगी. साथ ही उन्हें 'पूर्व सुरक्षा क्लियरेंस' लेना होगा जो दिल्ली सरकार से मिला करेगा.
बताया गया है कि चीनी वीज़ा देने की शर्तों को उतना ही कठोर किया जायेगा, जितनी कठोर शर्तों का पालन पाकिस्तान का वीज़ा देते समय होता है.
एक अधिकारी के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि चीनी संस्थानों के साथ भारतीय विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में अब भारी रूकावट आने की पूरी संभावना है. सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच हस्ताक्षर किए गए 54 ज्ञापनों की समीक्षा कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, मंदारिन भाषा के पाठ्यक्रमों को छोड़कर, चीनी संस्थानों के साथ गठजोड़ बंद होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि संस्थानों का इस्तेमाल नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक, राजनीतिक दलों, कॉरपोरेट्स और शिक्षाविदों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है.

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44 वंदे भारत ट्रेनों का टेंडर रद्द, रेलवे ने क्या कहा?
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे ने शुक्रवार को 44 सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण का टेंडर रद्द कर दिया है. यह टेंडर पिछले साल ही आमंत्रित किया गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले महीने जब टेंडर खोला गया तो 16 डिब्बे वाली इन 44 ट्रेनों के इलेक्ट्रिकल उपकरणों एवं अन्य सामान की सप्लाई के लिए छह दावेदारों में से एक चीनी संयुक्त उद्यम, एकमात्र विदेशी के रूप में उभरकर सामने आया.
रेल मंत्रालय का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर नया टेंडर निकाला जायेगा जिसमें 'मेक इन इंडिया' को तरजीह जी जायेगी. रेल मंत्रालय ने एक ट्वीट में इसकी जानकारी दी है.
हालांकि, रेलवे ने यह टेंडर रद्द करने के पीछे किसी ख़ास कारण का उल्लेख नहीं किया है.

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'धार्मिक स्थल खोलने पर ही कोविड का तर्क क्यों?'
द हिन्दू अख़बार ने भारत के चीफ़ जस्टिस एसए बोबडे की टिप्पणी को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
बोबडे ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया कि 'राज्य सरकारें हर उस गतिविधि को अनुमति दे रही हैं, जिसमें पैसा शामिल है, मगर वो धार्मिक स्थलों के लिए कहते हैं कि कोविड है, जो हैरान करने वाला है.'
बोबडे ने यह टिप्पणी मुंबई में पर्यूषण पर्व के दौरान तीन जैन मंदिरों को खोलने की याचिका पर सुनवाई के दौरान की. सुप्रीम कोर्ट ने इन मंदिरों को खोलने की सशर्त इजाज़त दी है.
मुंबई के दादर, बाइकूला और चेंबूर स्थित जैन मंदिरों को 22 और 23 अगस्त को खोलने की अनुमति मिली है.
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन को कहा कि वो अंडरटेकिंग दें कि कोरोना को लेकर सभी प्रोटोकॉल और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन किया जायेगा.
मंदिर ट्रस्ट ने एक बार में पाँच और एक दिन में सिर्फ़ 250 लोगों के मंदिर में प्रवेश की अनुमति माँगी थी.
इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा, "अगर बात सिर्फ़ पाँच लोगों की है, तो हमें जैन समुदाय के अलावा हिन्दू, मुस्लिम और अन्य समुदायों को भी इजाज़त देने में परेशानी नहीं है."
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